आग से जलने पर आयुर्वेद के सबसे असरकारक 79 घरेलु उपचार | Aag se jalne ka ilaj

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आग से जलने पर आयुर्वेद के सबसे असरकारक 79 घरेलु उपचार | Aag se jalne ka ilaj

आग से भाप से या किसी और गर्म चीज से जलना बहुत ही दर्दनाक होता है। अगर रोगी का शरीर आधे से ज्यादा जल गया हो तो उसको तुरन्त ही हॉस्पिटल ले जाना चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति थोड़ा बहुत जला हो तो उसकी तुरन्त ही चिकित्सा हो सकती है।

लक्षण-

जल जाने की वजह से शरीर की त्वचा सिकुड़ जाती है, उस पर मोटे-मोटे फफोले पड़ जाते है, पूरे शरीर में जलन होती है जिसकी वजह से रोगी बैठ या लेट भी नहीं सकता है। आइये जाने aag se jalne ka ilaj ,aag se jalne ka upchar in hindi

Aag se jalne ka विभिन्न औषधियों द्वारा उपचार-

1. भांगरें : भांगरें के पत्तों और तुलसी के पत्तों के रस को शरीर के जले हुए भाग पर दिन में 2-3 बार लगाने से आराम आता है।

2. दही : बरगद की मुलायम पत्तियों को पीसकर दही में मिलाकर जले हुए भाग पर जल्दी आराम आता है।

3. गूलर :

★ गूलर के पत्तों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन मिट जाती है और छाले के निशान भी नहीं पड़ते हैं।
★ शरीर के किसी भाग के जलने पर गूलर की हरी पत्तियों को पीसकर लेप करने से जलन दूर हो जाती है।

4. तूनी : किसी भी प्रकार के जख्म पर तूनी की छाल का लेप करने से या चूर्ण का प्रयोग करने से जख्म के कारण सिकुड़ी हुई त्वचा ठीक हो जाती है। खासकर जलने के बाद जले हुए स्थान की त्वचा अक्सर सिकुड़ जाती है।

5. गोबर : शरीर के किसी भाग के जल जाने पर उसी समय गाय का गोबर लगाने से आराम पड़ जाता है और जलने के निशान भी नहीं पड़ते हैं।

6. नारियल :

★ नारियल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लगाने से जले हुए रोगी को बहुत आराम मिलता है।
★ शरीर के जल जाने पर अगर कपड़े शरीर से ही चिपक जायें तो उन्हे नारियल या तिल के तेल में रूई को भिगोकर छुड़ाऐं। इसके बाद शरीर पर नारियल, जैतून या तिल का तेल लगाने से भी लाभ होता है।
★ अगर कोई व्यक्ति आग से जल गया हो और उस समय कोई औषधि पास में न हो तो जले हुए स्थान पर नारियल का तेल लगा दें। इससे जलन और दर्द तुरन्त शान्त हो जाते है और जख्म भी नहीं बनता है।
★ नारियल के तेल में तुलसी के पत्तों का रस बराबर की मात्रा में मिलाकर फेंटने के बाद जले हुए अंग पर लगाने से राहत मिलती है।
★ शरीर के जले हुए भाग पर नारियल का असली तेल लगाने से जलन शान्त हो जाती है

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7. अनार :

★ जलने के कारण जलन होने पर अनार और इमली को एकसाथ पीसकर लगाने से जलन समाप्त हो जाती है।
★ अनार के पत्तों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से दर्द समाप्त हो जाता है।

8. बबूल : बबूल की गोंद को पानी में घोलकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर हो जाती है।

9. तुलसी :

★ 2 चम्मच तुलसी के पत्तों के रस को 100 मिलीलीटर नारियल के तेल में मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।
★ आग से जल जाने पर तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से जलन दूर होती है और छाले तथा जख्म भी ठीक हो जाते हैं।
★ भांगरें के पत्तों और तुलसी के पत्तों के रस को शरीर के जले हुए भाग पर दिन में 2-3 बार लगाने से आराम आता है।
★ 250 मिलीलीटर तुलसी के पत्तों का रस और 250 मिलीलीटर नारियल के तेल को एक साथ मिलाकर धीमी आग पर गरम करें। गर्म करने पर जब महसूस हो कि रस का भाग जल गया है तो उस गरम तेल में ही 15 ग्राम मोम डालकर हिलाएं। इस लेप को ठंड़ा होने के बाद रोगी के शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से बहुत आराम मिलता है।
★ तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से जलने के कारण होने वाली जलन दूर हो जाती है, छाले नहीं पड़ते है तथा घाव भी ठीक हो जाता है।
★ तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से जलन, छाले तथा घाव ठीक हो जाते हैं।

10. बथुआ :

★ शरीर के किसी भाग के जल जाने पर बथुए के पत्तों को पीसकर लेप करने से जलन मिट जाती है।
★ बथुए के पत्तों पर पानी के छींटे मारकर पीस लें और शरीर के जले हुए भागों पर लेप करें। इससे जलने के कारण होने वाली जलन मिट जाती है और दर्द भी समाप्त हो जाता है।

11. सफेद कददू : कुम्हड़ा (सफेद कददू) के पत्तों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से जलन शान्त हो जाती है और जख्म भी भर जाते हैं।

12. मुलतानी मिट्टी : मुलतानी मिट्टी को बारीक पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द में आराम आता है।

13. मुलेठी : मुलेठी और चंदन को पानी के साथ घिसकर शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से लाभ होता है।

14. जायफल : जायफल को पीसकर कच्चे दूध में मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन दूर होती है और जलने के निशान भी नहीं पड़ते हैं।

15. जीरा : जीरे को पानी के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से आराम आता है।

16. गाजर :

★ शरीर के जले हुए भाग पर बार-बार कच्ची गाजर का रस लगाने से लाभ होता है।
★ आग से जल जाने पर गाजर का रस लगाने से जख्म नहीं बनता तथा जलन व पीड़ा भी दूर हो जाती है।
★ कच्ची गाजर को पीसकर शरीर के आग से जले हुए भाग पर रखने से जलन नष्ट हो जाती है और पीब बनना भी बन्द हो जाती है।
★ आग से जले हुए व्यक्ति की जलन और दर्द को मिटाने के लिए गाजर को पीसकर लगाना लाभकारी रहता है।

17. केला :

★ पके हुए केले के गुदे को हाथ से मसलकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।
★ आग से जल जाने पर केले को पीसकर लगाना लाभकारी रहता है।

18. पानी :

★ अगर शरीर का कोई भाग जल जाता है तो उसे लगातार पानी में डुबोकर रखें। यदि ऐसा न हो पाये तो उस भाग पर गीले कपड़े की पट्टी बांध लें और उसके ऊपर बार-बार पानी डालते रहें।
★ जल जाने के बाद जले हुए अंग को बहुत ठंड़े पानी में डुबोकर रखें। ऐसा करने से जले हुए स्थान पर जलन नहीं होती, फफोले नहीं पड़ते और शरीर पर जले हुए का निशान भी नहीं रहता। जो अंग पानी में डुबोया न जा सके तो उस पानी में कपड़ा भिगोकर उस अंग पर रखें तथा उस कपड़े को बार-बार ठंड़ा पानी डालकर ठंड़ा करते रहें।

19. गिलोय : गिलोय और पित्तपापड़े के रस को पीने से हर तरह की जलन शान्त हो जाती है।

20. नौसादर : नौसादर और अकरकरा को पीसकर तालु और मुंह में बहुत ज्यादा रगड़ने से मुंह में इतनी सुन्नता पैदा हो जाती है कि अगर मुंह में अंगारे भी भर लें तो मुंह जलता नहीं है।

21. लाल चंदन : जलने की वजह से यदि उस स्थान पर छाला फूटकर घाव बन गया हो तो वहां पर लाल चंदन को घिसकर लगाने से कुछ ही समय में घाव भर जाता है और जलने का निशान भी नहीं पड़ता है।

22. मिट्टी का तेल : शरीर के जले हुए भाग पर मिट्टी का तेल लगाने से छाला नहीं पड़ता है।

23. राल :

★ 10 ग्राम सफेद राल को पीसकर 60 मिलीलीटर नारियल के तेल में मिलाकर थोड़ी देर तक हिलाते रहे। जब दोनों मिलकर एक जैसे हो जायें तो इन्हे 101 बार पानी में धोकर लेप बना लें। इस लेप को लगाने से जलन और दर्द मिट जाते हैं। इस लेप के तैयार हो जाने के बाद इसे पानी से भरे घड़े के अन्दर ही रखना चाहिए।
★ 30 ग्राम सफेद राल को कपड़े में छानकर 250 मिलीलीटर तिल के तेल में थोड़ा-थोड़ा सा डालकर हिलाते रहे और उसमें थोड़ा-थोड़ा पानी भी डालते रहें। जब हिलाते-हिलाते राल सफेद हो जाये तो इसमें 6 ग्राम कपूरचूरा और 12 ग्राम पिसा हुआ कत्था डालकर मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से लाभ होता है।

24. नमक : पिसे हुए नमक को पानी में घोलकर लेप करने से जले हुए की जलन जल्दी समाप्त हो जाती है।

25. स्वमूत्र : अगर किसी के शरीर पर गर्म-गर्म पानी या उबलती हुई चाय गिर जाये और उसकी त्वचा पर जल कर फफोले पड़ जाये अथवा किसी का चेहरा आग से जल जाये और काला पड़ जाये तो उस पर अपना ही पेशाब को लगाने और अपने ही पेशाब से भीगे हुए कपड़े की पट्टी बांधने से सिर्फ 4 से 5 दिन में ही त्वचा अपने असली रूप मे आ जायेगी और कालापन दूर हो जायेगा। जलने का कोई निशान भी नहीं रह जायेगा।

26. हरड़ :

★ हरड़ को पानी में पीसकर उसमें क्षारोदक और अलसी का तेल मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जख्म जल्दी भरकर ठीक हो जाता है।
★ हरड़ को जलाकर बारीक पीस लें और वैसलीन में मिलाकर शरीर के जले हुए भागों पर लगाने से जलन कम होती है और जख्म भी भर जाते हैं।

27. आलू : आलू को बारीक पीसकर शरीर में जले हुए भाग पर मोटा-मोटा सा लेप कर दें जिससे कि जले हुए भाग पर हवा न लगे। ऐसा करने से जलन मिट जाती है और आराम आ जाता है।

28. सोनापाठा : फूल प्रियंगु, खस, पठानी लोध, सुगंधबाला, सनाय और सोनापाठा का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर दारूहल्दी के रस में मिलाकर शरीर पर मलने से जलन बिल्कुल मिट जाती है।

29. हींग : असली हींग को पानी में मिलाकर जले हुए भाग पर 24 घंटों में 4 से 5 बार मुर्गी के पंख से लगाने से जलने के कारण फफोलें नहीं पड़ते और जल्दी आराम आ जाता है।

30. चना : चने को दही के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से तुरन्त आराम आ जाता है।

31. मिश्री : कमल का पानी, चीनी का शर्बत, मिश्री मिला हुआ दूध और गन्ने का रस पीने से पित्त (शरीर की गर्मी) शान्त होकर जलन मिट जाती है।

32. ग्लिसरीन : शरीर के जले हुए भाग पर ग्लिसरीन लगाने से दर्द भी नहीं होता है और छालें भी नहीं पड़ते।

33. सुहागा : एक भाग सफेद सुहागे को 20 भाग पानी में मिला लें। इस पानी से शरीर के जले हुए भागों को धोने से घाव बिल्कुल ठीक हो जाता है।

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34. मेहंदी :

★ मेहंदी के पत्तों को पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है।
★ आग से जले हुये भाग पर मेहंदी की छाल या पत्तों को पीसकर गाढ़ा लेप करने से ठंड़क मिलती है।
★ मेहंदी के पत्तों की चटनी बनाकर जले हुए भाग पर लगाने से आराम मिलता हैं।
★ भंगरैया का पत्ता, भरबा और मेहंदी के पत्तों को एकसाथ पीसकर लेप करने से जलन दूर होती है और जख्म भी ठीक हो जाता है। इससे जले हुए स्थान पर सफेद निशान भी नहीं रहते हैं।

35. बेर :

★ बेर की मुलायम पत्तियों को दही के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जले हुए का दाग (निशान) मिट जाता है।
★ शरीर के किसी भी भाग में जलन होने पर बेर के पत्तों को पीसकर लगाने से आराम मिलता है।

36. तिल :

★ तिल को पीसकर शरीर के गर्म पानी से या आग से जल गये भागों पर लेप करने से आराम आता है।
★ तिलों को पानी में पीसकर बने लेप को जले हुए अंग पर मोटा लेप करने से जलन में लाभ पहुंचेगा।
★ तिल के बीजों को बराबर मात्रा में नारियल के तेल में मिलाकर जले हुए भाग पर लेप करने से आराम मिलता है।
★ शरीर के जले हुए भाग पर मछली या तिल का तेल लगाने से लाभ होता है।

37. नीम : जलने की वजह से शरीर में जख्म बन जाने पर नीम या चंदन का तेल लगाने से जख्म जल्दी ठीक हो जाते हैं।

38. बरगद-

★ बरगद की कोंपलों (मुलायम पत्तों) को पीसकर शरीर के आग से जले हुए भाग पर लगाने से आराम मिलता है।
★ दही के साथ बड़ को पीसकर बने लेप को जले हुए अंग पर लगाने से जलन दूर हो जाती है।
★ जले हुये स्थान बरगद की कोंपल या कोमल पत्तों को गाय के दूध की दही मे पीसकर लगाने से जलन दूर हो जाती है।

39. ग्वारपाठा :

★ ग्वारपाठे के अन्दर के 4 भाग गूदे और 2 भाग शहद को मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।
★ ग्वारपाठे के पत्तों के ताजे रस का लेप करने से जले हुए घाव जल्दी भर जाते हैं।
★ ग्वारपाठे के पत्ते को चीरकर निकले गूदे को जली हुई त्वचा पर दिन में 2-3 बार लगाने से जलन दूर होकर शान्ति मिलती है और घाव भी जल्दी भर जाता है।
★ शरीर के आग से जले हुए स्थान पर ग्वारपाठे का गूदा लगाने से जलन शान्त हो जाती है और फफोले भी नहीं उठते हैं।
★ शरीर के जले हुए स्थान पर ग्वारपाठे का गूदा बांधने से फफोले नहीं उठते तथा तुरन्त ठंडक पहुंचती है।
★ ग्वारपाठा के छिलके को उतारकर और पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से जलन मिट जाती है और रोगी के जलने के जख्म भी नहीं बनते हैं।

40. हिंगोट : हिंगोट (हिंगन) की गुठली से निकाले हुए तेल को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से बहुत लाभ होता है।

41. चावल :

★ कच्चे चावल (अरबा चावल) और उससे दुगनी मात्रा में काले तिल को लेकर ठंड़े पानी के साथ पीसकर लगातार 3 दिनों तक शरीर के जले हुए भाग पर लेप करने से जलन और दर्द दूर हो जाता है। ध्यान रहें कि इन 3 दिनों के बीच में जले हुए भाग को धोये नहीं। जब आराम हो जायेगा तो पपड़ी अपने आप ही हट जायेगी।
★ चावल के छिलकों को जलाकर उसकी राख को घी में मथकर लगाने से आग से जलने के घाव ठीक हो जाते हैं।

42. चौलाई : दुर्वा और चौलाई के पत्तों को बराबर की मात्रा में लेकर उन पर पानी की छींटे मारकर सिल पर पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द दूर हो जाते हैं।

43. कबीला : कबीला को तेल में मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जख्म जल्दी भर जाता है।

44. सज्जीखार : 1 भाग सज्जीखार को 9 भाग पानी में मिलाकर घोल बना लें। इस घोल की पट्टी जले हुए भाग पर करने से जलन जल्दी दूर हो जाती है।

45. चूना : चूने के छने हुए पानी और उसी के बराबर अलसी का तेल मिलाकर अच्छी तरह साफ कपड़े पर लगा लें। इस कपड़े को जले हुए भाग पर रखकर बांध दें। इससे जलन कम हो जाती है और जख्म भी ठीक हो जाते हैं।

46. मूंग : मूंग को पानी के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।

47. चूना : चूने के पानी और तिली के तेल को कांसे की थाली में फेंट कर रूई से हर 4-4 घंटे के बाद शरीर के जलें हुए भाग पर लगाने सें बहुत ज्यादा जला हुआ व्यक्ति भी ठीक हो जाता है और उसके शरीर में जले हुए के निशान भी नहीं पड़ते हैं।

48. गेहूं : शरीर के जले हुए भाग पर गेहूं के आटे में पानी मिलाकर लगाने से आराम आता है।

49. शहद : शरीर के जले हुए भाग पर शहद लगाने से जलन दूर होती है। जख्म होने पर शहद को तब तक लगाते रहें जब तक कि जख्म ठीक न हो जायें। जख्म ठीक होने के बाद जलने के जो सफेद निशान बन जाते हैं उन पर शहद लगाकर पट्टी बांधते रहने से निशान कुछ समय में ही मिट जाते हैं।

50. बिहीदाना : बिहीदाना के बीजों को गर्म पानी में डालकर जो लुआबदार घोल बनता है उस घोल को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जल्दी आराम आता है।

51. अलसी :

★ अलसी (तीसी) के तेल, चूने और पानी को एकसाथ मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम होता है।
★ शुद्ध अलसी के तेल और चूने के निथरे हुए पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर अच्छी प्रकार घोट लें। घोटने के बाद यह सफेद मलहम जैसा बन जाता है जिसे अंग्रेजी में कारोन ऑयल कहते हैं। इस मलहम को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जख्म में होने वाला दर्द दूर हो जाता है।

52. अमलतास : अमलतास के पत्तों को पानी के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से तुरन्त ही आराम आ जाता है।

53. आम :

★ आम के पत्तों को जलाकर उसकी राख को शरीर के जले हुए भाग पर छिड़कने से तुंरत ही रोगी को जलन और दर्द से राहत मिल जाती है।
★ आम की गुठली की गिरी को थोड़े से पानी के साथ पीसकर शरीर के आग से जले हुये भाग पर लगाने से तुरन्त शान्ति प्राप्त होती है।
★ आम की गुठली की गिरी को पानी में पीसकर जले हुए भाग पर लगाना लाभकारी रहता है।

54. चीनी : चीनी को थोड़े से पानी में मिलाकर गाढ़ा सा घोल बना लें और इसे शरीर के जले हुए भागों पर लगाएं। इससे जलने के कारण होने वाली जलन तुरन्त शान्त हो जाती है।

55. अजवायन : आग से जल जाने पर जंगली अजवायन के रस को घी में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।

56. सिरस : शरीर के जले हुए भाग पर सिरस के पत्तों को मलने से लाभ होता है।

57. चाय :

★ चाय के उबले हुए पानी को ठंड़ा करके किसी साफ कपड़े के टुकड़े या रूई से शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन और दर्द समाप्त हो जाते हैं।
★ अगर शरीर का कोई अंग किसी भी कारण से जल गया हो या झुलस गया हो तो चाय के उबलते हुए पानी को ठंड़ा करके उसमें साफ कपड़ा भिगोकर जले हुए अंग पर रखकर पट्टी बांधे। इस पट्टी को बार-बार बदलते रहें। इससे जले हुए अंगों पर फफोले नहीं पड़ते और त्वचा पर जलने के निशान भी नहीं बनते।

58. मेथी :

★ मेथी के दानों को पानी के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन शान्त होती है और जलने के जख्म भी नहीं बनते हैं।
★ मेथी के दानों को पानी में पीसकर बने लेप को शरीर के जले हुए भाग पर 3 बार लगाने से जलन और दर्द में राहत मिलती है तथा घाव भी जल्दी ठीक हो जाता है।
★ आग से जल जाने पर दानेदार मेथी को पानी में पीसकर लेप करने से जलन दूर होती है और फफोले नहीं पड़ते हैं।

59. हरीमिर्च : शरीर के जले हुए भाग पर हरीमिर्च को पानी में पीसकर लेप करने से आराम आता है।

60. इमली :

★ इमली की छाल को पीसकर घी में मिलाकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से लाभ होता है।
★ जले हुए घाव पर मीठे तेल के साथ इमली की छाल का 2 से 5 ग्राम सूखा चूर्ण मिलाकर लगाने से लाभ प्राप्त होता है।

61. हल्दी : हल्दी को पानी में घोलकर जले हुए भाग पर लेप करें। सूखने पर इसका लेप बार-बार करने से जल्दी लाभ होता है।

62. मोरपंख : मोर के पंखों के चन्द्र भाग को काटकर मिट्टी के बर्तन में भरकर आग पर पकाकर राख बना लें। इस राख को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जख्म जल्दी समाप्त हो जाते हैं।

63. मजीठ : मजीठ की जड़ तथा चंदन को घी में घिसकर बने लेप को जले हुए अंग पर 2 से 3 बार लगाएं। इस लेप को लगाने से जलन शान्त होती है और घाव भी जल्दी भर जाता है।

64. धनिया : यदि शरीर के किसी अंग को आग ने पकड़ लिया है तो उस समय बडे़ धैर्य से काम लेना चाहिए। सर्वप्रथम उस अंग को पानी में धो लेना चाहिए या फिर उसे कुछ देर तक पानी में डाले रहना चाहिए। ऐसा करने से जलन कम होती है और आराम भी मिलता है। कुछ न हो तो एक कपड़े को पानी से तर करके जले हुए भाग पर रखना चाहिए। इससे जलन पर एक तरह का मलहम लग जाता है। इसके बाद घरेलू चिकित्सा की ओर दौड़ना चाहिए। 50 दाने धनिया, एक टिकिया कपूर और थोड़े से नारियल के तेल को एक साथ मिलाकर खरल या किसी बर्तन में घोंटकर मलहम बना लेना चाहिए फिर इसको दिन में कई बार जले हुए अंगों पर लगाना चाहिए। इस मलहम को लगाने से कुछ ही दिनों में जले का घाव ठीक होने लगेगा और दाग भी नहीं पडे़गा।

65. जामुन – जामुन की छाल को नारियल के तेल में पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाना लाभकारी रहता है।

66. आक : आक की 3 ग्राम जलाई हुई रूई को 10 ग्राम तिल्ली के तेल में खरल करके 10 ग्राम निथरे हुए चूने के पानी में मिला दें। इस पानी में कपड़ा गीला करके जले हुए जख्म पर रखने से आराम आता है। यदि घाव में सूजन आ गई हो तो इस मिश्रण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अफीम भी घोल सकते हैं।

67. धाय : धाय के फूलों के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर जलन के कारण हुए घाव पर लगाते रहने से जलन और दर्द कम हो जाता है और घाव जल्दी भर जाता है।

68. जौ:

शरीर के किसी भाग के जल जाने पर जौ को बारीक पीसकर तिल के तेल में मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
जौ के रस को शरीर पर मलने से जले हुए भाग की जलन मिट जाती है।

69. चिरायता : चिरायता को सिरके और गुलाबजल में पीसकर बने लेप को घाव पर लगाने से घाव जल्दी ही भर जाता है।

70. मूंग : मूंग को पानी मे पीसकर जले हुए स्थान पर लेप करने से लाभ मिलता है।

71. ग्लिसरीन : जले हुए अंगों पर ग्लिसरीन लगाने से दर्द और जलन कम हो जाती है तथा छाले भी नहीं पड़ते हैं।

72. कायफल : शरीर के जल जाने पर कायफल के पेड़ की छाल के रस का लेप करना लाभकारी रहता है।

73. सेमल- सेमल की रूई जलाकर इसकी राख को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।

74. फालसे : फालसे का शर्बत बनाकर पीने से शरीर की जलन शान्त हो जाती है।

75. अनन्तमूल : अनन्तमूल चूर्ण को घी में भून लें। फिर इस लगभग आधा ग्राम से 1 ग्राम तक चूर्ण को 5 ग्राम शक्कर के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से चेचक, टायफायड आदि के बाद की शरीर में होने वाली जलन दूर हो जाती है।

76. पीपल : आग से जले हुए जख्मों पर पीपल की सूखी छाल का चूर्ण घी में पकाकर लगाने से आराम आता है।

77. परवल : कड़वे परवल का काढ़ा और कल्क (चूर्ण) को सरसों के तेल में मिलाकर उसमें सरसों से चार गुना पानी डालकर उबाल लें। पानी जल जाने पर उतार कर छान लें। इसे आग से जल जाने के कारण हुए जख्मों पर लगाने से दर्द, स्राव, जलन और छाले मिट जाते हैं।

78. एरण्ड : एरण्ड के तेल को थोड़े-से चूने में फेंटकर आग से जले घावों पर लगाने से वे शीघ्र भर जाते हैं। एरण्ड के पत्तों के रस में बराबर की मात्रा में सरसों का तेल फेंटकर लगाने से भी जले हुए में लाभ मिलता है।

79. बेल :

★ बेल के ताजे पत्तों के रस को जले भाग पर लगाने से आराम मिलता है।
★ चेचक की बीमारी में जब शरीर में अत्यंत जलन और बेचैनी हो तो बेल के रस में मिश्री मिलाकर पिलाने से तथा बेल के पत्तों का पंखा बनाकर रोगी को हवा करने से लाभ मिलता है।

विशेष : अच्युताय हरिओम अलोवेरा जेल के प्रयोग से जले हुए में लाभ मिलता है।
अच्युताय हरिओम नीम तेल को जले हुए जख्मों पर लगाने से आराम आता है।
प्राप्ति-स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रमों और श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र

नोट :- किसी भी औषधि या जानकारी को व्यावहारिक रूप में आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले यह नितांत जरूरी है ।

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