खाना पकाने में इन आयुर्वेदिक सिद्धांतों की अवहेलना न करें

आयुर्वेदिक कूकिंग आज कल कूकरी शोज़ की और रेसिपीज़ की भरमार है . पर हम खाना पकाने में आयुर्वेदिक सिद्धांतों की पूरी तरह से अवहेलना कर देते हैं , जिसकी वजह से आज स्वास्थ्य सम्बन्धी कई समस्याएँ आ रही है .अगर कोई ऐसी बिमारी है जो वर्षों से ठीक नहीं हो रही तो खाने में ये आजमा कर देखे

आयुर्वेद अनुसार भोजन के तीन प्रकार

सात्विक भोजन :

यह ताजा, रसयुक्त, हल्की चिकनाईयुक्त और पौष्टिक होना चाहिए। इसमें अन्ना, दूध, मक्खन, घी, मट्ठा, दही, हरी-पत्तेदार सब्जियाँ, फल-मेवा आदि शामिल हैं। सात्विक भोजन शीघ्र पचने वाला होता है। इन्हीं के साथ नींबू, नारंगी और मिश्री का शरबत, लस्सी जैसे तरल पदार्थ बहुत लाभप्रद हैं। इनसे चित्त एकाग्र तथा पित्त शांत रहता है। भोजन में ये पदार्थ शामिल होने पर विभिन्न रोग एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से काफी बचाव रहता है।

राजसी भोजन :

इसमें सभी प्रकार के पकवान, व्यंजन, मिठाइयाँ, अधिक मिर्च-मसालेदार वस्तुएँ, नाश्ते में शामिल आधुनिक सभी पदार्थ, शक्तिवर्धक दवाएँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा एवं व्यसन की सभी वस्तुएँ शामिल हैं। राजसी भोज्य पदार्थों के गलत या अधिक इस्तेमाल से कब, क्या तकलीफें हो जाएँ या कोई बीमारी हो जाए, कहा नहीं जा सकता।

इनसे हालाँकि पूरी तरह बचना तो किसी के लिए भी संभव नहीं, किंतु इनका जितना कम से कम प्रयोग किया जाए, यह किसी भी उम्र और स्थिति के व्यक्ति के लिए लाभदायक रहेगा। वर्तमान में होनेवाली अनेक बीमारियों का कारण इसी तरह का खानपान है, इसलिए बीमार होने से पहले इनसे बचा जाए, वही बेहतर है।
इसमें सभी प्रकार के पकवान, व्यंजन, मिठाइयाँ, अधिक मिर्च-मसालेदार वस्तुएँ, नाश्ते में शामिल आधुनिक सभी पदार्थ, शक्तिवर्धक दवाएँ, चाय, कॉफी, कोको, सोडा, पान, तंबाकू, मदिरा एवं व्यसन की सभी वस्तुएँ शामिल हैं।

तामसी भोजन :

इसमें प्रमुख मांसाहार माना जाता है, लेकिन बासी एवं विषम आहार भी इसमें शामिल हैं। तामसी भोजन व्यक्ति को क्रोधी एवं आलसी बनाता है, साथ ही कई प्रकार से तन और मन दोनों के लिए प्रतिकूल होता है।

 

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भोजन बनायें तो इन बातों का रखे ध्यान :

– सूप बनाते समय उसमे दूध नहीं डाले .

– दही खट्टा हो तो उसमे दूध नहीं डाले .

– ओट्स पकाते समय उसमे दूध दही साथ साथ न डाले .

– चाय कॉफ़ी में शहद ना डाले .

– पूरी , भटूरे , मिठाइयां डालडा घी में ना बना कर शुद्ध घी में बनाए .

– नमकीन चावलों में , सब्जी की करी में दूध न डाले .

– खट्टे फलों के साथ , फ्रूट सलाद में क्रीम या दूध न डाले .

– दही बड़ा विरुद्ध आहार है .

– देर रात दही , आइसक्रीम आदि का सेवन न करें .

– आटा लगाने के लिए दूध का इस्तेमाल ना करे .

– गर्मियों में हरी मिर्च और सर्दियों में लाल मिर्च ला सेवन करे .

– सुबह ठंडी तासीर की और शाम के बाद गर्म तासीर के खाने का सेवन करे .

– पकौड़ों के साथ चाय या मिल्क शेक नहीं गरम कढ़ी ले .

– फलों को सुबह नाश्ते के पहले खाए . किसी अन्य खाने के साथ मिलाकर ना ले .कच्चा सलाद भी खाने के पहले खा ले .

– दही वाले रायते को हिंग जीरे का तडका अवश्य लगाएं .

– दाल में एक चम्मच घी अवश्य डाले .

– खाली पेट पान का सेवन ना करे .

– खाने के साथ पानी नहीं ज़्यादा पानी डाला छाछ या ज्यूस या सूप पियें .

– अत्याधिक नमक और खट्टे पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं .

 

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