ब्राह्मी के 26 जबरदस्त फायदे व चमत्कारिक औषधीय प्रयोग | Brahmi ke Fayde Hindi

Home » Blog » Herbs » ब्राह्मी के 26 जबरदस्त फायदे व चमत्कारिक औषधीय प्रयोग | Brahmi ke Fayde Hindi

ब्राह्मी के 26 जबरदस्त फायदे व चमत्कारिक औषधीय प्रयोग | Brahmi ke Fayde Hindi

ब्राह्मी के लाभ : Benefits Of Brahmi in Hindi

ब्राह्मी का पौधा(brahmi ka podha) हिमालय की तराई में हरिद्वार से लेकर बद्रीनारायण के मार्ग में अधिक मात्रा में पाया जाता है। जो बहुत उत्तम किस्म का होता है। ब्राह्मी पौधे का तना जमीन पर फैलता जाता है। जिसकी गांठों से जड़, पत्तियां, फूल और बाद में फल भी लगते हैं। इसकी पत्तियां स्वाद में कड़वी और काले चिन्हों से मिली हुई होती है। ब्राह्मी के फूल छोटे, सफेद, नीले और गुलाबी रंग के होते हैं। ब्राह्मी के फलों का आकार गोल लम्बाई लिए हुए तथा आगे से नुकीलेदार होता है जिसमें से पीले और छोटे बीज निकलते हैं। ब्राह्मी की जड़ें छोटी और धागे की तरह पतली होती है। इसमें गर्मी के मौसम में फूल लगते हैं।

स्वरूप : brahmi ka podha – ब्राह्मी हरे और सफेद रंग का होता है। ब्राह्मी के पेड़ अधिकतर गंगा नदी के किनारे पाये जाते हैं। ब्राह्मी का पेड़ छत्ते के समान जमीन पर फैला हुआ होता है। ब्राह्मी की एक और प्रजाति होती है। जिसको मंडक पर्णी कहा जाता है। इसकी बेल भी पृथ्वी पर फैलती है। ब्राह्मी के पत्ते छोटे होते हैं। हमारे देश में अधिकतर यही पायी जाती है।

स्वाद : यह खाने में फीका होता है।

स्वभाव : Brahmi ka swabhav(Tasir)-यह शीतल (ठंडी) होती है।

दोषों को दूर करने वाला : दूध और वच इसके गुणों को सुरक्षित रखते हैं एवं इसमें व्याप्त दोषों को दूर करते हैं।

मात्रा : Brahmi ka upyog kaise kare

1 से 3 चम्मच ब्राह्मी के पत्तों का रस, ताजी हरी पत्तियां 10 तक सुखाया हुआ बारीक चूर्ण 1 से 2 ग्राम तक, पंचांग (फूल, फल, तना, जड़ और पत्ती) चूर्ण 3 से 5 ग्राम तक और जड़ के चूर्ण का सेवन आधे से 2 ग्राम तक करना चाहिए।

ब्राह्मी के फायदे : Brahmi ke Fayde hindi

★ ब्राह्मी बुद्धि तथा उम्र को बढ़ाता है। यह रसायन के समान होती है।
★ ब्राह्मी बुखार को खत्म करती है।
★ ब्राह्मी का सेवन याददाश्त को बढ़ाता है।
★ ब्राह्मी सफेद दाग, पीलिया, प्रमेह और खून की खराबी को दूर करती है।
★ ब्राह्मी खांसी, पित्त और सूजन को रोकती है।
★ ब्राह्मी बैठे हुए गले को साफ करती है।
★ ब्राह्मी का उपयोग दिल के लिए लाभदायक होता है।
★ ब्राह्मी उन्माद (मानसिक पागलपन) को दूर करता है। सही मात्रा के अनुसार इसका सेवन करने से निर्बुद्ध, महामूर्ख, अज्ञानी भी श्रुतिधर (एक बार सुनकर जन्म भर न भूलने वाला) और त्रिकालदर्शी (भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य को जानने वाला) हो जाता है, व्याकरण को पढ़ने वाले अक्सर इस क्रिया को करते हैं।
★ मण्डूक परनी भी ब्राह्मी के गुणों के समान होती है।
★ ब्राह्मी को ब्राह्मी घृत, ब्राही रसायन, ब्राही पाक, ब्राह्मी तेल, सारस्वतारिष्ट, सारस्वत चूर्ण आदि के रूप में प्रयोग किया जाता हैं।

ब्राह्मी का हानिकारक प्रभाव : Brahmi Side Effects in Hindi

ब्राह्मी का अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर दर्द, घबराहट, खुजली, चक्कर आना और त्वचा का लाल होना यहां तक की बेहोशी भी हो सकती है। ब्राह्मी दस्तावर (पेट को साफ करने वाला) होता है। अत: सेवन में सावधानी बरतें और मात्रा के अनुसार ही सेवन करें।
ब्राह्मी के दुष्प्रभाव को मिटाने के लिए आप सूखे धनिये का प्रयोग कर सकते हैं।

ब्राह्मी से विभिन्न रोगों में उपचार : Brahmi ke Ayurvedic Nusk

1. स्मरण शक्ति वर्द्धक :
• 10 मिलीलीटर सूखी ब्राह्मी का रस, 1 बादाम की गिरी, 3 ग्राम कालीमिर्च को पानी से पीसकर 3-3 ग्राम की टिकिया बना लें। इस टिकिया को रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को देने से दिमाग को ताकत मिलती है।
• 3 ग्राम ब्राह्मी, 3 ग्राम शंखपुष्पी, 6 ग्राम बादाम गिरी, 3 ग्राम छोटी इलायची के बीज को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को थोड़े-से पानी में पीसकर, छानकर मिश्री मिलाकर पीने से खांसी, पित्त बुखार और पुराने पागलपन में लाभ मिलता है।
• ब्राह्मी के ताजे रस और बराबर घी को मिलाकर शुद्ध घी में 5 ग्राम की खुराक में सेवन करने से दिमाग को ताकत प्रदान होती है।
2. नींद को कम करने के लिए :
• ब्राह्मी के 3 ग्राम चूर्ण को गाय के आधा किलो कच्चे दूध में घोंटकर छान लें। इसे 1 सप्ताह तक सेवन करने से लाभ पहुंचता है।
• 5-10 मिलीलीटर ताजी ब्राह्मी के रस को 100-150 ग्राम कच्चे दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
3. पागलपन (उन्माद) में :
• 6 मिलीलीटर ब्राह्मी का रस, 2 ग्राम कूठ का चूर्ण और 6 ग्राम शहद को मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पुराना उन्माद कम हो जाता है।
• 3 ग्राम ब्राह्मी, 2 पीस कालीमिर्च, 3 ग्राम बादाम की गिरी, 3-3 ग्राम मगज के बीज तथा सफेद मिश्री को 25 गाम पानी में घोंटकर छान लें, इसे सुबह और शाम रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।
• 3 ग्राम ब्राह्मी के थोड़े से दाने कालीमिर्च के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसे दिन में 3 से 4 बार पिलाने से भूलने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
• ब्राह्मी के रस में कूठ के चूर्ण और शहद को मिलाकर चाटने से पागलपन का रोग ठीक हो जाता है।
• ब्राह्मी की पत्तियों का रस तथा बालवच, कूठ, शंखपुष्पी का मिश्रण बनाकर गाय के पुराने घी के साथ सेवन करने से पागलपन का रोग दूर हो जाता है।
4. बालों के लिए : 100 ग्राम ब्राह्मी की जड़, 100 ग्राम मुनक्का और 50 ग्राम शंखपुष्पी को चौगुने पानी में मिलाकर रस निकाल लें। इस रस का सेवन करने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।
5. पेशाब करने में कष्ट होना (मूत्रकृच्छ) : ब्राह्मी के 2 चम्मच रस में, 1 चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेशाब करने की रुकावट दूर हो जाती है।
6. जलन : 5 ग्राम ब्राह्मी के साथ धनिया मिलाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह पीसकर, छानकर मिश्री के साथ मिलाकर पीने से जलन शांत हो जाती है।
7. उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) : ब्राह्मी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में आधे चम्म्च शहद के साथ लेने से उच्च रक्तचाप ठीक हो जाता है।
8. वीर्य रोग : ब्रह्मी, शंखपुष्पी, खरैटी, ब्रह्मदंडी तथा कालीमिर्च को पीसकर खाने से वीर्य रोग दूर होकर शुद्ध होता है।
9. अवसाद उदासीनता सुस्ती : लगभग 10 ग्राम ब्राह्मी (जलनीम) का रस या लगभग 480 से 960 मिलीग्राम चूर्ण को लेने से उदासीनता, अवसाद या सुस्ती दूर हो जाती है।
10. बुद्धिवैकल्प, बुद्धि का विकास कम होना : ब्राह्मी, घोरबच (बच), शंखपुष्पी को बराबर मात्रा में लेकर ब्राह्मी रस में तीन भावनायें (उबाल) देकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और रोजाना 1 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम को असमान मात्रा में घी और शहद के साथ मिलाकर काफी दिनों तक चटाने से बुद्धि का विकास हो जाता है।
11. मूत्ररोग : 4 मिलीलीटर ब्राह्मी के रस को शहद के साथ चाटने से मूत्ररोग में लाभ होता है।
12. दिल की धड़कन : 20 मिलीलीटर ताजी ब्राह्मी का रस और 5 ग्राम शहद को मिलाकर रोजाना सेवन करने से दिल की कमजोरी दूर होकर तेज धड़कन भी सामान्य हो जाती है।
13. गुल्यवायु हिस्टीरिया : 10-10 ग्राम ब्राह्मी और वचा को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सुबह और शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में त्रिफला के जल से खाने पर हिस्टीरिया के रोग में बहुत लाभ होता है।
14. मिर्गी (अपस्मार) :
• ब्राह्मी का रस शहद के साथ मिलाकर खाने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
• मिर्गी के रोग में ब्राह्मी (जलनीम) से निकाले गये घी का सेवन करने से लाभ होता है।
• ब्राह्मी, कोहली, शंखपुष्पी, सांठी, तुलसी और शहद को मिलाकर मिर्गी के रोगी को पिलाने से मिर्गी से छुटकारा मिल जाता है।
15. मिर्गी (अपस्मार) होने पर : 14 से 28 मिलीलीटर ब्राह्मी की जड़ का रस या 3 से 6 ग्राम चूर्ण को दिन में 3 बार 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ लेने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है।
16. धातु क्षय (वीर्य का नष्ट होना) : 15 ब्राह्मी के पत्तों को दिन में 3 बार सेवन करने से वीर्य के रोग का नष्ट होना कम हो जाता है।
17. आंखों की बीमारी में : 3 से 6 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों को घी में भूनकर सेंधानमक के साथ दिन में 3 बार लेने से आंखों के रोग में लाभ होता है।
18. आंखों का कमजोर होना : 3 से 6 ग्राम ब्राह्मी के पत्तों का चूर्ण भोजन के साथ लेने से आंखों की कमजोरी दूर हो जाती है।
19. खसरा : ब्राह्मी के रस में शहद मिलाकर पिलाने से खसरा की बीमारी समाप्त होती है।
20. बलगम : बालकों के सांस और बलगम में ब्राह्मी को थोड़ा-सा गर्म करके छाती पर लेप करने से लाभ होता है।
21. पीनस : मण्डूकपर्णी की जड़ को नाक से लेने से पीनस (पुराना जुकाम) के रोग में लाभ होता है।
22. दांतों के दर्द: दांतों में तेज दर्द होने पर एक कप पानी को हल्का गर्म करें। फिर उस पानी में 1 चम्मच ब्राह्मी डालकर रोजाना दो बार कुल्ला करें। इससे दांतों के दर्द में आराम मिलता है।
23. हकलाना, तुतलाना : ब्राह्मी घी 6 से 10 ग्राम रोजाना सुबह-शाम मिश्री के साथ खाने से तुतलाना (हकलाना) ठीक हो जाता है।
24. कमजोरी : 40 मिलीलीटर केवांच की जड़ का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से स्नायु की कमजोरी मिट जाती है। इसके जड़ का रस अगर 10-20 मिलीलीटर सुबह-शाम लिया जाए तो भी कमजोरी में लाभ होता है।
25. एड्स : ब्राह्मी नामक बूटी का रस 5 से 10 मिलीलीटर अथवा चूर्ण 2 ग्राम से 5 ग्राम सुबह शाम देने से एड्स में लाभ होता है क्योंकि यह गांठों को खत्म करता है और शरीर के अंदर गलने को रोकता है। निर्धारित मात्रा से अधिक लेने से चक्कर आदि आ सकते हैं।
26. निद्राचारित या नींद में चलना : ब्राह्मी, बच और शंखपुष्पी इनको बराबर मात्रा में लेकर ब्राह्मी के रस को 12 घंटे छाया में सुखाकर और 12 घंटे धूप में रखकर पूरी तरह से सुखाकर इसका चूर्ण तैयार कर लें। लगभग 480 मिलीग्राम से 960 मिलीग्राम सुबह और शाम को समान मात्रा में घी और शहद के साथ मिलाकर नींद में चलने वाले रोगी को देने से उसका स्नायु तंत्र मजबूत हो जाता है। इसका सेवन करने से नींद में चलने का रोग दूर हो जाता है।

विशेष : ब्राह्मी बूटी से निर्मित दिमाग की शक्ति बढाने तथा याद्दाश्त मजबूत करने वाले अच्युताय हरिओम फार्म के 2 लाभकारी उत्पाद
(१)अच्युताय हरिओम शंखपुष्पी सिरप (Achyutaya Hariom Shankh Pushpi Syrup)
(२)अच्युताय हरिओम स्मृतिवर्धक चूर्ण (Achyutaya Hariom smurti vardhak churna)

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

2018-01-22T11:02:44+00:00By |Herbs|0 Comments

Leave A Comment

17 + 3 =