पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

विद्यार्थियों के लिए

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विद्यार्थियों के लिए

जिन विद्यर्थियोंको स्कूल में कॉलेज में अच्छे नम्बरों से पास होना है वे प्राणायाम जरूर करें अनुलोम विलोम, भ्रामरी, अन्तर कुभक औरबहि र्कुम्भक प्राणायाम के बाद दो मिनट शांत बैठें, आँखें बंद, दोनों हाथों की हथेलियों को रगड़कर उसका स्पर्श दोनों आँखों को करें और आँखें खोलें ऐसा करने से अपनी ऊर्जा बाहर नहीं निकलेगी

रात को सोते समय पूरब दिशा की ओर सिराना करके सोयें

पढ़ाई करते समय पूरब और उत्तर दिशा के बीच वाले कोण, जिसे ईशान कोण कहते हैं, ईशान कोण की ओर मुख करके ही पढ़ें

गणित या विज्ञान में कुछ याद नहीं रहता तो जीभ को तालु में लगाकर पढ़ें ऐसा करने से मस्तिष्क का संतुलन अच्छा बना रहता है

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

2017-01-03T05:41:10+00:00 By |Balsanskar, Students|0 Comments

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