अधिक प्यास लगने के 37 घरेलु उपचार | Adhik Pyas Lagne ka Desi ilaj

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अधिक प्यास लगने के 37 घरेलु उपचार | Adhik Pyas Lagne ka Desi ilaj

बार बार प्यास लगने के कारण व उपचार

इस रोग में व्यक्ति को बहुत अधिक प्यास लगती है। रोगी व्यक्ति जितना भी पानी पीता है उसे ऐसा लगता है कि उसने बहुत ही कम पानी पिया है और वह बार-बार पानी पीता रहता है| कुछ स्त्री-पुरुष बार-बार पानी में बर्फ डालकर ठंडा पानी पीते हैं, लेकिन उनकी प्यास इसपरभी शांत नहीं होती है। आइये जाने तृषा रोग(बार बार प्यास लगना) के सरल देसी घरेलु उपचारों के बारे में |

अधिक प्यास लगने के कारण : Adhik Pyas Lagne ka karan

उपवास, धातुक्षय, मद्यपान, शोक, क्रोध, भय, परिश्रम, अग्निताप, अजीर्ण, आघात लगना, पित्तवर्धक पदार्थो का सेवन, दो दाल, कुल्थी आदि खाने पर तथा ज्वर (बुखार) के कारण भी प्यास अधिक लगती है।

अधिक प्यास लगने के आयुर्वेदिक उपाय: Bar Bar Pyas Lagne ke Gharelu Upchar

1) गिलोय : giloy se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
गिलोय का रस 6 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में कई बार देने से प्यास शांत हो जाती है।

20 प्याज : pyaj se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
प्यास अधिक लगने पर प्याज, पोदीना और मिश्री को मिलाकर घोटकर पिलाने से प्यास में लाभ होता है।

30 पीपल : pipal Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• पीपल की छाल को जलाकर पानी में डाल दें। जब राख नीचे बैठ जाये तो उस पानी को छानकर पिलाने से तेज प्यास शांत हो जाती है।
• पीपल का चूर्ण बनाकर खाकर ऊपर से पानी पीने से अधिक प्यास का लगना बंद हो जाता है।
• पीपल के ताजे छिलके का रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग या सूखे पत्तों का काढ़ा बना लें। लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग काढ़ा में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार लेने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।
• प्यास अधिक लगने पर पानी पीते-पीते पेट फूल जाने पर पीपल का काढ़ा बनाकर पीने से उल्टी होकर आराम हो जाता है।

4) पान :
पान खाने से प्यास कम लगती हैं।

5) पानी :bar bar Pyas Lagne ka Gharelu Upchar
गर्म पानी में नमक मिलाकर पीने से खुश्की की प्यास ठीक हो जाती है।

6) संतरा : Santra se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
प्यास अधिक लगने पर नारंगी के सेवन से प्यास कम होती है।

7) सोंठ : Sonth se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• सोंठ (सूखी अदरक), जीरा और संचर नमक इन सबको बराबर मात्रा लेकर पीसकर छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को पानी के साथ खाने से कफज तृष्णा प्यास शांत हो जाती है।
• सोंठ और जवाखार को मिलाकर कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ खाने से बदले हुए प्यास का असर मिट जाता है।
• सोंठ, पित्तपापड़ा, नागरमोथा, खस, लालचंदन, सुगन्धबाला इन सबको बराबर मात्रा में लेकर बने काढ़े को थोड़ा-थोड़ा पीने से बुखार तथा प्यास शांत होती है। यह उस रोगी को देना चाहिए जिसे बुखार में बार-बार प्यास लगती है।

8) सौंफ : saunf se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• 25 ग्राम सौंफ को 250 मिलीलीटर पानी में भिगोकर रखें। 1 घंटे बाद भिगोये हुए पानी को छानकर 1-1 घूंट पीने से तीव्र (तेज) प्यास मिटती है।
• पित्त ज्वर (बुखार), कफबुखार और मलेरिया बुखार में अधिक प्यास लगने पर बार-बार पानी पीने पर भी प्यास न बुझती हो और शरीर के भीतर गर्मी और जलन हो रही हो तो सौंफ को पानी में भिगोकर पीने से प्यास और बुखार की जलन मिटती है और घबराहट जल्द दूर होती है।

9) सोना :
गरम सोना, चांदी व गरम ईंट को जिस पानी में बुझाएं उस पानी को पीने से तेज प्यास शांत हो जाती है।

10) सेब :
सेब का रस पानी में मिलाकर पीने से प्यास कम लगती है। जिन्हे वायु विकार हो, उन्हें यह प्रयोग लाभकारी नहीं होगा।

11) उदुम्बर के पत्ते :
• उदुम्बर के सूखे पत्तों के लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार खाने से प्यास का बार-बार लगना बंद हो जाता है।
• उदुम्बर के ताजे पत्तों का रस निकालकर लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रस पीयें।

12) दही : dahi se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
दही में गुड़ मिलाकर खाने से बादी प्यास मिट जाती है तथा भोजन के बाद आने वाले तेज प्यास कम होती है।

13) दूध :
ताजा दूध 100 से 500 मिलीलीटर पाचन क्षमता के अनुसार पीने से तेज प्यास दूर होती है।

14) चकोतरा : Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
चकोतरे का रस थोड़ा सा पानी मिलाकर पीने से जलन व प्यास शांत होती है और बुखार भी उतर जाता है।

15) चावल :
चावल का काढ़ा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग दिन में 2 से 3 बार खाने से प्यास शांत होती है।

16) फालसा : falsa se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
पके फालसों के रस में पानी मिलाकर पीने से तृषा (प्यास) का रोग दूर होता है।

17) तरबूज : falsa se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
तरबूज खाने से प्यास लगना कम हो जाता है। तरबूज के रस में मिश्री को मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीने से रोग में अधिक लाभ होता है।

18) तुलसी : tulsi se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• तुलसी के 25 पत्ते पीसकर एक गिलास पानी में घोल लें। इसमें स्वादानुसार मिश्री और नींबू निचोड़ लें। इसे पिलाने से किसी रोग में यदि प्यास अधिक लग रही हो तो लाभ मिलता है। प्यास कम लग रही हो तो भी लाभ होता है।
• तुलसी के पत्तों को पीसकर 1 गिलास पानी में मिलाकर इस पानी में नीबू निचोड़कर व मिश्री मिलाकर पिलाने से प्यास कम लगती है।

19) जायफल : jayfal se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
किसी भी प्रकार के रोग में प्यास अधिक लगने पर जायफल का टुकड़ा मुंह में रखने से लाभ होता है।
किशमिश :
• 10 ग्राम किशमिश 500 मिलीलीटर गाय के दूध में पकाकर ठंडा हो जाने पर रात के समय रोज सेवन करने से जलन शांत होती है।
• किशमिश 80 ग्राम, गिलोय का बारीक चूर्ण, जीरा 10-10 ग्राम तथा चीनी 10 ग्राम इन सभी के मिश्रण को चिकने गर्म बर्तन में भरकर उसमें इतना गाय का घी मिलायें कि मिश्रण अच्छी तरह भीग जायें। इसमें से नित्य प्रति 6 से 20 ग्राम तक सेवन करने से एक दो सप्ताह में चेचक आदि विस्फोटक रोग होने के बाद जो दाह शरीर में हो जाती है, वह शांत हो जाती है।

20) मुलहठी : mulethi se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
मुलहठी में शहद मिलाकर सूंघने से तेज प्यास खत्म हो जाती है तथा थोड़े-थोड़े देर पर लगने वाली प्यास मिट जाती है।

21) बिहीदाना :
बिहीदाना 3 ग्राम को 200 मिलीलीटर पानी में 1 घंटा भिगो दें। 1 घंटे बाद बिहीदाना को उसी पानी में मसलकर छान लें। इस पानी में खांड मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम पिलायें। इससे बार-बार गले का सूखना बंद हो जाता है।

22) सिरका :
ठंडे पानी में सिरका मिलाकर पीने से बादी की प्यास मिट जाती है।

23) जामुन : jamun se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• जामुन का मीठा गुदा खाने से या उसका रस पीने से प्यास में आराम मिलता है।
• जामुन के पत्तों का रस लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रोगी को पिलाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

24) जामुन के पत्ते :
जामुन के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर लगभग 7 से 14 मिलीलीटर काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार पीने से बुखार में प्यास का लगना कम हो जाता है।

25) जौ : jau se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• एक कप जौ को बारीक पीसकर दो गिलास पानी में 8 घंटे के लिए भिगोकर रख दें। 8 घंटे बाद इसे आग पर उबालकर इसके पानी को छानकर गर्म-गर्म पानी से गरारे करने से तेज प्यास मिट जाती है।
• सेंके हुए जौ के आटे को पानी में मथकर (न अधिक गाढ़ा हो और न अधिक पतला) घी मिलाकर पीने से प्यास, जलन और रक्तपित्त दूर होता है।

26) ज्वार : jowar se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
ज्वार की रोटी को छाछ में भिगोकर खाने से प्यास लगना कम होता है। ज्वार की रोटी कमजोर और वात पित्त के रोगी को न देना चाहिए।

27) नमक : namak se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• नमक खाने से ग्रंथियों का रस सूख जाता है और प्यास लगने लग जाती है। इसलिए नमक का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए।
• 1 गिलास पानी में 1 चुटकी नमक डालकर घोल लें। 1-1 चम्मच थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाने से प्यास का अधिक लगना कम हो जाता है।

28) नींबू : nimbu se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• नींबू का शर्बत पीने से प्यास शांत होती है।
• नींबू को 1 गिलास पानी में निचोड़कर पीने से तेज प्यास का लगना बंद हो जाता है।
• गर्मी में नींबू के रस को शीतल (ठंडे) पानी में मिलाकर, चीनी डालकर शिकंजी बनाकर पीने से गर्मी नष्ट होती है और प्यास शांत होती है।
• नींबू की पत्ती को मिट्टी में मिलाकर गोली बना लें। इस गोली को आग में पकाकर 1 गिलास पानी में डालकर बुझाएं। फिर उस पानी को कपड़े से छानकर पिलायें। इससे बुखार व अन्य रोगों में लगने वाली प्यास मिटती है और गले का सूखना बंद हो जाता है।
• प्यास अधिक लगने पर नीम के पत्तों का शर्बत बनाकर पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

29) नीम : neem se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• कड़वे नीम की छाल, धनिया, सोंठ और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर 20 ग्राम की मात्रा बना लें। इसे 375 मिलीलीटर पानी में डालकर पकायें। आधा पानी रह जाने पर उतारकर ठंडा कर पीने से पित्त की प्यास बुझ जाती है।
• नीम के पत्तों को मिट्टी में मिलाकर गोला बनाकर आग में जला दें। लाल होने पर एक बर्तन में पानी भरकर उस पानी में गोला को बुझाकर उस पानी को पीने से तेज प्यास भी शांत हो जाती है।
• नीम की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से कफ के कारण लगने वाली प्यास शांत हो जाती है।

30) नीलोफर :
नीलोफर के फूल 20 ग्राम को 200 मिलीलीटर पानी में 2 घंटे भिगोने के बाद पानी छानकर थोड़ा-थोड़ा करके दिन में 3 से 4 बार पीयें। इससे अधिक बोलने या गाने के बाद गला सूखने से लगने वाली प्यास खत्म होती है तथा गला सूखता नहीं है।

31) नारियल : nariyal se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• नारियल की जड़ों को जलाकर गर्म पानी में डालकर रख दें। ठंडे हो जाने पर छानकर देने से ज्वर (बुखार) में प्यास का लगना दूर होता है।
• नारियल की जटा (रेशा) जलाकर पानी में बुझा लें। फिर इस पानी को अच्छे से मिलाकर व छानकर पिलायें। इससे गले का सूखापन दूर होता है।
• नारियल का पानी पीने से भी गले का सूखना व तेज प्यास लगना बंद हो जाता है।

32) नारंगी : narangi se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
प्यास अधिक लगने पर नारंगी खाने से प्यास कम लगती है।

33) नागरमोथा : nagarmotha se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
नागरमोथा, पित्तपापड़ा, उशीर (खस), लाल चंदन, सुगन्धबाला, सौंठ आदि पदार्थो को पीसकर काढ़ा बना लें और ठंडे पानी के साथ बीमार व्यक्ति को देने से प्यास और ज्वर की प्यास में शांति मिलती है।

34) अंजीर : anjeer se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करने से लाभ होता है।

35) अमरूद : amrud se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• अमरूद, लीची, शहतूत और खीरा खाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।
अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर पानी में डाल दें। कुछ देर बाद इस पानी को पीने से मधुमेह (शूगर) या बहुमूत्र प्यास में उत्तम लाभ होता है।

36) आंवला : amla se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
आंवला और सफेद कत्था मुंह में रखने से प्यास का अधिक लगना ठीक हो जाता है।

37) आम : aam se Bar Bar Pyas Lagne ka upchar
• आम की गुठली की गिरी के 40-60 मिलीलीटर काढे़ में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से भयंकर प्यास शांत होती है।
• 7-14 मिलीलीटर आम के ताजे पत्तों का रस या 14-28 मिलीलीटर सूखे पत्तों का काढ़ा चीनी के साथ दिन में तीन बार देना चाहिए।

विशेष : अच्युताय हरिओम आँवला शरबत “अरुचि (Anorexia), अम्लपित (Acidity) , पेट फूलना (gas), कब्ज (constipation) , कृमिरोग आदि पेट के अनेक रोगों में में लाभदायी है |

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji  Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है