पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

एसिडिटी के सफल 59 घरेलु उपचार | Acidity: Symptoms & Home Remedies

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एसिडिटी के सफल 59 घरेलु उपचार | Acidity: Symptoms & Home Remedies

परिचय :

खून में 20 प्रतिशत अम्ल एसिड अर्थात तेजाब और 80 प्रतिशत क्षार ऐल्काई होता है। जब खून में अम्ल (तेजाब) की मात्रा बढ़ जाती है तो यह अम्ल भोजन पकाने अंग पाकस्थली को प्रभावित करके अम्लता रोग उत्पन्न करता है। अम्लता रोग से पीड़ित रोगी की छाती में जलन व दर्द होता है।

अम्लपित्त 2 प्रकार की होती है- ऊर्ध्वगामी और अधोगामी। ऊर्ध्वगामी अम्लपित्त(एसिडिटी / Acidity) में पेट का अपचा व गंदा द्रव्य उल्टी के द्वारा मुंह से बाहर निकल जाता है जबकि अधोगामी में पेट की गंदगी गुदा मार्ग से बाहर निकलता है।

ऊर्ध्वगामी अम्लपित्त की बीमारी में हरे, काले, पीले, नीले परंतु लाल रंग के अधिक निर्जल, मछली के धोवन के समान बहुत चिकने, कफ के साथ तीखा, कडुवा व क्षारीय रस वाली उल्टी होती है।

अधोगामी में जलन, मूर्च्छा, प्यास, भ्रम, उबकाई, मोह, मंदाग्नि (पाचनक्रिया का मंदा होना), पसीना और शरीर में पीलापर आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। अधोगामी अम्लपित्त में कड़वी, खट्टी डकारें आना, छाती और गले में जलन, जी मिचलाना, शरीर में भारीपन, अन्न का न पचना, अरूचि, सिर दर्द, हाथ-पैरों की जलन, शरीर का गर्म रहना, खुजली, चकत्ते आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं।

कारण :

अम्लपित्त रोग उत्पन्न होने के कई कारण होते हैं, जैसे- समय पर भोजन न करना, अधिक उपवास करना, बाहरी सड़ी-गली चीजों का सेवन करना, अधिक मिर्च-मसाले वाले भोजन करना, अधिक चाय पीना, कॉफी पीना, शराब पीना आदि। इस सभी कारणों से पाचनशक्ति कमजोरी हो जाती है जिससे वह भोजन को ठीक से नहीं पचा पाती और अम्लपित्त का रोग उत्पन्न हो जाता है।

लक्षण :

पेट से निकलने वाला अम्ल जब अधिक लार के साथ गले तक आ जाता है तो पेट में जलन व खट्टापन प्रतीत होता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को छाती में जलन व गले में खट्टापन महसूस होता है। दोनों प्रकार के अम्लपित्त रोग में मंदाग्नि, कब्ज, भूख का कम लगना, पेशाब कम आना, पेट में गैस बनना, गले व छाती में जलन, चक्कर आना, हाथ-पैर, कमर व जोड़ों में दर्द होना, उल्टी होना, थकावट, भोजन का ठीक से न पचना, नींद का कम आना, अधिक आलस्य आना, भोजन करने के 1-2 घंटे बाद खट्टी उल्टी होना तथा अरूचि पैदा होना आदि लक्षण पैदा होता है। इस रोग में भोजन के बाद छाती और गले में जलन तथा खट्टी डकार के साथ खट्टा पानी मुंह में आता रहता है। बीड़ी-सिगरेट पीने वाले को अन्य लोगों की तुलना में रात में भारी भोजन करने से अम्लपित्त, शुगर, हृदय रोग, खांसी और दमा आदि बीमारी होने की अधिक संभावना रहती है।

भोजन और परहेज :

तोरई, टिण्डा, परवल, पालक, मेथी, मूली, आंवला, नारियल का पानी, पेठे का मुरब्बा, आंवले का मुरब्बा, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करना अम्लपित्त के रोगियों के लिए लाभकारी होता है। पुराने शालि चावल, पुरानी जौ, पुराने गेहूं, बथुआ का साग, करेला, लौंग, केला, अंगूर, खजूर, चीनी, घी, मक्खन, सिंघाड़ा, खीरा, अनार, सत्तू, केले का फूल, चीनी, कैथ, कसेरू, दाख, पका पपीता, बेलफल, सेंधानमक, पेठे का मुरब्बा, नारियल का पानी, जंगली जानवरों का मांस व छोटी मछलियों का सूप पीना भी लाभकारी होता है। रात को भोजन अपने सामान्य भूख से थोड़ा कम ही करना चाहिए और भोजन करने के बाद थोड़ी देर घूमना चाहिए व ढीले कपड़े पहनकर सोना चाहिए।

चाय, कॉफी, अंडा, मछली, शराब, तले भोजन, खीर और हलवा का कम से कम सेवन करना चाहिए। बासी या ज्यादा समय से रखा हुआ खाना, मिर्च-मसालेदार खाना, भारी भोजन, मिठाइयां, लालमिर्च, खटाई, अधिक नमक आदि का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। गुड़, खट्टा और चरपरा रस, भारी और अम्ल द्रव्य, नयी फसल का अनाज नहीं खाना चाहिए। तिल का बीज, उड़द की दाल, कुल्थी के तेल में बना पदार्थ, दही, बकरी का दूध, कचौड़ी, पराठे, बेसन से बना पदार्थ, फूलगोभी, आलू, टमाटर, बैंगन आदि का कम से कम सेवन करना चाहिए। अम्लपित्त के रोग से पीड़ित रोगी को अधिक परिश्रम व अधिक स्त्री-प्रसंग से बचना चाहिए। मानसिक अंशाति, गुस्सा, दिन में सोना, रात को जागना और मल-मूत्र का वेग रोकना अम्लपित्त के रोगियों के लिए बहुत हानिकारक होता है।

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विभिन्न औषधियों से उपचार :

1. फालसा : गैस और एसिडिटी के रोग से पीड़ित रोगी को फालसे का सेवन करना चाहिए।

2. आंवला :

* आंवले का 2 चम्मच रस और 2 चम्मच मिश्री मिलाकर पीने से अम्लता(acidity) व खट्टी डकारे(khatti dakar) दूर होती है।

* आंवला के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से अम्लता ठीक होता है।

* आंवले का रस एक चम्मच, चौथाई चम्मच भुना हुआ जीरा का चूर्ण, आधा चम्मच धनिये का चूर्ण और मिश्री को मिलाकर लेने से अम्लपित्त कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

* आंवला, सफेद चंदन का चूर्ण, चूक, नागरमोथा, कमल के फूल, मुलेठी, छुहारा, मुनक्का एवं खस बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह 2-2 चुटकी चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त (acidity)व पेट की गैस(gas) दूर होती है।
* आंवला, हरड़, बहेड़, ब्राह्मी और मुंडी बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें मिश्री मिलाकर 6-6 ग्राम चूर्ण बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन पीने से गैस की परेशानी दूर होती है।
आंवले के चूर्ण को दही या छाछ के साथ प्रयोग करने से अम्लता(acidity) में आराम मिलता है।

* आंवला के रस में शहद मिलाकर पीने से अम्लपित्त शान्त होता है और डकार के साथ मुंह में पानी आना बंद होता है।

* आंवले के 2 ग्राम चूर्ण नारियल पानी के साथ लेने से अम्लपित्त (acidity)का रोग नष्ट होता है।

3. आलू : आलू की प्रकति क्षारीय होता है जो अम्लता को कम करता है। जिसे अम्लपित्त का रोग हो, खट्टी डकारे आती हो और वायु (गैस) अधिक बनती हो उसे भुने हुऐ आलू खाना चाहिए। इससे अम्लता के रोग में जल्दी आराम मिलता है। इसमें पोटेशियम साल्ट भी होता है जो अम्लता (एसिडिटी) को कम करता है।

4. संतरा : संतरे के 100 मिलीलीटर रस में थोड़ा-सा भुना पिसा हुआ जीरा मिलाकर पीने से अम्लपित्त नष्ट होता है।

5. दूध :

* आधे गिलास कच्चे दूध में आधा गिलास पानी व 2 पिसी हुई छोटी इलायची का चूर्ण डालकर सुबह पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

* सादा व ठंडा दूध 2-2 घूंट दिन में कई बार पीने से खट्टी डकारे व मुंह में कडुवा पानी आना बंद होता है।

6. शहद :

* धनिया तथा जीरे का चूर्ण शहद के साथ खाने से खट्टी उल्टी आनी बंद होती है।

* शहद में 2 चुटकी हरड़ का चूर्ण मिलाकर चाटने से चक्कर आना व गैस दूर होती है।

7. धान (चावल) : धान का लावा से बनने वाले सत्तू, चीनी और पानी मिलाकर खाने से अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।

8. करौंदे : करौंदे का रस आधा चम्मच और पिसी हुई इलायची 2 चुटकी मिलाकर सेवन करने से अम्लता (एसिडिटी / Acidity) का रोग ठीक होता है।

9. अनार :

* 100 ग्राम अनारदाना, 50 ग्राम दालचीनी, 2 लाल इलायची, 50 ग्राम तेज पत्ता, 100 ग्राम मिश्री, 10 ग्राम जीरा और 10 ग्राम धनिये का बीज एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। यह 5-5 ग्राम चूर्ण दिन में 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है और सिर दर्द से आराम मिलता है।

* 10-10 मिलीलीटर अनार का रस दिन में 2 बार सेवन करने से डकारे व उल्टी में आराम मिलता है।

10. त्रिफला (हरड़, बडेड़ा और आंवला) :

* ” अच्युताय हरिओम त्रिफला चूर्ण ” आधा-आधा चम्मच दिन में 2 से 3 बार पानी के साथ लेने से एसिडिटी / Acidity में लाभ मिलता है।

* अच्युताय हरिओम त्रिफला, पीपल, जीरा और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से पेट की गैस दूर होती है।

* अच्युताय हरिओम त्रिफला को अच्छी तरह पीसकर गर्म लोहे के बर्तन में लेप करके रात भर रख दें। सुबह इसी मिश्रण को शहद या चीनी में मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।

* अच्युताय हरिओम त्रिफला के चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से बच्चों के पेट में होने वाली अम्लपित्त दूर होकर पेट साफ होता है।

* अच्युताय हरिओम त्रिफला, कुटकी और परवल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर मिश्री मिलाकर पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

11. सोंठ :

* सोंठ, आंवला और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सेवन करने से अम्लपित्त रोग ठीक होता है।

* 40-50 मिलीलीटर उबलते हुए पानी में 15 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर 20-25 मिनट तक उबालकर छानकर सेवन करें। यह 15 से 25 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से अफरा और पेट का दर्द खत्म हो जाता है। इस पानी में सोडा-बाई-कार्ब मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से अपच, खट्टी डकार व गैस दूर होती है।

* सोंठ, संचर नमक, भुनी हींग, अनारदाना और अमरबेल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। यह 2 चुटकी चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ पीने से एसिडिटी / Acidity का रोग ठीक होता है।

12. अगस्त : अगस्त की छाल 60 ग्राम को 1 लीटर पानी में पकाएं और जब पानी 250 मिलीलीटर बच जाए तो इस छानकर इसमें 2 ग्राम हींग मिलाकर चार भाग करके दिन में 4 बार सेवन करें। इससे अम्लपित्त के कारण उत्पन्न पेट का दर्द व खट्टी डकारे बंद होती है।

13. गाजर : खून में अम्ल की मात्रा बढ़ जाने पर गाजर का रस प्रतिदिन पीना अत्यंत लाभकारी होता है। इससे अम्लपित्त के रोग में भी लाभ मिलता है।

14. लौंग : प्रतिदिन खाना खाने के बाद लौंग चूसने से पेट की एसिडिटी / Acidity की शिकायत समाप्त होती है।

15. जौ :

* जौ का जूस या मांड शहद के साथ सेवन करने गैस, डकार व मुंह में कडुवा पानी आना बंद होता है।

* जौ और अडूसा को मिलाकर काढ़ा बनाकर इसमें दालचीनी, तेजपात, इलायची का चूर्ण और शहद मिलाकर पीने से एसिडिटी / Acidity से होने वाली उल्टी तुरंत बंद हो जाती है।

17. मूली :

* यदि गर्मी के प्रभाव से खट्ठी डकारे आती हो तो एक कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे डकारें बंद हो जाती है।

* मूली के 100 मिलीलीटर रस में 10 मिलीलीटर आंवले का रस या 3 ग्राम आंवले का चूर्ण मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से अम्लपित्त, उल्टी व चक्कर आना ठीक होता है।

* मूली का रस और कच्चे नारियल का पानी मिलाकर 250 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से गैस का बनना, अम्लपित्त व खट्टी डकारे बंद होती है।
* मूल के पत्तों का 10-20 मिलीलीटर रस में मिश्री मिलाकर नियमित प्रयोग करने से एसिडिटी में आराम मिलता है।

* कच्ची मूली में चीनी मिलाकर खाने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है। यह खट्टी डकारे व गैस की परेशानी को भी दूर करता है।

* खट्टी डकारे आना, अफारा, पेट की जलन, अम्लपित्त आदि को दूर करने के लिए मूली का सेवन करना चाहिए। इससे पाचनशक्ति बढ़ाती है और बदहजमी दूर होती हैं। ध्यान रखें कि मूल को कभी भी भोजन करने से पहले न खाएं।

* गर्मी के असर से खट्टी डकारे आती हो तो मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।

* मूली को काटकर सेंधानमक लगाकर सुबह खाली पेट खाने से लाभ होता है। ध्यान रखें कि खांसी की शिकायत होने पर मूली का सेवन कभी भी न करें।

18. पेठा :

* अम्लपित्त के रोगी को प्रतिदिन खाना खाने के बाद 2 डली पेठा खाना चाहिए। पेठा से आमाशय व आहार नली की जलन दूर होती है।

* सफेद पेठे के रस में चीनी डालकर पीने से अम्लपित्त (एसिडिटि) का रोग ठीक होता है।

19. केला :

* केले पर चीनी और इलायची डालकर खाने से अम्लपित्त के रोग में आराम मिलता है।

* केले के स्तम्भ या फल का 20 से 40 मिलीलीटर रस कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से पेट का गैस व अम्ल का अधिक बनना समाप्त होता है।

20. मुलेठी : मुलेठी का चूर्ण 3-3 ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से अमाशय की अम्लपित्त और पेट का दर्द दूर होता है।

21. कुलंजन : आधे-आधे ग्राम के कुलंजन का टुकड़े खाना खाने के बाद चूसने से पाचन ठीक से होता है और गैस दूर होती है।

22. नारियल :

* कच्चे हरे नारियल का 100 से 500 मिलीलीटर पानी दिन में 2 बार पीने से अम्लपित्त रोग ठीक होता है। इसका सेवन प्रतिदिन करने से पेट की जलन एवं छाती की जलन दूर होती है।

* नारियल की गिरी की राख को 6 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह सेवन करने से अम्लपित्त की बीमारियां दूर होती है।

23. प्याज :

* 60 ग्राम सफेद प्याज के टुकड़े को 30 ग्राम दही में मिलाकर दिन में 3 बार खाने से 7 दिनों में अम्लपित्त का रोग ठीक हो जाता है।

* प्याज के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से पेट, छाती और पेशाब की जलन शांत होती है और अम्लपित्त के रोग में लाभ मिलता है।

24. जीरा :

* जीरा, धनिया और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में पीसकर 2-2 चम्मच सुबह-शाम भोजन के बाद ठंडे पानी के साथ फांकी लेने से अम्लपित्त ठीक होता है।

* जीरे का चूर्ण 5 ग्राम को गुड़ के साथ सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

* जीरा और चीनी मिलाकर चूर्ण बनाकर आधा चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से रोग में लाभ मिलता है।

25. कालीमिर्च : कालीमिर्च और स्वाद के अनुसार सेंधानमक मिलाकर पीसकर आधा चम्मच सुबह-शाम खाना खाने बाद फांकी लेने से अम्लपित्त में आराम मिलता है।

26. पालक : पालक और 5 परवल को पीसकर पानी में उबाल लें और इसे ठण्डा करके इसमें हरा धनिया व नमक मिलाकर पीएं। यह अम्लपित्त से पीड़ित रोगी को सुबह-शाम पिलाने से गले व छाती में जलन ( Chhati me jalan ), डकारे और बैचेनी दूर होती है।

27. धनिया :

* 2 चम्मच सूखा हुआ धनिया, एक चम्मच सोंठ, आधा चम्मच जीरा और 4 लौंग को पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण में थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन में 3 लेने से पेट में अम्लपित्त का बढ़ना, छाती, आंखा की जलन, आलस्य, चिड़चिड़ापन और सांस फूलन आदि ठीक होता है।

* हरे धनिए को पानी में पीसकर इसमें कालानमक मिलाकर पीने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

* धनिया, आंवला एवं नगरमोथा बराबर मात्रा में लेकर पानी में भिगो दें और 2 घंटे बाद इसमें मिश्री व नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है।

28. अदरक :

* अदरक और धनिया बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

* एक चम्मच अदरक का रस शहद में मिलाकर प्रयोग करने से अम्लपित्त दूर होता है।

29. यवक्षार : यवक्षार देशी घी या शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अम्लपित्त दूर होता है।

30. पीपल :

* पीपल के फलों को सुखाकर पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम की मात्रा में ठंडे पानी के साथ लेने से अम्लपित्त रोग में आराम मिलता है।

* छोटी पीपल का 5 ग्राम चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से आराम मिलता है।

31. अजवायन : एक चम्मच पिसी हुई अजवायन को एक गिलास पानी व एक नींबू का रस मिलाकर पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

32. बड़ी हरड़ : बड़ी हरड़ के चूर्ण में एक ग्राम का चौथाई भाग जवाखार मिलाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से लाभ मिलता है।

33. हरड़ :

* हरड़ के 2 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर बच्चे को चटाने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

* हरड़, छोटी पीपल, दाख, धनिया, जवासा और मिश्री या चीनी को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह कूटकर रख लें। इस चूर्ण को 3 से 4 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त समाप्त होता है।

34. बिजौरा नींबू : 20 ग्राम बिजौरा नींबू के रस को प्रतिदिन शाम को पीने से अम्लपित्त दूर होता है।

35. नींबू :

* आधा लीटर पानी में एक पके हुए नींबू का रस निचोड़कर इसमें 5 ग्राम चीनी मिलाकर दोपहर के भोजन से आधा घंटा पहले पी लें। इसका प्रयोग एक से आधे महीने तक लगातार जारी रखने से अम्लपित्त मिटता है। ध्यान रखें कि भोजन के बाद इसका सेवन न करें क्योंकि यह जठर (पाचन क्रिया) का रस को अधिक खट्टा करके अम्लपित्त को बढ़ता है।

* नींबू का रस गर्म पानी में डालकर शाम को पीने से अम्लपित्त समाप्त होता है।

* नींबू के रस में आधा चम्मच भुना हुआ जीरा और एक चुटकी सेंधानमक मिलाकर सेवन करें।

* नींबू के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त समाप्त होती है।

35. गिलोय : गिलोय, नीम के पत्ते और कड़वे परवल के पत्ते को पीसकर शहद के साथ पीने से अम्लपित्त समाप्त होता हैं।

36. अडूसा : अडूसा, गिलोय, पित्तपापड़ा, नीम की छाल, चिरायता, भांगरा, हरड़, बहेड़ा, आंमला और कड़वे परवल के पत्तों को मिलाकर पीसकर काढ़ा बनाकर शहद डालकर पीएं। इससे अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

37. नीम :

* नीम के पत्ते और आंवले का काढ़ा बनाकर पीने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

* धनियां, सोंठ, नीम की सींक और चीनी मिलाकर काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से खट्टी डकारें, अपचन (भोजन का न पचना) और अधिक प्यास लगना ठीक होता है।

* नीम की जड़ का बारीक चूर्ण 10 ग्राम, विधारा चूर्ण 20 ग्राम, सत्तू 100 ग्राम लेकर अच्छी तरह से मिलाकर थोड़ी-सी मात्रा में शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त का रोग समाप्त होता है।

38. चूना : चूने का साफ पानी 10 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से अम्लपित्त और बदहजमी दूर होती है।

39. गुलाबजल :

* गुलाबजल में गुलाब का फूल, एक इलायची और एक चम्मच धनिये का चूर्ण मिलाकर भोजन करने के बाद सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

* एक कप गुलाबजल, 2 चम्मच चूने का पानी और एक चम्मच नींबू का रस लेकर अच्छी तरह मिला लें और इसका सेवन दिन में 3 बार करें। इससे खट्टी डकारें, उल्टी व गैस दूर होती है।

* गुलाबजल में चंदन का तेल मिलाकर शरीर पर मलिश करने से अम्लपित्त के कारण उत्पन्न थकावट व दर्द दूर होता है।

40. काला चना : काले चने में कालीमिर्च मिलाकर पीसकर चटनी बनाकर खाने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

41. दाख : दाख, हरड़, छोटी पीपल, जवासा, धनिया और मिश्री बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

42. सफेद जीरा :

* 40 ग्राम सफेद जीरा और 40 ग्राम धनिया पानी के साथ पीसकर 320 ग्राम घी में मिलाकर पका लें। यह 6 से 20 ग्राम तक की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से अम्लपित्त की शिकायत दूर होती है।

* सफेद जीरा, काला जीरा, बच, भुनी हींग और कालीमिर्च बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से आराम मिलता है।

43. खैर : खैर (कत्था) आधे से एक ग्राम सुबह-शाम सेवन करने से खट्टी डकारे आनी बंद होती है।

44. बथुआ : बथुआ के बीजों को पीसकर चूर्ण बनाकर 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ खाने से आमाशय की गन्दगी साफ होकर पित्त बाहर निकाल जाता है।

45. पोदीना : एक कप पानी में पोदीना की चटनी बनाकर थोड़ी-सी चीनी डालकर अच्छी तरह मिलाकर सेवन करने से अम्लपित्त के कारण पेट में होने वाली जलन शांत होती है।

46. जामुन : जामुन का 1 चम्मच रस थोड़े-से गुड़ के साथ लेने से उल्टी व गैस दूर होती है।

47. लहसुन :

* लहसुन की एक कली को देशी घी में भूनकर धनिया 5 ग्राम व 5 ग्राम जीरा के साथ पीसकर दिन में 3 बार लेने से अम्लपित्त का रोग दूर होता है।

* लहसुन को खाली पेट सुबह खाने से अम्लपित्त दूर होती है।

48. चिरायता : चिरायता और मुलहेठी को पानी में पीसकर चीनी मिलाकर खाने से एसिडिटी व कब्ज दूर होती है।

49. गन्ना : गन्ने के रस को थोड़ा गर्म करके थोड़ा नींबू और अदरक का रस मिलाकर पीने से पेट की गैस और बदहजमी दूर होती है।

50. हींग : हींग को भूनकर इसमें थोड़ा सा कालानमक मिलाकर पानी में उबालकर पीने से एसिडिटी व कब्ज दूर होती है।

51. करेला : करेला के भर्त्ता में सेंधानमक मिलाकर भोजन के साथ लेने से लाभ मिलता है।

52. परवल : परवल के पत्ते, नीम, अडूसा, मैनफल, सेंधानमक और शहद को मिलाकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से उल्टी आकर अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

53. मुलहठी : खाना खाने के बाद यदि खट्टी डकारें आती हो, जलन होती हो तो मुलहठी चूसने से लाभ मिलता है। भोजन से पहले मुलहठी छोटे-छोटे टुकड़े 15 मिनट तक चूसने और इसके बाद भोजन करने से अपच नहीं होता और अम्लपित्त में आराम मिलता है।

54. मेथी : मेथी के पत्तों का 100 मिलीलीटर रस और इतना ही पानी मिलाकर पीने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

55. पान : पान खाने से अम्लता (एसिडिटि) का रोग समाप्त होता है।

56. सेहुंड : सेहुंड का चूर्ण 10 ग्राम, घी 10 ग्राम और दूध 40 ग्राम को उबालकर घी में सिद्ध करके पीने से अम्लपित, रक्तपित, वातपित्त, दमा, बेहोशी और प्यास आदि में लाभ मिलता है।

57. शतावर : शतावर की जड़ का आधा ग्राम रस और शहद मिलाकर दिन 2 बार सेवन करने से अम्लपित्त का रोग ठीक होता है।

58. अंगूर :

* दाख (मुनक्का) हरड़ और चीनी बराबर-बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम ठंडे पानी के साथ सेवन करने से अम्लपित्त, हृदय व गले की जलन दूर होती है।

* रात को 100 मिलीलीटर पानी में मुनक्का 10 ग्राम और सौंफ 5 ग्राम भिगोकर रख दें और सुबह इस उसी पानी में मसलकर पीएं। इससे अम्लपित्त में लाभ मिलता है।

59. जम्भीरी नींबू : जम्भीरी नींबू का रस शाम को पीने से अम्लपित्त में राहत मिलती है।

अन्य उपचार :

* अम्लपित्त के रोगी को अपने खाने-पीने का समय निश्चित बनाकर रखना चाहिए।

* गुस्सा, अधिक मैथुन, चिन्ता, शोक आदि से बचना चाहिए।

* यदि अम्ल रोग बहुत ज्यादा हो तो 2-3 दिनों तक बार-बार नींबू पानी, संतरा, मौसमी, अन्नानास, गाजर, पेठा, खीरा, लौकी आदि का रस पीएं।

विशेष : अच्युताय हरिओम गुलकंद ,अच्युताय हरिओम संत कृपा चूर्णअच्युताय हरिओम आमला मिश्री चूर्ण के सेवन से एसिडिटी / Acidity में तुरंत राहत मिलती है

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