रतौंधी के 41 सबसे प्रभावशाली घरेलु उपचार | Home Remedies for Night Blindness

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रतौंधी के 41 सबसे प्रभावशाली घरेलु उपचार | Home Remedies for Night Blindness

रतौंधी के कारण लक्षण व उपचार : Rataundhi ka upchar

बचपन में बच्चों को अच्छा और पौष्टिक भोजन न मिल पाने के कारण उनमें शारीरिक कमजोरी आ जाती है जिससे आंखों की रोशनी भी कम हो जाती है। बच्चों को स्कूल में ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर देखने में भी बहुत परेशानी होती है।

रतौंधी का लक्षण :

★ रतौंधी रोग (रात में न दिखाई देना) के शिकार रोगियों को दिन में साफ दिखाई देता है। लेकिन शाम होने पर धुंधला दिखाई देने लगता है।
★ अगर इस रोग की चिकित्सा में देरी की जाये तो कुछ ही समय में दिखाई देना बिल्कुल कम हो जाता है।

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रतौंधी का आयुर्वेदिक घरेलु उपचार : Rataundhi ke Ayurvedik Gharelu Nuskhe

1. पान :
• पान के पत्तों के रस की 2-2 बूंदें आंखों में डालने से आंखों की रोशनी तेज होने के साथ ही रतौंधी ठीक हो जाती है।
• पान के पत्तों के रस में शहद को मिलाकर आंखों में रोजाना 3 से 4 बार डालने से रतौंधी रोग ठीक हो जाता है।
2. आबनूस : आबनूस की लकड़ी को सिल पर पीसकर सौंफ के रस में मिलाकर (चंदन की तरह) आंखों में लगाने से रतौंधी रोग दूर हो जाता है। यह परवाल (पलकों के बाल आंखों के अंदर की होना) में भी उपयोगी होता है।
3. गाजर :
• 200 मिलीलीटर गाजर का रस रोजाना पीने से शरीर में ताकत तो बढ़ती ही है साथ में रतौंधी का रोग से भी छुटकारा मिलता है।
• रतौंधी के रोग में गाजर का रस और दूध पीने से बहुत ही लाभ होता है।
4. पानी : ठंडे पानी के अंदर डुबकी लगाकर पानी में देखने से दिन में साफ दिखने लगता है।
5. जीरा :
• जीरा, आंवला तथा कपास के पत्तों को साफ पानी के साथ पीसकर, सिर पर 21 दिनों तक लगाने से लाभ होता है।
6. दूधी : छोटी दूधी में सलाई को भिगोकर रतौंधी के रोगी की आंखों में सलाई को अच्छी प्रकार से फिरायें। इससे कुछ देर बाद आंखों में बहुत दर्द होगा जो 3 घण्टे के बाद समाप्त हो जाएगा। एक बार में ही रतौंधी (रात को दिखाई न देना) का रोग जड़ से चला जाएगा।
7. प्याज :
• प्याज के फल को दबाकर निकाले हुए रस में जरा सा लवण (नमक) मिलाकर आंखों में 2-2 बूंद करके डालने से रतौंधी के रोग में लाभ मिलता है।
• प्याज का रस आंखों में डालने से या लगाने से रतौंधी रोग धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।
8. शतावर : शतावर के मुलायम पत्तों की सब्जी घी में बनाकर कुछ सप्ताह सुबह-शाम सेवन करते रहने से यह रोग खत्म हो जाता है।
9. सौंफ : गाजर के रस में हरी सौंफ का रस मिलाकर सेवन करने से रात में दिखाई नहीं देना (रतौंधी) समाप्त होता है। इससे आंखों की ज्योति (रोशनी) भी तेज होती है।
10. बेल : बेल के पत्ते 10 ग्राम, गाय का घी 6 ग्राम और कपूर 1 ग्राम तांबे की कटोरी में इतना रगड़ें की काला सुरमा बन जाये। इसे आंखों में लगायें और सुबह गाय के पेशाब से आंखों को धो लें। इससे रतौंधी से पीड़ित रोगी को आराम मिलता है।
11. जीवन्ती : जीवन्ती (डोडी) का साग (सब्जी) घृत (घी) के साथ पकाकर खाने से रतौंधी रोग में आराम आता है।
12. सौंठ : सौंठ, कालीमिर्च या छोटी पीपर में से किसी भी एक को लेकर पीसकर और शहद में मिलाकर आंखों में लगाने से रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है।
13. अरीठा : अरीठे को पानी के साथ पीसकर रोजाना 2 से 3 बार आंखों में लगाने से रतौंधी रोग दूर हो जाता है।
14. रीठा :
• 2 रीठे के छिलके को रात को पानी में भिगोयें और सुबह पानी में ही मसलकर छान लें। इस पानी में सलाई डुबोकर दोनों आंखों में लगाने से रतौंधी रोग ठीक हो जाता है।
• रीठे का छिलका पानी के साथ पीसकर रोजाना सुबह सूरज उगने से पहले नाक में डालें।
15. इतरीफल : 10 ग्राम इतरीफल जमानी को रात को सोते समय पानी से लें।
16. बर्शाशा : दर्द होने पर 2 ग्राम बर्शाशा पानी के साथ लेने से आराम आता है।
17. मक्खन : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में जस्ता की भस्म (राख) मक्खन, मलाई या शहद के साथ सुबह और शाम को दें। इसे आंखों में लगाने से पैत्तिक, गर्मी के कारण उत्पन्न हुआ रतौंधी रोग दूर होता है।
18. खमीरा : लगभग 3 से 6 ग्राम खमीरे गावजवार (अम्बरी) को रोजाना 2 से 3 बार गाय के दूध के साथ अथवा 10 ग्राम खमीरे गावजवान और चंदी के वर्क को मिलाकर, 120-120 मिलीलीटर गावजवान रस के साथ या ताजे पानी के साथ सुबह और शाम दिया जाए तो हृदय (दिल) से पैदा हुई बीमारी दूर होती है और दिमागी बीमारी दूर होने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है।
19. करेला : करेले के पत्तों के रस में कालीमिर्च को पीसकर आंखों में लगाने से 3 से 4 दिनों में ही रतौंधी रोग दूर होता है।
20. त्रिफला : त्रिफला के पानी से रोजाना सुबह-शाम आंखों और सिर को अच्छी तरह से धोना चाहिए।
21. केला : केले के पत्तों के रस को आंखों में लगाने से रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है।
22. लौंग : लौंग को बकरी के मूत्र में घिसकर आंखों पर लगाने से रतौंधी में लाभ होता है।
23. शहद :
• शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंखों में सुबह के समय तथा रात को सोते समय लगाने से रतौंधी में आराम मिलता है।
• शहद को आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग समाप्त होता है। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
24. दही : दही के पानी में कालीमिर्च को पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से इस रोग में आराम आता है।
25. अदरक : अदरक और प्याज के रस को मिलाकर सलाई से दिन में 3 बार आंखों में डालने से रतौंधी का रोग दूर हो जाता है।
26. कसौंदी : कसौंदी के फूल को पानी के साथ पीसकर रोजाना दिन में 3 बार आंखों में काजल की तरह लगाएं।
27. तम्बाकू : देशी तम्बाकू के सूखे पत्तों को पीसकर कपड़े में छानकर सलाई से सुबह और शाम को आंखों में लगाने से रतौंधी में आराम मिलता है।
28. आम : रोजाना सुबह-शाम पके हुए आमों को खाने से या उसका रस पीने से शरीर में विटामिन `ए´ की कमी पूरी हो जाती है और रतौंधी में आराम मिलता है।
29. टमाटर :
• टमाटर खाने से रतौंधी और अल्पदृष्टि (आंखों से कम दिखाई देना) में लाभ होता है।
• 200 ग्राम टमाटर रोज खाने से रतौंधी की बीमारी में बहुत आराम आता है।
• रोजाना टमाटर काटकर उस पर कालीमिर्च का चूर्ण और सेंधानमक छिड़ककर बच्चों को खिलाने से रतौंधी की बीमारी समाप्त हो जाती है।
30. ग्वारफली :
• ग्वारफली के मुलायम पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से रतौंधी का रोग समाप्त हो जाता है।
• ग्वारफली की सब्जी खाना रतौंधी के रोग में लाभ मिलता है। ग्वार के पत्तों के साग (सब्जी) से भी रतौंधी रोग दूर होता है।
31. धनिया :
• सब्जियों में हरा धनिया डालकर बच्चों को खिलाने से रतौंधी रोग कम हो जाता है।
• हरे धनिये की पत्तियों की चटनी को थोड़ा ज्यादा मात्रा में रोजाना भोजन के साथ खाने से रतौंधी का रोग समाप्त हो जाता है। इस चटनी को दाल, कढ़ी, साग (सब्जी) और रायते में मिलाकर भी खाया जा सकता है।
32. अपामार्ग (चिरचिटा) :
• अपामार्ग (चिरचिटा) की जड़ को छाया में सुखाकर और फिर उसका चूर्ण बनाकर 5 ग्राम की मात्रा में रात को पानी के साथ खाने से 4-5 दिनों में ही रतौंधी रोग में आराम आने लगता है।
• 10 ग्राम अपामार्ग की जड़ को शाम के समय भोजन करने के बाद रोजाना चबाकर सो जाने से 2 से 4 दिनों के बाद ही रतौंधी रोग समाप्त हो जाता है।
• अपामार्ग (चिरचिटा) की जड़ को गाय के पेशाब में घिसकर आंखों में लगाने से रतौंधी (रात में दिखाई न देना) में आराम मिलता है।
33. आंवला :
• आंवले का चूर्ण और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना 10 ग्राम पानी के साथ लेने से आंखों से धुंधला दिखाई देने का रोग ठीक हो जाता है।
• 8 ग्राम आंवला और 1 ग्राम सेंधानमक को किसी कांच के बर्तन में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को 2-3 दिन बाद सलाई से आंखों में लगाने से रतौंधी रोग नष्ट हो जाता है।
34. मुलहठी : 3 ग्राम मुलहठी, 8 मिलीलीटर आंवले का रस और 3 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को एक साथ मिलाकर रोजाना सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ जाती है।
35. घास : रोजाना सुबह सूरज निकलने से पहले गीली घास पर नंगे पैर चलने से आंखों की रोशनी तेज होती है।
36. कालीमिर्च :
लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में कालीमिर्च, कमीला और पीपल को बारीक पीसकर कपड़े से छानकर सलाई की सहायता से दिन में 3 बार आंखों में लगाने से रतौंधी में लाभ होता है।
• कालीमिर्च को दही के साथ पीसकर आंखों में लगाने से रतौंधी ठीक हो जाती है।
• रोजाना कालीमिर्च के 5 दाने घी के साथ सेवन करने से रतौंधी में लाभ होता है।
• कालीमिर्च को पीसकर दही में मिलाकर आंखों में लगाने से रतौंधी रोग और आंखों की खुजली वाले रोग कम होते हैं।
37. नौसादर : 1 ग्राम नौसादर को 3 ग्राम असली सिंदूर में अच्छी तरह मिलाकर शीशी में भरकर शहद में मिलाकर सलाई से आंखों पर लगाने से रतौंधी की बीमारी समाप्त हो जाती है।
38. तुलसी :
• तुलसी के पत्तों को पीसकर किसी कपड़े में बांधकर उसका रस निकाल लें। इस रस को रोजाना आंखों में 1-1 बूंद करके डालने से रतौंधी (रात में दिखाई न देना) रोग जल्दी समाप्त हो जाता है।
• तुलसी के रस की 2-2 बूंद आंखों में डालने से रतौंधी में लाभ मिलता है।
39. अनार : अनार के रस को निकालकर किसी साफ कपड़े से छानकर 2-2 बूंद आंखों में डालने से 2 से 3 हफ्तों में ही रतौंधी रोग कम होने लगता है।
40. असली शहद : असली शहद को सलाई से आंखों में लगाने पर रतौंधी की बीमारी में आराम आता है।
41. सिरस :
• सिरस के पत्तों का रस आंखों में 1 से 2 बूंद डालने और इसके 30 से 60 मिलीलीटर पत्तों का काढ़ा सुबह-शाम पीने से रतौंधी में लाभ मिलता है।
• रतौंधी के रोग में सिरस का पानी आंखों में लगाने से भी आराम आता है।

विशेष : अच्युताय हरिओम नेत्र बिंदु की 2-2 बूंद सुबह-शाम आंखों में डालने से रतौंधी में लाभ मिलता है।
प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

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