परिचय (chehre ka lakwa):

पैरालिसिस जिसे हम लकवा से भी जानते है ये बीमारी से शरीर की शक्ति कम हो जाती है उस मरीज को घुमाना -फिराना मुश्किल हो जाता है. लकवा तब होता है जब अचानक दिमाग में लोही (ब्लड) पहोचना बंध या फिर दिमाग की कोई लोही की नली फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकओं के आस पास की जगह पर खून जम जाता है.
क्या आप जानते है की लकवा किस-किस को हो सकता है किसी को भी ये बीमारी हो सकती है परंतु जयादा इस रोग आदमिमे दिखाई देता है और ५५ साल की उम्र में ये बीमारी ज्यादा नजर में आती है यह आधे चेहरे पर ही अपना असर दिखाती है . लेकिन तुरंत इलाज के द्वारा इस बीमारी से बच सकते है

पक्षाघात (लकवा) होने पर अगर उसका असर सिर्फ चेहरे की मांसपेशियों तक ही रहे उसे चेहरे का लकवा कहते हैं। चेहरे की सारी मांसपेशियां एक ही ओर खिंच सी जाती हैं। इसकी वजह से मुंह से सीटी भी नहीं बजा सकते हैं और अगर मुंह से फूंक भी मारते हैं तो हवा सीधी तरफ न जाकर बायीं तरफ से या दांयी तरफ से निकल जाती है। पलकों पर अपना काबू नहीं रहता जिसकी वजह से वह लटकने लगती है।.janiye paralysis treatment hindi me.

लकवा के कारण(paralysis Cause)

★ ज्यादातर मरीजों को धमनियों में खराबी की वजह से इस बीमारी का शिकार होते है .
★ या फिर मस्तिष्क की कोई रक्त वहिका फैट जाती है , जिसके कारन रक्त सही तरीके से शरीर के अंगो तक नहीं पहुंच पता है .
★ मस्तिष्क में अचानक रक्तस्त्राव होना जिसके कारन मरीज के हाथ पैर चलना बंद कर देते है .
★ आमतौर पर कई मामलो में देखा गया है की , उच्च तोर पर ब्रेन टूमओर से पीड़ित लोगो को भी ये बीमारी की संभावना रहती है.
★ पैरालिसिस शरीर के किसी भी भाग या मस्तिष्क में कैंसर होने के कारन भी लोग इस परेशानी से ग्रसित हो जाते है .जयादा यह रोग आदमि मे दिखाई देता है.

विभिन्न औषधियों से उपचार-(paralysis treatment in hindi )

1. एरण्ड : 10 से 20 मिलीलीटर एरण्ड के तेल को पकाकर गर्म दूध में मिलाकर सुबह और शाम रोगी को दें अगर रोगी को पैखाना (टट्टी, दस्त) साफ आने लगे तो सिर्फ एक बार दें। इसके सेवन करने से पक्षाघात, चेहरे का लकवा ठीक हो जाता है। यह शरीर में शक्ति पैदा करता है।

2. अमलतास : 10 से 20 मिलीलीटर अमलतास के पत्तों का रस रोगी को सुबह और शाम पिलायें इसके साथ ही इसी रस से चेहरे की मांसपेशियों पर दिन और रात को लगातार मालिश करते रहने से जरूर लाभ होगा।

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3. सहजना : सहजना (मुनगा) के जड़ की छाल, संतरे का छिलका और जायफल का मद्यसारीय रस (एल्कोहोलिक टिंचर) 10 से 15 बूंद पानी में मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार पीने से लाभ होता है।

4. लहसुन : बायविडंग और लहसुन को पकाकर सुबह-शाम खाने से और लहसुन से बने तेल से मालिश करने से पक्षाघात (लकवा) में पूरा लाभ मिलता है।

6.छुहारा : कुछ दिनों रोज छुहारों को दूध में भिगोकर रोगी को देते रहने से लकवा ठीक होने लगता है।

7. सौंठ : सौंठ और उड़द को पानी में मिलाकर हल्का गरम करके रोगी को नित्य पिलाने से लकवा ठीक हो जाता है।

8. देशी घी: 1 चम्मच काली मिर्च को पीसकर उसे 3 चम्मच देशी घी में मिलाकर लेप बना लें और लकवाग्रसित अंगों पर इसकी मालिश करें.एैसा करने से लकवा ग्रस्त अंगों का रोग दूर हो जाएगा।

9.मक्खन : 6 कली लहसुन को पीसकर उसे 1 चम्मच मक्खन में मिला लें और रोज इसका सेवन करें।

10.तुलसी : तुलसी के पत्तों, दही और सेंधा नमक को अच्छे से मिलाकर उसका लेप करने से लकावा ठीक हो जाता है.

विशेष : अच्युताय हरिओम मालिश तेल का हल्के हाथ से मालिश करके गरम कपडे से सेंकने पर शीघ्र लाभ होता है।

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