नेत्र रोग नाशक फकीरी नुस्खे | Aankhon ki Bimari ka ilaj

नेत्र रोग के कारण : aankhon ki bimari ka karan

खुले स्थान में अधिक देर तक स्नान करना, सूक्ष्म और दूर की वस्तु को बहुत देर तक देखना, रात में जागना और दिन में सोना, आँखों में धूल, धुआँ और मिट्टी पड़ जाना, धूप में गरम हुए पानी से मुँह धोना, पौष्टिक खाद्य का अभाव, चाय और वनस्पति-घी का उपयोग अधिक करना आदि कारणों से नेत्रों के रोग उत्पन्न होते हैं।

नेत्र-रोगों से बचने के सामान्य उपाय : aankhon ki bimari se bachne ke upay

(1) धूल या मिट्टी आँख में पड़ जाए तो आँखों को मसलना नहीं चाहिए। धीरे-धीरे आँखें खोलने और बन्द करने से या ठण्डे पानी के छींटे देने से धूल के कण आसानी से निकल जाते हैं।

(2) पढ़ते-लिखते समय प्रकाश हमेशा उचित मात्रा में, पीछे या बायीं तरफ से आना चाहिए, सामने से प्रकाश आने से आँखें बहुत जल्दी थक जाती हैं।

(3) कापी या किताब 12 से 15 इञ्च की दूरी पर रखना चाहिएं।

(4) सुबह उठते ही प्रतिदिन ठण्डे पानी से आँखें धोनी चाहिएं।

(5) सरसों के तेल से बना काजल या गुलाबजल आँखों में प्रतिदिन डालना चाहिए।

(6) अधिक देर तक पढ़ते-लिखते समय आँखों की थकान दूर करने के लिए-बीच-बीच में अपनी हथेलियों को हल्के से आँखों पर रखें, जिससे बाहरी-प्रकाश आँखों पर न पड़े।

(7) हरे शाक-सब्जी, दूध आदि के प्रयोग से आँखों की शक्ति बढ़ती है।
(8) आँखों को बार-बार ऊपर-नीचे, दाँए-बाँए, तिरछा और गोल-गोल घुमाकर आँखों का व्यायाम करें। फिर थोड़ी देर के लिए आँखें बन्द कर लें ।

(9) प्रतिदिन घी का अधिक से अधिक उपयोग करने से आँखों की शक्ति बढ़ती है।

(10) अन्य व्यक्ति का रूमाल, तौलिया या अँगोछे का उपयोग नहीं करना चाहिए।

नेत्र-रोगों से रक्षा के उपाय : aankhon ki rog se raksha ke upaay

(1) तिल के ताजे 5 फूल प्रातःकाल (अप्रेल में ही) निगलें, तो पूरे वर्ष आँखें नहीं दुखेंगी।

(2) चैत्र के महीने में प्रतिवर्ष ‘गोरखमुण्डी’ के 5 या 7 ताजे फूल चबाकर पानी के साथ खाने से आँखों की ज्योति बढ़ती है ।

(3) एक सप्ताह के बच्चे को बेलगिरी के बीच की मिंगी शहद में मिलाकर चटाने से जीवनभर आँखें नहीं दुखतीं ।

(4) नींबू का एक बूंद रस महीने में एक बार आँखों में डालने से कभी आँखें नहीं दुखतीं।

नेत्र रोग नाशक घरेलु इलाज : aankhon ki rog ka desi ilaj

(1) पुनर्नवा के अर्क की 2-3 बूंदें आँखों में टपकाने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।

(2) तिल के फूलों पर, जो ओस इकट्ठी होती है, उसे इंजेक्शन के द्वारा एकत्रित करके साफ शीशी में रख लें, इसे आँखों में डालने से नेत्रों के सभी विकार दूर होते हैं।

(3) नीम के हरे पत्तों को साफ करके एक सम्पुट में रख दें, ऊपर से एक कपड़ा ढंककर मिट्टी लगा दें तथा आग पर रख दें। जब पत्तियाँ बिल्कुल राख हो जायें, तब उन्हें निकालकर, नीबू के रस में मिलाकर आँखों में लगाने से खुजली, जलन आदि दूर होती है।

(4) एक भाग पीपल और दो भाग बड़ी हरड़ को पानी में घिसकर बत्ती बनाकर, आँखों में लगाने से सभी रोग दूर होते हैं।

(5) गोरखमुण्डी की जड़ को छाया में सुखाकर पीस लें, उसी मात्रा में शक्कर मिलाकर 7 माशा गाय के दूध के साथ पीने से आँखों के अनेक विकार दूर होते हैं।

(6) त्रिफला को 4 घण्टे पानी में भिगो दें और छानकर वही पानी आँखों में डालने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।

(7) सोंठ और नीम के पत्तों को पीसकर गरम कर लें और सेंधा नमक मिलाकर टिकिया बना लें फिर आँखों के ऊपर रखकर पट्टी बाँधने से कई रोगों में आराम मिलता है।

(8) हरड़, सेंधा नमक, गेरू और रसौत को पानी में पीसकर पलकों पर लगाने से सभी रोग दूर होते हैं।

(9) सात माशे फिटकरी को ग्वारपाठे के रस में घोंटकर, काँसे की थाली में बीच में रख दें, ऊपर से काँसे की कटोरी ढक दें। थाली के नीचे हल्की आँच जलाएं, फिटकरी के फूल उचटकर ऊपर ढकी हुई कटोरी में चिपक जायेंगे, इन फूलों में शुद्ध शोरा मिलाकर- आँखों में लगाने से फूला, जाला आदि रोग दूर होते हैं।

(10) ढाक की जड़ का स्वरस या भाप के द्वारा निकाला गया अर्क आँखों में डालने से- रतौंधी और आँखों से पानी बहना आदि रोग दूर हो जाते हैं।

(11) देवदारु के चूर्ण को बकरी के मूत्र की भावना देकर, घी के साथ लेने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं।

नेत्र रोग नाशक आयुर्वेदिक दवा : aankhon ki ayurvedic dawa

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1) नेत्र बिंदु
2) मामरा बादाम मिश्रण

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(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें )

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