मलेरिया(malaria)की छुट्टी कर देगा यह फकीरी नुस्खा |malaria home treatment in hindi

मलेरिया(malaria) कैसे फैलता हैं

• (Anopheles mosquito) मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से हमें मलेरिया बुखार आता हैं.
• इस मच्छर के खून में परजीवी बैक्टीरिया होते हैं. जब यह हमे काटती है तो इसके मुंह के जरिये वह परजीवी हमारे शरीर में भी पहुंच जाते हैं.
• फिर धीरे-धीरे यह परजीवी बैक्टीरिया शरीर में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाता हैं.
• शरीर में जब इस परजीवी की संख्या बढ़ जाती हैं तो मलेरिया बुखार हो जाता हैं.
• यह परजीवी लार के जरिये शरीर में पहुंचते ही अपना काम शुरू कर देते हैं, यह सबसे पहले लिवर पर हमला बोलते हैं.
• यह परजीवी अपना पूरा असर दिखाने में 8-12 दिन तक का समय लेते हैं.
आइये जाने malaria ke lakshan kya hai

मलेरिया बिमारी के लक्षण malaria symptoms /symptoms of malaria

1. यह बुखार बहुत ठण्ड लग कर आता हैं, पूरा शरीर कांपने लगता हैं.
2. शरीर की त्वचा ठंडी पढ़ने लगती हैं.
3. जी मचलना, उलटी होना आदि होने लगते है
4. सर दर्द होने लगता हैं, जो धीरे-धीरे तेज हो जाता हैं
5. शरीर थकान से भर जाता हैं. पूरा शरीर कमजोर होने लगता हैं
6. बहुत बार मलेरिया के लक्षण में आंखे लाल भी होने लगती हैं
7. बुखार तेजी से चढ़कर 102 डिग्री से 106 डिग्री Ferenahit तक पहुंच जाता हैं. इस अवस्था में मरीज कोमा (बेहोशी) में भी जा सकता हैं.

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मलेरिया की अक्सीर (रामबाण) औषधिः

मलेरिया का बुखार लोगों को अलग-अलग प्रकार से आता है। मुख्यरूप से उसमें शरीर टूटता है, सिर दुःखता है, उल्टी होती है। कभी एकांतरा और कभी मौसमी रूप से भी मलेरिया का बुखार आता है और कई बार यह जानलेवा भी सिद्ध होता है।

प्रयोग :

★ इसकी एक सरल, सस्ती तथा ऋषिपरम्परा से प्राप्त औषधि हैः हनुमानजी को जिसके पुष्प चढ़ते हैं उस आकड़े की ताजी, हरी डाली को नीचे झुकाकर (ताकि दूध नीचे न गिरे) उँगली जितनी मोटी दो डाली काट लें।मदार Madaar

★ फिर उन्हें धो लें। धोते वक्त कटे हिस्से को उँगली से दबाकर रखें ताकि डाली का दूध न गिरे।

★ एक स्टील की तपेली में 400 ग्राम दूध (गाय का हो तो अधिक अच्छा) गर्म करने के लिए रखें।

★ उस दूध को आकड़े की दोनों डण्डियों से हिलाते जायें। थोड़ी देर में दूध फट जायेगा। जब तक मावा न तैयार हो जाये तब तक उसे आकड़े की डण्डियों से हिलाते रहें।

★ जब मावा तैयार हो जाये तब उसमें मावे से आधी मिश्री अथवा शक्कर डालकर (इलायची-बादाम भी डाल सकते हैं) ठण्डा होने पर एक ही बार में पूरा मावा मरीज को खिला दें। किन्तु बुखार हो तब नहीं, बुखार उतर जाने पर ही खिलायें।

इस प्रयोग से मरीज को वर्ष भर फिर दुबारा मलेरिया नहीं होगा। रक्त में मलेरिया की ‘रींग्स’ दिखेंगी तो भी बुखार नहीं आयेगा और मलेरिया के रोग से मरीज सदा के लिए मुक्त हो जायेगा।

विशेष : 1 से 6 वर्ष के बालकों पर यह प्रयोग नहीं किया गया है। 6 से 12 वर्ष के बालकों के लिए दूध की मात्रा आधी अर्थात् 200 ग्राम लें और उपरोक्तानुसार मावा बनाकर खिलायें।

अभी वर्तमान में जिसे मलेरिया का बुखार न आता हो वह भी यदि इस मावे का सेवन करे तो उन्हें वर्ष भर कभी मलेरिया न होगा। दिमाग के जहरी मलेरिया में भी यह प्रयोग अक्सीर इलाज का काम करता है। अतः यह प्रयोग सबके लिए करने जैसा है।