आगम और तंत्र – Aagam Aur Tantra
इस किताब के बारे में
आगम एवं तंत्र का परिचयात्मक ग्रंथ। लेखक ब्रजबिहारी निगम हैं। इस पुस्तक में तंत्रशास्त्र का परिचय देते हुए साधना की आवश्यक प्रक्रियाओं, वाममार्गी साधना के पञ्चमकार, चक्रसाधना तथा दक्षिणाचार साधना की विद्या को समझाया गया है। साथ ही इतिहास, दर्शन व धर्म के संदर्भ में तान्त्रिक साधना का निर्वचन किया गया है। रंजन पब्लिकेशन्स, दिल्ली से प्रथम संस्करण 2004 में प्रकाशित।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मंत्रों का अर्थ, उच्चारण तथा जाप-विधि
- साधना-क्रम, संख्या तथा नियम
- यंत्र, ताबीज तथा उनके प्रयोग
- फल, सावधानियाँ तथा सामान्य प्रश्न
पुस्तक की मुख्य बातें
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