पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

ॐ केवल मंत्र नहीं, अपितु औषधि भी है

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ॐ केवल मंत्र नहीं, अपितु औषधि भी है

१. ॐ क्या है ?

ॐ को सभी मंत्रों का राजा माना जाता है । सभी बीजमंत्र तथा मंत्र इसीसे उत्पन्न हुए हैं । इसे कुछ मंत्रों के पहले लगाया जाता है । यह परब्रह्म का परिचायक है ।

२. ॐ के निरंतर जप का प्रभाव

ॐ र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से संबंधित है । र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड की निर्मित हुई है । इस कारण जब कोई ॐ का जप करता है, तब अत्यधिक शक्ति निर्मित होती है ।

चेन्नई – अब्दुल खादेरको अनेक वर्षोंसे संधिवातका विकार था । उसने प्रतिदिन ३० बार ॐ का जप किया । अब वे इस पीड़ा से मुक्त है । एडविन नामक रुग्ण पीठकी हड्डीकी पीडासे त्रस्त था । उसकेद्वारा भी ॐ का जप करनेके पश्चात उसकी पीडा न्यून हो गई ।

चेन्नईके योगतज्ञ डॉ. कानिमोजीके रुग्णालयमें इस प्रकारके अनेक अन्य धर्मीय लोग ॐ का जप करते हैं ।
डॉ. कानिमोजीके मतानुसार ॐ के उच्चारणसे शरीरकी ग्रंथिमें सकारात्मक परिवर्तन होता है । अतः जिन विकारोंको अन्य औषधसे आराम नहीं होता, वे विकार ॐ के उच्चारणसे ठीक होते हैं । अतः डॉ. कानिमोजीने यह दावा किया है कि अब अनेक रुग्ण इस उपचारकी ओर आकर्षित हो रहे हैं ।

2017-02-06T13:10:26+00:00 By |Mantra Vigyan|0 Comments

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