सर्जरी से बेहतर विकल्प है आयुर्वेद |

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सर्जरी से बेहतर विकल्प है आयुर्वेद |

आयुर्वेद : Ayurveda

वैसे तो आयुर्वेद द्वारा कई रोगों का समूल उपचार प्राचीन काल से होता आ रहा है। कई रोगों को आयुर्वेद की दिव्य औषधियों द्वारा कुछ ही समय में नष्ट कर दिया जाता है। इस बार में आपको उन रोगों से अवगत कराऊंगा जिनका कि आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में सर्जरी द्वारा उपचार किया जाता है, ज़बकि आयुर्वेद द्वारा उन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है। जब आयुर्वेद इतना प्रभावी उपचार उपलब्ध कराता है तो फिर क्या आवश्यकता है आपको दर्दनाक और जोखिम भरी शल्यक्रिया करवाने की?

पथरी : pathri ka ayurvedic ilaj

आज के दौर में लगभग सभी लोग जानते हैं कि पथरी का श्रेष्ठ उपचार आयुर्वेद में उपलब्ध है। कुछ ही दिनों में आयुर्वेद दवाओं द्वारा पथरी को गलाकर मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। मेरा स्वयं का अनुभव है कि मैंने आयुर्वेद उपचार द्वारा 1 mm से 55 mm तक की पथरी के रोगी को आरोग्य पहुंचाया है (इन रोगियों की USGReport मेरे पास उपलब्ध है)। moden medical Science पथरी के उपचार के लिए Operation का सुझाव देता है, या तो वो Laser से हो या हाथों से या दुरबीन से ये उपचार महंगा भी होता है तथा इसके कई Side Effect भी है। ऐसे में यदि रोगी आयुर्वेद को अपनाए तो उसे सस्ते एवं दर्द रहित उपचार द्वारा इस रोग से मुक्ति मिल सकती है। ( और पढ़ेपथरी के सबसे असरकारक 34 घरेलु उपचार)

पाइल्स ( बवासीर) : bawaseer ka ayurvedic ilaj

बवासीर रोग में आयुर्वेद के परिणाम देखकर शल्य चिकित्सक भी हैरान हो जाते हैं। बवासीर को आयुर्वेद द्वारा समूल नष्ट किया जा सकता है। बवासीर का उपचार भी शल्यकर्म के उपचार से कई गुना सस्ता एवं सटीक उपचार है। ये उपचार बवासीर को ठीक करने के साथ-साथ पाचनतंत्र को भी ठीक करता है, जिससे कि रोग पुनः नहीं होता। ( और पढ़ेबवासीर के मस्से जड़ से खत्म करेंगे यह 9 देशी घरेलु उपचार )

अपेन्डिसाइटिस : appendicitis ka ayurvedic ilaj

इमरजेंसी केसेस को छोड़ दिया जाए तो आयुर्वेद द्वारा अपेन्डिसाइटिस के शोध को दूर किया जा सकता है। इस हेतु आप किसी अच्छे आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लें, वह आपका रोग दूर कर देगा। अपेन्डिक्स का कार्य भी आंतो से Toxins को हटाना तथा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना होता है। कुछ चिकित्सक लोलुप वश इसका जबरन ऑपरेशन कर देते हैं, जिससे रोगी को लगता है अच्छा हुआ निकाल दिया वैसे भी तो किसी काम में नहीं आता है। जबकि इसके परिणाम उसे कुछ समय बाद चर्मरोग आदि के रूप में पता चलते हैं। अतः यदि कोई इमरजेंसी न हो तो रोगी को आयुर्वेद द्वारा अपेन्डिक्स का शोध दूर करके इस अमूल्य अंग को बचाने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि | ईश्वर ने कोई भी अंग फालतू नहीं बनाया है। ( और पढ़ेअपेंडिक्स के 6 सबसे असरकारक आयुर्वेदिक उपचार )

साइनस की समस्या ( साइनुसाईटिस) : sinus ka ayurvedic ilaj

साइनुसाईटिस रोग के रोगियों को छींके बहुत आती है, सरदर्द रहता है, बुखार बार-बार आ जाता है। इस हेतु आधुनिक चिकित्सक Anti Allergic दवाएं एवं Steroids देते हैं जिससे क्षणिक लाभ होता है तथा दवाओं का असर खत्म होते ही समस्या फिर शुरू हो जाती है। ऐसे में थोड़े समय के इलाज के बाद डॉक्टर आपको ऑपरेशन की सलाह देता है तथा ऑपरेशन के बाद 6 से 8 महीने बाद फिर वही समस्या शुरू हो जाती है।
आयुर्वेद इसके लिए रोग के मूल में जाकर उसे ठीक करता है। कुछ औषधियों से एवं कुछ योग एवं प्राणायाम द्वारा इस रोग में चमत्कारिक लाभ होते हमने देखा है। बस आवश्यकता है तो
आपके भरोसे की एवं एक योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की।

हार्ट की धमनी का अवरोध : heart blockage ka ayurvedic ilaj

कई रोगी एवं आयुर्वेद चिकित्सकों से सुना है कि उनकी 70 प्रतिशत तक Artery blockage आयुर्वेद दवा द्वारा हटा है। इस हेतु आयुर्वेद में कई औषधियां है। योग है, प्राणायाम है, पंचकर्म है, रक्तमोक्षण है, जिनका प्रयोग किसी योग्य चिकित्सक की देख-रेख में किया जाए तो निश्चित ही लाभ मिलेगा। ( और पढ़ेहार्ट ब्लॉकेज दूर करने के 10 सबसे असरकारक घरेलु उपचार )

ट्यूमर या एबसिस : tumor ka ayurvedic ilaj

‘ट्यूमर या एबसिस के लिए आयुर्वेद में अनगिनत औषधियों का भण्डार है। आयुर्वेद द्वारा लीवर, किडनी, गर्भाशय के ट्यूमर, एबसिस या सिस्ट को ठीक किया जा सकता है। लेकिन इस हेतु बार-बार Scanning करवाना आवश्यक है। यदि 1 माह में इसके आकार में कोई कमी न आए तो फिर शल्यकर्म करवा लेना चाहिए। वैसे अधिकांश रोगियों को लाभ मिल जाता है कुछ रोगियों को शल्यकर्म आवश्यक हो जाता है।

हर्निया : harniya ka ayurvedic ilaj

हर्निया को प्रारंभिक अवस्था में आयुर्वेद द्वारा ठीक किया जा सकता है। इस हेतु कई लेप एवं औषधियां आयुर्वेद में उपलब्ध है। रक्तमोक्षण द्वारा भी बहुत लाभ होता है।कमर का दर्द / साईटिका /, स्लीप डिस्क । गलत तरीके से बैठने, वजन उठाने या हड्डियों की कमजोरी के कारण ये रोग हो जाता है। इस रोग में आधुनिक चिकित्सक दर्द निवारक एवं कैल्शियम की गोलियां या इंजेक्शन देते हैं यदि इनसे लाभ नहीं होता है तो वह फिर रोगी को सर्जरी का परामर्श देते हैं। इस सर्जरी के असफल होने के चांस ज्यादा होते है तथा रोगी का कमर से नीचे का हिस्सा कार्य करना बंद भी कर सकता है तथा ये ऑपरेशन काफी महंगा भी होता है तथा लगभग 6 माह तक सामान्य जीवन नहीं जिया जा सकता। ऐसे में आयुर्वेद इसके लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प है जिससे कि कुछ ही दिनों में परिणाम मिल जाते हे तथा किसी प्रकार का कोई परहेज या बैंड रेस्ट की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। ये इलाज काफी सस्ता भी रहता है। ( और पढ़े हर्निया के 25 सबसे असरकारक रामबाण घरेलु उपचार )

गर्दन का दर्द/सर्वाइकल स्पोण्डिलाइटीस : spondylosis

गर्दन का दर्द आज-कल युवाओं की आम समस्या बन गया है। घण्टों टेबल एवं कम्प्यूटर वर्क करने से गर्दन की हड्डियों पर असर पड़ता है एवं सर्वाइकल स्पोडिलाटिस का रूप ले लेती है। इस रोग
में भी आधुनिक चिकित्सक साइटिका के समान ही उपचार बताते हैं। | आयुर्वेदिक औषधियों एवं पंचकर्म तथा योगासनों से इस दर्दकारक व्याधि से भी बिना ऑपरेशन के छुटकारा पाया जा सकता है। ( और पढ़ेसर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के 8 सबसे असरकारक घरेलु उपचार)

कास्मेटिक समस्याएं :

कई तरह की सौन्दर्य समस्याएं जैसे मोटापा, मुहांसे, अनचाहे बाल, त्वचा का सांवला रंग या काले धब्बे इन रोगों में आधुनिक चिकित्सा में लेजर आदि कास्मेटिक सर्जरी होती है। आयुर्वेद इन रोगों के लिए सस्ता सुलभ एवं आसान उपचार प्रदान करता है। जिसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं होते।

टॉसिलाइटिस :

टांसिल्स हमारे गले में पाये जाते हैं जो कि रक्षक या सैनिक | का कार्य करते है अर्थात हमारे शरीर में (विशेषतः फेफड़ों में) इंफेक्शन को जाने से रोकते हैं। कभी-कभी बार-बार इंफेक्शन या | एलर्जी के कारण इनमें सूजन आ जाता है तथा गले में दर्द एवं निगलने में समस्या आती है। ऐसे में यदि साल में छः से आठ बार ऐसा होता है तो — सर्जन इन्हें ऑपरेट करके निकलवाने की सलाह देता है। इसके ऑपरेशन के पश्चात सूजन, गले में दर्द एवं निगलने में होने वाली समस्या तो खत्म हो जाती है लेकिन फेफड़ों में संक्रमण ज्यादा होने लगते हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता हैकि हम इन्हें निकलवाएं नहीं इसे संजोकर रखें, और आयुर्वेद इसके लिए सर्वश्रेष्ठ उपाय है। आयुर्वेद में कुछ लेप, खाने की दवाएं एवं विशेष प्राणायाम द्वारा टांसिल्स की समस्या से सदा के लिए मुक्ति पाई जा सकती है। मेरा स्वयं का अनुभव है कि मात्र 3 दिन के लेप से सैकड़ों रोगियों के टांसिल्स के ऑपरेशन रूके हैं और वो रोगी आज स्वस्थ्य जीवन जी रहे है।

अब उपरोक्त उदाहरणों से रोगी को स्वयं ही ये निर्णय करना चाहिए कि वह सर्जरी कराए या आयुर्वेद को अपनाए। आयुर्वेद रोग को समूल नष्ट करता है, दुष्प्रभाव रहित है,
सस्ता, आसान और पीड़ा रहित है। ऐसे में हमारे पास इसे अपनाने का एवं रोग को नष्ट करने का बेहतर विकल्प मौजूद है। अंत में आयुर्वेद अपनाए सुखी जीवन की शुरऊआत करें।”

2018-07-15T13:03:41+00:00 By |Articles, Health Tips|0 Comments