श्रृंग्यादि चूर्ण (शृङ्गयादि चूर्ण) के फायदे और दुष्प्रभाव

श्रृंग्यादि चूर्ण (शृङ्गयादि चूर्ण) क्या है ? (What is Shringyadi churna in Hindi)

श्रृंग्यादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका मुख्य उपयोग – हिक्का (हिचकी), श्वास, खांसी, अरुचि, जुकाम आदि के उपचार में किया जाता है। बच्चों में इसका उपयोग – बुखार, खांसी, सर्दी, उल्टी और शिशु श्वसन संक्रमण के उपचार में किया जाता है।

श्रृंग्यादि चूर्ण के घटक द्रव्य और उनकी मात्रा :

  • काकड़ा सिंगी,
  • सोंठ,
  • काली मिर्च,
  • पीपल,
  • हरड़,
  • बहेड़ा,
  • आमला,
  • कण्टकारी,
  • भारंगी,
  • पुष्करमूल,
  • सेंधा,
  • सौंचल,
  • विड,
  • दभिद् और
  • समुद्र नमक

सभी सम भाग।

प्रमुख घटकों के विशेष गुण :

  1. काकड़ासिंगी : वात-कफ नाशक, कफनिस्सारक, वातानुलोमन, शोथघ्न ।
  2. त्रिकटु : वात कफनाशक, पाचक, अग्निवर्धक।
  3. त्रिफला : रसायन, सारक, चाक्षुष्य, विषघ्न।
  4. कण्टकारी : वात कफनाशक, दीपक, कासहर, कण्ठ्य, कृमिघ्न ।
  5. भारंगी : कफघ्न, कासहर, श्वासहर, आमपाचक।
  6. पुष्कर मूल : कफघ्न, कासहर, हृद्य, मेदोहर, शोथघ्न ।
  7. पंच लवण : दीपक, पाचक, रोचक, सारक, कफघ्न, कासहर।

श्रृंग्यादि चूर्ण बनाने की विधि :

सभी द्रव्यों को पृथक-पृथक, वस्त्र पूत चूर्ण करके मिला लें और एक घण्टा खरल करके सुरक्षित कर लें।

मात्रा और सेवन विधि (Dosage of Shringyadi churna)

  • एक से तीन ग्राम
  • शिशुओं को उनकी आयु के अनुसार।

अनुपान : गुनगुना पानी या मधु।

श्रृंग्यादि चूर्ण के फायदे और उपयोग (Benefits & Uses of Shringyadi churna in Hindi)

1. हिचकी (हिक्का) : अन्नजा हिक्का में इस चूर्ण का प्रयोग अत्यन्त लाभदायक है । परन्तु रोगों के उपद्रव स्वरूप हिक्का में इसका व्यवहार नहीं होता, उस प्रकार की हिक्काओं में तत् तत् रोग की चिकित्सा ही लाभदायक होती है, मूल कारण के समाप्त हो जाने पर हिक्का भी स्वयंमेव समाप्त हो जाती है।

2. श्वास : श्वास विशेष रूप में तमक श्वास में यह चूर्ण लाभदायक है यह श्वास नलिकाओं के संकोच का निवारण करके और कफ को ढीलाकर के कफ के निस्सारण का मार्ग प्रशस्त करता है। अतः श्वास नलिका अवरोध दूर होकर श्वास कष्ट भी दूर हो जाता है। श्वास की मूलगामी चिकित्सा के लिए श्वास वेग की शान्ति के पश्चात् अग्नि कुमार रस इत्यादि औषधियों का प्रयोग करवाना चाहिए जिनसे आम का पाचन होकर कफ की उत्पत्ती बाधित हो।

3. उर्ध्ववात : उदावर्त में विशेषत : मल एवं मूत्र के वेग धारण जन्य उदावर्त के शृङ्गयादि चूर्ण एक अमुल्य औषधि है, तीन ग्राम की मात्रा उष्णोदक से देने पर वायु की अधोगति होकर उसका सरण होने लगता है। पूर्ण लाभ के लिए इसका प्रयोग एक सप्ताह तक अवश्य करवाएं।

सहायक औषधियों में – द्विरुतर हिङ्गवादि चूर्ण, हिङ्गवाष्टक चूर्ण, यदि मल बन्ध हो तो पंच सकार चूर्ण का प्रयोग करना चाहिए।

4. खांसी (कास) : वातज कास में शृङ्गयादि चूर्ण का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। यह कफ को पतला करके निकाल देता है और श्वास नलिका एवं कण्ठ के शोथ को कम करता है अनुपान उष्णोदक ही उचित है, बच्चों को मधु या चाशनी में चटा सकते हैं।

सहायक औषधियों में – तालीसादि चूर्ण, प्रवाल भस्म, सुधायाष्टि, का प्रयोग लाभप्रद है। शुष्क कास में युनानी योग लाउक सपिस्तां भी काम की औषधि है, उसका भी प्रयोग करना चाहिए।

5. अरुचि : शृङ्गयादि चूर्ण का प्रयोग इसके पाचक एवं रोचक गुणों के कारण अरुचि में लाभप्रद है। दो तीन दिन सेवन से अन्न में रुचि जागृत होती है। मानसिक अरुचि में इससे कोई लाभ नहीं होता वहाँ मनः प्रसादक औषधियों का प्रयोग करना चाहिए।

अरुचि के लिए सहायक औषधियों में – सितोपलादि चूर्ण, दाडिमाष्टकचूर्ण महा शंख वटी, जीरकाद्य चूर्ण में से किसी एक का प्रयोग भी अवश्य करना चाहिए।

6. साइनस (पीनस) : प्रतिश्याय का जीर्ण रूप ही पीनस है, इस रोग का मुख्य कारण अग्निमान्द्य है। अपने पाचक और अग्निवर्धक गुण के कारण शृङ्गयादि चूर्ण पीनस में भी लाभदायक है।

सहायक औषधियों में – व्योषादि वटक, अग्निमुख रस, नवजीवन रस,अधिक विकृत रोगियों को समीर पन्नग रस, रुदन्ती चूर्ण, महालक्ष्मी विलास रस, का भी प्रयोग करवाना चाहिए।

7. आनाह (कब्ज) : शृङ्गयादि चूर्ण 2 ग्राम गुनगुने पानी से प्रयोग करवाने से दो दिन में ही आनाह में लाभ होता है। पूर्ण लाभ के लिए एक सप्ताह तक अवश्य प्रयोग करवाऐं।

सहायक औषधियों में – द्विरुत्तर हिंगवादि चूर्ण, वैश्वानर चूर्ण, गोमूत्र हरीतकी, आरोग्य वर्धिनी वटी इत्यादि का प्रयोग भी करवाना चाहिए।

आयुर्वेद ग्रंथ में श्रृंग्यादि चूर्ण के बारे में उल्लेख (Shringyadi churna in Ayurveda Book)

‍‍‌‌‍‍‌‌‌‍‌‌‌‌‌‌‌‌‌‍शृङ्गी कटुत्रय फलत्रय कण्टकारी।
भाङ्गी सपुष्करजटा लवणानिपञ्च॥
चूर्ण पिवेद् शिशिरेण जलेन हिक्का।
श्वासोर्ध्ववात कसना रुचि पीनसेषु ॥

गदनिग्रह
हिक्काश्वासाधिकार 64

श्रृंग्यादि चूर्ण के दुष्प्रभाव और सावधानीयाँ (Shringyadi churna Side Effects in Hindi)

तालिसादि चूर्ण लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।

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