गायों की रंग व किस्मों के अनुसार दूध के फायदे

अलग अलग रंगों व किस्मों की गाय के दूध के गुण :

कोई गाय काली, कोई पीली, कोई लाल और कोई सफ़ेद होती है। मतलब यह है कि, जितने प्रकार की गायें होती हैं, उतने ही प्रकार के दूध होते हैं , यानी रंग-रंग की गायों के दूध के गुण भी भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः पाठकों के लाभार्थ, नीचे सब तरह की गायों के दूधों के गुणावगुण खुलासा लिखते हैं –

1-काली गाय का दूध और उसके फायदे –

काली गाय का दूध विशेष रूप से वात-नाशक होता है। दूसरे रंग की गायों की अपेक्षा काली गाय का दूध गुण में श्रेष्ठ समझा जाता है। जिनको वात-रोग हो, उनको काली गाय का दूध पिलाना उचित है।

2-सफेद गाय का दूध और उसके फायदे –

सफेद गाय का दूध कफकारक और भारी होता है, यानी देर में पचता है। शेष गुण समान ही होते हैं।

3-पीली गाय का दूध और उसके फायदे –

पीली गाय का दूध और सब गुणों में तो अन्य वर्गों की गायों के समान ही होता है; केवल यह फ़र्क होता है कि इसका दूध विशेष करके वात-पित्त को शान्त करता है।

4-लाल गाय का दूध और उसके फायदे –

लाल गाय का दूध भी, काली गाय की तरह वातनाशक होता है। फर्क इतना ही है कि काली गाय का दूध विशेष रूप से वातनाशक होता है। चितकबरे रंग की गाय के दूध में भी लाल गौ के दूध के समान गुण होते हैं।

5-जांगल देश की गायों का दूध और उसके फायदे –

जिस देश में पानी की कमी हो और दरख्तों की बहुतायत न हो एवं जहाँ वात-पित्त-सम्बन्धी रोग अधिकता से होते हों, उस देश को “जांगल देश” कहते हैं। मारवाड़ प्रान्त जांगल देश की गिनती में है। जांगल देश की गाय का दूध भारी होता है अर्थात् दिक्कत से पचता है।

6-अनूप देश की गायों का दूध और उसके फायदे –

जिस देश में पानी की अधिकता (प्रचुरता) हो, वृक्षों की बहुतायत हो और जहाँ वात-कफ के रोग अधिकता से होते हों, उस देश को “अनूप देश” कहते हैं। बंगाल प्रान्त अनूप देश गिना जाता है। अनूप देश की गायों का दूध जांगल देश की गायों के दूध से अधिक भारी होता है।

7-अन्य प्रकार की गायों का दूध और उसके फायदे –

• छोटे बछड़े वाली या जिसका बछड़ा मर गया हो, उस गाय का दूध त्रिदोषकारक होता है।
• बाखरी गाय का दूध त्रिदोष-नाशक, तृप्तिकारक और बलदायक होता है।
• बरस दिन की ब्याई हुई गाय का दूध गाढ़ा, बलकारक, तृप्तिकारक, कफ़ बढ़ाने वाला और त्रिदोषनाशक होता है।
• खल और सानी खाने वाली गाय का दूध कफकारक होता है।
• कड़ब, बिनौले और घास खाने वाली गाय का दूध सब रोगों में लाभदायक होता है।
• जवान गाय का दूध मीठा, रसायन और त्रिदोषनाशक होता है।
• बूढ़ी गाय के दूध में ताक़त नहीं होती।
• गाभिन गाय(Pregnant cow) का दूध, गाभिन होने के तीन महीने पीछे पित्तकारक, नमकीन और मीठा तथा शोष(शुष्कता) करने वाला होता है।
• नई ब्याई(जिसने बच्चे को जन्म दिया है) हुई गाय का दूध रूखा, दाह-कारक, पित्त करने वाला और खून-विकार पैदा करने वाला होता है।
• जिस गाय को ब्याये बहुत दिन हो गये हों, उस गाय का दूध मीठा, दाहकारक और नमकीन होता है।

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