पुष्पधन्वा रस : Pushpadhanwa Ras In Hindi

दाम्पत्य जीवन में मधुरता रहे, परस्पर प्रीति और समर्पण भाव रहे इसके लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि वे दोनों तन-मन से स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम बने रहें और दोनों परस्पर आत्मीयतापूर्ण व्यवहार करें । शारीरिक एवं मानसिक रूप से अस्वस्थ, अशक्त और अक्षम होने पर दाम्पत्य जीवन नीरस, विषादपूर्ण और प्राय: कलहपूर्ण हो जाता है। यहां एक ऐसे आयुर्वेदिक योग का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है जो पति-पत्नी दोनों के लिए समान रूप से गुणकारी और उपयोगी होने से सेवन योग्य है। यह बलपुष्टि और स्फूर्तिदायक योग है- पुष्पधन्वा रस।

पुष्पधन्वा रस के घटक द्रव्य :

रस सिन्दूर, नाग भस्म, लोह भस्म, अभ्रक भस्म और वंग भस्म- सभी सम भाग। धतूरा, भांग, मुलहठी, सेमल की छाल और नागर बेल के पत्ते- इन पांचों का रसभावना देने के लिए।

पुष्पधन्वा रस निर्माण विधि :

पांचों औषधियों को मिला कर पांचों द्रव्यों के रस में 1-1 भावना देकर 1-1 रत्ती की गोलियां बना कर सुखा लें और शीशी में भर लें।

सेवन विधि और मात्रा :

यह 1-1 गोली सुबह शाम शहद में मिलाकर चाट लें। जो शहद का प्रयोग करना न चाहे वे मख्खन या मलाई या मिश्री मिले हुए दूध या घी या मख्खन- मिश्री में से किसी के भी साथ ले सकते हैं।

पुष्पधन्वा रस के उपयोग :

यह एक ऐसा उत्तम योग है। जिसका उपयोग पुरुष एवं स्त्री दोनों के लिए ही लाभप्रद सिद्ध होता है क्योंकि यह- ‘पुरुष-रोग और स्त्री-रोग’- दोनों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। यह रसायन है और जहां पुरुषों में आई नपुंसकता को दूर करता है वहीं स्त्रियों में आई बीज कोष की अक्षमता, कमज़ोरी और गर्भ धारण करने में असमर्थता को भी दूर करता है इसीलिए यह पति-पत्नी दोनों के लिए सेवन योग्य प्रथम श्रेणी का आयुर्वेदिक योग है। यौन-विकारों को दूर करने के अलावा यह योग हड्डियों की कमज़ोरी, प्रमेह, मधुमेह, शुक्रमेह, लाला मेह आदि व्याधियों को दूर करने में भी उपयोगी है। पुरुष और स्त्री दोनों वर्गों के लिए इसके उपयोग, गुण और लाभ का अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है।

पुरुष वर्ग के लिये पुष्पधन्वा रस के फायदे :

• यह विवाहित पुरुषों के लिए ही सेवन योग्य है क्योंकि यह योग अत्यन्त बलवीर्यवर्द्धक और श्रेष्ठ वाजीकरण करने वाला है।
• अण्डकोष और शुक्रवाहिनी की निर्बलता के कारण पुरुष नपुंसकता से ग्रस्त होता है, मानसिक निर्बलता और दोष होने से नपुंसकता का अनुभव करता है. अति वीर्यनाश करने, अति कामुक विचार करने, अनुचित आहार-विहार करने से वीर्य का पतलापन होने आदि कारणों से नपुंसकता का अनुभव करता है, अण्डकोष, फलवाहिनी, शुक्राशय, शुक्रवाहिनी आदि का समुचित विकास न होने या इनमें विकार और क्षीणता आ जाने से नपुंसकता का अनुभव करता है तो इन कारणों को दूर कर नपुंसकता को खत्म करने के लिए पुष्पधन्वा रस एक उत्तम योग है।
• यह योग यौनांग संस्थान के विकार दूर कर पौरुष शक्ति प्रदान करता है।
• कई व्यक्ति मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट के कारण नपुंसकता से ग्रस्त हो जाते हैं, कभी तो अच्छी शक्ति का अनुभव करते हैं। और कभी ऐसा कि जैसे सब कुछ खत्म हो गया है। इस योग के सेवन से ऐसी स्थिति ठीक हो जाती है।
• अति विषयी और कामुक मनोवृत्ति के पुरुष को कभी-कभी ऐसी शिकायत भी होती है कि स्त्री का खयाल करते ही या विषय भोग की कल्पना करते ही सिर दर्द होने लगता है और तब तक होता रहता है जब तक वीर्यपात न हो । कुछ लोगों को ऐसी शिकायत होती है कि कामुक विचार करने मात्र से या कामुक दृश्य देखने मात्र से ही वीर्यपात हो जाता है। यह स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि यौनांग उत्तेजित न हो, शिथिल अवस्था में ही हो और वीर्यपात हो जाता है। ऐसे पुरुष स्त्री-सहवास शुरू भी नहीं कर पाते और उनका वीर्यपात हो जाता है। इस अवस्था को ठीक करने के लिए पुष्पधन्वा रस बहुत लाभप्रद होता है क्योंकि यह वीर्यवाहिनी शिरा को शक्ति प्रदान कर उसे वीर्य को धारण करने में समर्थ बनाता है और यौनांग की नसों में पर्याप्त रक्त संचार बढ़ा कर शिथिलता दूर करता है जिससे जननेन्द्रिय में कठोरता आती भी है और देर तक कायम भी रहती है। क्योंकि यह रस स्तम्भक (रुकावट करने वाला) और वृष्य (पुष्टि करने वाला) होने से शुक्र को धारण कराने वाला एवं शक्ति बढ़ाने वाला है।
• इस योग में जो रस सिन्दूर है वह बलवर्द्धक, उत्तेजक और योगवाही गुण वाला है।
• नाग भस्म स्तम्भनकारक, बलदायक और मेहनाशक है।
• अभ्रक भस्म मानसिक कारणों से उत्पन्न हुए मनोविकार नष्ट करती है, धातुओं को पुष्ट करती है और योगवाही एवं रसायन है ।
बंग भस्म प्रमेह नाशक, पौष्टिक बलवर्द्धक और स्तम्भनकारक है ।
लौह भस्म रक्तवर्द्धक और शक्ति बढ़ाने वाली है। धतूरा पीड़ा नाशक एवं उमंग बढ़ाने वाला और वृष्य है।
• सेमल की छाल शुक्र को बढ़ाने वाली, वृष्य तथा स्तम्भक होती है।
• मुलहठी जीवन शक्ति देने वाली, बलदायक और रसायन है।
• नागर बेल के पत्ते उत्तेजक और बलदायक हैं।
• ये सभी मिल कर पुष्पधन्वा रस को एक अत्यन्त श्रेष्ठ, बलवीर्यवर्द्धक स्तम्भनकारी और नपुंसकता नाशक योग बनाते हैं।
• शीघ्रपतन के रोगी के लिए यह योग अमृत के समान गुणकारी है।
• आम, इमली तथा खटाई, आम का अचार, मादक द्रव्य, खराब तैल में तले पदार्थ, तेज़ मिर्च मसालेदार व्यंजन और कामुक विचारों का त्याग रखते हुए, उचित ढंग से आहार-विहार करते हुए कम से कम 2-3 माह इस योग का सेवन कर पुरुष यौन-दौर्बल्य से निश्चित रूप से मुक्त हो सकता है इसमें कोई सन्देह नहीं।
• प्रमेह या मधुमेह, शुक्रमेह और लाला मेह आदि रोगों के प्रभाव से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने में यह योग बहुत उपयोगी है।
• संक्षेप में सारांश की बात यह है कि जिन विवाहित युवकों या प्रौढ़ पुरुषों को नपुंसकता, शिथिलता, शीघ्र पतन आदि यौन विकारों की शिकायत हो उन्हें उचित और पथ्य आहार-विहार का पालन तथा अनुचित एवं अपथ्य आहार-विहार का सर्वथा त्याग रख कर 2-3 माह तक इस योग का उपयोग अवश्य करना चाहिए। इसका सेवन ‘शादी से पहले नहीं, शादी के बाद यदि ज़रूरी हो तो ही करना चाहिए।

स्त्री वर्ग के लिये पुष्पधन्वा रस के फायदे :

बलवर्द्धक और पौष्टिक योग के प्रयोग की ज़रूरत सिर्फ पुरुषों को ही पड़ती है। ऐसी बात नहीं है। कुछ नारी रोग ऐसे होते हैं जो स्त्री के शरीर और स्वास्थ्य को कमजोर करते हैं इसलिए ऐसे रोग से ग्रस्त स्त्री के लिए पौष्टिक योग का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है।
• जैसे पुरुषों में मानसिक एवं शारीरिक कारणों से नपुंसकता आ जाती है और वे शिथिलता और असमर्थता का अनुभव करने लगते हैं, उनकी संसर्ग इच्छा ही मर जाती है, उसी प्रकार स्त्रियां भी कई कारणों से अरुचि और अनिच्छा करने लगती हैं, इस विषय में रुचि नहीं ले पातीं। युवा हो जाने पर भी अंगों का समुचित विकास न होने पर ऐसी स्थिति को दूर करने के लिए पुष्पधन्वा रस का सेवन करना उपयोगी होता है क्योंकि इसके सेवन से मानसिक क्षोभ दूर होता है, नारी-अंगों का समुचित विकास और काम शीतलता दूर होता है ।
• जिन स्त्रियों का गर्भाशय सूज़ाक या उपदंश के विष से दूषित हो जाता है जिससे योनि मार्ग से पतला और बदबूदार स्राव होता है उनको इस दूषित प्रभाव से मुक्त होने तथा गर्भाशय को शुद्ध और स्वस्थ करने के लिए इस योग का प्रयोग नियमित रूप से करना चाहिए।
• बीजकोष (Ovaries) का समुचित विकास न होने के कारण जो स्त्रियां बन्ध्यत्व से ग्रस्त हो जाती हैं उनके लिए पुष्पधन्वा रस उसी प्रकार गुणकारी सिद्ध होता है जैसे शुक्र की दुर्बलता के कारण नपुंसक हुए पुरुषों के लिए यह योग लाभकारी सिद्ध होता है, इसीलिए इस योग को पति और पत्नी दोनों के लिए सेवन योग्य कहा गया है।
• स्त्रियां शरीर से कोमल और पुरुष की अपेक्षा कम शक्ति वाली होती हैं इसीलिए उन्हें अबला कहा जाता है। यद्यपि कई मामलों में वे पुरुष से ज्यादा सबला सिद्ध होती हैं फिर भी शारीरिक दृष्टि से वे पुरुष की अपेक्षा नाजुक और कमज़ोर होती हैं। इसमें कोई शक नहीं। इस पर यदि स्त्री अस्थिक्षय से ग्रस्त हो जाए तो उसको उठने-बैठने व चलने फिरने में असुविधा होती है, परिश्रम मालूम पड़ता है और वे बहुत कमज़ोरी का अनुभव करती हैं। उन्हें पैर उठाने में भी ताक़त लगाना पड़ती है विशेष कर कूल्हों की हड्डी के कमज़ोर होने पर उनकी चाल में फ़र्क आ जाता है। यह स्थिति पुरानी हो चुकी हो तो नाग भस्म 1 रत्ती और 1 रत्ती पुष्पधन्वा रस का सेवन करना चाहिए और पुरानी न हो तो सिर्फ पुष्पधन्वारस ही काफ़ी है।
• इस योग के नियमित सेवन से स्त्री के जननांग के दोष दूर होते हैं, गर्भाशय और बीजाशय शुद्ध और स्वस्थ होते हैं और शरीर के अंग-प्रत्यंगों का उचित विकास होता है जिससे स्त्री शरीर पुष्ट, सशक्त और सुडौल हो जाता है।
• इस तरह यह योग स्त्री-पुरुष दोनों के ही लिए उपयोगी सिद्ध होता है।

नोट :- एक बात का खयाल रखना चाहिए कि शरीर बहुत कमज़ोर हो और व्याधि पुरानी हो तो पुष्पधन्वारस की मात्रा न बढ़ा कर, सिर्फ 1-1 गोली ही लम्बे समय तक यानी पूर्ण लाभ न होने तक सेवन करते रहें। ऐसे स्त्री-पुरुष साथ में मधुमालिनी वसन्त की 1-1 गोली लेते रहें तो जल्दी और मनोवांछित लाभ होगा। यह योग बना-बनाया बाज़ार में मिलता है।

पुष्पधन्वा रस के नुकसान : Pushpadhanwa Ras Side Effects In Hindi

1-पुष्पधन्वा रस केवल चिकित्सक की देखरेख में लिया जाना चाहिए।
2-अधिक खुराक के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं ।
3-डॉक्टर की सलाह के अनुसार पुष्पधन्वा रस की सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें।