पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

मनुष्य की प्रकृति नही मासाहार के अनुकूल

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मनुष्य की प्रकृति नही मासाहार के अनुकूल

मनुष्य की प्रकृति नही मासाहार के अनुकूल

आप किसी भी शाकाहारी की दांतों की बनावट देख लें , एक जैसी है . जैसे – मनुष्य, बकरी, गाय आदि
ओर किसी भी मांसाहारी की देखे , एक जैसी है . जैसे – कुत्ता , शेर आदि

अधिक जानकारी के लिये

herbivore teeth vs carnivore teeth गूगले पर देखें ओर विचार करें.

इस सृष्टि में शाकाहारी व मांसाहारी जीवों की अनेक जातियां हैं और बहुत छोटे से लेकर बहुत बड़े आकार तक के विभिन्न प्रकार के जीव हैं, किन्तु सभी शाकाहारी जीवों की शरीर रचना, हाथ, पांव, दांत, आंतों आदि की बनावट व उनकी देखने सूंघने की शक्ति व खाने पीने का ढंग मांसाहारी जीवों से भिन्न है । जैसे-
1.मांसाहारी जीवों के दांत नुकीले व पंजे तेज नाखून वाले होते हैं जिससे यह आसानी से अपने शिकार को चीर फाड़ कर खा सकें ।

शाकाहारी जीवों के दांत चपटी दाढ़ वाले होते हैं, पंजे तेज नाखून वाले नहीं होते जो चीर फाड़ कर सकें अपितु फल आदि आसानी से तोड़ सकने वाले होते हैं ।

2.मांसाहारी जीवों के निचले जबड़े केवल ऊपर नीचे ही हिलते हैं और वे अपना भोजन बगैर चबाए ही निगलते हैं ।

शाकाहारी जीवों के निचले जबड़े ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं सब ओर हिल सकते हैं और ये अपना भोजन चबाने के बाद निगलते हैं ।

3.मांसाहारी प्राणियों की जीभ खुरदरी होती है, ये जीभ बाहर निकाल कर उससे पानी पीते हैं ।

शाकाहारियों की जीभ चिकनी होती है, ये पानी पीने के लिए जीभ बाहर नहीं निकालते अपितु होठों से पीते हैं ।

4.मांसाहारी जीवों की आंतों की लम्बाई कम, करीब करीब उनके शरीर की लम्बाई के बराबर और धड़ की लम्बाई से 6 गुनी होती है । आंते छोटी होने के कारण वे मांस के सड़ने व विषाक्त होने से पहले ही उसे शरीर से बाहर फेंक देती हैं ।

शाकाहारी जीवों की आंतों की लम्बाई अधिक, करीब करीब इनके शरीर की लम्बाई से चार गुनी व धड़ की लम्बाई से 12 गुनी होती है, इस कारण वे मांस को जल्दी बाहर नहीं फेंक पातीं ।

5.मांसाहारी जीवों के जिगर (Lever) व गुर्दे (Kidney) भी अनुपात में बड़े होते हैं ताकि मांस का व्यर्थ मादा आसानी से बाहर निकल सके ।

शाकाहारी जीवों के जिगर (Lever) व गुर्दे (Kidney) में छोटे होते हैं और मांस के व्यर्थ मादे को आसानी से बाहर नहीं निकाल पाते।

6.मांसाहारी जीवों के पाचक अंगों में मनुष्य के पाचक अंगों की अपेक्षा दस गुना अधिक हाइड़ोक्लोरिक एसिड होता है जो मांस को आसानी से पचा देता है।

शाकाहारी जीवों के पाचक अंगों में हाइड्रोक्लोरिक एसिड कम होता है व मांस को आसानी से नहीं पचा पाता।

7.मांसाहारी जीवों की (Saliva) लार अप्लीय (Acidic) होती है।

शाकाहारी जीवों की लार क्षारीय (Alkaline) होती है व उनकी लार में (Ptyaline) टायलिन रसायन जो कार्बोहाइड्रेटस को पचाने में उपयोगी होता है, पाया जाता है।

8.मांसाहारी जीवों का Blood-PH (खून की एक रसायनिक स्थिति) कम होता है यानि उसका झुकाव अप्लीय (Acidic side) होता है।

शाकाहारी जीवों का Blood-PH अधिक होता है यानि उसका झुकाव क्षारीय ओर (AIKaline side) को होता है।

9.मांसाहारी जीवों के Blood Lipo-Protiens अलग किस्म के होते हैं।

शाकाहारी पशुओं व मनुष्य के Blood Lipo-Protiens एक से होते हैं व मांसाहारी जीवों से भिन्न होते हैं।

10.मांसाहारी जीवों की सूंघने की शक्ति अत्यन्त तीव्र होती है, आँखें रात्रि में चमकती हैं व रात मे भी दिन की प्रकार देख पाती हैं। ये शक्तियां उसे शिकार करने में सहायक होती हैं।

शाकाहारी जीवों में सूंघने की शक्ति उतनी तीव्र नहीं होती व रात में भी दिन की भांति देखने की शक्ति नहीं होती।

11.मांसाहारी जीवों के शब्द कर्कश व भयंकर होते हैं।

शाकाहारी जीवों के शब्द कर्कश नहीं होते।

12.मांसाहारी जीवों के बच्चे जन्म के बाद एक सप्ताह तक प्राय: दृष्टि शून्य होते हैं।

शाकाहारी जीवो के बच्चे प्रारम्भ से ही दृष्टि वाले होते हैं।
उपरोक्त तथ्यों से यह पता लगता हैं -कि प्रकृति ने मनुष्य की बनावट शाकाहारी

2017-02-13T18:00:18+00:00 By |Ahar-vihar, Articles|0 Comments

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