घाव को जल्दी सुखाने के घरेलू उपाय | Ghav Sukhane ke Upay

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घाव को जल्दी सुखाने के घरेलू उपाय | Ghav Sukhane ke Upay

रोग परिचय :

शरीर पर अनेक कारणोंवश घाव हो जाया करते हैं । घाव सामान्य तरह की चोट होती है, भले ही यह खतरनाक नहीं होता, किंतु यदि घाव संक्रमित हो जाते हैं तो ये खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं। घाव में स्टेफिलोकोक्कस नामक कीटाणु का संक्रमण होता है।प्राथमिक उपचारकर्ता को विभिन्न प्रकार के घावों का उपचार करना पड़ता है।

घावों (जख्म) के प्रकार :

निम्न चार प्रकार के घाव पहचाने जाते हैं

(क) कटे हुए घाव-ये साफतौर पर कटने के घाव होते हैं, जो तेज धारवाली
चीजों जैसे उस्तरा, धारदार टिन, चाकू, टूटे हुए गिलास के टुकड़े इत्यादि से उत्पन्न होते हैं। इनके परिणामस्वरूप तेज रक्तस्राव भी सतही रक्तवाहिनियों के कटने से होता है। यह शीघ्रता से ठीक हो जाता है।और संक्रमण भी जल्दी नहीं होता। रक्तस्राव को शीघ्रता से पट्टी बाँधकर रोक देना चाहिए, जिससे संक्रमण नहीं होता।

(ख) कुचला हुआ घाव-इन घावों में अनियमित और फटे हुए छोर होते
हैं, क्योंकि ये कुंठित वस्तुओं से निर्मित होते हैं। चूँकि रक्तवाहिनियाँ कुचल जाती हैं और स्वयमेव बंद हो जाती हैं, जिसके कारण रक्तस्राव कम होता है और घाव अपेक्षाकृत धीमी गति से ठीक होता है।

(ग) चुभनेवाले घाव-ये घाव नोंकदार वस्तुओं के त्वचा में घुसने से बनते हैं, जैसे काँच की खपचियाँ, चाकू, सूई, तीर, कैंची इत्यादि। इनके छिद्र छोटे हो सकते हैं, किंतु शरीर में गहरे उतरते हैं और महत्त्वपूर्ण अंगों को नष्ट कर सकते हैं। ऐसे घावों में संक्रमण की संभावना बहुत ज्यादा होती है।

(घ) भितरघाती अंदरूनी चोट-ये घाव खोखली वस्तुओं जैसे लाठी,पत्थर या घूसे से निर्मित होते हैं। परिणामस्वरूप रक्त त्वचा के अंदररिसता रहता है और त्वचा यथावत् रहते हुए सूजन उत्पन्न करती है।

घाव का संक्रमण क्या है : what is infection of wound

संक्रमण से तात्पर्य रोगाणुओं (अति सूक्ष्म भी) के प्रवेश और वृद्धि से है, जो घावों में गुणोत्तर दर से बढ़ते हैं, जिसके गंभीर परिणाम होते हैं। ये रोगाणु हर जगह उपस्थित होते हैं अर्थात् हवा, पानी व मिट्टी में । संक्रमित घावों के चिह्न व लक्षण होते हैं–ताप, दर्द, सूजन, लालिमा और मवाद का बनना। आइये जाने घाव ठीक करने के घरेलू उपाय – Home Remedies to Heal Wounds in Hindi

घाव को शीघ्र सुखाने के घरेलू उपाय : ghav sukhane ke upay

1-सर्वप्रथम घावों को नीम के ताजे पत्तों के काढ़ा से भली भांति धो-पोंछकर सुखाकर घावों पर ‘जात्यादि तैल’ दिन में 2-3 बार लगायें अथवा 1 बार लगाकर पट्टी बाँधे । ( और पढ़े पुराने घाव ठीक करने का रामबाण फकीरी नुस्खा )

2- नीम के ताजे पत्ते, निर्गुन्डी के ताजे पत्ते, शरपुंखा के पत्ते, पत्थरचूर के पत्ते, प्रत्येक 25 ग्राम लेकर इकट्ठा रस निचोड़ कर व छानलें । इसमें स्वच्छ वस्त्र डुबोकर घावों पर पट्टी बाँध दें ।
अथवा उक्त चारों प्रकार के पत्तों को पीसकर लुगदी बनाकर इसे 1 कड़ाही में रखकर इससे 4 गुना नारियल का तेल डालकर (तेल मात्र शेष रहने तक) गरम करें। फिर भली भांति छानकर इसमें कार्बोलिक एसिड 100 भाग मिलाकर कांच की स्वच्छ ढक्कन युक्त बोतल में सुरक्षित रखें या
इसमें पिघला हुआ मोम डालकर और मिलाकर मरहम बनाकर सुरक्षित रखें। तदुपरान्त इस तैल या मरहम को घावों पर दिन में 2-3 बार लगाया करें । अथवा प्रतिदिन 1 बार लगाकर पट्टी बाँधा करें ठीक न होने तक प्रतिदिन पट्टी बदलकर नई पट्टी बाँधते रहें । ( और पढ़ेघाव को सिघ्र भरते है यह 19 घरेलु उपाय)

3-‘महातिक्तघृत’ (सि. यो. संग्रह) भेद होते हैं। 1 से 4 ग्राम तक गौदुग्ध या जल से खायें ।

4- ‘महामन्जिष्ठारिष्ट’ (आयुर्वेदसार संग्रह) 15 मि.ली. तथा ‘सारिवाद्यसव’ 15 मि.ली. एकत्र मिलालें । उसमें 30 मि.ली. जल मिलाकर भोजनोपरान्त दिन में 2 बार पिलायें । ( और पढ़ेजले घाव को ठीक करने का सबसे असरकारक उपचार )

5-व्याधिहरण रसायन, नाड़ी व्रण, हड्डी व्रण अथवा उपदंश के संक्रमण से उत्पन्न घावों में इसकी 125 से 250 मि.ग्रा (आयु और आवश्यकतानुसार) मधु से सुबह-शाम दिन में 2 बार चाटकर ऊपर से गौ-दुग्ध पान करें । पुराने घाव के संक्रमण में चोपचिन्यादि चूर्ण’ (ग्रन्थ आर्यभिषक), भी आयु और आवश्यकतानुाार 3 से 6 ग्राम तक ताजे जल से दिन में 2-3 बार तक खिलायें।

6- रसमाणिक्य’ (भै. र.) 125 से 250 मि.ग्रा. तथा ‘गन्धक रसायन (भै. र.) 500 मि.ग्रा. से 1 ग्राम तक एकत्र मिलाकर मधु से सुबह-शाम चटायें।

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

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