सेब खाने के 30 लाजवाब फायदे | Seb Khane ke Labh

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सेब खाने के 30 लाजवाब फायदे | Seb Khane ke Labh

सेब के बारे में जानकारी / परिचय :

सेब का लेटिन नाम-मेलस सिलवेस्ट्रिस (Malus Sylevestris) है । सेब की गणना उत्तम कोटि के फलों में की जाती है। इसका मूल वतन यूरोप एवं एशिया के ठण्डे पहाड़ी प्रदेश हैं । सेब के गुणों की प्रशांसा में अनेक लोकोक्तियां प्रसिद्ध है, जैसे-‘An apple a day keeps doctor away’ अर्थात प्रतिदिन एक सेब खाइए और डाक्टर (चिकित्सक) से पिण्ड छुड़ाएँ । या To eat an apple before going to bed will make the doctor beat his heart अर्थात सोते समय रोज एक सेब खाते रहे तो डाक्टर छाती पीट कर रह जाएँ।
सेब के पेड़ कद में छोटे होते हैं । सेब की अनेको किस्में होती है। इनमें-गोल्डन डिलीशन, प्रिन्स आल्बर्ट, चार्ल्स रोस, न्यूटन वन्डर, बेमले सीडलिग, लेकस्टन सुपर्व, ब्लेनहीम आरेन्ज, आरेन्ज पिपिन, रेड सोल्जर और अमेरिकन मदुर ये दस किस्में मुख्य एवं प्रसिद्ध हैं। सेब का अचार, मुरब्बा, चटनी और शर्बत बनता है।सेब लम्बे अर्से तक बिगड़ते नहीं । सेब का स्वाद खट्टा-मीठा होता है। खटमीठा स्वाद वाला सेब ही उत्तम माना जाता है।

सेब के गुण : sev / seb ke gun

✦ सेब पित्त-वायु को शान्त करते हैं। तृषा मिटाते हैं और आँतों को मजबूत करते हैं ।
✦आमयुक्त पेचिश मिटाने का गुण भी इनमें है
✦सेब का ऊपर वाला छिलका निकालकर सेब खाने से मीठे लगते हैं। सेब को छील कर नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके छिलके में कई महत्वपूर्ण क्षार होते हैं ।
✦सेब के टुकड़ों को शक्कर में रखने के बाद खाने से वे बहुत मीठे लगते हैं। प्रातः समय खाली पेट खाने पर सेब अधिक लाभप्रद सिद्ध होता है।
✦रक्तचाप को कम करने में यह उत्तम माना जाता है। यह शरीर में स्थित विषाक्त तत्व को दूर करता है । ✦सेब के सेवन से दाँत के मसूढ़े मजबूत बनते हैं।
✦जठर की खटाई को दूर करने में तो सेब अमृत के समान गुणकारी है।
✦सोते समय रात्रि को सेब खाने से मस्तिष्क शान्त होता है और अच्छी नींद आती है ।
✦थोड़ी-सी ठण्डी या गर्मी लगने से अथवा थोड़ा-सा श्रम करने से यदि बुखार आ जाता हो या बार-बार पलटी मारकर थोड़े-थोड़े दिनों में बुखार आ जाता हो, तो रक्तादि धातुओं में अवस्थित ज्वर के विष को जलाने के लिए अन्न का त्याग कर दें और सेबकल्प शुरू करें अर्थात केवल सेब का ही सेवन करें ऐसा करने पर थोड़ी ही दिनों में सदैव के लिए बुखार से मुक्ति प्राप्त हो जाती है और शरीर भी बलवान बनता है।
✦जिस रोगी को बुखार के साथ सूजन हो, अग्निमांद्य हो, पतले दस्त होते हों, दस्त के साथ कच्चा आम निकलता हो, पेट भारी लगता हो, पेट को दबाने से दर्द महसूस हो तो ऐसे रोगियों को यदि सिर्फ सेब-सेवन पर रखा जाए तो धीरे-धीरे उपरोक्त कष्ट समूल नष्ट हो जाते हैं।
✦जीर्णरोग जो दीर्घकाल से त्रासदायक हो गया हो, आमातिसार पुराना हो और प्रतिदिन 5-7 दस्त लगें, पाचनक्रिया खराब हो जाए, बार-बार थोडे-थोड़े दस्त हों अथवा मलावरोध हो, पेट भारी लगता हो, शरीर में आलस्य रहता हो और दुर्बलता अधिक आ गई हो तो ऐसी दशा में अन्न सेवन का त्याग करके यदि सेब का सेवन किया जाए तो कुछ ही दिनों में समस्त प्रकार के विकार दूर हो जाते हैं और पाचनक्रिया बलवान बनती है, स्फूर्ति आती है तथा मुखमण्डल तेजस्वी बनता है।
✦जिन रोगियों के पेशाब में यूरिक एसिड अधिक निकलता हो, जोड़ों में दर्द हो, पाचनक्रिया दूषित हो, उन्हें भी सिर्फ सेब पर रखने से थोड़े ही दिनों में उनकी यकृत क्रिया सुधरती है और मूत्राम्ल की मात्रा कम होती है।
✦मेदवृद्धि के कारण यदि थोड़ा-सा भी परिश्रम असहनीय हो जाए, भूख-प्यास का वेग शान्त न हो, प्यास लगने पर तुरन्त पानी पीना पड़े अन्यथा घबराहट हो, थोड़ा-सा चलने पर भी साँस फूल जाए तो ऐसे मेद वाले लोगों को अन्न का पूर्णतया त्याग करके केवल सेब खाने से बहुत लाभ होता है।
✦रक्तविकार के कारण बार-बार फोड़े-फुन्सियाँ हों, जीर्ण त्वचा रोग के कारण चमड़ी शुष्क हो गई हो, रात्रि के समय खुजलाहट अधिक सताती हो, अँगुलियों और नितम्बों पर खुजली की पीली-पीली फुन्सियाँ परेशान करती हों और इस कष्ट के कारण नींद न आती हो तो ऐसी दशा में भी अन्न का पूर्णतः त्याग करके केवल सेब का सेवन करने से लाभ होता है।
विशेष-सेब का कल्प करने वाले यानि केवल सेब का सेवन करने वाले को यदि दूध अनुकूल हो तो सुबह और शाम को दूध तथा दोपहर के समय सेब लेना चाहिए । दूध और सेब सेवन के बीच 3 घण्टे का अन्तराल रखना चाहिए। एक बार में दूध अथवा सेब का सेवन इतनी मात्रा में करना चाहिए जितनी मात्रा का 3 घण्टे में पाचन हो सके।जिन्हें दूध अनूकूल न हो वे लोग गाय के दूध से बना ताजा मट्ठा सेवन कर सकते हैं । यदि मल का रंग सफेद हो तो दही के ऊपर से मलाई निकालकर मट्ठा बनाना चाहिए । यदि रोगी को सूजन हो तो मट्ठे में नमक बिल्कुल नहीं डालना चाहिए।
✦ सेब के गर्भ की अपेक्षा उसके छिलके में विटामिन ‘सी’ अधिक मात्रा में होता है।
✦अन्य फलों की तुलना में सेब में फॉस्फोरस की मात्रा सबसे अधिक होती है। सेब शरीर को बल और गर्मी अच्छी मात्रा में प्रदान करता है। सेब में लौह का अंश भी अधिक होता है। सेब के टुकड़े करके खाते समय वायु में अवस्थित आक्सीजन मिलने से उसका लौह तत्व खूब बढ़ जाता है । सेब के अन्दर नाशपाती के फल की अपेक्षा फास्फोरस दुगुना और आयरन डेढ़ गुना है। अतः यह रक्त और मस्तिष्क सम्बन्धी दुर्बलता वाले लोगो के लिए परमहितकारी फल है।
✦इसमें अवस्थित लौह और फास्फोरस मानसिक अशान्ति की उत्तम दवा है । ज्ञानतन्तु और मस्तिष्क की दुर्बलता के लिए यह उत्तम पुष्टिकारक फल माना जाता है।
✦ सेब वायु और पित्तनाशक, कफकारक, पुष्टिप्रदायक, भारी, रस तथा पाक में मधुर, ठण्डा, रुचिकारक, और वीर्यवर्धक है।
✦यह कामोत्तेजक, हृदय के लिए हितकर और ग्राही है । सेब अतिसार में पथ्य है ।
✦यह पाचनशक्ति बढ़ाने वाला और रक्त सुधारक है।
✦आयुर्वेद के शास्त्रीय प्रयोगों में सेब का उपयोग नहीं होता परन्तु अनेकों रोगों में पथ्य के रूप में इसका उपयोग होता है। अर्श, अतिसार, मलावरोध, प्रवाहिका, पित्त ज्वर, मोतीझारा, अरुचि, जीर्णज्वर, प्लीहावृद्धि, अजीर्ण, शारीरिक दुर्बलता, सिरदर्द, वृद्धि, मेदवृद्धि, पथरी, रक्तविकार, सूखी खाँसी, शुष्क श्वास, और वातविकारों में सेव का सेवन हितकारी है।

वैज्ञानिक मतानुसार:

✱सेब में, ग्लूकोज, कार्बोहाइड्रेट पोटेशियम, फास्फोरस, लौह, ईथर, मैलिक एसिड, लिसिथिन, खनिज आदि क्षार हैं। इसमें विटामिन ‘बी’ और ‘सी’ भी हैं।
✱सेब में टार्टरिक एसिड होने के कारण आमाशय में सेब मात्र एक घण्टे में ही पच जाता है और साथ ही खाए हुए अन्नाहार को भी पचा देता है।
✱सेब में फास्फोरस होता है । अर्थात जलन करने वाला पदार्थ होता है। जिसे खाने से पेट साफ होता है और आमाशय को पुष्टि प्राप्त होती है।

सेब खाने के फायदे / लाभ : seb khane ke fayde / labh

1-जुकाम-दुर्बल मस्तिष्क के कारण भी सर्दी-जुकाम बना रहता है। ऐसे रोगियों को जुकाम की दवाओं के सेवन से लाभ नहीं होता । अतः ऐसे रोगियों का जुकाम ठीक करने के लिए भोजन से पहले छिलके सहित सेब खाने से मस्तिष्क की दुर्बलता दूर होकर जुकाम ठीक हो जाता है।

2-खाँसी-पके हुए सेब का रस 1 गिलास निकालकर मिश्री मिलाकर प्रातः समय पीते रहने से पुरानी खाँसी में लाभ होता है। ( और पढ़ेखांसी का 11 रामबाण इलाज )

3-आन्त्रज्वर (टायफायड)-सेब का मुरब्बा 15-20 दिन खाने से हृदय की दुर्बलता और दिल का बैठना ठीक हो जाता है।

4-उच्च रक्तचाप-हाई ब्लडप्रैशर होने पर 2 सेब नित्य खाने से लाभ होता है।

5-प्यास की अधिकता-सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है। जिन्हें वायु विकार हो, उन्हें यह प्रयोग लाभकारी नहीं होगा।  ( और पढ़े बार बार प्यास लगना के कारण और उपचार )

6-स्मरणशक्ति वर्धक-जिन लोगों के मस्तिष्क और स्नायु दुर्बल हो गए हों, याददाश्त की कमी हो, उन लोगों की सेब के सेवन करने से स्मरणशक्ति बढ़ जाती है, इस हेतु 1 या 2 सेब बिना छीले खूब चबा-चबाकर भोजन से 15 मिनट पहले खाएँ।

7-पथरी-गुर्दे और मूत्राशय में पथरियाँ बनती रहती हैं। आपरेशन कराके पथरी निकाल देने के पश्चात भी प्रायः पथरी रह जाती हैं । सेब का रस पीते रहने से पथरी बनना बन्द हो जाती है तथा बनी हुई पथरी घिस-घिस कर मूत्रमार्ग द्वारा बाहर निकल जाती है। यह वृक्कों को शुद्ध करता है, गुर्दे का दर्द दूर होता है। यदि कुछ दिन रोगी केवल सेब खाकर ही रहें तो पथरी निकल जाती है। अधिक भूख लगे तो अन्य शाक फल खाएँ।

8-बहुमूत्रता-सेब खाने से रात को बार-बार मूत्र जाना कम हो जाता है। ( और पढ़े बार बार पेशाब आने का कारण और इलाज )

9-अनिद्रा-सेब का मुरब्बा खाने से निद्रा आने लगती है। सेब खाकर सोना भी नींद लाने में सहायक है।

10-शराब सेवन की आदत-सेब का रस बार-बार सेवन करने से अथवा अच्छी तरह पका हुआ 1-1 सेब नित्य 3 बार खाते रहने से शराब पीने की आदत छूट जाती है। नशे के समय सेब खाने से शराब का नशा उतर जाता है। सेब का रस भी पीया जा सकता है। भोजन के साथ सेब खाने से भी शराब की आदत छूट जाती है।

11-सूखी खाँसी-नित्य पके हुए मीठे सेब खाने से सूखी खाँसी में लाभ होता है।

12-मानसिक रोग-कफ, खाँसी, यक्ष्मा में सेब का रस व इसका मुरब्बा सेवन करना लाभप्रद है।

13-भूख न लगना-सेब का रस 1 गिलास स्वादानुसार मिश्री मिलाकर नित्य कुछ दिनों तक निरन्तर पीते रहने से भूख अच्छी तरह लगने लग जाती है। खट्टे सेब के रस में आटा गूंदकर रोटी बनाकर नित्य खाना भी लाभप्रद है। ( और पढ़े – भूख बढ़ाने के 55 उपाय )

14-मलेरिया ज्वर-ज्वर में सेब खाने से ज्चर जल्दी ठीक हो होता है । मलेरिया बुखार आने के पहले सेब खाने से ज्वर आने के समय ज्वर नहीं आता।

15-बच्चों के पेट के रोगों में-नित्य सेब खिलाना लाभकारी है।

16-बच्चों के दस्त-जब बच्चों को दूध नहीं पचता हो, दुग्धपान करते ही कै और | दस्त आते हों तो ऐसी दशा में उनका दूध बन्द करके थोड़े-थोड़े समय बाद सेब का रस पिलाने से कै और दस्तों में आराम आ जाता है। पुराने दस्तों में भी सेब का रस दस्तों में भी यह मरोड़ लगकर होने वाले वयस्कों के दस्तों में भी यह लाभदायक है। खून के दस्तों को भी बन्द करता है। दस्तों में सेब बिना छिलके वाली होनी चाहिए। दस्तों में सेब का मुरब्बा भी लाभदायक है । सेब के छिलके उतारकर छोटे-छोटे टुकड़े करके दूध में उबालें । इस दूध का आधा कप प्रति घण्टे के अन्तराल से पिलाने से दस्त (विशेषकर गर्मी से होने वाले दस्त) बन्द हो जाते हैं।

17-यकृत शक्तिवर्धक-यकृत रोगों में सेब का सेवन लाभदायक है । इससे यकृत को शक्ति मिलती है।

18-गैस-सेब का रस पाचन अंगों पर एक पतली तह चढ़ा देता है । जिससे वे संक्रमण और बदबू से बचे रहते हैं और वायु उत्पन्न होना रुक जाता है। मलाशय और निचली आँतों में दुर्गन्ध और संक्रमण नहीं होता । सेव का रस पीने के बाद गर्म पानी पीना चाहिए। ( और पढ़ेपेट की गैस का रामबाण इलाज )

19-आँतों में घाव व शोथ-सेब का रस पीते रहने से आराम मिलता है।

20-कब्ज-भूखे पेट सेब खाने से कब्ज दूर होती है। खाना खाने के बाद सेब खाने से कब्ज होती है। सेब का छिलका दस्तावर होता है । कब्ज वाले रोगियों को सेब छिलके सहित खाना चाहिए। तथा दस्त वाले रोगियों को सेब छीलकर खाना चाहिए। ( और पढ़ेकब्ज के कारण ,लक्षण और इलाज )

21-कृमि-2 सेब रात को सोते समय कुछ दिन (कम से कम 7 दिन) खाने से कृमि मरकर गुदामार्ग से मल के साथ बाहर आ जाते हैं। सेब खाने के बाद रात भर पानी न पीएँ।

22-मस्से-खट्टी सेब का रस मस्सों पर लगने से मस्सों के छोटे-छोटे टुकड़े होकर मस्से जड़ से गिर जाते हैं।

23-यदि आपकी त्वचा तैलीय हो तो ऐसी दशा में 1 सेब को अच्छी तरह पीस लें और लुगदी बना लें । इस लुगदी की पतली तह चेहरे पर चढ़ा लें । 10 मिनट के बाद चेहरे को गरम पानी से धो डालें ।

24- सेब के छोटे-छोटे टुकड़े करके काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में चाँदनी रात में बाहर रखकर रोज प्रातः समय 1 महीने तक सेवन करने से शरीर तन्दुरुस्त बनता है।

25-सेब के पेड़ की 4 माशा छाल और 20 तोला पत्ते उबलते हुए पानी में डालकर 10-15 मिनट तक ढंक कर रखें । तदुपरान्त उसे छान लें । उसमें 1 टुकड़ा नीबू का रस और 1-2 तोला चीनी मिलाकर सेवन करने से बुखार की घबराहट, प्यास, थकान और दाह दूर होते हैं । यकृत के विकार से आने वाले बुखार में भी लाभ करता है। इस प्रयोग से बुखार उतरता है और मन प्रसन्न होता है।

26- सेब को अंगारों पर सेंक कर खाने से बिगड़ी हुई पाचनक्रिया में भी सुधार होता है।

27- रात में सेब खाने से जीर्ण मलावरोध एवं जरावस्था का मलावरोध मिटता है और उदर शुद्धि होती है।

28-सेब का रस सोड़ा के साथ मिलाकर दाँतों पर मलने से दाँतों से निकलने वाला खून बन्द होता है और दाँतों पर जमी हुई पपड़ी दूर होती है तथा दाँत स्वच्छ बनते हैं।

29-सेब को अंगारों पर सेंककर मसलकर, पुल्टिश बनाकर रात के समय आँखों पर बाँधने से थोड़े ही दिनों में आँखों का भारीपन, दृष्टि मन्दता, दर्द वगैरह मिटता है।

30- 2 सेव के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उस पर आधा लीटर उबलता हुआ पानी डालकर रख दें। जब वह पानी ठण्डा हो जाए तो उसे छानकर पी लें । यदि उसमें मिठास की आवश्यकता हो तो उसमें मिश्री मिला लें । यह सेब का पौष्टिक और स्वादिष्ट शर्बत है। यह शर्बत शीघ्र ही रक्त में मिलकर हृदय, मस्तिष्क, यकृत और शरीर के प्रत्येक कोष में शक्ति एवं स्फूर्ति पहुँचाता है |

सेब खाने के नुकसान | seb khane ke nuksan

✱ज्यादा मात्रा में सेब सेवन करने से शरीर में फैट के साथ साथ रक्त में मौजूद “ब्लड शुगर” भी बढ़ जाती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। इसलिए सेब का एक निश्चित मात्रा में ही सेवन किया जाना चहिये।

✱सेब खाते समय ध्यान रखें की उसके बीज का सेवन न किया जाये। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके बीज के अन्दर साइनाइड नामक पदार्थ पाया जाता है जो पाचन संबंधित परेशानियों का कारण बन सकता है ।

नोट-सेब के सेवन की मात्रा-1 बार में 1 से 3 सेब तक है । गला बैठने की दशा में तथा गायक कलाकारों को सेब का सेवन नहीं करना चाहिए।

2018-09-05T16:53:45+00:00By |Herbs|0 Comments

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