शुक्ल यजुर्वेद प्रतिशाख्य — एक परिशीलन – Shukla Yajurveda Pratishakhya
इस किताब के बारे में
"शुक्ल यजुर्वेद प्रतिशाख्य — एक परिशीलन" — डॉ. उमेश प्रसाद सिंह कृत शोधपूर्ण अध्ययन। प्रतिशाख्य वैदिक परंपरा का वह शास्त्र है जो वेद-पाठ के स्वर, उच्चारण तथा संहिता-पाठ को शुद्ध रखने के नियम बताता है। वैदिक अध्येता एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- आत्मा तथा ब्रह्म का स्वरूप
- जगत् की उत्पत्ति, माया तथा अद्वैत
- साधना, ध्यान तथा आत्मज्ञान के सोपान
- उपनिषद् तथा गीता का सार
पुस्तक की मुख्य बातें
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