हाइड्रोसील के कारण,लक्षण व 10 सबसे प्रभावशाली घरेलु उपचार | Hydrocele ka safal ilaj

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हाइड्रोसील के कारण,लक्षण व 10 सबसे प्रभावशाली घरेलु उपचार | Hydrocele ka safal ilaj

हाइड्रोसिल का इलाज : Hydrocele Treatment in Hindi

पुरुषों का वह रोग जिसमें एक या दोनों अंडकोषों testes में पानी भर जाता है उसे हाइड्रोसील कहते हैं। हाइड्रोसील (Hydrocele) में अंडकोष में पानी भर fluid accumulation जाने से यह एक थैली की तरह फूल जाते हैं। यह एक साइड या दोनों साइड हो सकता है।

हाइड्रोसील के कारण क्या है ? : Hydrocele ka karan

★ शिशुओं में Congenital Hydrocele यह आमतौर पर तब होता है जब वह चैनल जिसके माध्यम से अंडकोष पेट से नीचे उतरते हैं, ठीक तरह से बंद नहीं हो जाता है या पुन: खुल जाता है। इस कारण पेट से अंडकोश की थैली में तरल उतरता रहता है जिससे हाइड्रोसील हो जाता है।

★ वयस्कों में अंडकोश की सूजन या चोट के कारण हाइड्रोसील हो सकता हैं। यह सूजन, एक संक्रमण (एपिडीडिमिसिस) के कारण भी हो सकती है।

हाइड्रोसील के क्या लक्षण है : Hydrocele ke lakshan

१. हाइड्रोसील के लक्षण ( Symptoms of Hydrocele)
२. अंडकोषों का सूजन जाना
३. वृषण में पानी भर जाना जिससे यह पानी से भरे गुब्बारे जैसे दिखने लगे।
आइये जाने hydrocele treatment without operation in hindi

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हाइड्रोसील के आयुर्वेदिक घरेलु उपचार : Hydrocele ka Ayurvedic Gharelu ilaj

1•     5 ग्राम काली मिर्च और 10 ग्राम जीरा लें और उन्हें अच्छी तरह पीस लें. इसमें आप थोडा सरसों या जैतून का तेल मिलाएं और इसे गर्म कर लें। इसके बाद इसमें थोडा गर्म पानी मिलाकर इसका पतला घोल बना लें और इसे बढे हुए अंडकोषों पर लगायें। इस उपाय को सुबह शाम 3 से 4 दिन तक इस्तेमाल करें आपको जरुर लाभ मिलेगा।
2•      रोगी 25 मिलीलीटर पानी को पीतल के गिलास या पिली बोतल में सूरज की रोशनी में गर्म करें और उस पानी का दिन में 4 से 5 बार ग्रहण करना चाहियें। जलतप्त पानी पीने के 1 घंटे बाद रोगी अपने अंडकोष पर लाल प्रकाश डालें और अगले 2 घंटे बाद नीला प्रकाश डालें. इस प्रक्रिया को अपनाने से भी रोगी को हाइड्रोसील से जल्द ही आराम मिलता है।
3•      हाइड्रोसील की वृद्धि रोकने के लिए अंडकोष को बांधकर रखे। उन्हें लटकने न दे और कूदते-फांदते समय कभी भी ढीला ना छोड़े।
4•      दो रत्ती फूला हुआ सुहागा गुड के साथ प्राप्त:काल तीन-चार दिन लेने से अंडकोष की सूजन में आराम मिलता है।
5•      हल्दी को पानी में पीसकर अंडकोष पर लेप कर दे सूजन खत्म हो जाएगी।
6•      अंडकोष की वृद्धि में, वचा को सरसों के पानी द्वारा सिल पर पीस ले और अंडकोष पर लेप कर दें इससे अंडकोष का आकार सामान्य हो जाएगा।
7•      अंडकोषों में पानी भर जाने पर रोगी 10 ग्राम काटेरी की जड़ को सुखाकर उसे पीस लें। फिर उसके पाउडर / चूर्ण में 7 ग्राम की मात्रा में पीसी हुई काली मिर्च डालें और उसे पानी के साथ ग्रहण करें। इस उपाय को नियमित रूप से 7 दिन तक अपनाएँ। ये हाइड्रोसील का रामबाण इलाज माना जाता है क्योकि इससे ये रोग जड़ से खत्म हो जाता है और दोबारा अंडकोषों में पानी नही भरता।
8•     hydrocele ka homeopathic medicine: हाइड्रोसील की सूजन वृद्धि या अन्य विकार रोकने के लिए होम्योपैथी की कुछ दवाइयां भी अत्यंत कार्य करती है- ‘स्पंजिया’ अंडकोष के कड़ेपन और सूजन के लिए उत्तम है। ‘बेलाडोना’ अंडकोष की सूजन एवं गर्मी के लिए लाभदायक है। ‘कल्केरिया कार्ब’ अंडकोष वृद्धि की सर्वश्रेष्ठ दवा है।
9•      सूर्यतप्त जल ( Make Water Warm Under Sunrays ) : रोगी 25 मिलीलीटर पानी को पीतल के गिलास या पिली बोतल में सूरज की रोशनी में गर्म करें और उस पानी का दिन में 4 से 5 बार ग्रहण करना चाहियें. जलतप्त पानी पीने के 1 घंटे बाद रोगी अपने अंडकोष पर लाल प्रकाश डालें और अगले 2 घंटे बाद नीला प्रकाश डालें. इस प्रक्रिया को अपनाने से भी रोगी को हाइड्रोसील से जल्द ही आराम मिलता है.
10•      20 ग्राम माजूफल और 5 ग्राम फिटकरी को पीसकर उनका लेप तैयार करें. और उसे सूजे हुए अंडकोषों पर लगायें. जल्द ही उनका पानी सुख जायेगा.

हाइड्रोसील के लिए उपलब्ध उपचार क्या है ? : Hydrocele ka Upchar

प्रायः हाइड्रोसील खतरनाक नहीं होते पर फिर भी इसमें सर्जरी(hydrocele ke operation) की आवश्यकता हो सकती है। यदि हाइड्रोसील का परिमाण इतना बढ़ गया हो जिससे तकलीफ होती हो तो सर्जरी की जरूरत होती है। हाइड्रोसील के कारण रक्‍त संचार में समस्‍या हो सकती है। ऐसे में सर्जरी से इसका उपचार किया जाता है। यदि द्रव साफ हो या कोई इन्फेक्शन या रक्त का रिसाव हो तो इसके निकास के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

एस्‍पीरेशन के जरिये :- इस प्रक्रिया को सूची वेधन भी कहते हैं, इससे अंडकोष में जमा पानी को निकाला जाता है। एस्पिरेशन करने के बाद छिद्र बन्द करने के लिए स्क्लिरोजिंग औषधि को इंजेक्ट करते हैं। ऐसा करने से भविष्य में भी पानी जमा नहीं होता और हाइड्रोसील की शिकायत दोबारा होने की संभावना भी कम होती है। वैसे तो अंडकोष से पानी निकालने के लिए सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है पर जो सर्जरी का खतरा नही उठाना चाहते उनके लिए यह अच्‍छा तरीका है।

हाइड्रोसीलोक्टोमी:- हाइड्रोसील इंग्वाइनल हार्निया होने पर इसे सर्जरी द्वारा शीघ्रातिशीघ्र ठीक किया जाना आवश्यक है। क्योंकि इस तरह का हाइड्रोसील महीनों और सालों तक स्वतः समाप्त नहीं होता। प्रायः हाइड्रोसिलोक्टोमी नामक सर्जरी से हाइड्रोसील ठीक किया जाता है।