पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

फटी एड़ियों के 34 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Home Remedies for Cracked Heels

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फटी एड़ियों के 34 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Home Remedies for Cracked Heels

शरीर में उष्णता या खुश्की बढ़ जाने, नंगे पैर चलने-फिरने, खून की कमी, तेज ठंड के प्रभाव से तथा धूल-मिट्टी से पैर की एड़ियां फट जाती हैं।

यदि इनकी देखभाल न की जाए तो ये ज्यादा फट जाती हैं और इनसे खून आने लगता है, ये बहुत दर्द करती हैं। एक कहावत शायद इसलिए प्रसिद्ध है- जाके पैर न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।
आइये जाने बिवाई (फटी एड़िया adi ka fatna ) के आयुर्वेदिक घरेलू उपचार(gharelu Upchar) | Home Remedies For Cracked Heels in hindi

उपचार :

प्रथम प्रयोगः चमेली के पत्तों के 400 मि.ली. रस को 100 ग्राम घी में मिलाकर गर्म करें। जब रस जल जाये तब उस घी को लगाने से बिवाई( Fati Ediyon) मिटती है।

दूसरा प्रयोगः ऐड़ी पर नींबू घिसने से बिवाई में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः महुए के फल (टोली, डोरिया) का तेल लगाकर सिंकाई से अथवा कोकम का तेल लगाने से लाभ होता है।

चौथा प्रयोग : रात्रि सोने से पहले ग्लिसरीन, गुलाबजल और जैतून के तेल को समभाग एकसाथ मिला लें। फिर इस तेल से तलुवों तथा एड़ियों की मालिश करें। ऐसा प्रतिदिन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

पाँचवा प्रयोग : हरी मुलायम घास और नीम के 10 से 12 पत्ते पीसकर पूरी पगतली में अच्छी तरह से लगाकर आधे घंटे बाद धो लें। इससे एड़िया(adi) जल्दी ही ठीक हो जाती है।

छठा प्रयोग : फटी हुई एड़ियों को ठीक करने के लिए कच्चे पपीते को पीस लें। इसके बाद इसमें जरा-सा सरसों का तेल तथा हल्दी मिलाएं और इस पेस्ट को एड़ियों पर लगाकर कपड़ा बांध लें। इस प्रकार से उपचार करने से कुछ ही दिनों में फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

सातवा प्रयोग : अमचूर का तेल 50 ग्राम, मोम 20 ग्राम, सत्यानाशी के बीजों का पावडर 10 ग्राम और शुद्ध घी 25 ग्राम। सबको मिलाकर एक जान कर लें और शीशी में भर लें। सोते समय पैरों को धोकर साफ कर लें और पोंछकर यह दवा बिवाई में भर दें और ऊपर से मोजे पहनकर सो जाएं। कुछ दिनों में बिवाई दूर हो जाएगी, तलवों की त्वचा साफ, चिकनी व साफ हो जाएगी।

आठवां प्रयोग : त्रिफला चूर्ण को खाने के तेल में तलकर मल्हम जैसा गाढ़ा कर लें। इसे सोते समय बिवाइयों में लगाने से थोड़े ही दिनों में बिवाइयां (Crack heel)दूर हो जाती हैं।

नौवा प्रयोग : चावल को पीसकर नारियल में छेद करके भर दें और छेद बन्द करके रख दें। 10-15 दिन में चावल सड़ जाएगा, तब निकालकर चावल को पीसकर बिवाइयों में रोज रात को भर दिया करें। इस प्रयोग से भी बिवाइयां(Crack heel) ठीक हो जाती हैं।

दसवा प्रयोग : गुड़, गुग्गल, राल, सेंधा नमक, शहद, सरसों, मुलहटी व घी सब 10-10 ग्राम लें। घी व शहद को छोड़ सब द्रव्यों को कूटकर महीन चूर्ण कर लें, घी व शहद मिलाकर मल्हम बना लें। इस मल्हम को रोज रात को बिवाइयों पर लगाने से ये कुछ ही दिन में ठीक हो जाती हैं।
विशेष : ” अच्युताय हरिओम मलहम ” को कटी-फटी एड़ियों में लगाने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. मोम :

* 1 ग्राम मोम और 4 ग्राम तिल को मिलाकर गर्म करके लेप बनाकर फटी एड़ियों पर लगाने से फटी एड़ियां सुन्दर हो जाती हैं।

* एड़ियों के ज्यादा फटने या उनमें खून निकलने की हालत में एड़ियों को रात को गर्म पानी से धोकर उनमें गर्म मोम लगाने से फटी एड़िया( Fati Ediyon) ठीक हो जाती हैं।

2. नमक : देसी घी में नमक मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाने से एड़ियों की त्वचा मुलायम रहती है और हाथ-पैर फटते नहीं हैं।

3. कालीमिर्च : कालीमिर्च, राल और कत्थे को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। फिर इसमें 4 चम्मच देसी घी और 4 चम्मच चमेली का तेल मिला लें और बर्तन में डालकर गर्म कर लें। फिर इसे एक शीशी में भरकर रख लें। इस तेल को लगाने से एड़ियां फटना बन्द हो जाती हैं।

4. शलगम : शलजम को उबालकर उसके पानी से बिवाइयों (फटी एड़ियां) को धोकर उसके बाद उन पर शलजम को रगड़े। रात के समय इसका इस्तेमाल करके फटी हुई एड़ी पर साफ कपड़ा लपेट लें। इसके प्रयोग से फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

5. प्याज :

* कच्चे प्याज को पीसकर बांधने से या लेप करने से बिवाइयों (फटी एड़ियों) में लाभ होता है।

* कच्चे प्याज को पीसकर एड़ियों पर बांधने से फटी एड़िया ठीक हो जाती हैं।

6. पपीता : पपीते के छिलकों को सुखाकर और पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में ग्लिसरीन मिलाकर दिन में 2 बार कटी-फटी एड़ियों( Fati Ediyon) और पैरों में लगाने से बहुत जल्दी लाभ होता है।

7. हल्दी : कच्चे दूध में पिसी हुई हल्दी को मिलाकर शरीर पर लेप करने से त्वचा मुलायम होती है और हाथ-पैर फटते नहीं हैं।

8. एरण्ड : पैरों को गर्म पानी से धोकर उनमें एरण्ड का तेल लगाने से बिवाइयां (फटी एड़ियां) ठीक हो जाती हैं।

9. आलू : सूखे और फटे हुए हाथों को ठीक करने के लिए आलू को उबालकर, उसका छिलका हटाकर पीसकर उसमें जैतून का तेल मिलाकर हाथों पर लगाने के 10 मिनट बाद हाथों को धोने से हाथ सुन्दर हो जाते हैं।

10. दूध : सर्दी के मौसम में अक्सर चेहरा सूखकर उसकी चमक खत्म हो जाती है। चेहरे की चमक दोबारा लाने के लिये कच्चे दूध में नींबू का रस मिला लें और इसे रूई से हल्का-हल्का चेहरे पर लगायें और थोड़ी देर के बाद साफ पानी से चेहरे को धो लें।

11. सरसों का तेल :

* अगर एड़ियां फट गई हो और उनमें झुर्रियां (दरार) पड़ गई हो तो रात को सोने से पहले एड़ियों में सरसों का तेल लगा लें। सुबह एड़ियों को किसी खुरदरी चीज से हल्के से रगड़कर धो लें। ऐसा लगातार 15 दिनों तक करने से फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

* सरसों के तेल से एड़ियों पर लेप करने से एड़ियां फटती नहीं हैं।

* सरसों के तेल को गर्म करके बिवाइयों (फटी एड़ियों) की सिंकाई करने से लाभ होता है।

* सर्दियों में पैर फट जाये तो रात को सोते समय उन पर सरसों का तेल लगाकर, ऊपर से पिसी हुई हल्दी डालकर सो जायें। कुछ दिन ऐसा करने से फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती है।

12. वैसलीन : एड़ियों के फटने पर रोजाना नहाते समय थोड़ी देर पहले अपनी एड़ियों को पानी में भिगो लें और जब एड़ियों की चमड़ी फूल जाए तो खुरदरे पत्थर, मैल निकालने वाले या नायलोन के ब्रश से एड़ियों को रगड़कर उन पर वैसलीन लगा लें।

13. आकड़ा : 1 मुट्ठी आकड़े के फूलों को 2 गिलास पानी में रात को उबालें और इसकी भाप से एड़ियों को सेंके। इसके बाद गर्म-गर्म फूलों को एड़ियों पर बांध लें। 1 सप्ताह तक रोजाना इस प्रकार करते रहने से एड़ियों का दर्द दूर हो जाता है। शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो तो इस प्रयोग से लाभ होता है।

14. चमेली : चमेली के पत्तों के ताजा रस को फटी एड़ियों पर लगाने से लाभ होता है।

15. आम : आम के ताजा कोमल पत्तों को तोड़ने से जो एक प्रकार का द्रव पदार्थ निकलता है उस द्रव पदार्थ को एड़ी के फटे हिस्से पर लगाने से फटी एड़ियों में आराम आता है।

16. दूब हरी : फटी हुई एड़ियों पर दूब का लेप लगाने से उनमें होने वाला दर्द कम हो जाता है।

17. गेंदा : गेंदे के पत्तों का रस वैसलीन में मिलाकर 2-3 बार लगाने से फटे-हाथ पैरों में लाभ मिलता है।

18. घी : देशी घी और नमक को एकसाथ मिलाकर फटी एड़ियों पर लगाने से एड़ियों की त्वचा कोमल रहती है और सर्दियों में हाथ-पैर भी नहीं फटते हैं।

19. पीपल :

* पीपल के पेड़ के 20 पत्तों को तोड़कर और पीसकर 4 गिलास पानी में अच्छी तरह उबाल लें। उबलने पर 3 गिलास पानी रह जाने पर पानी को छानकर, कपड़ा भिगोकर फटी हुई एड़ियों की सिंकाई करें और बाद में इसी पानी में उन्हें धो लें। इससे फटी हुई एड़ियां कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती हैं।

* हाथ-पैर फटने पर पीपल के पत्तों का रस या दूध लगाने से लाभ होता है।

20. पानी : एड़ियों की त्वचा खासकर औरतों की एड़ियों की जल्दी ही कठोर, काली और सूखी हो जाती है। सोने से पहले रात को रोजाना एड़ियों को गर्म पानी और साबुन से धोकर-पोंछकर रगड-रगड़कर उन पर तेल लगाने से एड़ियां सुन्दर और मुलायम हो जाती हैं।

21. बरगद : एड़ियों की फटी हुई दरारों में बरगद का दूध भरकर मलते रहने से कुछ ही दिनों में फटी हुई एड़िया ठीक हो जाती हैं।

22. मेहंदी : हाथ-पैरों के फटने पर मेहंदी लगाने से लाभ होता है।

23. तिल :

1 ग्राम देशी पीला मोम और 4 ग्राम तिल के को तेल मिलाकर गर्म करके मरहम बनाकर लगाने से फटी हुई एड़िया मुलायम हो जाती हैं।
मोम और सेंधानमक को मिलाकर गर्म करके मलने से फटी हुई एड़ियां ठीक हो जाती हैं।

24. नींबू :

* दूध में नींबू का रस और ग्लिसरीन की कुछ बूंदों को मिलाकर 15 मिनट तक हाथों पर लगा रहने दें। इससे घर में काम-काज की वजह से जिनकी उंगलियां काली पड़ जाती है वह ठीक हो जाती हैं।

* ज्यादा गर्मी या सर्दी के मौसम में अक्सर एड़ियां फट जाती हैं। एड़ियां ज्यादातर धूल जमने के कारण फटती हैं। इसलिए रोजाना रात को सोते समय गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर उस पानी से पैरों को अच्छी तरह से धों लें और फिर उनमें वैसलीन या ग्लिसरीन लगा लें।

सामग्री : 100 ग्राम सफेद वैसलीन, 50 ग्राम मोम, 20 ग्राम ग्लिसरीन, 2 नींबू का छना हुआ रस और खुशबू जितनी जरूरत हो।

विधि : सफेद वैसलीन और मोम को एक छोटे पतीले में डाल दें। आग पर एक बड़े पतीले में आधा पतीला पानी भरकर गर्म होने के लिए रख दें। जब पानी में उबाल आने लगे तो उसमें छोटे पतीले को रख दें पर ध्यान रहे बड़े पतीले का पानी छोटे पतीले के अन्दर नहीं जाये। जब सफेद वैसलीन और मोम पिघलकर एक हो जाये तो उन्हें लकड़ी की किसी ड़ड़ी से हिलायें और इसमें ग्लिसरीन डालकर अच्छी तरह से हिला लें। यदि यह जमने लगे तो इसे फिर दोबारा से गर्म पानी के पतीले में रख दें। अब इसमें नींबू, गुलाब, चमेली और मोंगरा जिसकी भी खुशबू पसन्द हो उसका रस डाल दें तथा गर्म-गर्म ही किसी चौडे़ मुंह वाली शीशियों में भरकर ठंड़ा होने के लिए रख दें। इसे त्वचा पर रात को सोने से पहले लगायें दिन में नहीं, नहीं तो दिन भर वातावरण में उपस्थित मिट्टी त्वचा पर चिपक जायेगी। इसे पैरों और उंगलियों पर लगाकर हल्के-हल्के हाथ से त्वचा पर मल लें। इससे त्वचा चिकनी और मुलायम हो जाती है तथा बिवाई (फटी एड़िया) ठीक हो जाती हैं।

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