स्वप्नदोष क्या है ? इसके मुख्य कारण :

स्वप्नदोष नामक व्याधि मुख्यत: दो कारणों से होती है। पहला कारण क़ब्ज़ रहना और पेट ठीक से साफ़ न होना है जिससे कोठे में उष्णता के प्रभाव से ‘स्वप्नदोष’ यानि सोते हुए वीर्यपात होने की स्थिति निर्मित हो जाया करती है। दूसरा कारण है स्वप्न में कामुक दृश्य देखना । इस कारण से, अन्तर्मन के आदेश से सोते हए भी यौनांग सक्रिय हो जाता है और वीर्यपात हो जाता है। जो लोग दिन में कामुक चिन्तन किया करते हैं, कामुक हरकतें किया करते हैं उन्हें स्वप्न में भी कामुक दृश्य दिखाई देते हैं और इस कारण से होने वाले अनैच्छिक वीर्यपात को ‘स्वप्नदोष’ कहते हैं।

इस रोग से बचाव करने के लिए यह जरूरी है कि इन स्थितियों को निर्मित होने ही न दिया जाए अन्यथा दवाइयों के सेवन से भी लाभ न हो सकेगा। आयुर्वेद इसीलिए औषधि सेवन से भी ज्यादा जोर पथ्य-अपथ्य के पालन करने पर देता है।

स्वप्नदोष का आयुर्वेदिक उपचार :

1- बबूल की नर्म पत्तियां 5 से 10 ग्राम वज़न में खूब चबा चबा कर खा लें और ठण्डा पानी पी लें। 2-3 सप्ताह यह प्रयोग करने पर स्वप्नदोष होना बन्द हो जाएगा।

2- शीतकाल में, पाव भर दूध में 3 छुहारे और 2 चम्मच पिसी मिश्री डाल कर खूब पकाएं। जब दूध आधारह जाए तब उतार कर छुहारे की गुठली निकाल कर फेंक दें तथा छुहारे खाते हुए दूध चूंट-घूट करके पीते रहें। यह प्रयोग सुबह खाली पेट करें। स्वप्नदोष बन्द होने के साथ ही शरीर में बल भी बढ़ेगा।

3- सफ़ेद मुसली का चूर्ण 50 ग्राम, बहमन सफ़ेद का चूर्ण 50 ग्राम और इसबगोल की भूसी 20 ग्राम। तीनों को मिला लें। यह चूर्ण 1 चम्मच और 1 चम्मच पिसी मिश्री मिलाकर सुबह शाम पीने और ऊपर से 1 कप दूध पीने से स्वप्नदोष बन्द हो जाता है।

4- प्रतिदिन सुबह 4-5 गुलाब के फूल और 1 चम्मच पिसी मिश्री खा कर ऊपर से 1 कप दूध पीने से स्वप्नदोष होना बन्द हो जाता है।

5- एक सप्ताह तक शीतलचीनी (कबाब चीनी) का चूर्ण सुबह, दोपहर और शाम को 3-3 ग्राम मात्रा में (छोटे चम्मच से लगभग आधी चम्मच) ठण्डे पानी के साथ सेवन करें। दूसरे सप्ताह में, दिन में दो बार, सुबह और शाम और तीसरे सप्ताह में सात दिन तक दिन में सिर्फ एक बार सुबह या शाम कभी भी 3 ग्राम चूर्ण ठण्डे पानी से सेवन करें।

6- चाय का सेवन या तो बन्द कर दें या केवल सुबह शाम- दो बार थोड़ी ठण्डी करके पिया करें। सुबह चाय से पहले दूध 1 कप और ठण्डा पानी 1 कप मिलाकर थोड़ी शक्कर डाल कर फेंट लें। इस लस्सी को सुबह कोरे पेट आवश्यकता के अनुसार 10-12 दिन तक पिएं। इसके आधाघण्टे बाद, चाहें तो चाय पी सकते हैं।

7- दिन में भोजन के 2-3 घण्टे बाद 1 बड़ा चम्मच यानि लगभग 10-15 ग्राम गुलकन्द खाया करें।

8- भोजन में लालमिर्च, तले पदार्थ, तेज़ मसालेदार और खटाई वाले पदार्थों का सेवन कतई बन्द कर दें। अण्डा, मांस और शराब का सेवन करते हों तो बन्द कर दें। हरी शाक सब्ज़ी, छिलके वाली मूंग की दाल और ताज़ी चपाती का सेवन करें। भोजन के अन्त में एक टुकड़ा गुड़ या एक केला खाया करें। घंट-घूट करके, भोजन करते हुए एक गिलास छाछ पी सकें तो अवश्य पिया करें। छाछ में पिसा हुआ जीरा व नमक डाल लिया करें या एक छोटा चम्मच भर लवणभास्कर चूर्ण घोल लिया करें।

9- रात को सोते समय 1 चम्मच इसबगोल की भूसी और 1-2 चम्मच शक्कर थोड़े पानी में गला कर खाया करें। यह प्रयोग एक माह तक करें या ज्यादा दिन भी कर सकते हैं।

10- मुलहठी लाकर खूब बारीक पीस कर छान लें। 1 चम्मच चूर्ण पर्याप्त शुद्ध घी में मिलाकर चाट लें और ऊपर से मिश्री मिला दूध पूंट-घूट करके पी लें। यह प्रयोग आप या तो सुबह लस्सी पीने के बाद और भोजन से दो घण्टे पहले कर सकते हैं या शाम के भोजन के दो घण्टे बाद और सोने तथा इसबगोल लेने से एक घण्टे पहले कर सकते हैं। यह प्रयोग दो माह तक करें।

11- रात को सोने से पहले ठण्डे पानी से हाथ पैर धोएं। दंतमंजन करके मुंह साफ़ कर लें और सोने से पहले मलमूत्र आदि का विसर्जन अवश्य कर लें। स्नान करते समय एवं शौचादि से निवृत्त होते समय प्रतिदिन अपने शिश्न को पानी से धोकर साफ़ किया करें। शाम को 7 बजे के बाद गर्म चाय या बहुत गर्म दूध का सेवन न करें। | इतना सब करते हुए भी यदि सुबह शाम दोनों वक्त शौच साफ़ न आये तो रात को इसबगोल का प्रयोग 4-5 दिन बन्द रख कर इसके स्थान पर छोटी हरड़ का पिसा हुआ चूर्ण 1-2 चम्मचया इतनी मात्रा में कि जिससे एक बंधा हुआ दस्त हो जाए और पेट साफ़ हो जाए, सेवन करें। इसके बाद यह प्रयोग बन्द करके इसबगोल पुन: शुरू कर दें।

12- भोजन के बाद 1-2 पके केले शहद लगा कर खाने से शरीर पुष्ट होता है और स्वप्नदोष होना बन्द होता है।

13- ग्रीष्मकाल में स्वप्नदोष का घरेलू इलाज करने के लिए रोज़ रात को एक कप पानी में कतीरा गोंद 10 ग्राम डाल कर रख दें। सुबह तक यह गल कर फूल जाएगा। इसमें दो चम्मच पिसी मिश्री घोल कर पी लें । दो सप्ताह तक यह प्रयोग करने से स्वप्नदोष होना बन्द हो जाता है। इसे शीतकाल एवं वर्षाकाल में सेवन न करें। बबूल के गोंद को भी इसी विधि से सेवन करने पर स्वप्नदोष होना बन्द हो जाता है। बबूल के गोंद का सेवन किसी भी ऋतु में किया जा सकता है। बहुत लाभप्रद है।

14- त्रिफला चूर्ण 5 ग्राम, शहद में मिला कर, रोज़ सुबह शाम चाटने से स्वप्न – दोष होना बन्द होता है। यदि गर्मी मालूम दे तो शहद की जगह 10 ग्राम मिश्री के साथ सेवन करें।

15- तरबूज के बीजों की मींगी निकाल लें। इनके वज़न के बराबर पिसी मिश्री ले कर मिला लें और कूट पीस कर शीशी में भर लें। इसे 10-10 ग्राम सुबह शाम चबा कर खाएं। लगातार 3-6 माह तक सेवन करने पर शरीर पुष्ठ, सुगठित, सुडौल और सशक्त बनता है।

स्वप्नदोष में खान-पान व परहेज :

• स्वप्नदोष के रोगी को क़ब्ज़ से बचना चाहिए। यदि क़ब्ज़ रहती हो तो कोई भी नुस्खा प्रयोग करने से पहले क़ब्ज़ दूर करना चाहिए।
• गरिष्ठ, तेज़ मिर्च मसालेदार और खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
• सुपाच्य, हलका और सादा भोजन करना चाहिए।
• सुबह सूर्योदय से पहले उठ कर 2-3 किलोमीटर तक घूमने जाना चाहिए और सुबह शाम दोनों वक्त शौच जाना चाहिए।
• कामुक विचार-चिन्तन करने से बचें, कामुक मनोवृत्ति का त्याग करें।