वीर्य शोधन वटी के फायदे और नुकसान | Virya Shodhan Vati Benefits and Side Effects in Hindi

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वीर्य शोधन वटी के फायदे और नुकसान | Virya Shodhan Vati Benefits and Side Effects in Hindi

वीर्य शोधन वटी क्या है ? virya shodhan vati in hindi

virya shodhan vati kya hai
वीर्य शोधन वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जो स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, नपुंसकता, शारीरिक और मानसिक निर्बलता, शरीर का दुबलापन, पाचन शक्ति और स्मरणशक्ति की कमी होना आदि को दूर करता है ।
अनुचित और अनियमित ढंग से आहार-विहार और कामुक आचरण करने की वजह से वीर्य दूषित, पतला और निर्बल हो जाता है जिससे आजकल अधिकांश युवक इन शिकायतों से पीड़ित हैं । वीर्य को शुद्ध, पुष्ट और सबल बनाए बिना अन्य वाजीकारक औषधियों का सेवन करने से पूरा लाभ नहीं होता या नहीं भी होता और दवाओं पर किया गया भारी खर्च वैसे ही बेकार हो जाता है जैसे मैले कपड़े को रंगने पर ठीक से रंग नहीं चढ़ता इसलिए वाजीकारक, बलवीर्यवर्द्धक या पौष्टिक दवाइयों के साथ-साथ वीर्यशोधन वटी का सेवन करना भी ज़रूरी है।

वीर्य शोधन वटी की सामाग्री : Ingredients of virya shodhan vati

चांदी के वर्क, वंग भस्म, प्रवाल पिष्टी, शुद्ध शिलाजीत और गिलोय सत्व – सब 10-10 ग्राम, कपूर 3 ग्राम ।

वीर्य शोधन वटी बनाने की विधि :

शिलाजीत को थोड़े से पानी में घोल लें । शेष सब द्रव्यों को मिला कर खरल में डाल कर शिलाजीत के साथ घुटाई करें और जब गोली बनाने लायक गाढ़ा हो जाए तब 2-2 रत्ती की गोलियां बना लें ।( एक ग्राम में 8 रत्ती)

सेवन की मात्रा और अनुपान : dosage & how to take in hindi

सुबह शाम 2-2 गोली मीठे गर्म दूध के साथ लें ।

वीर्य शोधन वटी के उपयोग : virya shodhan vati uses

virya shodhan vati ke upyog
✶ यह वटी वीर्य को शुद्ध (शोधन) करके उसमें मौजूद दूषित तत्त्वों को नष्ट करती है, उष्णता कम करके स्तम्भन शक्ति बढ़ाती है, शुक्राशय और शुक्र (वीर्य) वाहिनी की शिथिलता, तरलता और निर्बलता दूर करती है तथा प्रमेह, धातु रोग, मूत्र रोग तथा यौन-संस्थान की कमज़ोरी आदि विकार दूर करती है ।

✶ अनुपान के रूप में कई द्रव्यों या औषधियों के साथ इस वटी का सेवन करने से कई प्रकार के यौन-रोग दूर होते हैं नपुंसकता और शिथिलता दूर होती है, स्वप्न दोष और शीघ्रपतन होना बन्द होता है।

✶ शुक्र और शुक्राशय में विकार होने के कई कारण होते हैं । तम्बाकू खाना, धूम्रपान करना, गरम गरम चाय पीना, मद्यपान करना, तेज़ मिर्च मसालेदार व खटाई युक्त पदार्थों का सेवन करना, हस्तमैथुन करना , क्विनाइन जैसी उग्र और उष्ण दवाओं का सेवन, एण्टीबायोटिक दवाओं का सेवन करना, अश्लील आचार-विचार, अश्लील फोटो या साहित्य, फिल्में देखना तथा सबसे बड़ा कारण कामुक चिन्तन और खयालों में कामक्रीड़ा करना या करने के बारे में सोच विचार करना आदि कारणों से वीर्य पतला, निर्बल और दूषित होता है। लम्बे समय तक रोग ग्रस्त रहना, पौष्टिक आहार न लेना, ज्यादा उष्ण वातावरण में परिश्रम के काम करना, विषमाशन करना यानी पहले का खाया हुआ पचने से पहले पुनः भोजन करना या कोई भी खाद्य पदार्थ खाना, लम्बे समय तक क़ब्ज़ बना रहना, सुबह शाम ठीक से पेट साफ़ न होना, सुबह देर तक सोये रहना, दिन में सोना और देर रात तक जागना, पेट में उष्णता बढ़ना आदि कारणों से वीर्य में दोष पैदा होते हैं । चिकित्सा यानी औषधि सेवन करने से पहले उपर्युक्त सभी कारणों का त्याग करना ज़रूरी है। और इनसे पूरी तरह बचे रह कर औषधि का सेवन करना ज़रूरी है तभी लाभ होगा वरना लाभ नहीं होगा और दवाएं बदनाम होंगी कि कोई फ़ायदा नहीं करतीं।
इन सब कारणों का त्याग करके निम्नलिखित अनुपानों के साथ इस योग का सेवन करके अनेक यौन-रोग दूर किये जा सकते हैं।

वीर्य शोधन वटी के फायदे ,गुण और रोगों का इलाज : virya shodhan vati benefits in hindi

virya shodhan vati ke fayde
1- वीर्य को गाढ़ा व पुष्ट करने में इसके फायदे :
वीर्य पतला और क्षीण हो गया हो तो इस वटी का सेवन गिलोय व गोखरू का काढ़ा बना कर इस काढ़े के साथ करना चाहिए । भारी पदार्थों और खटाई का सेवन नहीं करना चाहिए ।
तम्बाकू सेवन करने वाले को तम्बाकू का सेवन त्याग कर मिश्री मिले गरम दूध के साथ इस वटी का सेवन 2-3 मास तक करना चाहिए । ( और पढ़े वीर्य को गाढ़ा व पुष्ट करने के आयुर्वेदिक उपाय)

2- मन्द ज्वर दूर करने में इसके फायदे :
शरीर गरम रहता हो या मन्द ज्वर रहता हो तो चन्दनादि लोह के साथ इस वटी का सेवन करना चाहिए ।
पेट साफ़ न होता हो तो रात को सोते समय दो चम्मच सत इसबगोल की भुसी और एक चम्मच त्रिफला चूर्ण मिला कर गरम दूध के साथ 2-3 मास तक लेते हुए इस वटी का सेवन करना चाहिए ।

3- वीर्य का पतलापन दूर करने में इसके फायदे :
गरम गरम चाय के अति सेवन, तेज़ मिर्च मसालेदार व्यंजन, गरम गरम भोजन और शराब व तम्बाकू के सेवन से रक्त रचना विकृत होती है, उष्णता बढ़ जाती है, रक्ताणु निर्बल और रक्त दूषित होता है जिससे वीर्य में भी उष्णता, दोष और पतलापन आता है। ऐसी स्थिति में पहले इन कारणों का त्याग करें । चन्द्रकला रस 1 रत्ती और वीर्य शोधन वटी 1 गोली मिला कर मीठे गर्म दूध के साथ सुबह शाम लेना चाहिए ।

4-महिलाओं के लिए इसके फायदे :
यह वटी पुरुषों के समान युवतियों और वयस्क महिला और गर्भवती के लिए भी बहुत उपयोगी है ।
ज्वर या अन्य किसी कारण से शरीर में बढ़ी हुई उष्णता से रक्त में गर्मी बढ़ती है जिससे स्त्रियां रक्त प्रदर, रक्ताल्पता (एनीमिया), कमज़ोरी, श्वेतप्रदर आदि व्याधियों से पीड़ित हो जाती हैं । ऐसी स्थिति में महिलाओं को स्वर्ण माक्षिक भस्म दो रत्ती और वीर्य शोधन वटी एक गोली गुलकन्द या शहद या कुनकुने मीठे दूध के साथ सुबह शाम लेना चाहिए ।

5-युवा वर्ग के लिए इसके फायदे :
विवाहित स्त्री पुरुषों के अलावा यह वटी अविवाहित युवक-युवतियों के लिए भी उपयोगी और लाभकारी है । स्वप्नदोष,शुक्रमेह, मन्दाग्नि, शरीर का दुबला और कमज़ोर होना, चेहरा निस्तेज और पिचका हुआ होना, श्वेत प्रदर या रक्त प्रदर से पीड़ित युवती का शरीर कमज़ोर होना, मज्जा की कमी से जोड़ों में कट कट की आवाज़ होना व दर्द होना, त्वचा रूखी सूखी और मैली (सांवली) होना, देह सूखना, मन्दाग्नि होना, वात प्रकोप रहना आदि लक्षणों को दूर कर शरीर को स्वस्थ, पुष्ट और शक्तिशाली बनाने के लिए इन लक्षणों को उत्पन्न करने वाले कारणों का त्याग करके, वीर्य शोधन वटी का सेवन गिलोय सत्व, वंशलोचन 1-1 ग्राम, छोटी इलायची के पिसे हुए दाने और आंवला चूर्ण आधा-आधा चम्मच शहद में मिला कर चाट लें, ठण्डे मीठे दूध के साथ वीर्य शोधन वटी दो गोली सुबह शाम लें।
इस वटी का सेवन कम से कम 2-3 मास तक करना चाहिए । यह वटी बाज़ार में मिलती है ।

वीर्य शोधन वटी के नुकसान : virya shodhan vati side effect in hindi

virya shodhan vati ke nuksan
★ डॉक्टर की सलाह के अनुसार वीर्य शोधन वटी की सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें।

विशेष : अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित “बल्य रसायन” बलप्रद, पौष्टिक, रसायन, कांति-वर्धक एवं उत्कृष्ट वीर्यवर्धक है |
इसके नियमित सेवन से शरीर की सभी धातुओं का पोषण होकर शरीर सुदृढ़ बनता है एवं शरीर स्वस्थ व तंदुरस्त रहता है | यह मांस-पेशी, अस्थियाँ एवं स्नायुओं की दुर्बलता दूर करके उनका बल बढाता है | कृश एवं दुर्बल रोगियों का वजन एवं बल बढाकर शरीर को मजबूत बनाता है |

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है ।

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

2018-09-24T10:40:56+00:00 By |Ayurveda|0 Comments