फटी एड़ियों (बिवाइयां पड़ना) का आयुर्वेदिक इलाज – Fati Ediyo ka Ayurvedic Ilaj

साधारणतः स्त्रियां बालों, त्वचा व शरीर के अन्य अंगों के सौंदर्य पर ध्यान देती हैं, पर पैरों की ओर उनका ध्यान कदापि नहीं जाता। सैंडलों और चप्पलों से झांकती हुई पैरों की दरारें महिलाओं के सौंदर्य को तो कम करती हैं, उनकी लापरवाही की भी गवाही देती हैं। पैरों में बिवाइयां पड़ना (एड़ी फटना) स्त्री के लिए पीड़ादायक व सौंदर्य के लिए बाधक स्थिति होती है। आयुर्वेद में इसे पाददारी या विपादिका तथा आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में Rhaphage या Fissural Eczema कहते हैं।

क्यों फटती है एड़ियां (Causes of Cracked Heels in Hindi)

एड़ी फटने (बिवाइयां पड़ना) के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं –

  • सामान्य तौर पर सर्दियों में पैरों की एडियां फटने की समस्या पैदा होती है।
  • नंगे पैर बाहर घूमने से भी एड़ियां फटती हैं।
  • पैरों की उचित देखभाल न करने व स्वच्छता न रखने से पैरों में बिवाइयां पड़ती हैं।
  • कैल्शियम, विटामिन, आयरन की कमी से भी पैरों में दरारें पड़ती हैं।
  • घर में धुलाई-सफाई के लिए प्रयोग किए जाने वाले साबुन व डिटर्जेंट पाउडर की वजह से भी एड़ियां फटती हैं।
  • पानी में अधिक समय तक कार्य करने से पैरों की यह तकलीफ होती है।
  • प्लास्टिक के जूते चप्पल पहनना भी पैर फटने का एक कारण है।

पैरों की त्वचा मोटी होती है, अतः समय समय पर इसे स्वच्छ करने से दरारों से बचाव होता है।

एड़ियों को फटने से कैसे बचाया जाए ? (How to Prevent Cracked Heels in Hindi)

पैरों की एड़ियां फटने पर उनकी उपेक्षा न करें क्योंकि उनमें जीवाणुओं के संक्रमण का भय रहता है। इस स्थिति से बचने के लिए –

  • सर्वप्रथम नंगे पैर घूमना छोड़ दें।
  • पैरों को अधिक पानी, डिटर्जेंट, साबुन इत्यादि से बचाएं।
  • पैरों की दरारों को दूर करने के लिए मालिश व योगासन करें।
  • अपने दैनिक आहार में हरी साग-सब्जियां, दूध व मौसमी फलों का समावेश करें।

फटी एड़ियों का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment for Cracked Heels in Hindi)

  1. आयुर्वेदिक दवा – पैरों के फटने पर सैंधवादि लेप, मदनादि लेप, पाददारी मरहम या शतधौत घृत लगाएं।
  2. औषधि में कैशोर गुग्गुल 1-1 सुबह-शाम महामंजिष्ठादि काढ़ा 2 चम्मच के साथ लें।

फटी एड़ियों के घरेलू उपाय और नुस्खे (Cracked Heels Home Remedies in Hindi)

घरेलू उपचार में निम्न उपाय किए जा सकते हैं –

1. एरंड तेल – एरंड तेल में आधा नींबू निचोड़कर इस मिश्रण को दरारों में भरें। इससे पैरों का आराम मिलता है।

2. सरसों का तेल – यदि एड़ियां इतनी कट-फट गई हों कि उनसे खून निकलता हो, तो मोम व सरसों के तेल का मरहम बनाकर लगाएं। यह मोम मधुमक्खी के छत्तों का होना चाहिए। मरहम लगाने के पूर्व गरम पानी में नमक व नीम की पत्तियां मिलाकर कुछ देर तक पैर डालकर सेंक करें। उपचार करने पर एड़ियां मुलायम, सुंदर, चिकनी व पीडारहित हो जाती हैं।

3. ग्लिसरीन – मोम, ग्लिसरीन, वैसलीन को मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाएं।

4. एलोवेरा – कुनकुने पानी में नींबू निचोड़कर पैरों को कुछ समय पानी में डुबाए रखें। ब्रश से रगड़कर साफ करें व सुखाकर एलोवेरा क्रीम लगाएं। इससे एड़ियां नरम हो जाएंगी।

5. प्याज – प्याज को पीसकर दरारों में भरने से पैरों की एडियां फटती नहीं।

6. दूब – हरी दूब को पीसकर फटी हुई एड़ियों पर लगाएं।

7. शहद – गुड़ और शहद का लेप दरारों में भरें।

8. नीम का तेल – नीम के तेल में हींग डालकर फटी एड़ियों पर भर दें।

9. पत्ता गोभी – पत्ता गोभी के ताजा मुलायम पत्ते एड़ी पर रगड़ने से वे स्वच्छ होती हैं तथा कटी हुई त्वचा जुड़ती है।

10. तिल तेल – पैरों को गरम पानी से धोकर एरंड का तेल, कोकम तेल या तिल तेल लगाएं, दरारें नहीं पड़ेंगी।

11. घी – शुद्ध घी में थोड़ा-सा नमक मिलाकर फटी हुई एड़ियों पर लगाएं।

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