दोहावली | Dohavali By Gita Press
इस किताब के बारे में
दोहावली श्री गुरु गोरखनाथ की पाठों का समाहार है, जिसे मौलालाल, गोरखपुर से प्रकाशित किया गया है। इस संकलन का आधार गोरखपुर के चरनों तथा पहाड़ों से जुड़ी परंपरा है, जहाँ पंचमाता गोरखनाथ का स्मरण आज भी इन दोहों के माध्यम से जीवंत रहता है। पुस्तक में सैकड़ों हजार दोहे एकत्र किए गए हैं।
पुस्तक के अनुसार वर्ष १९६६ से २०१३ तक लगभग ३,४६,२५० दोहे संकलित किए गए हैं, जिनमें २०१० का वार्षिकी महोत्सव तथा २०१३ की दैहिक सत्कथा से जुड़ी नई सामग्री भी सम्मिलित है। हर वर्ष पुरस्कार-वितरण के साथ नई रचनाएँ जुड़ती रहती हैं। दोहा-पद्धति में बँधे ये छोटे पद जोड़ी-बोध कराते हैं और स्मरण सरल बनाते हैं।
गोरखनाथ-पीठ की परंपरा में दीक्षित साधकों, सिद्ध-भक्तों तथा निःशुल्क में उपलब्ध डाउनलोड प्राप्त करने वाले सामान्य पाठकों के लिए यह संग्रह समर्पित है। लोक-साहित्य और नाथ-पंथ के शिष्यों के लिए यह अत्यंत मूल्यवान अभिलेख है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- तुलसीदास जी की दोहावली का पाठ
- दोहों का सरल हिंदी अर्थ
- जीवन-शिक्षा तथा नीति
- राम-भक्ति का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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