अवचेतन मन की चमत्कारिक शक्तियाँ और हमारा मस्तिष्क

मस्तिष्क और अवचेतन मन :

हमारे मस्तिष्क द्वारा हमारा जीवन संचालित होता है। हमारे मन द्वारा न सिर्फ हम सारा संसार निर्मित करते हैं बल्कि ये भी कहा जा सकता है कि संसार मन का ही विस्तार है। इस मन के कई भाग हैं प्रकार हैं। यहां पहले मस्तिष्क की फिर अवचेतन मन की कार्य प्रणाली पर विस्तृत विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

हमारा मन सूक्ष्म पदार्थ से निर्मित है, इसमें सूक्ष्म द्रव्य होते हैं। जिस तरह कम्प्यूटर में
(1) हार्डवेयर और (2) सॉफ्टवेयर होते हैं उसी तरह हमारे दिमाग में हार्डवेयर स्थूल पदार्थ और सॉफ्टवेयर सूक्ष्म पदार्थ होते हैं। इन दोनों का कार्य विभाजन अलग-अलग है। इनदोनों के अपने विशिष्टगुण और शक्तियां हैं।

(A) मानव मस्तिष्क (ब्रेन) / मानव मस्तिष्क के दिलचस्प तथ्य

मानव मस्तिष्क (ब्रेन) को मस्तिष्क के कार्य व उसकी बनावट को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है-

(1) मस्तिष्क मानव शरीर का दो प्रतिशत भाग है किंतु ऑक्सीजन एवं खुराक 20 प्रतिशत खपत करता है।

(2) मस्तिष्क का 40 प्रतिशत भाग भूरा (Grey) बाहर रहता है तथा 60 प्रतिशत सफेद भाग अंदर होता है।

(3) जागते समय ब्रेन 10 से 24 वॉट की ऊर्जा छोड़ता है।

(4) ब्रेन का 75 प्रतिशत भाग पानी (द्रव) का बना होता है।

(5) हमारी ग्रोथ (वृद्धि) दिन के बजाए रात को अधिक होती है । रात में पिट्युटरी ग्लेन्ड अधिक हार्मोन्स बाहर निकालती है।

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(6) 5 वर्ष की आयु तक मस्तिष्क 95 प्रतिशत तक विकसित हो जाता है जबकि 18 वर्ष की आयु तक यह शत-प्रतिशत विकसित हो जाता है।

(7) हंसते समय मस्तिष्क के 5 भाग एक साथ काम करते हैं अत: प्रसन्नचित्त व्यक्तियों का मस्तिष्क अधिक सक्रिय रहता है।

(8) मस्तिष्क में 1 लाख मील लंबी रक्त वाहिकाएं होती हैं।

(9) मस्तिष्क में 60 हजार विचार औसतन रूप से दिन भर में आते हैं।

(10) मनुष्य के मस्तिष्क का औसत वजन 1500 ग्राम के लगभग होता है।

(11) 40 वर्ष की आयु के बाद मस्तिष्क सिकुड़ता है।

(12) इंसान का मस्तिष्क सभी प्राणियों से बड़ा होता है। इंसान का मस्तिष्क शरीर का 2 प्रतिशत होता है जबकि हाथी का दिमाग शरीर का 1.5 प्रतिशत होता है।

(13) मानव मस्तिष्क सोते समय अधिक सक्रिय रहता है।

(14) मानव मस्तिष्क में लगभग 100 अरब से भी अधिक तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं।

(15) नया सीखने पर मस्तिष्क में नये सिलवट विकसित होते हैं । ये सिलवट(झुर्रियां) ही आई.क्यू. (बुद्धि का स्तर) जानने का सही पैमाना है। जिसके दिमाग में ज्यादा सिलवट होंगे वह उतना ही समझदार होता है।

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(16) एक ही बात का अधिक (Tension) दबाव लेने से मस्तिष्क सोचने, समझने एवं निर्णय की क्षमता खो देता है।

(17) यह धारणा सही नहीं है कि इंसान 10 प्रतिशत मस्तिष्क का इस्तेमाल करता है। इंसान अपनी क्षमता के अनुरूप पूरे दिमाग का उपयोग करता है।

(18) मस्तिष्क और मन दोनों अलगअलग हैं। दोनों के कार्य अलग-अलग हैं।

(19) हमारे मस्तिष्क को 5 मिनट से ज्यादा ऑक्सीजन न मिले तो वह नष्ट होने लगता है।

(20) हमारे मस्तिष्क में प्रतिदिन लगभग 70 हजार विचार आते हैं।

(21) हमारे मस्तिष्क में भावनाएं एमग्डिला खंड (Amygdala) नामक ब्रेन के भाग में बनती हैं। अगर मस्तिष्क से एमग्डिला खंड (Amygdala) निकाल दिया जाए तो भावनाएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।

(B) हमारा मन (Mind) अर्थात सूक्ष्म तत्व :

मन क्या है ? –

संसार का फैलाव मन का ही विस्तार है। मन जहां तक जाए वहां तक संसार है यदि मन नहीं है या किसी प्रकार से मन को नियंत्रित करके एकाग्र कर लिया जाए या अमनी दशा (Stateof NoMind) को उपलब्ध कर लिया जाए तो फिर सारा संसार असार हो सकता है। मगर यह बहुत कठिन है।

मन की अवस्था या प्रकार –

हमारे मन (Mind) के कई प्रकार हैं-

(1) चेतन मन- इसे सचेतन मन भी कहते हैं। विषय परख मन (Conscious Mind) यह स्थूल शरीर-अन्नमय कोष से बनता है या संबंधित रहता है।

(2) अवचेतन मन या चित्त (Subconscious Mind)- यह प्राणमय, मनोमय और विज्ञानमय कोष से संबंधित रहता है।

(3) अवचेतन मन (Unconscious Mind)- यह आनंदमय कोष से संबंधित है।

(4) अतिचेतन मन (Super Conscious Mind)- यह ध्यान, धारणा, समाधि से प्राप्त होता है । इसे महा कारण शरीर-आत्म तत्व कहते हैं। यह पांच कोषों से परे है। यही आत्म तत्व है।

मन कहां पर रहता है / मन का स्थान :

मन के प्रकार के बाद मन का स्थान यह कहां और कब रहता है। जाग्रत अवस्था में मन मस्तिष्क में रहता है। वस्तुत: मन सारे शरीर में व्याप्त है। फिर भी इसके निवास के विशेष स्थान होते हैं । वेदांत के अनुसार जाग्रत अवस्था में यह दक्षिण नेत्र, स्वप्न में कंठ और सुषुप्ति में मन हृदय में स्थित रहता है।

मण्डूक ऋषि ने मण्डूक उपनिषद में इसे चार अवस्था में वर्णन किया है । जाग्रत अवस्था चेतन मन (Conscious Mind), स्वप्नावस्था-अवचेतनमन (Sub-Conscious Mind), सुषुप्ति अवस्था- अचेतन मन (UnConscious Mind), तुरीय अवस्थाअतिचेतन मन (Super Conscious Mind) समाधि कीअवस्था।

चेतन और अचेतन मन का विभाजन वास्तविक भौतिक आधार पर नहीं किया जा सकता है । यह एक मनोविज्ञान की अवधारणा है।

सचेतन मन क्या है ? और उसके कार्य :

यह दिमाग की सक्रिय अवस्था है। इसे विषय परख मन भी कहते हैं। उदाहरण के लिए जाग्रत अवस्था में हमारे जीवन में हम कई निर्णय करते हैं। जैसे घर का चुनाव, व्यवसाय का चुनाव, जीवन साथी का चुनाव आदि। यह सभी निर्णय हम सचेतन मन से करते हैं । सचेतन मन हमारे दिमाग का दसवां भाग है। अर्थात 1/10 वां हिस्सा है। इसके द्वारा हम तर्क-वितर्क, सोच-विचार करके प्रतिदिन के कार्यों के निर्णय लेते हैं । यूं भी कहा जा सकता है कि यह हमारे स्थूल शरीर से, अन्नमय कोष से ज्यादा संबंधित कार्य करता है।

अवचेतन मन क्या है ? :

इसे चित्त भी कहा जाता है। यह आपके अनुभवों और स्मृतियों का बना होता है। आप जो भी करते हैं इसमें अंकित हो जाता है। जैसे टेप रिकॉर्ड में रिकॉर्ड होता है ठीक उसी तरह । यह पूरे दिमाग का 1/10 भाग होता है। यानि सिर्फ 10 प्रतिशत क्रियाएं ही चेतन मन द्वारा संचालित होती हैं। शेष 90 प्रतिशत अवचेतन मन द्वारा होती है। समस्त स्वचलित कार्य जैसे श्वसन तंत्र का चलना, हृदय का धड़कना आदि अवचेतन मन से संचालित होते हैं। यह एक गोडाउन की तरह होता है जिसमें सारे आंकड़े (डाटा) इकट्ठा होते हैं और आवश्यकतानुसार संचालित होते रहते हैं।

दरअसल अवचेतन मन बहुत ही आज्ञाकारी होता है । इसे सचेतन मन जो भी निर्देश देता है उसे यह ग्रहण कर अमली जामा पहनाता है। इस पर जो विचार, विश्वास तथा सिद्धांत आप पहुंचाते हैं उन्हें ये एकत्रित करता है और फिर परिस्थितियों, स्थितियों और घटनाओं के रूप में प्रकट करता रहता है। आइये जाने अवचेतन मन की शक्ति क्या है ।

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अवचेतन मन के कार्य और उसकी चमत्कारिक शक्तियाँ :

(1) यह हमारी समस्याओं को सुलझाने का कार्य सदा करता है। कई बार हम देर रात किसी समस्या को सुलझाने का प्रयत्न करते हैं या गणित का कोई प्रश्न हल करते हैं और हल नहीं ढूंढ पाते हैं, कई बार हम हल ढूंढते – ढूंढते सो जाते हैं और जब सबेरे सोकर उठते हैं तो उन प्रश्नों का सही-सही हल पा लेते हैं। ऐसा अवचेतन मन के कारण होता है।

(2) जब रात्रि को सोते समय विचार लाते हैं कि सुबह जल्दी कोई काम है और जल्दी उठना है तब बिना अलार्म सेट किए, बिना घड़ी की अलार्म बजे ही हम उस समय पर उठ जाते हैं जिस समय हमको काम हो । भले ही फिर उस समय रात्रि के 3 या 4 बजे हों। यह अवचेतन मन के कारण होता है । यह मनुष्य का सच्चा सहयोगी है।

(3) अवचेतन मन के द्वारा आप अपने बुरे स्वभाव को बदल सकते हैं व सदगुणों की वृद्धि कर सकते हैं।

(4) आप में जो भी बुरी भावना है या भय की भावना है तो आप रात को सोते समय उसके विपरीत अच्छी भावना करके सोएं या ये सोचकर सोएं कि आप बहादुर हैं, साहसी हैं। सोने के पहले ये कम से कम तीन बार और अधिक से अधिक आप जितना दोहरा सकते हो दोहराएं तो आप सबेरे जागने के बाद पाएंगे कि आपमें साहस की वृद्धि हुई है। आप साहस से भरे हैं। इसी तरह से आप आत्मविश्वास जगा कर भय और दुर्गुणों से निजातपा सकते हैं।

(5) आपका अवचेतन मन आपके शरीर का निर्माता है यह आपकी शारीरिक, मानसिक एवं मनोकायिक बीमारियों का उपचार कर सकता है। हर रात को सोते समय आपके मन में स्वास्थ्य के लिये आदर्श विचार लाएं, वह आपका अवचेतन मन ग्रहण करेगा और धीरे-धीरे आपका स्वास्थ्य बेहतर से बेहतर होता जाएगा।

(6) अवचेतन मन को कैसे जगाये – अगर आपको कहीं भाषण देना है, कोई लेख या पुस्तक लिखना है तो आप इसी तरह के सकारात्मक भाव प्रेम के साथ, भावना के साथ अपने अवचेतन मन तक पहुंचा दें। वह अनुरूप व अनुकूल प्रक्रिया कर आपको इसके लायक बनने में सहायता करेगा या बना ही देगा।

(7) अपने जीवन में नकारात्मक सोच न आने दें। जैसे आप किसी कार्य को नहीं कर सकते, आपके पास धन नहीं है । मेरे पास साधन नहीं है-इस तरह के नकारात्मक विचार न लाएं । क्योंकि इसके नकारात्मक परिणाम ही मिलेंगे । इसके विपरीत सदा संतुष्ट रहें, प्रसन्न रहें, धैर्य रखें और जो भी है उसे ही ज्यादा समझ कर प्रभु का धन्यवाद करें, क्योंकि हम जैसे विचार अवचेतन मन को देते हैं वैसा ही हमारे साथ होने लगता है।

(8) अवचेतन मन आपके हृदय को चलाता है, पाचन तंत्र, रक्त संचार, श्वास की अनिवार्य प्रक्रियाओं को भी संचालित करता है। वह चेतन मन की तरह तर्क-वितर्क नहीं करता है।

(9) जो व्यक्ति कामवासना से पीड़ित होता है उसके मन में किसी भी स्त्री को देखने से ही मन में दूषित विचार एवं हीन विचार आने लगते हैं। यदि ऐसा व्यक्ति सोने से पहले यह विचार बार-बार दोहराए कि वह सत् चित्त आनंद आत्मा ब्रह्म ही है तो धीरे-धीरे उसे कामवासना से मुक्ति मिलेगी, उसका चित्त प्रसन्न, शांत व शुद्ध होगा।

(10) आपका चेतन मन आपसे वादविवाद करता है किंतु आपका अवचेतन मन आपसे बहस नहीं करता है। वह चेतन मन के आदेश को चुपचाप मान लेता है। आप अपने अवचेतन मन के कप्तान हैं। चेतन मन जैसा विचार देता है अवचेतन मन उसे स्वीकार कर साकार रूप देने लगता है।

(11) अवचेतन मन का चमत्कार – मेरा शरीर व सभी अंग मेरे अवचेतन मन की असीमित शक्ति ने बनाए हैं । वह जानता है कि मेरा उपचार कैसे किया जाए। उसकी युक्ति ने मेरे सभी अंग बनाए हैं व उसकी असीमित उपचारक शक्ति मेरे अंदर कार्य कर रही है व मुझे संपूर्ण बना रही है। मैं उसे इसके लिए हृदय से धन्यवाद देता हूं। यह एक प्रार्थना थी जो एक धर्मगुरु प्रतिदिन 5 मिनट तीन बार दोहराते थे। जिससे उनकी त्वचा की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई।

(12) स्वतंत्र तंत्र (Autonomic Nevas System) अवचेतन मन का अंग है । इसका संचालन सेरीवेलम और एमिगडेला नामक ब्रेन का भाग करता है । यही भाग आपका चौबीस घंटे भला करता रहता है।

(13) प्रार्थनाएं व आत्मविश्वास अवचेतन मन को मजबूत बनाते हैं । अत: सदैव इसे सकारात्मक और अच्छा विचार दें। नकारात्मक विचारों को अपने पास फटकने भी नदें। जब आप निम्न बातें कहते हैं
(अ) मेरी स्थिति बिगड़ती जा रही है।
(ब) मेरी इच्छा कभी पूरी नहीं होती।
(स) मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा।
(द) मुझे कोई उम्मीद नहीं है।
(इ) मैं बहुत दु:खी व उलझन में हूं।
ऐसा सोचने पर आपका अवचेतन मन आपकी कुछ भी मदद नहीं करेगा। मानसिक दबाव, ज्यादा तनाव व भय प्रार्थना की शक्ति को भी प्रभावित करते हैं। कल्पना मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। इसलिए सदैव अच्छी व सकारात्मक कल्पना करें। आप जैसी कल्पना करेंगे वैसा ही घटित होने लगेगा। अत: मन में नकारात्मकया हीन विचार कभी न आने दें।

(14) 1920 के दशक में कनाडा के मशहूर डॉक्टर फेडरिक बैटिंग ने अपना शोध डायबिटीज की ओर मोड़ा। उन्हें इस बीमारी के रोकथाम का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। सभी रास्ते उन्हें बंद मिल रहे थे। एक रात वे इसी विचार में खोए-खोए सो गए । नींद में अवचेतन मन ने उन्हें निर्देश दिया कि कुत्तों की पेनक्रियाटिक ग्लेंड से अवशेष निकालें तो उन्हें सफलता प्राप्त होगी, इसी प्रेरणा से वे इंसुलिन की खोज कर पाए और उन्हें सफलता प्राप्त हुई।

(15) मेरा अपना निजी अनुभव- मैं 1955 में हाईस्कूल की परीक्षा में बैठ रहा था। अच्छी पढ़ाई की थी पर अधिक तनाव से बहुत परेशान था ताकि इम्तिहान के पहले क्या पढ़ें ? रात 10 बजे के लगभग सो गया।
रात्रि में अवचेतन मन में पांच प्रश्न दिखे। सुबह 5 बजे उठकर उन्हीं को पढ़कर गया। सुबह परीक्षा में प्रश्न-पत्र में वे ही प्रश्न दिखे जैसा मैंने रात्रि को देखा था । यह कमाल अवचेतन मन ने कर दिखाया था । पर आप यह प्रयोग जीवन में नहीं दोहराएं।

हमारे शरीर में सूक्ष्म शरीर या अंत:करण होता है। इसे लिंगशरीर के नाम से भी पुकारते हैं। मन सूक्ष्म जड़ है । वह आत्म ज्योति को प्रतिफलित करने की क्षमता रखता है। जब हम आत्मा को सूक्ष्म शरीर की उपाधि से युक्त करते हैं तो उसे जीव या जीवात्मा कह कर पुकारते हैं। वास्तव में कर्तापन व भोक्तापन इसी सूक्ष्म शरीर में होता है। यही सूक्ष्म शरीर अवचेतन मन कहलाता है। शरीर में स्थूल शरीर को चेतन मन का प्रतिनिधि कहते हैं । अवचेतन मन अर्थात सूक्ष्म शरीर हमारे लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता है । यही मनुष्य के भीतर बहुत बड़ा खजाना है। उसे हासिल करने के लिए मनुष्य को अपने भीतर देखना भर है। मनुष्य के भीतर नियामतों का अथाह भंडार है। जिससे वह सुखद, समृद्ध और आनंदमय जीवन जीने के लिए हर चीज निकाल सकता है।

मनुष्य के भीतर असीम ज्ञान व अनंत प्रेम का भंडार छिपा है और वह इसमें से मनचाही चीज निकाल सकता है। यह मनुष्य के अवचेतन मन की चमत्कारिक शक्तियों द्वारा ही संभव है। मनुष्य को तो बस मानसिक और भावनात्मक रूप से अपनेअवचेतन मन से जुड़ना है।

मेरा यह छोटा सा लेख आपको अपने अवचेतन मन की अविश्वसनीय शक्ति का अवलोकन व उपयोग कैसे करें इस दिशा में चलने का छोटा सा प्रयास भर है। हरि ओम्।