सर्पगंधा चूर्ण योग उच्च रक्तचाप के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एक पारंपरिक आयुर्वेदिक दवा है।

सर्पगन्धा चूर्ण योग बनाने की विधि : Preparation Method of Sarpagandha Choorna

अत्यन्त सूक्ष्म पिसा हुआ रससिन्दूर 3 ग्राम , सर्पगन्धा का सूक्ष्म कपड़छन चूर्ण 58 ग्राम , लेकर दोनों को एकत्र मिला एक घण्टा तक अच्छी तरह खरल करके सुरक्षित रख लें।
– सिद्धयोगसंग्रह

मात्रा और अनुपान :

1-1 ग्राम , प्रातः सायं जल से या दूध से या अर्क गुलाब से दें।

सर्पगन्धा चूर्ण योग के फायदे और उपयोग :

आजकल हृदय-सम्बन्धी रोगों का प्रसार सभी वर्ग के लोगों में (विशेषत: जिनको बैठकर मस्तिष्क-सम्बन्धी कार्य अधिक करना पड़ता है) अत्यन्त तीव्रता से हो रहा है। इस रोग का प्रमुख कारण तीक्ष्ण औषधियों का अधिक सेवन करना, अत्यन्त पौष्टिक भोजन करना एवं शारीरिक परिश्रम न करना है। फलत: मेद वृद्धि होकर मधुमेह, हृदय रोग आदि व्याधियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। आयुर्वेद के मतानुसार हृदय रोग ५ प्रकार का होता है। किन्तु आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार हाई ब्लडप्रेशर (रक्तचाप वृद्धि) और लो-ब्लडप्रेशर (रक्तचाप की क्षीणता)से भी हृदय रोग होते हैं। इसमें हाई ब्लडप्रेशर में हृदय एवं नाड़ी की गति अत्यन्त तीव्र हो जाती है और कभी-कभी तो रक्तचाप की वृद्धि के कारण, मस्तिष्क में अधिक रक्त परिभ्रमण के कारण, मस्तिष्क की नस तक फट जाती है और परिणामतः रोगी की मृत्यु हो जाती है। इसी रक्तचाप की वृद्धि में अचानक हृदय की गति का रूक जाना भी सम्मिलित है। हाई ब्लडप्रेशर रोग के प्रारम्भ में बेचैनी, अनिद्रा घबराहट, चिड़चिड़ापन आदि लक्षण होते हैं। इनमें इस रसायन का सेवन करना अत्यन्त उपयोगी है। इसके प्रयोग से रक्तचाप कम होकर गाढी निद्रा आती है और शनैः-शनै: मोती या प्रवाल पिष्टी मिलाकर देने से हृदय बलवान होता है। इसके अतिरिक्त अपतन्त्रक (हिस्टीरिया), उन्माद और नवीन अपस्मार रोग में भी इससे अच्छा लाभ होता है।

सर्पगंधा चूर्ण योग के नुकसान :

1-सर्पगंधा लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।
2-स्तनपान कराने वाली महिलाओं और गर्भावस्था के दौरान भी इसके सेवन से बचना चाहिए।