पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

खीरे के बीजों के 8 लाजवाब फायदे | khire ke beejon ke fayde

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खीरे के बीजों के 8 लाजवाब फायदे | khire ke beejon ke fayde

खीरा एवं ककड़ी जहाँ गर्मियों में विशेष लाभकारी हैं, वहीँ ककड़ी एवं विशेषत: खीरे के बीज पौष्टिक होने के साथ कई प्रकार की बीमारियों में भी बहुत उपयोगी हैं | खीरे के बीजों को सुखाकर छील के रख लें |

गुण : खीरे के बीजों को खाने से पेशाब खुलकर आता है और पेशाब की जलन व दर्द दूर होता है। यह लीवर और प्लीहा के लिए भी हितकर है। यह गर्मी से होने वाले बुखार को शांत करता है। आइये जाने khire ke beejon ke fayde in hindi

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औषधीय प्रयोग :

१] कमजोरी : १० सूखे बीज १ चम्मच मक्खन के साथ १ माह तक देने से कमजोर बालक पुष्ट होने लगते हैं | बड़ों को ३० बीज १ चम्मच घी के साथ देने से उन्हें भी लाभ होता हैं |

२] मूत्र में जलन : जलन के साथ व अल्प मात्रा में मूत्र – प्रवृत्ति में ताजे बीज अथवा ककड़ी या खीरा खाने से अतिशीघ्र लाभ होता है |

३] पथरी : जिन्हें बार – बार पथरी होती हो वे प्रतिदिन ४ माह तक ३० सूखे बीज भोजन से पूर्व खायें तो पथरी बनने की प्रवृत्ति बंद हो जायेगी |

४] पेशाब में खून  : पेशाब के साथ खून आने पर १ – १ चम्मच बीजों का चूर्ण व गुलकंद तथा १ चम्मच आँवला – रस या चूर्ण मिला के १ – २ बार लें, खूब लाभ होगा |

५] श्वेतप्रदर : श्वेतप्रदर में १ चम्मच बीज – चूर्ण, १ केला, पीसी मिश्री मिलाकर दिन में १ – २ बार लेने से बहुत लाभ होता हैं |

६] मूत्ररोग : 10 ग्राम खीरे के बीज को पीसकर पानी में मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पीने से नाभि का दर्द और मूत्राशय की पीड़ा ठीक होती है।

७] यकृत का बढ़ना : खीरे को काटकर नींबू व पुदीने का रस एवं कालानमक मिलाकर खाने से जिगर का बढ़ना रोग ठीक होता है।

८] मूर्च्छा (बेहोशी): खीरे को काटकर रोगी की आंखों और माथे पर रखने और खीरे की फांक रोगी को सुंघाने से बेहोशी दूर होती है।

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2017-06-22T11:29:54+00:00 By |Ayurveda|0 Comments

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