सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम् – Siddha Kunjika Stotram
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सिद्धकुंजिकास्तोत्रम् नामक पुस्तक में शिव का देवी से उवाच रूप में आरंभ होता है और उसमें कुल सात श्लोक हैं। पहले श्लोक में कहा गया है कि जिस मंत्र के प्रभाव से चण्डीजी पान का प्रसाद मिलता है, वह कुंजिका-स्तोत्र मुख्य है। दूसरे श्लोक में यह स्पष्ट किया गया है कि यह पाठ कबल, नागलोला या कौलिक जैसे किसी भी वर्ग तक सीमित नहीं है। तीसरे श्लोक में यह बताया गया है कि केवल कुंजिका-पाठ से दुग्धपात्रादि लाभ मिल जाते हैं, अपने या देवताओं के लिए भी।
इसके बाद धनदाढ्य मन्त्र का पाठ आता है, जिसमें वर्ण-माला के रूप में मन्त्र-बीज दिए गए हैं, और तीसरे श्लोक में जाग्रन्त होकर महादेव से सिद्धि की प्रार्थना की गई है। अन्तिम पंक्ति में यह भी कहा गया है कि यह स्तोत्र गोपित रखा जाना चाहिए और जो इसे योन-सम्पत्ति के साथ पढ़े, उसे सिद्धि मिलती है।
यह तंत्र-पारंपरा का एक लघु स्तोत्र है, जिसमें मन्त्र-साधना के प्रयोग का उल्लेख है। ऐसी साधना के बारे में दी गई बातें परंपरा और अनुभव पर आधारित हैं, इसलिए किसी भी मन्त्र-साधना को स्वयं शुरू करने से पहले योग्य और अनुभवी गुरु से मार्गदर्शन लेना आवश्यक है। यह स्कैन में पाठ एक ही पृष्ठ पर दो बार उत्पन्न हुआ है, अतः पृष्ठ-संख्या मुद्रित नहीं है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मंत्रों का अर्थ, उच्चारण तथा जाप-विधि
- साधना-क्रम, संख्या तथा नियम
- यंत्र, ताबीज तथा उनके प्रयोग
- फल, सावधानियाँ तथा सामान्य प्रश्न
पुस्तक की मुख्य बातें
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