बार बार पेशाब आने के कारण लक्षण और उपचार | Bar Bar Peshab Aane ka Gharelu ilaj

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बार बार पेशाब आने के कारण लक्षण और उपचार | Bar Bar Peshab Aane ka Gharelu ilaj

बार बार पेशाब आने के कारण : bar bar peshab ana ki waja

क्षय रोग की पैत्रिक प्रवृत्ति होना, हिस्टीरिया, चिन्ता, सिर पर चोट लग जौना, यकृत अथवा आमाशय के विकार, सर्दी लग जाना, शराब पीना, आतशक, कब्ज या पौष्टिक भोजन न मिल पाने आदि कारणों से यह रोग होता है।वंश परम्परागत विकृति से भी यह होता है।

रोग के प्रमुख लक्षण :

✦ इस रोग में रोगी को चौबीस घन्टे में छह  से आठ लीटर के लगभग ‘‘मूत्र” आता है।
✦ बच्चों और युवाओं को यह रोग अधिक होता है।  bar bar peshab ka ilaj
✦ कब्ज, मन्दाग्नि, प्यास की अधिकता, मूत्र अत्यधिक मात्रा में आना, मूत्र का रंग हल्का पीला होना, अधिक मूत्र आने के कारण अनिद्रा तथा दिन-प्रतिदिन क्षीण होते चले जान ।
✦प्रायः कमर में दर्द रहना आदि लक्षण होते है। कई बार यह कमर का दर्द बढ़ कर रोगी की जंघाओं और पिन्डलियों तक पहुँच जाता है।
✦ मूत्र का आपेक्षिक गुरुत्व 1000 से 1005 तक तथा जीभ लाल, चमकदार रहे, मन्दाग्नि, सिरदर्द, सुस्ती आदि होने से इस रोग को आसानी से पहिचाना जा सकता है।

विशेष :

क्षय रोग के रोगी को यदि यह रोग हो जाये तो उसकी मृत्यु तक हो सकती है। रोग बढ़ जाने पर शरीर की मांसपेशियां घुलने लग जाती है और रोगी दिन प्रतिदिन दुर्बल होता चला जाता है।
आइये जाने बार बार पेशाब आने से छुटकारा दिलाने वाले घरेलू नुस्खे के बारे में |

बार बार पेशाब आना (बहुमूत्र) के घरेलू उपचार : bar bar peshab aane ke gharelu upchar

1- मिश्री 40 ग्राम, मुलहठी 30 ग्राम, काली मिर्च 20 ग्राम लें और कूटपीसकर चूर्ण बनायें। फिर 4 ग्राम दवा गाय के घी में मिला कर सुबह-शाम चटायें। एक सप्ताह में ही लाभ हो जायेगा।  ( और पढ़ेबार बार पेशाब आने के कारण व 25 सरल घरेलु उपचार )

2- रूमी मस्तंगी, दालचीनी, शक्कर तीनों को समान मात्रा में लें। यह मिश्रण 3 ग्राम प्रातः सायं गर्म जल से लें । एक सप्ताह में आराम हो जायेगा।

3- काले तिल, पुराना गुड़, दोनों को समान भाग लेकर 1-1 ग्राम की गोलियाँ बना लें । सुबह, दोपहर, शाम खायें ।खस-खस के दाने 20 ग्राम तथा गुड़ 20 ग्राम लें। इसे 1-1 ग्राम प्रातः सायं जल से दें।

4-तिल काले 40 ग्राम, अजवायन 20 ग्राम मिलाकर बारीक पीसलें। फिर 60 ग्राम गुड़ मिला लें। इस योग को 6-6 ग्राम खायें। बहुमूत्र नाशक बहुमूल्य योग है।
विशेषः-छोटे बच्चे जो रात्रि में बिस्तर पर मूत्र कर देते हैं, उस में भी परम उपयोगी है।  ( और पढ़ेतिल खाने के 79 जबरदस्त फायदे )

5-रीठे की गुठली का चूर्ण आधा ग्राम सुबह-शाम प्रातः सायं ताजे पानी के साथ देने से बहुमूत्र रोग एक सप्ताह ठीक हो जाता है।

6- तिल काले 5 ग्राम, मिश्री 5 ग्राम तथा नौशादर 4 ग्रेन लें। यह एक खुराक है। तीनों को कूट-पीसकर प्रातः सायं 2-3 महीने सेवन करायें।

7- 6 माशा काले तिल और प्रवाल-भस्म का सेवन करने से मूत्रातिसार मिट जाता है। ( और पढ़ेप्रवाल पिष्टी के 6 हैरान करदेने वाले लाजवाब फायदे  )

8- बड़ की छाल का क्वाथ पीने से बहुमूत्र-रोग में लाभ होता है।

9- एक-एक माशा जावित्री और मिश्री मिलाकर पीस लें। इसके सेवन करने से मूत्रातिसार में लाभ होता है।

10- आँवले के रस में 6 माशा शहद मिलाकर पीने से बहुमूत्र-रोग मिट जाता है। ( और पढ़े – आँवला रस के इन 16 फायदों को जान आप भी रह जायेंगे हैरान )

11- आँवले के फूल या पच्चाङ्ग का चूर्ण साढ़े तीन माशा सेवन करने से पेशाब के साथ-साथ अधिक शक्कर आना भी मिट जाता है।

12- जायफल और सफेद मूसली को समभाग लेकर फङ्की लेने से-बहुमूत्र में लाभ होता है।

13-पके केले के सेवन से भी मूत्रातिसार मिट जाता है।

14- चार माशा तुख्मलंगा सात सात दिन तक खाने से मूत्रातिसार में लाभ होता है।

बहुमूत्रता नाशक प्रमुख योग : bar bar peshab aane ka ayurvedic ilaj

बहुमूत्रता के रोगी को निम्न योग प्रयोग करवाकर निरोगी करें-

1. बंग भस्म 15 से 30 मि.ग्रा. मधु से दिन में 3-4 बार चटायें।

2.  शिलाजीत वटी ½ से 1 गोली तक सुबह-शाम ठन्डे जल या दूध से दें।

3.  मधुमेहान्तक रस ¼ से ½ गोली, गिलोय स्वरस, केले की पक्की फली या गूलर के काढ़े से सुबह-शाम दें। यह योग मधुमेह के अतिरिक्त बहुमूत्र में भी उपयोगी है।

4.  महाराज बंग भस्म-15 से 30 मि.ग्रा. मलाई के साथ सुबह-शाम चटायें।
नोट:-यह भस्म बहुमूत्र के अतिरिक्त प्रमेह, नपुसंकता, वीर्यस्राव आदि रोगों में भी गुणकारी है तथा वीर्य स्तम्भक एवं शक्तिप्रद भी है।

5.  बहुमूत्रान्तक रस की चौथाई से 1 गोली तक सुबह-शाम दोनों समय गूलर के क्वाथ या ठन्डे जल से दें।
अधिक प्यास लगने पर शालपर्णी, मुलहठी, दाब की जड़, मुनक्का, श्वेत चन्दन, हरड़ का बक्कल, महुआ के फूल 6 ग्राम लेकर कुचलकर रात को 250 मि.ली. जल में भिगों दें तथा प्रातः काल मसलकर छानकर रखलें। फिर दिन भर प्यास लगने पर इस द्रव्य को थोड़ा-थोड़ा पिलायें। इसके बाद सुबह भिगोकर रात में उपयोग में लायें।

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें )

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