१. ॐ क्या है ?

ॐ को सभी मंत्रों का राजा माना जाता है । सभी बीजमंत्र तथा मंत्र इसीसे उत्पन्न हुए हैं । इसे कुछ मंत्रों के पहले लगाया जाता है । यह परब्रह्म का परिचायक है ।

२. ॐ के निरंतर जप का प्रभाव

ॐ र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से संबंधित है । र्इश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड की निर्मित हुई है । इस कारण जब कोई ॐ का जप करता है, तब अत्यधिक शक्ति निर्मित होती है ।

चेन्नई – अब्दुल खादेरको अनेक वर्षोंसे संधिवातका विकार था । उसने प्रतिदिन ३० बार ॐ का जप किया । अब वे इस पीड़ा से मुक्त है । एडविन नामक रुग्ण पीठकी हड्डीकी पीडासे त्रस्त था । उसकेद्वारा भी ॐ का जप करनेके पश्चात उसकी पीडा न्यून हो गई ।

चेन्नईके योगतज्ञ डॉ. कानिमोजीके रुग्णालयमें इस प्रकारके अनेक अन्य धर्मीय लोग ॐ का जप करते हैं ।
डॉ. कानिमोजीके मतानुसार ॐ के उच्चारणसे शरीरकी ग्रंथिमें सकारात्मक परिवर्तन होता है । अतः जिन विकारोंको अन्य औषधसे आराम नहीं होता, वे विकार ॐ के उच्चारणसे ठीक होते हैं । अतः डॉ. कानिमोजीने यह दावा किया है कि अब अनेक रुग्ण इस उपचारकी ओर आकर्षित हो रहे हैं ।