पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

तनाव और चिंता की छुट्टी कर देगा योगियों का यह यौगिक प्रयोग| Mansik Tanav aur Chinta se mukti ke upay

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तनाव और चिंता की छुट्टी कर देगा योगियों का यह यौगिक प्रयोग| Mansik Tanav aur Chinta se mukti ke upay

चिंता और तनाव(Tension)दूर करने वाला दिव्य प्रयोग :Tanav Or Chinta ko Dur Kaise Kare kam karne ke upay

पहला प्रयोग :

★ पूरा श्वास भरकर उसे अंदर रोके बीना पूरी तरह बाहर निकाल दें |
★ श्वास भीतर भरते समय भावना करें कि हम निश्चिंतता, आनंद, शांति भीतर भर रहे हैं तथा मुँह से फूँक मारते हुये श्वास बाहर छोड़ते समय भावना करें कि हम चिंता, तनाव, हताशा, निराशा को बाहर निकाल रहे हैं |
★ ऐसा २० – २५ बार करने से चिंता, तनाव (tanav )एवं थकान दूर होकर तृप्ति का अनुभव होता है |

दूसरा प्रयोग :

★ चिंता(Chinta) के कारण रात को नींद नहीं आती हो तो पुकारो : ‘हे हरि, हे गोविंद, हे माधव !’ १५ से २५ मिनट भगवान का नाम लो
★ और २ – ४ मिनट हास्य-प्रयोग करों, ‘हरि ॐ…..ॐ…..ॐ….. मेरे ॐ…..प्यारे ॐ ….. हा…हा…हा…’
★ प्रारब्ध तो पहले बना है, पीछे बना है शरीर ! संत तुलसीदासजी कहते हैं कि चिंता क्या करते हो ? भज लो श्रीरघुवीर …. हे गोविंद ! हे रघुवीर ! हे राम !
★ दुःख मन में आता है, चिंता चित्त में आती है; मैं तो निर्लेप नारायण, अमर आत्मा हूँ | मैं प्रभु का हूँ, प्रभु मेरे हैं | इससे चिंता(chinta) भागेगी |

काहे को चिंता करना ? जो होगा देखा जायेगा | हम ईश्वर के, ईश्वर हमारे ! ईश्वर चेतनस्वरूप हैं, ज्ञानस्वरूप हैं, आनंदस्वरूप हैं और हमारे सुह्रद हैं | चिंता कुतिया आयी तो क्या कर लेगी ? गुरु का संग जीवात्मा को दु:खों से असंग कर देता है | चिंताओं से असंग कर देता है | हरि ॐ …ॐ….ॐ…

चिंता से चतुराई घटे, घटे रूप और ज्ञान | चिंता बड़ी अभागिनी, चिंता चिता समान ||

~~ पूज्य संत श्री आशारामजी बापूजी (Pujya Asaram Bapu Ji)~~

श्रोत – ऋषि प्रसाद मासिक पत्रिका (Sant Shri Asaram Bapu ji Ashram)

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2017-08-21T09:47:10+00:00 By |Successful LifeTips|0 Comments

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