पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

कब्ज का 41 रामबाण आयुर्वेदिक इलाज | kabj ka Ayurvedic ilaj

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कब्ज का 41 रामबाण आयुर्वेदिक इलाज | kabj ka Ayurvedic ilaj

पेट साफ करने के उपाय ,कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज

परिचय :kabj kya hota hai /kabj ke lakshan

कब्ज से अभिप्राय है, कि मल-त्याग न होना, मल-त्याग कम होना,लगातार पेट साफ न होना,

कब्ज का कारण :kabj ke karan in hindi

खानपान सम्बंधी गलत आदतें जैसे- समय पर भोजन न करना, बासी और अधिक चिकनाई वाला भोजन, मैदा आदि से बनाया गया मांसाहारी भोजन, भोजन में फाइबर की कमी, अधिक भारी भोजन अधिक खाना, शौच को रोकने की आदत, शारीरिक श्रम न करना, विश्राम की कमी, मानसिक तनाव (टेंशन), आंतों का कमजोर होना, पानी की कमी, गंदगी में रहना, मादक द्रव्यों का सेवन, एलोपैथी दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण, भोजन के साथ अधिक पानी पीने, मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ जैसे-पूरी-कचौड़ी, नमकीन, चाट-पकौड़े खाने, अधिक गुस्सा, दु:ख आलस्य आदि कारणों से कब्ज हो जाती है।

कब्ज का आयुर्वेदिक उपचार :kabj ka ayurvedic ilaj

1. त्रिफला (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) :

• त्रिफला का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में लेकर हल्के गर्म पानी के साथ रात को सोते समय लेने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) समाप्त होती है।
• त्रिफला का चूर्ण 6 ग्राम को शहद में मिलाकर रात में खा लें, फिर ऊपर से गर्म दूध पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
• त्रिफला 25 ग्राम, काली हरड़ 25 ग्राम, सनाय 25 ग्राम, गुलाब के फूल 25 ग्राम, बीज रहित मुनक्का 25 ग्राम, बादाम की गिरी 25 ग्राम, काला दाना 25 ग्राम और वनफ्शा 25 ग्राम को आदि लेकर अच्छी तरह पीस लें। इस मिश्रण को गर्म दूध के साथ पीने से कब्ज के रोग को समाप्त करता है।
• त्रिफला (छोटी हरड़, बहेड़ा तथा आंवला) तीनों को एक समान मात्रा में लेकर इसका चूर्ण तैयार कर लेते हैं। फिर रोजाना रात में सोते समय 2 चम्मच चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
• 1 चम्मच त्रिफला के चूर्ण को गर्म पानी के साथ सोने से पहले सेवन करने से कब्ज में आराम मिलता है।
• 50 ग्राम त्रिफला, 50 ग्राम बादाम की गिरी, 50 ग्राम सौंफ, 10 ग्राम सोंठ और 30 ग्राम मिश्री आदि को अलग-अलग जगह कूट लें। इन सबको मिलाकर 6 ग्राम को खुराक के रूप में रात को सोने पहले पी लें।
• त्रिफला गुग्गुल की 2-2 गोलिया दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) गर्म पानी के साथ देने से पुरानी कब्ज़ मिट जाती है।
• त्रिफला के चूर्ण को कुछ घण्टे तक पानी में भिगोकर, छानकर उसका पानी पीने से भी गैस की शिकायत नहीं रहती है।
• 15 से 20 मुनक्का को 250 ग्राम दूध और 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल लें और जब केवल दूध बच जाये, तब इसे उतार दे। मुनक्के को खाकर ऊपर से दूध को पीने से कब्ज की शिकायत में लाभ होता है।

2. मुनक्का :
• रोजाना प्रति 10 मुनक्का को गर्म दूध में उबालकर सेवन करने से लाभ मिलता है।
• 3 पीस मुनक्का, 20 ग्राम किशमिश और एक अंजीर को शाम के दौरान 250 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इन सभी को मसलकर उसमें थोड़ा पानी मिलाकर छान लें। बाद में इसमें एक नींबू का रस निचोंड़ दें और 2 चम्मच शहद को मिलाकर पीने से कुछ ही दिनों कब्ज़ में लाभ मिलता है।
• मुनक्का का ताजा रस 28 मिलीलीटर से 56 मिलीलीटर को चीनी या सेंधानमक मिलाकर पीने से कब्ज दूर हो जाती है।
• मुनक्का को रात को सोने से पहले गर्म दूध के साथ पीने से लाभ होता है।

3. आंवला :
• सूखे आंवले का चूर्ण रोजाना 1 चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद ने से लाभ होता हैं।
• 1 चम्मच आंवले का चूर्ण शहद के साथ रात में लें।
• आंवले के फल का चूर्ण यकृत बढ़ने, सिर दर्द, कब्ज, बवासीर व बदहजमी रोग में त्रिफला चूर्ण के रूप में प्रयोग किया जाता है। 3 से 6 ग्राम की मात्रा में त्रिफला चूर्ण फंकी गर्म पानी के साथ रात में सोते समय लेने से कब्ज मिटता है।
• रात को एक चम्मच पिसा हुआ आंवला पानी या दूध से लेने से सुबह दस्त साफ आता है, कब्ज नहीं रहती। इससे आंत तथा पेट साफ हो जाता है।
• आंवले का मुरब्बा खाकर ऊपर से दूध पीने से कब्ज समाप्त हो जाती है।
• आंवला, हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ लें।
• ताजे आंवले का रस शहद के साथ लेने से पेट खाली होता है।
• आंवला की चटनी खायें

4. नमक :
• रात को तांबे के बर्तन में पानी भरकर रख दें। उसमें 1 चुटकी की मात्रा में नमक डालकर सुबह के समय सेवन करने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।
• 50 ग्राम नमक या कालानमक, लाहौरी नमक 10 ग्राम, अजवायन 5 ग्राम, भुनी हींग 10 ग्राम, त्रिफला व सौंफ 50-50 ग्राम को पीसकर छान लें। इस चूर्ण को खाना खाने के बाद 5 ग्राम गर्म पानी से लें। इससे कब्ज दूर हो जाती है।
• काला नमक, अजवाइन, छोटी हर्र और सौंठ को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। रात को खाने से 1 घण्टे बाद 1 चम्मच गर्म पानी से फंकी लेने से कब्ज दूर होती है और आराम मिलता है।
• 1 से 2 ग्राम नमक को गुनगुने पानी में रोज रात को पीने से कब्ज की शिकायत नहीं रहती हैं, क्योंकि इसको पीने से आंते साफ रहती हैं। शौच खुलकर आती है और पुरानी से पुरानी कब्ज चली जाती है।
• कालानमक और छोटी हरड़ को पीसकर गर्म पानी के साथ खाना खाने के पहले 1 से 2 चम्मच की मात्रा में लेने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।
• नमक, 4 कालीमिर्च के पीस, 4 लौंग के पीस आधी कटोरी पानी में उबालकर पीने से कब्ज में राहत प्राप्त होती है।

5. गिलोय :
• गिलोय का मिश्रण या चूर्ण 1 चम्मच गुड़ के साथ खाने से कब्ज दूर होती है।
• गिलोय का बारीक चूर्ण को गुड़ के साथ बराबर की मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सोते समय सेवन करने से कब्ज का रोग दूर हो जाता है।

6. बथुआ :
• बथुआ की साग-सब्जी बनाकर रोजाना खाते रहने से कब्ज की शिकायत कभी नहीं होती है। यह आमाशय को ताकत देता है। इससे शरीर में ताकत व स्फूर्ति आती है।
• बथुआ को उबालकर इच्छानुसार चीनी मिलाकर एक गिलास सुबह-शाम पीने से कब्ज में आराम मिलता है।
• बथुआ आमाशय को ताकत देता है और कब्ज दूर करता है। यह पेट को साफ करता है। अत: कब्ज वालों को बथुए का साग रोज खाना चाहिए। कुछ हफ्ते लगातार बथुआ का साग खाते रहने से हमेशा होने वाला कब्ज दूर हो जाता है।
• बथुआ और चौलाई की भुजी को मिलाकर सेवन करने से कब्ज नष्ट होती है।

7. चौलाई : चौलाई की सब्जी खाने से कब्ज में लाभ मिलता है।

8. मूंग :
• चावल और मूंग के दाल की खिचड़ी खाने से कब्ज़ में आराम होता है।
• चावल और मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज दूर होती है। 20 ग्राम मूंग की दाल और 10 ग्राम चावल की खिचड़ी बनाएं। फिर इसमें नमक मिलाकर और घी डालकर खाने से कब्ज दूर होकर दस्त साफ आता है।

9. मसूर की दाल : मसूर की दाल खाने से कब्ज में लाभ होता है।

10. तरबूज : तरबूज कुछ दिनों तक सेवन करने से पेट की कब्ज दूर हो जाती है।

11. तिल :
• 60 ग्राम तिल को कूटकर रख लें, फिर इसमें समान मात्रा में गुड़ मिलाकर खाने से कब्ज समाप्त होती है।
• लगभग 6 ग्राम तिल को पीसकर रख लें, फिर इसमें मीठा मिलाकर खाने से कब्ज मिटता है। तिल, चावल और मूंग की दाल की खिचड़ी भी कब्ज को दूर करती है।
• तिल का छिलका उतारकर, मक्खन और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर सुबह-सुबह खाने से कब्ज दूर हो जाती है।
• तिल, चावल और मूंग की दाल की खिचड़ी को खाने से पेट में गैस नहीं रहती है।

12. सज्जीखार : सज्जीखार 3 ग्राम, 3 ग्राम पुराना गुड़ दोनों को मिलाकर रगड़कर छोटी गोलियां बना लें। रोजाना सुबह 1 गोली खुराक के रूप में सेवन करने से कब्ज की बीमारी समाप्त हो जाती है।

13. पीपल :
• पीपल के 5-10 फल को रोजाना खाने से कब्ज का रोग मिट जाता है।
• पीपल के पत्ते और कोमल कोपलों का 40 मिलीलीटर काढ़ा पिलाने से विरेचन (पेट साफ करने वाला) लगता है।
• पीपल के पेड़ का फल और नई कोपलें खाने से पेट मल का रुकना दूर हो जाता है।

14. अंकोल : अंकोल की जड़ का चूर्ण खाने से पेट की कब्ज में आराम मिलता है।

15. ढाक : ढाक के 20 पत्तों को ताजे पानी में पीसकर मरीज को दें, यदि दर्द हल्का हो जाये तो एक बार फिर इसी मात्रा में देने से वायु (गैस) के रोग में राहत देता है।

16. नागदोन : नागदोन और हरड़ का चूर्ण खाने से लाभ होता है।

17. बड़ी पीलू : बड़ी पीलू के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से पेट साफ हो जाता है।

18. दही : दही का तोड़ (खट्टा पानी) पीने से कब्ज दूर हो जाती है।

19. दूध :
• 250 मिलीलीटर गाय का दूध, 250 ग्राम पानी और 5 कालीमिर्च साबुत लेकर आग पर चढ़ा दें और जब पानी जल जाये, तब उतारकर छान लें। इसमें मिश्री मिलाकर पीने से वायुगोला का दर्द मिट जाता है।
• गर्म दूध के साथ ईसबगोल की भूसी या गुलकंद लेने से शौच खुलकर आता है। बवासीर रोग से ग्रस्त रोगियों को भी इसका सेवन करना चाहिए। गाय का ताजा दूध तलुवों पर रगड़ने से बवासीर में राहत मिलती है।
• गर्म दूध के साथ 2 चम्मच गुलाब का गुलकंद या ईसबगोल की भूसी रात को लेने से शौच खुलकर आता है।
• कब्ज होने पर दूध और घी का सेवन भी कर सकते हैं।
• दूध में घी या मुनक्का डालकर सेवन करने से कब्ज नहीं होता है।
• 2 चम्मच गुलकंद को गर्म दूध में डालकर सोने से पहले पीने से सुबह शौच खुलकर आती है।
• 250 मिलीलीटर दूध में 4 चम्मच ईसबगोल की भूसी डालकर पीने से मल ढीला होकर निकल जाता है।
• ईसबगोल 20 ग्राम को दूध के साथ रात में सोने से 30 मिनट पहले सेवन करने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) समाप्त हो जाती है।
• ईसबगोल के बीज की भूसी 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें सुबह उठकर मिश्री में मिलाकर शर्बत बना लें। फिर इसे पीने से पेट की आंते फूल जाती हैं जिससे मल आसानी से बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है। ध्यान रहे कि भूसी को बिना भिगोये सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी कष्ट को बढ़ा देता है।

20. सत्यानाशी :
• सत्यानाशी की जड़ की छाल 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 पीस लेकर पानी में पीस लेने से पेट के दर्द दूर हो जाता है।
• 1 ग्राम से 3 ग्राम तक सत्यानाशी के तेल को पानी में डालकर पीने से पेट साफ हो जाता है।
• सत्यानाशी की जड़ की छाल 6 से 10 ग्राम तक पानी के साथ खाने से शौच साफ आती है।
• पीले धतूरे के बीजों से प्राप्त तेल की 30 बूंदों को दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से कब्ज (kabj)दूर होती है।

21. चाकसू : चाकसू के बीजों को पीसकर चूर्ण बनाकर खाने से पुरानी कब्ज मिट जाती है।

22. मिट्टी :
• कपड़े को पानी से गीला कर लें, उस पर गीली मिट्टी का लेप करके दोबारा इस पर फिर कपड़ा बांधें। रातभर इस तरह पेट पर गीली मिट्टी की पट्टी को पेट पर रखने से कब्ज दूर हो जाती है तथा पेट साफ हो जाता है।
• पेट पर गीला कपड़ा बिछायें। फिर उस पर गीली मिट्टी का लेप करके मिट्टी बिछाकर कपड़ा बांधे। रातभर इस तरह पेट पर गीली मिट्टी रखने से कब्ज दूर होगी। मल बंधा हुआ तथा साफ आयेगा।

23. मुलहठी :
• मुलहठी 5 ग्राम को गुनगुने गर्म दूध के साथ सोने से पहले पीने से सुबह शौच साफ आती है।
• पिसी मुलहठी 125 ग्राम, पिसी सोंठ 3 चम्मच, पिसे गुलाब के सुखे फूल 2 चम्मच, 1 गिलास पानी में उबालकर ठण्डा होने पर छानकर सोते समय रोजाना पीने से पेट में जमा कब्ज और आंव (एक तरह का चिकना सफेद मल) निकल जायेगा।

24. नीम :
• नीम के सूखे फल को रात में गर्म पानी के साथ खाने से शौच खुलकर आती है।
• नीम के फूलों को सुखाकर पीसकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना एक चुटकी रात को गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज में लाभ होता है।
• नीम की 20 पत्तियों को पीसकर 1 गिलास पानी में मिला लें, सुबह-सुबह इससे एक कुल्ला करके यह सारा पानी पीने से कब्ज नहीं रहती है।

25. ईसबगोल :
• ईसबगोल 2 चम्मच, हरड़ 2 चम्मच, बेलक का गूदा 3 चम्मच आदि को पीसकर चटनी बना लें। सुबह-शाम इसमें से 1-1 चम्मच गर्म दूध के साथ सेवन करने से लाभ होता है।
• रात को सोने से पहले ईसबगोल की भूसी को दूध के साथ लेने से सुबह शौच खुलकर आती है।
• ईसबगोल 6 ग्राम को 250 मिलीलीटर गुनगुने दूध के साथ सोने से पहले पी लें। कभी-कभी ईसबगोल की भूसी लेने से पेट फूल जाता है। ऐसा बड़ी आंतों में ईसबगोल पर बैक्टीरिया के प्रभाव से पैदा होने वाली गैस से होता है। इसलिए ध्यान रखें कि ईसबगोल की मात्रा कम से कम ही लें, क्योंकि ईसबगोल आंतों में पानी को सोखती है, जिससे मल की मात्रा बढ़ती है और मल की मात्रा बढ़ने से आंतों की कार्यशीलता बढ़ जाती है, जिससे मल ठीक से बाहर निकल आता है। ईसबगोल लेने के बाद दो-तीन बार पानी पीना चाहिए। इससे ईसबगोल अच्छी तरह फूल जाता है। इसलिए ईसबगोल रात को ही लेना चाहिए और खाने के तुरंत बाद लें।
• रानी आंव या आंतों की सूजन में 100-100 ग्राम बेल का गूदा, सौंफ, ईसबगोल की भूसी और छोटी इलायची को एक साथ पीसकर पाउडर बना लें। अब इसमें 300 ग्राम देशी खांड या बूरा मिलाकर कांच की शीशी में भरकर रख दें। इस चूर्ण की 2 चम्मच मात्रा सुबह नाश्ता करने के पहले ताजे पानी के साथ लें और 2 चम्मच शाम को खाना खाने के बाद गुनगुने पानी या गर्म दूध के साथ 7 दिनों तक सेवन करने से लाभ मिल जाता है। लगभग 45 दिनों तक यह प्रयोग करने के बाद बंद कर देते हैं। इससे कब्ज, पुरानी आंव या आंतों की सूजन के रोग दूर हो जाते हैं।
• कोष्ठबद्धता (कब्ज) होने पर ईसबगोल को जल में घोलकर उसका लुबाव बनाकर उसमें बादाम का तेल मिलाकर पीने से बहुत लाभ मिलता है। कोष्ठबद्धता (कब्ज) दूर होने से पेट का दर्द भी नष्ट हो जाता है।
• ईसबगोल भूसी के रूप में काम में आता है। यह कब्ज को दूर करता है। ईसबगोल के रेशे आंतों में पचते नहीं हैं तथा तरल पदार्थ सूखकर फूल जाते हैं और मल की निकासी शीघ्र करते हैं। इसका लुबाव आंतड़ियों को शीघ्र चलने में सहायता करता है जिससे मलत्याग में सहायता मिलती है। तीन चम्मच ईसबगोल गर्म पानी या गर्म दूध से रात को सेवन करने से कब्ज में लाभ मिलता है।
• ईसबगोल के बीज की भूसी 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें सुबह उठकर मिश्री में मिलाकर शर्बत बना लें। इसे पीने से पेट की आंते फूल जाती हैं जिससे मल आसानी से बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है। ध्यान रहें कि भूसी को बिना भिगोये सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी कष्ट को बढ़ा देता है।
• गर्मी के दिनों में सुबह-शाम 3-3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को मिश्री के मिले हुए जल में कुछ दिनों तक भिगोकर सेवन करने से कब्ज दूर हो जाता है।

26. अदरक :
• अदरक का रस 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है।
• 1 कप पानी में 1 चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। फिर इसे छानकर पीने से कब्ज(kabj) दूर होती है।
• अदरक, फूला हुआ चना और सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।

27. गुलकंद :
अच्युताय हरिओम गुलकंद 30 ग्राम को दूध के साथ रोजाना पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) समाप्त होती है। गुलकंद को खाकर ऊपर से दूध पी जायें। ऐसा 7 दिनों तक करने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।
• गुलकंद (गुलाब की पंखड़ियों से प्राप्त रस) 10 से 20 मिलीलीटर सुबह-शाम सेवन करने से शौच साफ आती है। भूख बढ़ती है और शरीर में ताकत आती है।
• 2 चम्मच गुलकंद को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ सोने से पहले लेने से पेट की गैस में लाभ होता है।
• गुलकंद 2 बड़ा चम्मच, मुनक्का 4 पीस, सौंफ आधा चम्मच को मिलाकर एक कप पानी में उबालकर सेवन करें।
• गुलाब की सूखी कली 20 ग्राम और तालमिश्री 40 ग्राम को मिलाकर 250 मिलीलीटर गर्म दूध के साथ पीने से लाभ होता है।
• गुलकंद, आंवला, हरड़ का मुरब्बा, बहेड़ा का मुरब्बा आदि में से बीजों को बाहर निकालकर पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) 1-1 गोली गर्म दूध या पानी के साथ कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज मिटती है।

28. नींबू :
• नींबू का रस, 5 मिलीलीटर अदरक का रस और 10 ग्राम शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) नष्ट होती है।
• 5 मिलीलीटर नींबू के रस को 10 ग्राम मिश्री में घोलकर पानी के साथ पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) दूर होती है।
• नींबू के रस को पीने से वायु (गैस) का गोला समाप्त हो जाता है।
• गन्ने का रस गर्म करके और नींबू का रस थोड़ी-सी मात्रा में लेकर सुबह के समय एक साथ लेने से लाभ होता है।
• 1 नींबू का रस गर्म पानी के साथ रात को सोने से पहले पी लें। इससे सुबह शौच खुलकर आती है।
• नींबू का रस 2 चम्मच और चीनी 5 ग्राम को मिलाकर शर्बत बना लें। 4-5 दिन तक लगातार पीने से कब्ज में लाभ होता है।
• नींबू के रस में थोड़ी-सी पिसी हुई कालीमिर्च को डालकर सेवन करने से कब्ज नष्ट हो जाती है।
• नींबू के 10 मिलीलीटर रस को 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर सुबह के समय सेवन करने से कोष्ठबद्धता तुरंत समाप्त होती है।
• 1 नींबू का रस 1 गिलास गर्म पानी के साथ रात में सोते समय लेने से पेट साफ हो जाता है। नींबू का रस 15 मिलीलीटर और शक्कर (चीनी) 15 ग्राम लेकर 1 गिलास पानी में मिलाकर रात को पीने से पुराना कब्ज कम हो जाता है।
• नींबू के रस में सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से पेट की बीमारी और गैस बाहर निकल जाती है।
• 1 गिलास गुनगुने पानी में 1 नींबू का रस व एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से कब्ज दूर होती है और शरीर का वजन घटने लगता है।

29. पानी :
• 10 मिलीलीटर पानी को गर्म करके उसमें शहद मिलाकर रात को सोने से 30-40 मिनट पहले पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) की शिकायत दूर होती है।
• कब्ज से पीड़ित व्यक्ति को दिन में 25-30 गिलास पानी पीना चाहिए।
• एक गिलास गर्म पानी में 1 चम्मच नमक मिलाकर पीने से उल्टी आकर मेदा अर्थात आमाशय साफ हो जाता है जिससे कब्ज दूर हो जाती है।
• पानी को पीने से पेट में कब्ज नहीं बनती है, क्योंकि पानी पीने से मल ढीला रहता है और आसानी से शौच के दौरान आ जाता है। यदि कब्ज की शिकायत हो तो सुबह पानी में नींबू को निचोड़कर पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।
• सुबह सोकर उठते ही 1 गिलास पानी पीने तथा भोजन करते समय घूंट-घूंट करके पानी पीने से कब्ज के रोग में लाभ मिलता है।
ध्यान देने योग्य बातें : सर्दी के दिनों में रोजाना डेढ़ से 2 लीटर और गर्मी में लगभग 3 लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए। भोजन के 1 घंटे पहले और लगभग 2 घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए।

30. काबुली हरड़ : काबुली हरड़ को रात में पानी में डालकर भिगो दें। सुबह इसी हरड़ को पानी में रगड़कर नमक मिलाकर 1 महीने तक लगातार पीने से पुरानी से पुरानी कब्ज मिट जाती है।

31. एरण्ड :
• एरण्ड का तेल 30 मिलीलीटर को गर्म दूध में मिश्री के साथ पीने से कब्ज में लाभ होता है।
• 1 कप दूध में 2 चम्मच एरण्ड के तेल को मिलाकर सोते समय पिलाने से पेट की कब्ज नष्ट हो जाती है।
• सोते समय 2 चम्मच एरण्ड का तेल पीने से कब्ज दूर होती है, दस्त साफ आता है। इसे गर्म दूध या गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
• एरण्ड के तेल की 10 बूंदों को रात को सोते समय पानी में मिलाकर सेवन करने से कब्ज (kabj) की बीमारी में लाभ होता है।
• एरण्डी के तेल की 2 से 4 बूंदों को माता के दूध में मिलाकर देना चाहिए।
• अरण्डी के तेल की पेट पर मालिश करने से पेट साफ हो जाता है।
• 6 मिलीलीटर अरण्डी के तेल में 6 ग्राम दही मिलाकर आधे-आधे घण्टे के अन्तर के बाद पिलाने से वायु गोला हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।
• एरण्डी का तेल 20 मिलीलीटर और अदरक का रस 20 मिलीलीटर मिलाकर पी लें, फिर ऊपर से थोड़ा-सा गर्म पानी पीने से वायु गोला में तुरंत लाभ होता है।
• एरण्ड का तेल और उसकी 2 से 3 कलियां खाने से पेट साफ हो जाता है।
• एरण्ड के पत्ते और हरड़ की छाल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से बंद पेट खुल जाता है और शौच खुलकर आ जाती है।
• एरण्डी का तेल 3 चम्मच, बादाम रोगन 1 चम्मच को 250 मिलीलीटर दूध में गर्म कर सोने से पहले लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
• 1 चम्मच एरण्ड का तेल दूध में मिलाकर सोने से पहले पीने से लाभ होता है।
• एरण्ड के तेल की 30 बूंदों को 250 मिलीलीटर दूध में मिलाकर सेवन करने से सामान्य पेट की गैस दूर हो जाती है। नवजात शिशुओं को छोटी चम्मच में दी जा सकती है।

32. बड़ी हरड़ :
• बड़ी हरड़ को पीसकर रख लें। फिर 5 ग्राम चूर्ण को हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) दूर हो जाती है।
• बड़ी पीली हरड़ का छिलका 6 ग्राम कालानमक या लाहौरी आधा ग्राम मिलाकर कूटकर रख लें। इसे सोने से पहले पानी के साथ लेने से पेट साफ होता है।

33. हरड़ :
अच्युताय हरिओम हरड़ चूर्ण गुड़ में मिलाकर सेवन करने से वात-रक्त (खूनी वात) के कारण होने वाला पेट का दर्द दूर होता है।
• छोटी हरड़ 1-1 की मात्रा में दिन में 3 बार चूसने से गैस की बीमारी खत्म हो जाती है।
• हरड़, बहेड़े और आंवले को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को त्रिफला चूर्ण कहते हैं। रात्रि को 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गर्म जल या दूध के साथ सेवन करने से कोष्ठबद्धता नष्ट होती है।
• हरड़ सुबह-शाम 3 ग्राम गर्म पानी के साथ खाने से कब्ज में फायदा मिलता है। इससे बवासीर रोग में भी लाभ होता है।
• हरड़, सनाय और गुलाब के गुलकंद की गोलियां बनाकर खाने से मल बंद (कब्ज) को खुलकर लाता है।
• 10 ग्राम हरड़, 20 ग्राम बहेड़ा और 40 भाग आंवला आदि को मिलाकर चूर्ण बना लें। रात को सोते 1 चम्मच चूर्ण दूध या पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
• हरड़ की छाल 10 ग्राम, बहेड़ा 20 ग्राम, आंवला 30 ग्राम, सोनामक्खी 10 ग्राम, मजीठ 10 ग्राम और मिश्री 80 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें। फिर 10 ग्राम मिश्रण को शाम को सोने से पहले सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।
• छोटी हरड़ और 1 ग्राम दालचीनी मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें, इसमें 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी के साथ रात में सोने से पहले लेने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) दूर होती है।
• छोटी हरड़ 2 से 3 रोजाना चूसने से कब्ज मिटती है।
• छोटी हरड़ को घी में भून लें। फिर पीसकर चूर्ण बना लें। 2 हरड़ों का चूर्ण रात को सोते समय पानी के सेवन करने से शौच खुलकर आती है।
• छोटी हरड़, सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें से 1 चम्मच चूर्ण रात को सोते समय पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

34. छाछ :
• छाछ में पिसी हुई अजवाइन को पीने से कब्ज दूर होती है।
• छाछ पीने से कब्ज, दस्त, पेचिश, खुजली, चौथे दिन आने वाला मलेरिया बुखार, तिल्ली, जलोदर, रक्तचाप की कमी या अधिकता, दमा, गठिया, अर्धांगवात, गर्भाशय के रोग, मलेरियाजनित यकृत के रोग और मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है।
• छाछ में अजवायन और नमक मिलाकर पीने से मलावरोध मिट जाता है।

35. कालानमक : 6 ग्राम काला नमक को देशी घी में भूनकर गर्म पानी के साथ खाने से 3-4 बार ट्टटी आने से पेट हल्का हो जाता है।

36. गुलाब :
• गुलाब के फूल 10 ग्राम, सनाय 10 ग्राम, सौंफ 10 ग्राम और मुनक्का 20 ग्राम को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर रख लें। सुबह उठकर सबको उसी पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। जब पानी 50 मिलीलीटर शेष रह जाये, तब इस काढ़े को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।
• गुलाब के फूल में बहुत सारे रेशे होते हैं अत: यह कब्ज दूर करता है। यह आंतों में छिपे हुए मल को बाहर निकाल देता है। 2-2 चम्मच गुलकंद सुबह-शाम को सोते समय गुनगुने दूध या पानी से लेने से कब्ज का नाश हो जाता है। इससे पेट व आंतों की गर्मी शांत होती है। यह दिमाग को ठंडक प्रदान करती है।
• 2-2 चम्मच गुलकंद सुबह या सोते समय गुनगुने दूध अथवा पानी से लेने से कब्ज पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
• गुलकंद को बराबर मात्रा में अमलतास के गूदे के साथ 1-1 चम्मच या गुलकंद को सनाय की पत्ती के साथ सेवन करने से कब्ज का रोग ठीक हो जाता है।
• गुलाब की पत्ती, सनाय तथा तीनों हर्रों को 3 : 2 : 1 के अनुपात में 50 ग्राम लेकर उबाल लें। उबलने पर चौथाई हिस्सा पानी बाकी रहने पर रात में गुनगुना करके पी जाना चाहिए। कब्ज को दूर करने के लिए यह बहुत ही उपयोगी औषधि है।
• पुराने कब्ज में 2 बड़े चम्मच गुलकंद, 4 मुनक्का व आधा चम्मच सौंफ को साथ-साथ उबालना चाहिए। जब आधा पानी बच जाये तो रात में सोते समय, सर्दी में गर्म तथा गर्मी में ठण्डा पी जाए। करीब 2 गिलास पानी उबालने के लिए रखना चाहिए ताकि 1 गिलास बचे।
• गुलाब की पत्तियां 10 ग्राम, सनाय का 1 चम्मच पिसा हुआ चूर्ण के रूप में, 2 छोटी हरड़ लेकर 2 कप पानी में तीनों को उबाल लें। पानी जब एक कप बच जायें, तब इस बने काढ़े का प्रयोग करने से कब्ज की बीमारी में लाभ होता है।
• गुलाब 10 ग्राम, मजीठ 10 ग्राम, निसोत की छाल 10 ग्राम, हरड़ 10 ग्राम और सोनामाखी 10 ग्राम आदि को 80 ग्राम चीनी में मिलाकर चूर्ण बना लें। लगभग 4 ग्राम चूर्ण को ठण्डे पानी के साथ पीने से लाभ होता है।

37. पपीता :
• कच्चा पपीता या पका पपीता खाने से कब्ज की शिकायत मिट जाती है।
• सुबह के समय पपीते का दूध पीने से कब्ज दूर होती है।
• कब्ज में पका हुआ पपीता सोने से पहले खाने से लाभ होता है।
• खाना खाने के बाद पपीता खाने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।

38. प्याज :
• 1 कच्चा प्याज रोजाना खाने के साथ खाने से कब्ज दूर होती है।
• प्याज के काढ़े को 40 मिलीलीटर दिन में 2-3 बार सेवन करने से लाभ होता है।
• कच्चा प्याज रोजाना भोजन के साथ खाने से कब्ज का रोग ठीक होता है।

39. मूली :
• मूली पर नमक, कालीमिर्च डालकर खाना खाते समय रोजाना 2 महीने तक खाने से कब्ज दूर हो जाती है।
• मूली के पत्तों का रस 20 से 40 मिलीलीटर तक खुराक के रूप में सुबह-शाम सेवन करने से दस्त और पेशाब खुलकर आता है।
• मूली के बीजों का चूर्ण 1-3 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है।
• मूली व उसके पत्तों को काटकर, उसमें प्याज, खीरा या ककड़ी, टमाटर आदि को काटकर मिला लें। इस प्रकार तैयार हुए सलाद में 5-10 बूंद सरसों का तेल भी मिला सकते हैं। भोजन के साथ रोजाना इस प्रकार तैयार किया हुआ सलाद जो पूरे भोजन का एक तिहाई है खाने से कब्ज़ दूर होता है।
• मूली का साग या ताजी मुलायम मूलियां पत्तों सहित खाने या मूली का अचार खाने से कब्ज़ मिटता है।

40. काला दाना :
• काला दाना 9 ग्राम को देशी घी में भूनकर चूर्ण बना लें। इसमें लगभग आधा ग्राम सोंठ को खाने से लगातार 5 से 6 दिनों तक दस्त आकर कब्ज की शिकायत मिट जाती है।
• कालादाना (कृष्णजीरक) 2-3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेट की गैस निकल जाती है और पेट हल्का हो जाता है।

41. मेथी :
• मेथी के पत्तों की सब्जी खाने से कब्ज दूर होती है।
• 2 चम्मच दाना मेथी को खाना खाने के बाद फंकी के द्वारा लेने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है और भूख लगने लगती है।
• भोजन में मेथी की सब्जी सुबह-शाम खाने से कब्ज समाप्त हो जाती है।
• सोते समय 1 चम्मच साबुत मेथी दाने को पानी के साथ पीने से कब्ज दूर होगी।
• पेट में जब कब्ज हो जाए तो मेथी के पत्तों की सब्जी खाना लाभप्रद होगा।
• 1-1 चम्मच मोटा (दरदरी) दानामेथी, ईसबगोल और चीनी मिलाकर रात को गर्म दूध से फंकी लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
• मेथी की नरम पत्तियों का साग बनाकर खाने से कब्ज में राहत मिलती है, रक्त शुद्ध होता है, शक्ति बढ़ती है और बवासीर रोग में लाभ मिलता है।
• मेथी के 3-3 ग्राम की मात्रा में पीसे हुए चूर्ण को सुबह-शाम गुड़ या पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज मिटता है और लीवर (यकृत) को मजबूत बनता है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति यदि मेथी दानों का साग खाएं तो दस्त साफ आता है।
• 100 ग्राम दाना मेथी दरदरी (मोटी) कूटकर 50 ग्राम भूनी हुई छोटी हरड़ पीसकर मिला लें। एक चम्मच सुबह तथा एक चम्मच शाम को पानी के साथ सेवन करने से कब्ज और पेट दर्द में लाभ होगा।
• यदि आंतों की कमजोरी से कब्ज हो तो सुबह-शाम 1-1 चम्मच मेथी दाने का चूर्ण पानी के साथ कुछ दिनों तक लेने से आंतों तथा यकृत को ताकत मिलती है और कब्ज दूर होती है।
• आंतों की कमजोरी से पेट में कब्ज बनती है, इसलिए आंतों को मजबूत बनाने और रोगमुक्त करने के लिए 1-1 चम्मच मेथी पाउडर पानी के साथ कुछ दिनों तक लगातार सेवन करें। इससे कब्ज में राहत मिलती है।
• कब्ज, पेट में अल्सर हो तो एक कप मेथी के पत्तों को उबालकर, शहद में घोलकर सुबह-शाम पीना चाहिए।

कब्ज(kabj)के अन्य उपचार :

• कब्ज़ से पीड़ित रोगी को किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक की देख-रेख में ही कार्य क्षमता के अनुसार ही दो से तीन तक उपवास रखना चाहिए और ध्यान रखे की इलाज के दौरान केवल छाछ का ही सेवन करें।
• उपवास के बाद केला, पपीता, शरीफा और चीकू जैसे- नरम फल ही खाएं।
• मरीज को खाने में सुबह और शाम दही-चावल और पके हुए केला ही देने चाहिए।
• शिशु को माता द्वारा फल-सब्जि़यों आदि का रस पिलाने से ही कब्ज आसानी से समाप्त हो जाती है। गुलकंद खिलाने से भी इससे निजात पाई जा सकती है।
• गुनगुने पानी में शहद की कुछ बूंदे मिलाकर पिलाने से शिशु को कब्ज (गैस) से छुटकारा मिलता है।
• माता का दूध पीने से भी शिशु कब्ज की पकड़ में नहीं आते हैं।हींग को पानी में घिसकर नाभि के आस-पास के भाग पर लेप करने से शिशुओं की कब्ज ठीक हो जाती है।
• सावां (सामा, एक प्रकार का अनाज) है जिसे उबाल या भूनकर खाया जा सकता है। इससे कब्ज दूर हो जाती है।
• गर्भवती स्त्री के कब्ज में और बच्चों की कब्ज में पोय (पोरो, पोई) साग, आहार में लेने से लाभ होता है।

विशेष : कितना भी पुराना कब्ज हो “अच्युताय हरिओम शोधन कल्प चूर्ण ” कब्ज का रामबाण इलाज है

 

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कब्ज का 41 रामबाण आयुर्वेदिक इलाज | kabj ka Ayurvedic ilaj
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