पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

रोग निवारण के फकीरी नुस्खे | Rog Nivaran ke Fakiri Nuskhe

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रोग निवारण के फकीरी नुस्खे | Rog Nivaran ke Fakiri Nuskhe

तुतलापन :tutlane ka ilaj

जो व्यक्ति अटक-अटककर बोलते हैं, बीच में कुछ समय तक अटके रह जाते हैं, वे निम्न प्रयोग से लाभ उठाएं :ayurvedic treatment for tutlana

(१) बारीक भुनी हुई फिटकरी मुख में रखकर सो जाया करें । एक मास के निरन्तर सेवन से तुतलापन दूर हो जायगा ।
(२) हकलाते और तुतलाते बच्चे आँवला चबाएँ तो तुतलाना मिटता है । जीभ पतली होकर बोली साफ होने लगती है ।

दर्द मात्र की औषधि :dard ka ilaj

(१) सोडा बाई कार्ब तीन ग्राम, फिटकरी सफेद कच्ची तीन ग्राम, दोनों को बारीक पीस लें । यह एक मात्रा है । दवा फांककर ऊपर से गर्म पानी पी लें । एक मात्रा में सर्व प्रकार के दर्द भाग जाते हैं ।
(२) कच्ची फटकरी ३० ग्राम, स्वर्ण गेरू १० ग्राम । दोनों को पीसकर कपडे से छानकर आधा ग्राम से एक ग्राम तक दूध अथवा गर्म पानी के साथ लें । इससे सिर आदि स्थानों में होनेवाले सभी दर्द शान्त हो जाते हैं ।

दस्त बन्द करने की दवा :dast ka desi ilaj

(१) जायफल पानी में पीसकर दिन में तीन बार पिलाने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।
(२) रोगी की नाभि में बड का दूध भर दो । दस्त बन्द हो जायेंगे ।

नपुंसकता : napunsakta ka ayurvedic ilaj in hindi

(१) मालगंगनी का तेल ४० ग्राम, शुद्ध घी ८० ग्राम, शुद्ध शहद १२० ग्राम ।
उपर्युक्त वस्तुओं को मिलाकर एक काँच के बर्तन में रख लें । प्रातः सायं ६ ग्राम दवा के सेवन से नपुंसकता का रोग दूर होता है । गाय का दूध अधिक मात्रा में पियें । ४० दिन तक यह दवा सेवन करें ।

स्त्री के अनेक रोगों पर एक दवा :stri rog

(१) आक की जड छाया में सुखाकर एवं बारीक पीसकर सुरक्षित रखें । इसकी मात्रा दो से चार ग्राम तक है । इसके सेवन से मासिक का खुलकर आना, दर्द से आना, पूरी मात्रा में न आना अथवा बिल्कुल न आना आदि शिकायतें दूर हो जाती हैं । मन्दाग्नि नष्ट होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है । वायु-गोला, कटि-पीडा, दूर हो शरीर में स्फूर्ति आती है ।

गर्भस्थापक :garbh dharan ke gharelu upay

(१) रात को किसी मिट्टी के बर्तन में २५ ग्राम अजवायन, २५ ग्राम मिसरी, २५ ग्राम पानी में डुबाकर रखें । सुबह उसे ठण्डाई की नार्इं पीसकर पियें ।
भोजन में मूँग की दाल, बिना नमक की रोटी खायेंँ । यह प्रयोग मासिक धर्म के पहले दिन से लेकर आठवें दिन तक करना चाहिए । इस प्रयोग से जरूर गर्भ धारण होगा ।
(२) शिलिंगी के ९ बीज रोज, मासिक धर्म के बाद सतत चार दिन तक सेवन करने से गर्भ धारण होगा ।
एक बार के इस प्रयोग से अगर सफलता नहीं मिलती है तो यह प्रयोग ३-४ बार करने से अवश्य इच्छा पूर्ण होगी ।

गर्भरक्षा : garbh raksha ke upay in hindi

जिस स्त्री की बार-बार गर्भपात हो जाता हो उसकी कमर में धतूरे की जड का चार उंगल का टुकडा बाँध दें । इससे गर्भपात नहीं होगा । जब नौ मास पूर्ण हो जायेंँ तब जड को खोल दें ।

सिरदर्द : sir dard ka ilaj

सिरदर्द होने पर दोनों हाथों की कोहनी के ऊपर कपडे की चिन्दी, रीबिन या मुलायम रस्सी से कसकर बाँध देना चाहिए । इससे पाँच सात मिनट में ही सिरदर्द चला जायेगा । कोहनी पर इतने जोर से बाँधना चाहिए कि रोगी को हाथ में अत्यन्त दर्द मालूम हो । सात मिनट के बाद रस्सी खोल देना चाहिए । आवश्यकता हो तो दिन में फिर एक बार बाँधना चाहिए । सिरदर्द में चमत्कारिक आराम हो जाता है ।

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रोग निवारण के फकीरी नुस्खे | Rog Nivaran ke Fakiri Nuskhe
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2017-07-07T14:22:35+00:00 By |Disease diagnostics|0 Comments

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