वायरल बुखार : viral fever in hindi

वायरल बुखार कुछ और नहीं, ज्वर का एक खास वर्ग है। इसके सदस्य कई प्रकार के वायरस हैं, जो किसी भी समय सक्रिय होकर वातावरण में फैल जाते हैं और हर तरफ अपना प्रकोप दिखाते हैं। जिसे देखो वही उनकी पकड़ में आ जाता है और कुछ दिनों के लिए सर्दी-जुकाम, गले की खराश और ज्वर से पीड़ित हो बिस्तर से बँध जाता है। बुखार उतरने के बाद भी कई हफ्ते तक कमजोरी, थकान और अवसाद की दशा बनी रहती है। लेकिन फिर धीरे-धीरे स्थिति अपने आप सँभलने लगती है।

वायरल बुखार क्या है और यह कैसे होता है ?

वायरल बुखार कई प्रकार के वायरसों से होनेवाला ज्चर है, जिनमें लगभग एक ही तरह के लक्षण पाए जाते हैं। ये वायरस श्वास-प्रणाली के प्रथम भाग–नाक, गले, स्वर-यंत्र और मुख्य श्वास-नली (ट्रेकिया) पर धावा बोलते हैं, पैठ करते हैं, पलते-बढ़ते हैं और रोगी के खाँसने, छींकने और नाक छिनकने पर वातावरण में पहुँच जाते हैं, जहाँ से ये अन्य व्यक्तियों में फैल जाते हैं। किसी एक परिवार में यदि एक व्यक्ति को यह ज्वर हो जाए, तो प्रायः सभी परिवारजनों को एक-एक कर ज्वर हो जाता है। लगता है जैसे ज्वर घर ही नहीं छोड़ना चाहता।

कौन-कौन से वायरस सामान्य वायरल बुखार पैदा करते हैं ? यह बुखार संक्रमण के कितने दिन बाद प्रकट होता है ?

एडिनोवायरस, कोक्ससेकी वायरस, इको वायरस, इनफ्लूएंजा वायरस, पेराइनफ्लूएंजा वायरस, आर. एस. वी. और राइनोवायरस कुछ ऐसे प्रमुख वायरस हैं जिनसे वायरल बुखार फैलता है। इनमें से हर वायरस का संक्रमण-काल अलग-अलग है : सबसे कम-एक से तीन दिन-इनफ्लूएंजा वायरस का है और अधिक से अधिक-सात से चौदह-दिन कोक्ससेकी वायरस का है।

वायरल बुखार के लक्षण क्या हैं ?

हाथों-पैरों, सिर और पीठ में दर्द होता है, कुछ करने को जी नहीं चाहता, भूख नहीं लगती, जी मिचलाता है और ठंड देकर बुखार आता। है। शरीर का तापमान बढ़कर 39° सेल्सियस (102° से 103° फारेनहाइट) तक चला जाता है। चेहरा और आँखों की पुतलियाँ लाल हो जाती हैं और नब्ज तेज हो जाती है। नाक, आँखों और गले में सूजन होने से नाक और आँखों से पानी झरने लगता है और गले में खराश हो जाती है।

वायरल बुखार का निदान कैसे होता है ?

जिन दिनों यह बुखार फैला होता है, उन दिनों मात्र लक्षण देखकर ही इसका निदान हो जाता है। मुश्किल तब आती है, जब बुखार लंबा खिंच जाता है और उतरने का नाम नहीं लेता। तब सारे जाँच-परीक्षण करने जरूरी हो जाते हैं।

वायरल बुखार का घरेलू इलाज क्या है ?

1-नींबू को काटकर उस पर सेंधानमक और कालीमिर्च का चूर्ण डालकर, हल्का-सा गर्म करके चूसने से बुखार में लाभ होता है।

2-7 बीज निकले मुनक्का, कालीमिर्च के 7 दाने, 7 बादाम, 7 छोटी इलायची, 5 ग्राम कासनी व 5 ग्राम सौंफ को पीसकर 100 मिलीलीटर पानी में डालकर 1 चम्मच खांड़ मिलाकर सुबह और शाम पीने से ही कई प्रकार के बुखार में लाभ होता है।

3-25 ग्राम तुलसी के ताजे पत्ते और 1 ग्राम कालीमिर्च को पानी में पीसकर छोटी-छोटी गोलिया बनाकर छाया में सुखा लें। यह 1-1 गोली पानी से सुबह और शाम सेवन करने से हर प्रकार का बुखार मिट जाता है।

4-किसी भी तरह के बुखार में चिरायता के रस में एक तिहाई कप पानी मिलाकर दिन में 3 बार ले लें। इसका सेवन करने से बुखार ठीक हो जाता है।

5-अर्जुन की छाल का 40 मिलीलीटर काढ़ा पीने से बुखार उतर जाता है।

6-नारियल का पानी पीने से बुखार जल्द ही कम हो जाता है।

खान-पान :

खाने-पीने में तली हुई चीजें, घी-मक्खन जिनको पचाना मुश्किल होता है नही लेना चाहिये । रोगी को हलकी चीजें जैसे दलिया, खिचड़ी, दाल-चावल, बिना चिपुड़ी रोटी, आलू, सब्जी, क्लीयर सूप, फल इत्यादि लेना ठीक रहता है।

बुखार घटने पर भूख धीरे-धीरे अपने आप लौटने लगती है। खाने के लिए रोगी के साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए। हाँ, पानी और दूसरे पेय पदार्थ जरूर दिए जाते रहने चाहिए, क्योंकि उनकी भरपाई से हालत नियंत्रण में रहती है, बिगड़ती नहीं।

क्या तेज बुखार में ठंडे पानी की पट्टियाँ भी की जा सकती हैं ?

हाँ, पर फायदा तभी है जब पूरे बदन पर पट्टियाँ रखी जाएँ। सिर्फ माथे पर पट्टियाँ रखने से बुखार कम नहीं होता। सिद्धांत यह है कि ठंडी पट्टियाँ रखकर शरीर के भीतर की गर्मी दूर की जाए, यह तभी हो सकता है जब शरीर के बहुत बड़े भाग पर पट्टियाँ रखी जाएँ।
क्या ऐंटिबॉयटिक दवाएँ वायरल बुखार में किसी तरह का लाभ पहुँचाती हैं ?
नहीं, उनकी उपयोगिता बैक्टीरियाजन्य संक्रमण में ही होती है, वायरस के विरुद्ध ये काम नहीं कर पातीं।

बुखार दूर हो जाने के बाद भी कई बार अजीब सी थकान, अवसाद और परेशानी बनी रहती है, उसे कैसे दूर किया जा सकता है ?

हलका व्यायाम, खूब मात्रा में पेय जल, प्राकृतिक फल और सब्जियाँ और पौष्टिक आहार लेने से अक्सर कुछ ही दिनों में स्थिति सामान्य हो जाती है। यदि एक हफ्ते के भीतर सुधार न आए तो डॉक्टर को बताना चाहिए। विटामिन की गोलियाँ और विशेष अवसादरोधक दवा देकर वह जल्द राहत दिला सकता है।

क्या वायरल बुखार से बचने के लिए कोई रोग-निरोधक टीके हैं ? इन्हें कब और कैसे लगवाया जाना चाहिए ?

इनफ्लूएंजा वायरस के विरुद्ध टीके हैं, लेकिन उनकी उपयोगिता सीमित है। एक तो उनका असर ही थोड़े समय तक रहता है, दूसरा उनकी बचावकारी क्षमता भी पचास-अस्सी प्रतिशत ही पाई गई है। फिर यह भी मालूम नहीं होता कि किस बार किस वायरस का प्रकोप होगा कि टीका लगवाने की सलाह दी जाए।

बचाव के लिए सबसे सार्थक सावधानी यही है कि जिन दिनों शहर में बुखार फैला हो, भीड़ वाली जगहों-जैसे सिनेमाघर, मेले, सार्वजनिक तरणताल, आदि से दूर रहें। स्कूल, कॉलेज, दफ्तर में जिस किसी को बुखार आए, वह घर पर रहकर पूरा आराम करे । ताकि बुखार हवा में न फैले और लोग उसके प्रकोप से बच सकें।

नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।