पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

गर्भावस्था में कभी न खायें यह चीज वरना हो सकती है बच्चे को हानि | What’s not safe to eat in pregnancy?

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गर्भावस्था में कभी न खायें यह चीज वरना हो सकती है बच्चे को हानि | What’s not safe to eat in pregnancy?

सगर्भावस्था में निषिद्ध आहार:Garbhavastha mein yh nahi Khayen

pregnancy Diet tips in hindi में सबसे पहले आप यह जाने ले की गर्भ रहने पर गर्भिणी / गर्भवती(garbhvati) किसी भी प्रकार के आसव-अरिष्ट (कुमारी आसव, दशमूलारिष्ट आदि), उष्ण-तीक्ष्ण औषधियों, दर्द-निवारक (पेन किलर) व नींद की गोलियों, मरे हुए जानवरों के रक्त से बनी रक्तवर्धक दवाइयों एव टॉनिक्स तथा हानिकारक अंग्रेजी दवाइयों आदि का सेवन न करें |

गर्भवती महिला के लिए भोजन में इडली, डोसा, ढोकला जैसे खमिरयुक्त, पित्तवर्धक तथा चीज, पनीर जैसे पचने में भारी पदार्थ नही होने चाहिये | ब्रेड, बिस्कुट, केक, नुडल्स (चाऊमीन), भेलपुरी, दहिवड़ा जैसी मैदे की वस्तुएँ न खाकर शुद्ध घी व आटे से बने तथा स्वास्थ्यप्रद पदार्थो का सेवन करे |

★ कोल्डड्रिंक्स व डिब्बाबंद रसों की जगह ताजा नीबू या आँवले का शरबत ले | देशी गाय के दूध, गुलकंद का प्रयोग लाभकारी है |

★ मांस, मछली, अंडे आदि का सेवन कदापि न करे |

★ आयुर्वेदानुसार सगर्भावस्था(garbhvati) में किसी भी प्रकार का आहार अधिक मात्र में न लें | षडरसयुक्त आहार लेना चाहिए परंतु केवल किसी एकाध प्रिय रस का अति सेवन दुष्परिणाम ला सकता हैं |

इसे भी पढ़े :गर्भवती महिला के लिए पुष्टिवर्धक संतुलित भोजन |Pregnancy health diet in Hindi

इस संदर्भ में चरकाचार्यजी ने बताया है |

१] मधुर(मीठा) : अधिक मात्र में सतत सेवन करने से बच्चे को मधुमेह (डायबिटीज), गूँगापन, स्थूलता हो सकती हैं |

२] अम्ल(खट्टा) : अधिक मात्र में खट्टे पदार्थ जैसे इमली. टमाटर, खट्टा दही , डोसा, खमीरवाले पदार्थ अतिप्रमाण में खाने से बच्चे का जन्म से ही नाक में से खून बहना, त्वचा व आँखों के रोग हो सकते हैं |

३] लवण (नमक) : ज्यादा नमक लेने से रक्त में खराबी आती है, त्वचा के रोग होते हैं | बच्चे के बाल असमय में सफेद हो जाते हैं, गिरते है, गंजापन आता है, त्वचा पर समय झुरियाँ पडती है तथा नेत्रज्योति कम होती है |

४] तीखा : अधिक मात्र में तीखी चीजों के सेवन से बच्चा कमजोर प्रकुति का, क्षीण शुक्रधातुवाला व् भविष्य में संतानोत्पत्ति में असमर्थ हो सकता है |

५] कडवा : अधिक मात्र में कडवे पदार्थों के सेवन से बच्चा शुष्क, कम वजन का व कमजोर हो सकता है |

६] कषाय(कसैले) : अति खाने पर श्यावता (नीलरोग) आती है, उर्ध्ववायु की तकलीफ रहती है |

सारांश यही है कि स्वादलोलुप न होकर आवश्यक संतुलित आहार लें |

श्रोत – ऋषि प्रसाद मासिक पत्रिका (Sant Shri Asaram Bapu ji Ashram)

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2017-07-15T13:52:41+00:00 By |Ahar-vihar|0 Comments

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