Last Updated on February 7, 2025 by admin
यह ‘दुनिया बहुत निष्ठुर है, इसलिए अगर आपमें ये 12 खासियतें हैं? तो समझिए आप सामान्य नहीं, असाधारण बुद्धि के स्वामी हैं , और ये गुण आपको किसी के भी झाँसे में आने से बचाएंगे और आपको जीवन में हमेशा एक कदम आगे रखेंगे। अगर ये लक्षण अभी नहीं भी हैं, तो चिंता न करें आप भी इन्हें अपनी आदतों में शामिल करके असाधारण बुद्धि के स्वामी बन सकते हैं।
बस 13 मिनट दीजिए, और इस लेख के अंत तक आपकी सोच में एक जादुई ट्रांसफॉर्मेशन हो जाएगा। ये 13 मिनट आपके लिए एक मेंटल वर्कआउट की तरह होंगे, जो आपकी सोच को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
आज हम उन 12 बातों को जानेंगे जो हर बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान हैं। ये न सिर्फ आपको मुश्किलों में स्थिर रखेंगी, बल्कि आपकी सोच को भी निखारेंगी।
एक समय की बात है, एक गुरु अपने आश्रम में शिष्यों को जीवन का एक गहरा सबक सिखा रहे थे। उन्होंने कहा, ‘बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो जीवन के हर तूफान में अपनी नाव को संभाल लेता है। चाहे समुद्र कितना भी उग्र क्यों न हो, वह डगमगाता नहीं। वहीं, एक मूर्ख व्यक्ति छोटी सी लहर में भी डूब जाता है और हार मान लेता है।’ गुरु ने आगे समझाया, ‘ये दुनिया एक जंगल की तरह है। अगर आप बुद्धिमान हैं, तो आप वनराज सिंह की तरह इस जंगल में निर्भय होकर विचरण करेंगे। लेकिन अगर आप मूर्ख हैं, तो यह जंगल आपको अपना शिकार बना लेगा।’
श्री कृष्ण ने यह भी कहा है कि बुद्धिमान बनना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि जीवन की जरूरत है। इसीलिए हमें बुद्धिमान बनने का प्रयास करना चाहिए । यह दुनिया बुद्धिहीन लोगों का फायदा उठाने में माहिर है। अगर आप बुद्धिमान नहीं बनेंगे, तो यह दुनिया आपको पीछे धकेल देगी। सुंदरता, धन, या ताकत किसी काम की नहीं, अगर उन्हें संभालने की समझ न हो। जो लोग इन 12 गुणों को अपनाते हैं, वे न सिर्फ अपने जीवन में ऊँचाइयाँ छूते हैं, बल्कि दूसरों के लिए एक आदर्श बन जाते हैं।
तभी एक शिष्य खड़ा हुआ और पूछा, ‘गुरुदेव, हम कैसे जानें कि हम बुद्धिमान हैं या मूर्ख?’ गुरु मुस्कुराए और बोले, ‘बेटा, आज मैं तुम्हें बुद्धिमान लोगों के 12 गुण बताऊंगा। अगर ये गुण तुममें हैं, तो तुम पहले से ही समझदार हो। और अगर नहीं हैं, तो आज से ही इन्हें विकसित करना शुरू करें—क्योंकि यह संसार उन्हीं का सम्मान करता है, जो अपनी मेधा से उसे चकित कर देते हैं।
हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने का स्वभाव :
गुरु ने शिष्यों को पहला लक्षण बताते हुए कहा, “बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान यह है कि वह हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहता है। सीखने की ललक ही इंसान को असाधारण बनाती है। ज्ञान की भूख जितनी बढ़ेगी, सफलता आपके उतनी ही नजदीक आती जाएगी। बुद्धिमान वह नहीं जो सब जानता है, बल्कि वह है जो हमेशा कुछ नया सीखने को तैयार रहता है। ये दुनिया एक विशाल पुस्तकालय की तरह है, जहाँ हर कदम पर सीखने के लिए कुछ न कुछ नया मिलता है। और जो लोग सीखने की इस आदत को अपना लेते हैं, वे कभी हारते नहीं। क्योंकि जीवन में सीखी गई हर छोटी-बड़ी बात कभी न कभी काम आती है। ये ऐसे ही है जैसे आप एक टूलकिट बना रहे हैं, जिसमें हर नया स्किल एक नया औजार है। और जब जरूरत पड़ेगी, ये औजार आपकी मुश्किलें आसान कर देंगे। सीखना एक यात्रा है, जिसे रोक दिया तो मंजिल भी वहीं रुक जाएगी।”
गुरु ने आगे समझाया, “सीखने की ललक ही इंसान को असाधारण बुद्धिमान बनाती है। हर दिन कुछ नया सीखना, खुद को हर दिन नया बनाने जैसा है। सीखने के लिए स्कूल या गुरुकुल ही एकमात्र जगह नहीं है। ये पूरी दुनिया ही आपकी पाठशाला है। आप एक छोटे बच्चे से भी धैर्य सीख सकते हैं, एक पेड़ से स्थिरता सीख सकते हैं, और एक गरीब से संघर्ष की ताकत सीख सकते हैं। सफल लोग आपको बताएंगे कि सफलता का रास्ता क्या है, और असफल लोग आपको सिखाएंगे कि किन गलतियों से बचना है। असल में, हर इंसान, हर चीज, और हर अनुभव आपके लिए एक नया पाठ लेकर आता है। बस आपकी नजर सीखने वाली होनी चाहिए।”
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा, “मान लीजिए, आप एक ऐसे व्यक्ति से मिलते हैं जिसने करोड़ों कमाए हैं। उससे पूछिए कि उसने ये मुकाम कैसे हासिल किया? उसकी आदतें, उसकी मेहनत, और उसकी सोच क्या थी? वहीं दूसरी ओर, एक ऐसा व्यक्ति जो असफल हो गया, उससे सीखिए कि उसने कौन-सी गलतियां कीं, ताकि आप उन्हें दोहराएं नहीं। याद रखिए, जीवन इतना लंबा नहीं है कि आप हर गलती खुद करके सीखें। दूसरों के अनुभव से सीखना ही समझदारी है।”
समय का मूल्य समझना :
फिर गुरु जी ने दूसरा सूत्र बताते हुए कहा, “बुद्धिमान लोग समय को अपना सबसे बड़ा साथी मानते हैं। जो इंसान समय को समझ गया और उसके अनुसार खुद को ढाल लिया, समझो उसने जीवन जीने का असली राज पा लिया। समय और अवसर दोनों कभी किसी के लिए नहीं रुकते, जो एक बार हाथ से फिसल गये तो फिर कभी वापस नहीं आते। जो समय की कीमत समझता है, वही जीवन की कीमत समझता है। समय को संभाल लो, जीवन खुद-ब-खुद सवर जाएगा।
यह पैसे, ताकत या किसी भी चीज से ज्यादा कीमती है, क्योंकि अगर समय साथ न दे तो बाकी सब बेकार है। हर किसी को जीवन में 24 घंटे का ही समय मिलता है, लेकिन सफल वही होता है जो इन घंटों को सही तरीके से इस्तेमाल करता है। जीवन का असली खजाना धन नहीं, बल्कि सही समय पर किया गया सही प्रयास है।”
गुरु जी आगे समझाते हैं, “बुद्धिमान लोग कुछ अलग काम नहीं करते, बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं। वे अपने समय के हर पल को महत्व देते हैं और उसे सही कामों में लगाते हैं। असफलता का सबसे बड़ा कारण है समय पर सही कदम न उठाना। अगर तुम भी जीवन में कुछ बड़ा करना चाहते हो, तो पहले अपना लक्ष्य तय करो और फिर समय को अपना हथियार बनाकर उस दिशा में आगे बढ़ो। समय और जीवन का रिश्ता सांसों जैसा है—एक भी व्यर्थ गई तो नुकसान तय है।”
गुरु जी ने आगे कहा, “समय किसी के लिए नहीं रुकता, न राजा के लिए, न भिखारी के लिए। यह बिना रुके अपनी गति से चलता रहता है। हमें भी इसकी रफ्तार के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए। समय को बर्बाद करना जीवन को बर्बाद करने जैसा है। इसलिए, हर पल को जिए और उसे सही तरीके से इस्तेमाल करें। समय ही सफलता की कुंजी है, लेकिन यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इस कुंजी को कैसे इस्तेमाल करते हो।
एकांत सेवन करना :
फिर गुरुजी तीसरा लक्षण बताते हुए कहते हैं, “बुद्धिमान लोग अकेले रहना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि अकेले रहना, मूर्ख और नकारात्मक लोगों के बीच रहने से हर हाल में बेहतर है। जो खुद के साथ खुश रहना सीख जाता है, वह दुनिया की किसी भी भीड़ में खोता नहीं है। अकेलापन कमजोरों को तोड़ता है, लेकिन बुद्धिमानों को निखारता है।
अकेले रहने वाले लोगों में एक अलग ही तरह की खासियत होती है। देखो बच्चों, हर इंसान में कुछ न कुछ खूबियां जरूर होती हैं, लेकिन उन खूबियों का पता तभी चलता है, जब हम अकेले में रहकर अपने साथ समय बिताते हैं। एकांत में विचारों की गूंज सुनाई देती है, जो जीवन को नई दिशा देती है। शांति और एकांत में ही आत्मचिंतन का बीज अंकुरित होता है।
जो लोग हमेशा दूसरों के बीच फंसे रहते हैं, उन्हें अपनी खूबियों का पता ही नहीं चल पाता, क्योंकि वे दूसरों को देखकर उनके जैसा बनने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन जो व्यक्ति अकेला रहता है, वह किसी से प्रभावित नहीं होता। वह वही करता है जो उसे अपने विवेक से सही लगता है। जो अकेले रहने की कला सीख जाता है, वह जीवन में किसी पर निर्भर नहीं रहता। सबसे गहरी बातें शोर में नहीं, बल्कि एकांत में समझ आती हैं। शांति और सफलता उन्हीं के पास आती है, जो एकांत में खुद को खोजने का साहस रखते हैं।”
गुरुजी आगे कहते हैं, “जब हम किसी से कुछ पूछते हैं, तो हमारे सामने कई तरह की बातें आती हैं। उन बातों को सुनकर कभी-कभी हमारे अंदर नकारात्मकता भी घर कर जाती है। जैसे, ‘इसमें तो यह खूबी है, यह मेरे अंदर क्यों नहीं है?’, ‘इसने तो ऐसा कर दिया, यह मेरे से क्यों नहीं हो रहा?’ और यही सोचकर हमारा मन दुखी होता रहता है। वहीं, अकेला इंसान खुश रहता है, क्योंकि उसके फैसले सिर्फ उसके अपने होते हैं। उसे कोई यह नहीं बताता कि उसे क्या करना चाहिए या क्या नहीं। वह अपने अनुभव और विवेक की सुनता है और उसी के अनुसार आगे बढ़ता है। “
“अकेले रहने वाला व्यक्ति अपने बारे में गहराई से जान पाता है। वह अपने काम को बेहतर तरीके से कर पाता है, क्योंकि उसके आसपास कोई ऐसा नहीं होता जो उसे भटकाए। वह किसी पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने सभी काम खुद ही करता है। इससे उसके सभी काम समय पर पूरे हो जाते हैं। उसे यह अच्छे से पता होता है कि यह दुनिया स्वार्थी है। अगर हम किसी से थोड़ी सी भी मदद लें, तो सामने वाला व्यक्ति उसे हमेशा याद दिलाता रहता है। इसीलिए अकेले रहने वाले लोग किसी का अहसान नहीं लेते। वे अपने बल पर आगे बढ़ते हैं और अपनी राह खुद बनाते हैं।”
कम बोलना :
गुरु जी चौथे लक्षण की चर्चा करते हुए एक बहुत ही दिलचस्प बात कहते हैं। वे बताते हैं कि बुद्धिमान लोग कम बोलते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे चुप रहते हैं। बल्कि, वे केवल उतना ही बोलते हैं जितना जरूरी हो। उनकी यह आदत उन्हें औरों से अलग बनाती है। बुद्धिमान लोग ज्यादा सुनते हैं और कम बोलते हैं। वे सामने वाले की बात को ध्यान से सुनते हैं, उसे समझते हैं, और फिर उसी के अनुसार जवाब देते हैं। यह उनकी समझदारी का प्रतीक है। जब हम ध्यान से सुनते हैं, तो हमें नई चीजें सीखने को मिलती हैं। हर बात पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं, कभी-कभी सिर्फ सुनना ही सबसे अच्छा उत्तर होता है।
इसके विपरीत, मूर्ख लोग बिना सोचे-समझे बकबक करते रहते हैं। उन्हें सुनने से ज्यादा अपनी बात सुनाने में मजा आता है। ऐसे लोग कभी कुछ नया सीख नहीं पाते क्योंकि वे दूसरों की बातों पर ध्यान ही नहीं देते।
बुद्धिमान लोग शब्दों की बर्बादी नहीं करते, वे केवल सार्थक बातें कहते हैं। और कभी बेकार की बहस में नहीं पड़ते। अगर उसे कोई बात पसंद नहीं आती, तो वह चुपचाप वहां से हट जाते है। वहीं, एक मूर्ख व्यक्ति बहस को और बढ़ा देता है और अक्सर ऐसा कुछ बोल जाता है जो उसे नहीं बोलना चाहिए था। यही बात बाद में उसके लिए मुसीबत का कारण बन जाती है।
बुद्धिमान लोग अपनी बात को कम शब्दों में पूरा कर देते हैं। वे इतने सटीक और प्रभावशाली ढंग से बोलते हैं कि सामने वाला उनकी बातों को गंभीरता से सुनता है। वहीं, मूर्ख लोग एक ही बात को बार-बार दोहराते रहते हैं, जिससे लोग उनकी बातों से ऊब जाते हैं और उन्हें नजरअंदाज करने लगते हैं।
शब्द एक ऐसा हथियार है जिससे हम दूसरों के दिल जीत सकते हैं। बुद्धिमान लोग इस हथियार का इस्तेमाल बहुत ही कुशलता से करते हैं। वे अपने शब्दों से लोगों को प्रभावित करते हैं और उनका दिल जीत लेते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। बुद्धिमान व्यक्ति की बातों में वजन होता है, जबकि मूर्ख व्यक्ति की बातें केवल शोर मचाती हैं।
जीवन के राज को गोपनीय रखना :
गुरु ने शिष्यों को पाँचवा लक्षण समझाते हुए कहा, “बुद्धिमान व्यक्ति अपने जीवन के राज किसी से साझा नहीं करता। वह जानता है कि आज का दोस्त कल दुश्मन बन सकता है। इसलिए वह अपनी कमजोरियां, अपने परिवार के रहस्य, और अपने निजी विचार किसी के सामने नहीं उजागर करता। समझदार व्यक्ति अपने रहस्यों को अपनी परछाई से भी छुपाकर रखता है।
वहीं, मूर्ख लोग हर छोटी-बड़ी बात दूसरों को बता देते हैं। फिर जब बुरा वक्त आता है, तो वे धोखा खाते हैं और दूसरों को दोष देने लगते हैं। लेकिन असल में, वे खुद ही अपने रहस्यों को बेच देते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति समझता है कि ये दुनिया अधिकांश स्वार्थी लोगों से भरी है। यहाँ लोग आपकी कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इसलिए, अपने रहस्यों को अपने तक ही रखना ही समझदारी है। बुद्धिमान वही है, जो अपनी योजनाओं को तब तक गुप्त रखता है जब तक वे सफल न हो जाएं। राज खुलते ही शक्ति कमजोर पड़ जाती है, इसलिए बुद्धिमान इसे अपने पास रखते हैं। जो अपने राज खुद तक रखता है, वह हमेशा मजबूत रहता है। “
एक लक्ष्य निर्धारित करना :
फिर गुरु ने छठा लक्षण बताया, “बुद्धिमान व्यक्ति अपने जीवन में एक ही लक्ष्य तय करता है और उसे पूरा करने में जुट जाता है। वह जानता है कि एक साथ कई लक्ष्य पाने की कोशिश करना, एक साथ दो नावों में पैर रखने जैसा है। ऐसा करने से आप डूब सकते हैं। वहीं, मूर्ख लोग एक साथ कई लक्ष्य बना लेते हैं, लेकिन उनमें से किसी को भी पूरा नहीं कर पाते। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका ध्यान और समय बट जाता है। जबकि बुद्धिमान व्यक्ति एक लक्ष्य पर फोकस करता है, उस पर पूरी ऊर्जा लगाता है, और उसे पूरा करके ही दम लेता है। यही उसकी सफलता का रहस्य है।”
गुरु ने एक उदाहरण देते हुए कहा, “मान लीजिए, आप एक तीरंदाज हैं। अगर आप एक बार में कई निशाने साधने की कोशिश करेंगे, तो शायद ही किसी एक भी लक्ष्य को भेद पाएं। लेकिन अगर आप एक ही निशाने पर ध्यान देंगे, तो वह तीर सीधा लक्ष्य पर जाएगा। यही सिद्धांत जीवन में भी लागू होता है। एक समय में एक ही लक्ष्य, एक ही मिशन। यही बुद्धिमानी है।
किसी से अपनी तुलना न करना :
फिर गुरु जी सातवां लक्षण समझाते हुए कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी अपनी तुलना दूसरों से नहीं करते। जो लोग ऐसा करते हैं, वे हमेशा दुखी ही रहते हैं। बुद्धिमान लोग जानते हैं कि हर किसी की काबिलियत और समय अलग होता है।
दूसरों से तुलना करने वाला व्यक्ति कभी भी संतुष्टि का अनुभव नहीं कर सकता। क्योंकि यह दुनिया अद्भुत विविधताओं से भरी हुई है। हर इंसान अलग है, हर किसी में अलग-अलग प्रतिभाएं और सोचने-समझने की क्षमताएं होती हैं। बुद्धिमान लोग इस सच्चाई को अच्छी तरह से जानते हैं, इसीलिए वे कभी भी अपनी तुलना दूसरों से नहीं करते, बल्कि अपनी मेहनत और लगन से खुद को बेहतर बनाते है ।
तुलना करने वाला हमेशा असंतोष में जीता है, लेकिन जो खुद पर विश्वास रखता है, वह आगे बढ़ता है। जिस तरह एक गुलाब का पौधा आम नहीं दे सकता, और एक आम का पेड़ गुलाब नहीं दे सकता, ठीक वैसे ही हर इंसान में अलग-अलग गुण और प्रतिभाएं होती हैं। हर कोई अपने अनूठे गुणों के आधार पर ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है। लेकिन मूर्ख लोग हमेशा दूसरों से अपनी तुलना करते रहते हैं। वे सोचते हैं, “उसके पास इतनी शानदार कार क्यों है और मेरे पास नहीं? उसने इतना बड़ा घर कैसे बना लिया, और मैं क्यों नहीं बना पा रहा? उसने व्यापार में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल कर ली, लेकिन मैं जब भी कोशिश करता हूँ, तो नुकसान ही होता है।” ये नकारात्मक विचार उन्हें आगे बढ़ने नहीं देते और वे हमेशा दुखी रहते हैं। वे अपने भीतर छिपे हुए गुणों को कभी पहचान ही नहीं पाते।
वहीं, एक बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी दूसरों से अपनी तुलना नहीं करता। वह दूसरों को देखकर ईर्ष्या नहीं करता, बल्कि उनसे सीखकर आगे बढ़ता है। वह अपनी प्रतिभा को पहचानता है, उसे निखारता है, और अपने रास्ते पर चलकर सफलता हासिल करता है। उसकी सोच सकारात्मक होती है, और वह जानता है कि हर किसी का सफर अलग होता है।
इसलिए, अगर आप खुश और सफल रहना चाहते हैं, तो दूसरों से अपनी तुलना करना छोड़ दें। अपनी ताकत को पहचानें, उसे बढ़ाएं, और अपने हुनर को निखारें। याद रखें, आपका मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है। जब आप अपने आप को बेहतर बनाएंगे, तो सफलता आपके कदम चूमेगी।
आत्मनिर्भर होना :
गुरुजी आठवें लक्षण की चर्चा करते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताते हैं। वे कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी दूसरों पर निर्भर नहीं रहते।
उन्हें पता हैं कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए खुद ही मेहनत करनी पड़ती है।
वे यह नहीं सोचते कि कोई और आकर उनका काम कर देगा। इसी वजह से उनका हर काम समय पर पूरा हो जाता है, और वे हमेशा निश्चिंत रहते हैं। वहीं, मूर्ख लोग हर छोटे-बड़े काम के लिए दूसरों के भरोसे बैठे रहते हैं। उन्हें लगता है कि कोई और आकर उनका काम कर देगा। लेकिन जब ऐसा नहीं होता, तो वे चिंता और तनाव में घिर जाते हैं, और उनका काम बिगड़ जाता है।
दुनिया में हर कोई अपने काम में इतना व्यस्त है कि किसी के पास दूसरों का काम करने का समय ही नहीं है। अगर आप खुद पर भरोसा रखेंगे, तो आपका हर काम समय पर पूरा होगा। लेकिन अगर आप दूसरों से उम्मीद लगाएंगे, तो आपका काम अधूरा ही रह जाएगा।
बुद्धिमान लोग कभी किसी का एहसान नहीं लेते और न ही किसी से कोई उम्मीद रखते हैं। वे अपने काम को खुद ही पूरा करते हैं, और इसी में उनकी सफलता का राज छुपा होता है।
क्रोध और चिंता से दूर रहना :
फिर गुरुजी नौवें लक्षण की ओर बढ़ते हैं और कहते हैं कि बुद्धिमान लोग हमेशा तनाव, क्रोध और चिंता से दूर रहते हैं। क्रोध इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। क्रोध में लिया गया हर फैसला गलत होता है। क्रोध के समय इंसान खुद पर काबू नहीं रख पाता और ऐसे काम कर बैठता है, जिसका बाद में उसे पछतावा होता है। इसीलिए बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा अपने क्रोध पर काबू रखता है। वहीं, मूर्ख लोग छोटी-छोटी बातों पर आगबबूला हो जाते हैं और अपने गुस्से के कारण ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका उन्हें जीवन भर पछतावा रहता है।
बुद्धिमान व्यक्ति अतीत या भविष्य के बारे में सोचकर अपना समय बर्बाद नहीं करता। वह हमेशा वर्तमान में जीता है और अपने कर्म पर ध्यान देता है। वह जानता है कि चिंता करने से कुछ हासिल नहीं होता। जो होना था, वह हो चुका, और जो होना है, वह होकर रहेगा। लेकिन मूर्ख लोग अतीत और भविष्य के बारे में सोच-सोचकर इतने चिंतित रहते हैं कि वे अपने वर्तमान को भी खराब कर लेते हैं। उनकी यह चिंता धीरे-धीरे उन्हें इतना परेशान कर देती है कि उनका पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है।
आंख मूंद कर दूसरों पर विश्वास न करना :
फिर गुरु जी दसवां लक्षण बताते हुए कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति कभी भी आँख मूंदकर किसी पर विश्वास नहीं करता। वह पहले अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके हर चीज को जांचता-परखता है, सच्चाई की गहराई तक पहुंचता है, और फिर ही किसी पर भरोसा करता है। चाहे सामने वाला कितनी भी मधुर बातें क्यों न करे, उसे बहकाने की कितनी भी कोशिश क्यों न करे, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति तब तक उसकी बातों पर यकीन नहीं करता, जब तक कि उस व्यक्ति के कर्म और वचन में एकरूपता न दिखे।
बुद्धिमान व्यक्ति तथ्यों और सबूतों पर भरोसा करता है। वह अपनी आँखों से देखी और कानों से सुनी हुई बातों को ही महत्व देता है। वह लोगों के शब्दों से ज्यादा उनके कर्मों पर ध्यान देता है। इसीलिए ऐसे व्यक्ति को धोखा देना बहुत मुश्किल होता है। वहीं, मूर्ख व्यक्ति बिना सोचे-समझे किसी की भी बात पर विश्वास कर लेता है। यही कारण है कि कोई भी उन्हें आसानी से बेवकूफ बना लेता है, उनका फायदा उठा लेता है, या फिर उनसे गलत काम करवा लेता है। उन्हें किसी के भी खिलाफ भड़काना आसान होता है।
आलस्य से दूर रहना :
अब गुरु जी ग्यारहवां लक्षण बताते हुए कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति आलस और टालमटोल को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है और उससे हमेशा दूर रहता है। वह खुद को कभी भी इन आदतों का शिकार नहीं होने देता, क्योंकि काम को टालने की आदत इंसान को कभी आगे नहीं बढ़ने देती। यह एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो ज्यादातर लोगों में पाई जाती है और उनकी असफलता का सबसे बड़ा कारण भी यही होती है।
मूर्ख व्यक्ति हर काम में आलस करता है। वह हर काम को “कल” पर टाल देता है, लेकिन उसका “कल” कभी आता ही नहीं। ऐसा करते-करते उसकी पूरी जिंदगी बीत जाती है। और जब उसे होश आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
असफलता से हताश न होना :
फिर गुरुजी बारहवें लक्षण की ओर बढ़ते हुए कहते हैं, “बुद्धिमान लोग असफलता को अपना अंत नहीं मानते, बल्कि उसे एक नई शुरुआत का मौका समझते हैं। वे हार को हथियार बना लेते हैं और उससे सीखकर फिर से मैदान में कूद पड़ते हैं। वे कभी भी पुरानी सफलताओं के पीछे छुपकर नहीं बैठते, न ही उनका बखान करते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि बीता हुआ कल अब सिर्फ एक याद है। भविष्य में वही मिलेगा, जिसके लिए आज वे मेहनत करेंगे।”
गुरुजी आगे समझाते हैं, “असफलता बुद्धिमानों को थोड़ी देर के लिए दुखी कर सकती है, लेकिन उन्हें डिगा नहीं सकती। क्योंकि वे समझते हैं कि असफलता सफलता की सीढ़ी का पहला कदम है। यह उन्हें उनकी कमियों और गलतियों का आईना दिखाती है, ताकि वे अगली बार और बेहतर तैयारी कर सकें। असफलता उनके लिए एक गुरु की तरह है, जो उन्हें सही रास्ता दिखाती है।”
गुरुजी का संदेश साफ है, “बुद्धिमान लोग असफलता को सीखने का मौका मानते हैं और उसका सदुपयोग करते हैं। वे जानते हैं कि हर असफलता उन्हें सफलता के एक कदम और करीब ले जाती है। वहीं, मूर्ख लोग असफलता से डरकर पीछे हट जाते हैं और खुद को सफलता से दूर कर लेते हैं।”
तो दोस्तों, ये 12 आदतें न सिर्फ आपको बुद्धिमान बनाएंगी, बल्कि आपके जीवन को भी एक नई दिशा देंगी। इन्हें अपनाकर आप न सिर्फ खुद को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। तो क्यों न आज से ही इन आदतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और सफलता की नई ऊँचाइयों को छूएं? याद रखिए, बदलाव की शुरुआत आपके एक कदम से होती है!”