परिचय :

जल चिकित्सा हमारे शरीर के वज़न का दो तिहाई भाग जल तथा सिर्फ एक तिहाई भाग ठोस है। हवा के बाद शरीर की दूसरी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी है। जिसके बिना शरीर लम्बे समय तक नहीं चल सकता। दांत शरीर का सबसे ठोस पदार्थ कहा जा सकता है। उसमें भी दस प्रतिशत जल का अंश है। शरीर के अन्य भागों में हड्डियों में चौदह प्रतिशत से अधिक जलीय अंश हैं।

शरीर में जल का प्रमुख कार्य भोजन पचाने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं में शामिल होना तथा शरीर की संरचना का निर्माण करना होता है। जल शरीर के भीतर विद्यमान गंदगी को पसीने एवं मलमूत्र के माध्यम से बाहर निकालने, शरीर के तापक्रम को नियंत्रित करने तथा शारीरिक शुद्धि के लिए बहुत उपयोगी तथा लाभकारी होता है। शरीर में जल की कमी से कब्ज, सीने में जलन, पेट के अल्सर, आंतों के रोग, थकान, गर्मियों में लू आदि की अधिक संभावना रहती है। जल पाचन क्रिया के लिए अति आवश्यक है। जल के कारण ही हमें छः प्रकार के रसों-मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा और कसैला आदि के अलग-अलग स्वाद का अनुभव होता है।

अतः हमें यह जानना और समझना आवश्यक है कि पानी का उपयोग हम कब और कैसे करें ? पानी कितना, कैसा और कब पीयें ? उसका तापमान कितना हो ? स्वच्छ शुद्ध, हल्का, छना हुआ पानी शरीर के तापक्रम के अनुकूल एवं उपयोगी होता है। पानी को जितना धीरे-धीरे चूंट-घूट पीयें उतना अधिक लाभप्रद होता है।

पानी कब और कैसे पीना चाहिये : pani kab aur kaise piye

भेषजं वारि जीर्णं वारि बल प्रदम्। भोजने चामृतं वारि भोजनान्ते विष प्रदम्॥
– चाणक्य नीति दर्पण

अपच होने पर जल पीना औषधि का काम करता है, भोजन के पच जाने पर जल पीना बलदायक होता है, भोजन के मध्यकाल में जल पीना अमृत के समान और भोजन के अन्त में जल पीना पाचन क्रिया के लिए हानिकारक होता है।

भोजन के तुरन्त पहले पानी पीने से भूख मर जाती है। भोजन के बीच में पानी पी सकते हैं, लेकिन ज्यादा नहीं। परन्तु वह पानी गुनगुना हो न कि बहुत ठण्डा। खाना खाने के पश्चात् आमाशय में लीवर पित्ताशय, पेन्क्रियाज आदि के श्राव और अम्ल मिलने से जठराग्नि प्रदीप्त होती है। अत: प्रायः पानी पीने की इच्छा होती है। परन्तु भोजन के तुरन्त बाद पानी पीने से पाचक रस पतले हो जाते हैं, जिसके कारण आमाशय में भोजन का पूर्ण पाचन नहीं हो पाता। फलतः भोजन से जो ऊर्जा मिलनी चाहिए, प्रायः नहीं मिलती। अतः भोजन के पश्चात् जितनी ज्यादा देर से पानी पीयेंगे, उतना पाचन अच्छा होता है। भोजन के दो घंटे पश्चात् जितनी आवश्यकता हो खूब पानी पीना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो।

सुबह खाली पेट पानी पीने के फायदे : subah khali pet pani pine ke fayde

प्रातः काल खाली पेट पानी पीने की क्रिया को उषा पान कहते हैं। उषा पान का पूर्ण लाभ बिना दातुन पानी पीने से मिलता है। रात को तांबे के बर्तन में रखा गया पानी अति उपयोगी होता है। हर रोज़ सुबह दो गिलास पानी पीना चाहिए और दो-चार महीनों में मात्रा बढ़ाते-बढ़ाते चार गिलास पानी पर आ जाइए। पानी पीने के पौने घंटे तक कुछ भी खाएं-पिएं नहीं। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत हो उन्हें दो-तीन गिलास पानी पीकर दो-चार किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। सुबह खाली पेट में पानी पीने से
1- बवासीर,
2-सूजन,
3-संग्रहणी,
4-ज्वर,
5-उदर रोग,
6-कब्ज,
7-आंत्ररोग,
8-मोटापा,
9-गुर्दे संबंधी रोग,
10-यकृत रोग,
11-नकसीर,
12-कमर दर्द,
13-आंख, कान आदि विभिन्न अंगों के रोगों से मुक्ति मिलती है।
14- नेत्र ज्योति में वृद्धि, बुद्धि निर्मल तथा सिर के बाल जल्दी सफेद नहीं होते अर्थात् अनेक रोगों में लाभ होता है। ( और पढ़ेचमत्कारिक ‘पानी प्रयोग )

शुद्ध पानी से रोगों का इलाज : health benefits of water

1. जल से शरीर के अन्दर की गर्मी एवं गंदगी दूर होती है।
2. खड़े-खड़े पानी पीने से गैस, वात विकार, घुटने तथा अन्य जोड़ों का दर्द, दृष्टि दोष, कानों के रोग होते हैं। अत: पानी बैठकर ही पीना चाहिए।
3. थकावट होने अथवा प्यास लगने पर धीरे-धीरे घुट-घूट पीना लाभप्रद होता है।
4. भय, क्रोध, मूर्च्छा, शोक व चोट लग जाने के समय अन्त:श्रावी ग्रन्थियों द्वारा छोड़े गये हानिकारक श्रावों के प्रभाव को कम करने के लिए पानी लाभप्रद होता है।
5. लू तथा गर्मी लग जाने पर ठंडा पानी व सर्दी जाने पर गर्म पानी पीना चाहिए, उससे शरीर को राहत मिलती है। पानी पीकर गर्मी के बाहर निकलने पर लू लगने की संभावना नहीं रहती।
6. उच्च अम्लता में भी अधिक पानी पीना चाहिए, क्योंकि यह पेट तथा पाचन नली के अन्दर कोमल सतह को जलन से बचाता है।
7. दिन में तीन घंटे के अन्तर पर पानी अवश्य पीना चाहिए, क्योंकि इससे अन्त:श्रावी ग्रन्थियों का श्राव पर्याप्त मात्रा में निकलता रहता है।
8. उपवास के समय पाचन अंगों को भोजन पचाने का कार्य नहीं करना पड़ता। अत: वे शरीर में जमे विजातीय तत्त्वों को आसानी से निकालना प्रारम्भ कर देते हैं। अधिक पानी पीने से उन तत्त्वों के निष्कासन में मदद मिलती है।
9. पेट में भारीपन, खट्टी डकारें आना, पेट में जलन तथा अपच आदि का कारण पाचन तंत्र में खराबी होता है। अत: ऐसे समय गरम पानी पीने से पाचन सुधरता है और उपरोक्त रोगों में राहत मिलती है।
10. डायरिया, हैजा व उल्टी, दस्त के समय उबाल कर ठंडा किया हुआ पानी पीना चाहिए, क्योंकि यह पानी कीटाणु रहित हो जाता है तथा दस्त के कारण शरीर में होने वाली पानी की कमी को रोकता है।
11. गले और नाक में गर्म जल की भाप से जुकाम और गले संबंधी रोगों में आराम मिलता है।
12. त्रिफला के पानी से आंखें धोने पर आंखों की रोशनी सुधरती है। रात भर मेथी दाना में भिगोया पानी पीने से पाचन संबंधी रोग ठीक होते
13. विशेष परिस्थितियों के अतिरिक्त स्नान ताजे पानी से ही करना चाहिये। ताजा पानी रक्त संचार को बढ़ाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बढ़ती है जबकि गर्म पानी से स्नान करने पर आलस्य एवं शिथिलता बढ़ती है।