पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

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चिकनगुनिया के सबसे असरकारक घरेलु उपचार | chikungunya in hindi

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चिकनगुनिया के सबसे असरकारक घरेलु उपचार | chikungunya in hindi

चिकनगुनिया (chikanguniya) का कारण ,लक्षण व उपचार

चिकनगुनिया (chikanguniya) एक वायरल रोग है जो की संक्रमित मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलता है। इस रोग को सबसे पहले, तंज़ानिया Tanzania, मारकोंड प्लेटू Markonde Plateau, मोजाम्बिक Mozambique और टनगानिका Tanganyika पर 1952 में फैलते देखा गया था। चिकनगुनिया वायरस जनित रोग है और इस रोग का वेक्टर एडीज एजिप्टी मच्छर है जो डेंगू बुखार और येलो फीवर का भी वेक्टर है। हाल ही में पेरिस के पाश्चर संस्थान ने दावा किया है कि इस वायरस में अब म्युटेशन हो गए हैं और यह वायरस अब टाइगर मच्छर के द्वारा भी फैलाया जा रहा है।

“चिकनगुनिया” शब्द मारकोंड प्लेटू के भाषा के एक शब्द Kungunyala से लिया गया है जिसका मतलब होता है to become contorted मुड़ जाना / झुक जाना, ऐंठ जाना या बिगड़ जाना। यह शब्द इस रोग के शरीर पर देखे प्रभाव के कारण दिया गया क्योंकि इस रोग में शरीर में आर्थराइटिस जैसी स्थिति हो जाती है।

चिकनगुनिया के लक्षण Chikungunya Symptoms :

चिकनगुनिया का इन्क्यूबेशन पीरियड 2-12 दिनों का है, लेकिन आम तौर पर यह 3-7 दिनों में हो सकता है। इन्क्यूबेशन पीरियड के बाद अचानक तेज़ बुखार होता है (> 40 डिग्री सेल्सियस या 104 ° F)।

ठंड लगना, जोड़ों का दर्द या गठिया, व्यग्रता, मतली, उल्टी, सिरदर्द, हल्का फोटोफोबिया भी होता है। हाथ पैरों के जोड़ों में सूजन और दर्द होता है। कुछ रोगियों को अशक्त कर देने वाला जोड़ों का दर्द या गठिया भी हो जाता है जो कुछ सप्ताह से लेकर कुछ महीनों तक परेशान कर सकता है। एक्यूट चिकनगुनिया का बुखार कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ़्ते तक रह सकता है। इससे होने वाली दिक्कतें जैसे की जोड़ों की सूजन, दर्द, गठिया आदि कुछ महीनो या वर्षों तक मरीज़ को परेशान कर सकती है। चिकनगुनिया की डाइगनोसिस प्रायः तब की जाती है जब यह महामारी की तरह फैला हो तथा शरीर में तेज़ बुखार, दाने और आमवाती लक्षण हों।

★ बुखार जिसमें जोड़ों का दर्द हो
★ मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, उल्टी, थकान और शरीर पर दाने
★ जोड़ों का दर्द आम तौर पर कुछ दिनों से लकर हफ्तों तक रह सकता है। लेकिन कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द कई महीनों, या वर्षों के लिए रह सकता है।

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एलोपैथिक उपचार :

★ चिकनगुनिया का कोई विशेष उपचार एलोपैथी में नहीं है।
★ इसकी कोई वैक्सीन भी उपलब्ध नहीं है।
★ उपचार के तरीको में शामिल हैं, इंट्रावीनस फ्लुइड्स देना, ज्वरनाशक दवाई देना, सूजन कम करने की और एनाल्जेसिक दवाओं द्वारा दर्द कम करना।
★ क्लोरोक्विन फास्फेट (250 मिलीग्राम) Chloroquine Phosphate (250 mg) दिन में एक बार दैनिक देने से से चिकनगुनिया से पीड़ित लोगों में लाभ देखा गया है।

आयुर्वेदिक या हर्बल उपचार Ayurvedic or Herbal Treatment of Chikungunya

आयुर्वेद में चिकनगुनिया का उपचार उस बुखार की तरह किया जाता है जिसमें शरीर में बुखार के साथ आर्थराइटिस की समस्या भी हो। इस प्रकार के ज्वरों में वात-पित्त ज्वर, वात-कफ ज्वर और संधिगत सन्निपात ज्वर आते है। चिकनगुनिया जानलेवा तो नहीं है किन्तु शरीर को बहुत ही कष्ट देने वाला रोग है।

चिकनगुनिया के लिए निम्लिखित उपयोगी है:
ज्वरहर वनस्पतियाँ:

=> गिलोय, सोंठ, कालमेघ, पाठा, तुलसी, नीम, त्रिफला, मंजीठ, रसना, गुग्गुलु, हल्दी और निर्गुन्डी

=> नीम की चाय, गिलोय का काढ़ा, त्रिफला का काढ़ा, तुलसी, सोंठ, अदरक का रस आदि का प्रयोग घरेलू उपचार की तरह किया जा सकता है।

=> तुलसी और नीम शरीर की इम्युनिटी को भी बढ़ाते है। यह शरीर में वात-कफ को कम करते हैं।

गिलोय लीवर की रक्षा करने वाली और वायरस जनित ज्वारों को नष्ट करने वाली उत्तम औषध है। गिलोय का काली मिर्च और तुलसी के पत्तों से बना काढ़ा डेंगू के साथ-साथ इसमें भी उपयोगी है। ताज़ी गिलोय न उपलब्ध होने पर, गिलोय घन वटी का प्रयोग किया जा सकता है। ताज़ी गिलोय का काढ़ा गिलोय घन वटी से अधिक प्रभावशाली है।

स्वास्थ्यवर्धक वनस्पतियाँ:

=> आंवले, अश्वगंधा, गिलोय और मुलेठी का सेवन करने से शरीर में बल आता है। ये सभी आयुर्वेद की रसायन या टॉनिक औषधियां हैं।

आयुर्वेदिक दवाएं:

चिकनगुनिया के उपचार के लिए उपयोगी दवाएं

नीचे दी गई दवाओं को २ सप्ताह तक, गर्म पानी के साथ लें। सटीक दवा शरीर में देखे जा रहे लक्षणों, दवा के प्रभाव पर तय की जाती है।

★ संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
★ सुदर्शन घन वटी 500mg 1 गोली दिन में तीन बार।
★ अमृतारिष्ट 15-30 ml दिन में दो बार।

अथवा

★ संजीवनी वटी (100 mg) दिन में दो बार।
★ त्रयोदशांग गुग्गुलु 500mg दिन में तीन बार।
★ महारस्नादी क्वाथ 45 ml दिन में दो बार।

लक्षणों के आधार पर इनका सेवन करें:

★ बुखार और दर्द: दशमूल काढ़ा का सेवन करें।
★ बुखार के लिए: पटोलादि क्वाथ अथवा पञ्च तिक्त क्वाथ अथवा सुदर्शन चूर्ण का सेवन करें।
★ बुखार जिसमें कफ की अधिकता हो: निम्बादी क्वाथ
★ आमवात, गठिया, आर्थराइटिस जैसी स्थिति: रस्नादी क्वाथ अथवा महारास्नादि क्वाथ अथवा महा योगराज गुग्गुलु अथवा योगराज गुग्गुलु अथवा रसना सप्तक क्वाथ का सेवन करें।
★ पुराने बुखार में: आरोग्यवर्धिनी गुटिका का सेवन करें।
★ त्वचा पर दाने/रैशेस: गुडूच्यादी क्वाथ अथवा बिल्वादी गुटिका अथवा हरिद्रा खण्ड का सेवन करें।

चिकनगुनिया में गुग्गुलु का सेवन:

गुग्गुलु क्योंकि शरीर में सूजन को दूर करते हैं इसलिए चिकनगुनिया में विशेष रूप से उपयोगी है। जब बुखार ठीक भी हो जाता है तो श्री में जोड़ों की दिकात रह जाती है। ऐसे में निम्न से किसी एक गुग्गुलु का सेवन शरीर में दर्द सूजन में राहत देता है:

★ अमृता गुग्गुलु Amrita Guggulu (2 tablets twice daily)
★ योगराज गुग्गुलु Yogaraj guggulu (2 tablets thrice daily)
★ महायोगराज गुग्गुलु Maha yogaraja Guggulu (2 tablets twice daily)
★ सिंहनाद गुग्गुलु Simhanada Guggulu (2 tablets thrice daily)
★ गोक्षुरादी गुग्गुलु Gokshuradi Guggulu (2 tablets twice daily)
★ कैशोर गुग्गुलु Kaishore Guggulu (2 tablets twice daily)
★ त्रयोदाशांग गुग्गुलु Trayodashanga Guggulu (2 tablets thrice daily)

अन्य सुझाव :

★ पर्याप्त आराम करें।
★ पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों, ओआरएस, फलों का रस, संतरे का रस, अनार का रस और अन्य तरल पदार्थ का सेवन करें।
★ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी की कमी न होने दें।
★ दूध, फलों का रस, इलेक्ट्रोलाइट समाधान (ओआरएस) और जौ/चावल का पानी का सेवन करें।
★ गेंहू के जवारे का २०-२५ ml जूस सुबह पीने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट की आपूर्ति होती है और ताकत मिलती है।
★ विटामिन सी का सेवन करें यह इम्युनिटी को बढ़ता है और आयरन के अवशोषण में भी मदद करता है।
★ नारियल पानी पियें।

पथ्य What to eat :

जब तक शरीर का तापक्रम सामान्य न हो जाये, रोगी को तरल आहार ही दें। फलों के रस के सेवन से शरीर में कमजोरी कम करने में साहयता होगी और ज़रूरी पोषक पदार्थों की आपूर्ति भी होती रहेगी।

रोकथाम और नियंत्रण :

★ चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए सबसे ज़रूरी है मच्छर के काटने से बचा जाए।
★ सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
★ पूरी बांह के कपड़े, फुल पेंट पहनें।
★ अगर आस-पास में किसी को यह संक्रमण है तो विशेष सावधानी बरते।
★ इसका नियंत्रण करने के लिए मच्छरों के ब्रीडिंग स्थानों को नष्ट करना होगा। कूलर, A/C, चिड़ियों के लिए रखे पानी, गमले में रुके पानी को साफ़ कर दें। घर के आसपास पानी न इकठ्ठा होने दें।

 

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