विदारी कन्द का सामान्य परिचय : Vidarikand in Hindi

✦ यह एक मोटी लता होती है। और इसकी जड़ में जमीन के अन्दर कई हिस्सों में कन्द होते हैं जो एक से दो फुट लम्बे और एक फुट मोटे होते हैं। कोई-कोई कन्द कुम्हड़े के आकार का भी होता है। इसे विदारी कन्द कहते हैं।
✦ इस कन्द के छोटे-छोटे टुकड़े करके सुखा लेते हैं। सूखने पर वे दूध जैसे सफ़ेद हो जाते हैं। ये सफ़ेद टुकड़े ही विदारीकन्द के नाम से बाज़ार में मिलते हैं।
✦ इनका स्वाद कुछ-कुछ मुलहठी जैसा और मीठा होता है इसलिए इसे ‘स्वादकन्दा’ या ‘इक्षुविदारी’ भी कहते हैं ।
✦ इसकी लताएं घोड़ों को बहुत प्रिय होती है। इसलिए “गजवाजिप्रिया’ और ‘घोड़बेल’ भी कहा जाता है ।
✦ यह सरलतापूर्वक बाज़ार में जड़ी बूटी बेचने वाली या पंसारी की दुकान पर मिलता है।
✦ यह ‘सराल’ के नाम से भी जाना जाता है।

भाव प्रकाश निघण्टु में लिखा है-

विदारी मधुरा स्निग्धा बृहणी स्तन्यशुक्रदा।।
शीता स्वर्या मूत्रला च जीवनी बलवर्णदा।
गुरुः पिताम्रपवनदाहान हन्ति रसायनम् ॥

विविध भाषाओं में नाम :

सं.- विदारी। हि.-विदारी कन्द। म.- बेंदर। गु.- खाखरवेल, विदारी। बं.- शिमीया । ते.- दरी गुम्भडि । ता.-नीलाप्पुचेनी । मल.- गुमडिगिडा । मारवाड़ी-घोड़वेल । पंजाबी- सुरल । ई.- इण्डियन कुडजु (Indian Kudju) । लै.- प्यूरेरिया टूट्यूबरोसा (Pueraria tuberosa).

विदारी कन्द के औषधीय गुण और प्रभाव :

• यह मधुर रस वाला, स्निग्ध, स्तनों में दुग्ध बढ़ाने वाला है।
• यह शुक्रवर्द्धक, शीतवीर्य, स्वर को अच्छा करने वाला है।
• यह मूत्रकारक, जीवनी शक्ति बढ़ाने वाला, बल तथा वर्ण देने वाला है।
• यह भारी रसायन तथा पित, रक्त, वात और जलन को नष्ट करने वाला कन्द है।

विदारी कन्द के औषधीय उपयोग : Health Benefits of Vidarikanda in Hindi

✥इसके कन्द का चूर्ण ही उपयोग में लिया जाता है। यह स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए, बलवीर्य और पुष्टि की वृद्धि करने के लिए, मूत्र की रुकावट दूर करने के लिए, शोथ दूर करने के लिए,
वात एवं पित्त का शमन करने के लिए, दुबलापन व धातुक्षीणता दूर करने के लिए, शुक्रमेह (Spermaturia) बन्द करने के लिए और बच्चों एवं स्त्री-पुरुषों के शरीर को पुष्ट, शक्तिशाली और सुडौल बनाने के लिए बहुत उपयोगी होता है।

✥पुरुषों के लिए यह एक श्रेष्ठ वाजीकारक और वीर्य शक्ति बढ़ाने वाला रसायन हैं।

✥प्रकृति में शीतवीर्य यानी शीतल, मधुर और स्निग्धगुण वाला होने से यह सिर्फ शीतकाल में ही नहीं बल्कि बारहों महीने उपयोग में लेने योग्य होता है।

✥ इसके कन्दों में कार्बोहाइड्रेट 64.6 प्रतिशत और प्रोटीन 10.9 प्रतिशत होने से यह शरीर को मोटा-ताज़ा और ऊर्जावान बनाने में उपयोगी सिद्ध होता है। यहां कुछ घरेलू इलाज से सम्बन्धित प्रयोग प्रस्तुत है

विदारी कन्द के अन्य फायदे :

१-दुग्धवर्द्धक –
जिन स्त्रियों के स्तनों में पर्याप्त दूध न उतरता हो उनको सुबह-शाम एक चम्मच (लगभग 5-6 ग्राम) चूर्ण मीठे दूध के साथ सेवन करना चाहिए।

२-दुर्बल बच्चे –
इस चूर्ण को 2 ग्राम मात्रा में, शहद में मिला कर सुबह शाम चटाने से बच्चों का शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है। इसमें पीपल (पीपर) का चूर्ण 2 ग्राम मिला कर चटाने से बच्चों की पाचन शक्ति बढ़ती है।

३-अधिक रक्तस्राव –
एक चम्मच चूर्ण थोड़े से घी और शक्कर के साथ मिला कर सुबह-शाम चाटने से मासिक धर्म में अधिक रज:स्राव होना बन्द होता है।

४-तिल्ली और यकृत वृद्धि –
एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ मिला कर सुबह शाम चाटने से तिल्ली और यकृत की वृद्धि कम हो जाती है।

५-महा रसायन योग –
आवश्यक मात्रा में विदारीकन्द ला कर कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें।
इस चूर्ण को विदारीकन्द के रस में भिगोकर सुखा लें। ऐसा 21 बार करें यानी उसी चूर्ण को सूखने के बाद फिर से ताज़े रस में भिगो कर सुखाएं। इस विधि को भावना देना कहते हैं। विदारीकन्द के चूर्ण को 21 भावना देकर और खूब अच्छा सुखा कर कांच की बर्नी (Jar) में भर कर रख लें। इस चूर्ण को प्रात: और रात को सोते समय 6 ग्राम (एक चम्मच) और 6 ग्राम पिसी मिश्री मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से स्त्रीपुरुषों (नवयुवा, युवा और प्रौढ़) का शरीर बलिष्ठ, सुडौल और कान्तिपूर्ण होता है, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है, चेहरा भरा हुआ और तेजस्वी होता है, जीवनी शक्ति और स्फूर्ति बढ़ती है और पुरुष की वीर्य शक्ति में भारी वृद्धि होती है। पुरुषों के लिए यह एक निरापद और निश्चित रूप से लाभ करने वाला योग है।

विशेष निवेदन – भावना देने के लिए उसी औषधि के रस (स्वरस) की आवश्यकता पड़ती है। यहां विदारीकन्द का रस मिलने की समस्या खड़ी होगी सो इसका समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं । विदारीकन्द का चूर्ण जितनी मात्रा (वज़न) में हो उसी मात्रा (वज़न) के बराबर विदारीकन्द के टुकड़ों को मोटा मोटा (जौ कुट) कूट लें। इसे आठ गुने पानी में डाल कर शाम को रख दें। सुबह इसे आग पर रख कर इतना औटाएं कि पानी चौथाई भाग शेष बचे यानी काढ़ा बन जाए। इसे उतार कर ठण्डा करके छान लें। यही स्वरस का काम देगा।

भावना देना – भावना देने की विधि यह है। कि स्वरस में चूर्ण डाल कर अच्छी तरह भिगो कर निकाल लें और दिन भर धूप में और रात भर ओस में रखें । दूसरे दिन ताज़ा स्वरस तैयार करें और इसी चूर्ण को स्वरस में भिगो कर दिन भर धूप में और रात भर ओस में रखें। यह दूसरी भावना हुई। ऐसी 21 भावना देना है।
काम खटपट वाला ज़रूर है पर जब 2-3 माह तक इस महारसायन का सेवन कर लेंगे तब आप इसका चमत्कार देख कर दंग रह जाएंगे। चाहें तो खुद तैयार कर लें या किसी स्थानीय कुशल और अनुभवी वैद्य से बनवा लें। अगर अपना हाथ जगन्नाथ के अनुसार खुद ही तैयार करें या अपनी निजी देख रेख में तैयार कराएं तो अधिक अच्छा रहेगा।