सूर्य स्नान के लाभ और विधि | Surya Snan ke Labh

Home » Blog » Health Tips » सूर्य स्नान के लाभ और विधि | Surya Snan ke Labh

सूर्य स्नान के लाभ और विधि | Surya Snan ke Labh

सूर्य स्वस्थता एवं जीवनी शक्ति का भण्डार है। उसकी किरणों द्वारा पृथ्वी पर अमृत बरसता है। सृष्टि में जो स्फूर्ति, हलचल, विकास, वृद्धि एवं तेजस्विता दिखाई पड़ रही है, उसका स्रोत सूर्य है। सूर्य का संबंध यदि पृथ्वी से हटा दिया जाए तो भूतल पर एक भी जीव का अस्तित्व नहीं रह सकता। तब बर्फ का यह अंधकारमय गोला एक निकम्मी स्थिति में पहुंचकर अपने अस्तित्व को खो बैठने के लिए बाध्य होगा।

★ डॉक्टर मूर ने सूर्य की दिव्य शक्तियों का वैज्ञानिक ढंग से चिकित्सा में प्रयोग करके अद्भुत सफलता पाई है। उन्होंने लिखा है कि जिस बालक को धूप से बचाकर रखा जाता है, वह सुंदर और बुद्धिमान बनने के बजाए कुरूप और मूर्ख बनता है।

★ सर जेम्स वाथ ने अपने अनुसंधान की रिपोर्ट में लिखा है कि सेन्ट पीटर्स वर्ग में जो सैनिक बिना प्रकाश वाले स्थानों में रहते थे, वे प्रकाशवान स्थान में रहने वाले सैनिकों की अपेक्षा तीन गुनी अधिक संख्या में मरते थे।

★ महामारी फैलने पर देखा जाता है कि अंधेरे मुहल्लों और अंधेरे मकानों में बीमारी और मृत्यु का प्रकोप सबसे अधिक रहता है।

★ डॉक्टर ऐलियर के चिकित्सालय में ऐसे रोग भी सूर्य किरणों द्वारा ही अच्छे किए जाते हैं, जिनके लिए कि डाक्टरों के पास आपरेशन के अतिरिक्त और कोई इलाज नहीं।

★ चीन के डॉक्टर फीनसीन ने धूप की सहायता से इलाज करने में बड़ी भारी ख्याति प्राप्त की है। उनका कथन है कि जब सूर्य की किरणें बिना मूल्य अमृत बरसाती हैं, तो फिर विषैली, खर्चीली, कड़वी और कष्टसाध्य दवाओं को लोग क्यों सेवन करते हैं, यह मेरी समझ में नहीं आता।

★ प्रातःकाल की धूप अति उत्तम है। प्रातःकाल की सुनहरी धूप स्वस्थ और बीमार दोनों के लिए ही समान रूप से उपयोगी है। बीमारों को यदि सवेरे की धूप में तेज हवा से बचाते हुए स्नान कराया जाए, तो उनके लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है।

★ सूर्य की किरणों में रोगों को दूर करने की इतनी अधिक शक्ति है कि उनका वर्णन नहीं हो सकता उनसे त्वचा के छिद्र खुल जाते हैं और शरीर में संचित दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। अशुद्ध रक्त और रोग नष्ट हुए बिना नहीं रहते। सूर्य-स्नान करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सूर्य स्नान की विधि : Surya Snan ki vidhi

(1)  सूर्य-स्नान करते समय सिर को भीगे रुमाल अथवा हरे पत्तों से ढ़क लेना चाहिए।

(2)  सूर्य-स्नान का सर्वोत्तम समय सूर्योदय काल है। उस समय यदि स्नान का सुयोग न मिले तो फिर सूर्यास्त काल। तेज धूप में न बैठे। इसके लिए प्रातःकाल और सायंकाल की हल्की किरणें ही उत्तम होती हैं।

(3)  धूप-स्नान का आरम्भ सावधानी से करें। पहले दिन 15 मिनट स्नान करें। फिर रोज पाँच मिनट बढ़ाते जायं। परन्तु एक घंटे से अधिक नहीं।

(4)  जितनी देर स्नान करना हो उसके चार भाग करके पीठ के बल, पेट के बल, दाहिनी करवट और बायीं करवट से धूप लें, जिससे सारे शरीर पर धूप लग सके।

(5)  सूर्य-स्नान करते समय शरीर पर कम से कम वस्त्र रखें ताकी सूर्य किरणों का पूरा लाभ शरीर को प्राप्त हो सके ।

(6)  खुले स्थान में, जहाँ जोर की हवा न आती हो सूर्य-स्नान करें ।

(7)  भोजन करने के एक घंटे पहले और दो घंटे बाद तक सूर्यस्नान न करें।

(8)  सूर्य-स्नान करने के उपरान्त ठंडे पानी में भीगे तौलिये से शरीर का प्रत्येक अंग खूब रगड़ना आवश्यक है।

(9) सूर्य-स्नान के बाद यदि शरीर में फुर्ती, उत्साह आता जान पड़े तो ठीक है। यदि सिर में दर्द तथा अन्य किसी प्रकार का कष्ट जान पड़े तो सूर्य-स्नान का समय कुछ घटा दें।

(10) सदा नियमित रूप से स्नान करें। स्नान का पूरा लाभ रोज नियमित रूप से करने से ही प्राप्त होता है। बालक, वृद्ध, युवा, स्त्री, पुरुष सभी को सूर्य स्नान से लाभ उठाना चाहिए।

वेटिब, डब्लू आर लुकस, जानसन, रोलियर, लुइस, रडोक, टाइरल आदि अनेक डॉक्टरों और अनेक वैद्यों ने सूर्य-स्नान की बहुत-बहुत प्रशंसा की है। विदेशों में इस विषय पर नित्य नये ग्रन्थ लिखे जा रहे हैं और हमारे तो पुरातनकाल से ही प्रातः सायं और मध्याह्न संध्या का विधान है। जिसका अर्थ हैं खुले बदन पर सूर्य की बलदायक और आरोग्यप्रद किरणें पड़ने देना। बिल्कुल मुफ्त मिलने वाले सूर्य-किरणों का लाभ उठाकर हमें अपना स्वास्थ सुधारने में चूकना नहीं चाहिए।

– डॉ. श्री जटाशंकर नान्दी

2018-05-01T14:58:45+00:00 By |Health Tips|0 Comments

Leave A Comment

twelve + thirteen =