अलौकिक अतींद्रिय क्षमताओं और रहस्यों से भरा मानवी मस्तिष्क

मानवी मस्तिष्क की अनसुलझी गुत्थी :

मानवी मस्तिष्क समस्त ज्ञात-अविज्ञात क्रियाकलापों का अधिष्ठाता है। इसकी न्यूरोलॉजिकल संरचना जितनी अद्भुत और आश्चर्यजनक है, उससे भी अधिक विलक्षण उसकी अनिष्क्रिय क्षमता है। अब तो न्यूरोलॉजिस्ट भी मानने लगे हैं कि मस्तिष्क मात्र फास्फोलिपिड्स का संघटन एवं न्यूरॉन संजाल ही नहीं है। नवीनतम स्कैनिंग तथा इन्फ्रासाउंड तकनीकों के साथ ही लेजर नियंत्रित प्रणालियों के माध्यम से भी मानव की कार्यविधि को समझने का प्रयास किया जाने लगा है। वैज्ञानिक स्वप्न को मस्तिष्क से जोड़कर देखते हैं, परंतु वे भी इस अनसुलझी गुत्थी का पार नहीं पा सके हैं।

मानव मस्तिष्क के बारे में दिलचस्प तथ्य :

वैज्ञानिकों की दृष्टि में मस्तिष्क की निर्माण प्रक्रिया जिन रासायनिक तत्त्वों से हुई है, वे भी कम आश्चर्यजनक नहीं हैं। सेरिबिलम में न्यूरॉन की संख्या सर्वाधिक होती है और मेरुदंड में सबसे कम। मनुष्य का मस्तिष्क अन्य जानवरों के मस्तिष्क से उसके कॉर्टेक्स के कारण ही भिन्न और अनोखा है। यही इसको भानुमती के पिटारे की संज्ञा से विभूषित करता है। कॉर्टेक्स मस्तिष्क की बाहरी परत है। इस क्षेत्र के न्यूरॉन के आपसी संबंधों की गणना यदि एक सेकेंड में एक की दर से की जाए तो ३२०० लाख वर्ष लगेंगे।न्यूरोलॉजिस्ट एस० जेकी के अनुसार केवल कॉर्टेक्स के न्यूरॉन के विभिन्न जोड़ों का हिसाब लगाया जाए तो यह समस्त ब्रह्मांड के स्थापित क्रमों से भी अधिक होंगे।

“ब्रेन मेट्रिक्स” अब भी बना हुआ है पहेली :

माँ के गर्भ में ही मस्तिष्क के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इस दौरान प्रोलिफरेशन अवस्था में प्रति मिनट २५०,००० नए न्यूरॉन पैदा होते हैं और दो महीने के समाप्त होते-होते छोटा-सा मस्तिष्क अस्तित्व में आने लगता है और जन्म के पश्चात तो मस्तिष्क केवल परिपक्व एवं विकसित होता है तथा रहस्य का आगार बन जाता है। अभी भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली तथा संरचनात्मक विशेषता पर काय करने वाले वैज्ञानिक मस्तिष्कीय कोशिकाओं के मध्य में फैले मटमैले सलेटी भूरे रंग के द्रव्य ‘ब्रेन मेट्रिक्स’ के विषय में बहुत स्पष्ट नहीं हैं। उनके लिए यह रहस्य ही बना हुआ है।

स्वप्न के अनसुलझे राज :

इन्हीं रहस्यों में एक रहस्य है-वे अद्भुत स्वप्न, जो मस्तिष्क को केवल कुछ औंस फास्फोलिपिड्स के पिंड से उपलब्ध हो जाते हैं। वैज्ञानिक तमाम शोध अनुसंधानों के बावजूद यह नहीं जान सके हैं कि मानव मस्तिष्क का वह कौन-सा भाग है, जो विभिन्न रहस्य स्वप्नों के माध्यम से सुदूर भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का स्पष्ट पूर्वाभास देता है, तो कभी बेंजीन के अणु की संरचनात्मक जानकारी में निमग्न हक्सले को सर्पाकृति के माध्यम से दिशा-निर्देश प्रदान करता है। यह जानी-समझी और पढ़ी घटना है कि बेंजीन के अणु की संरचना की खोज में वर्षों बिता चुके हक्सले ने एक अजीब-सा स्वप्न देखा, जिसमें एक साँप अपनी पूँछ को अपने मुँह में लेकर गोलाकार हवा में तैर रहा था। यही वह स्वप्न था, जो बेंजीन की संरचना-सूत्र का आधार बना और इसकी उपयोगिता से संसार उपकृत हुआ।

मस्तिस्क की अलौकिक अतींद्रिय क्षमता :

वैज्ञानिक आज इस तथ्य को स्वीकारते हैं कि अधिकांश विश्वप्रसिद्ध आविष्कार किसी अतींद्रिय क्षमता से संबंधित थे। इसी परिप्रेक्ष्य में परमाणु ऊर्जा के उपयोग का सूत्र खोजने वाले सदी के महानतम वैज्ञानिक जर्मनी के अलबर्ट आइंस्टाइन ने जब द्रव्य तथा ऊर्जा के मध्य गणितीय संबंधों की स्थापना की तो उनके पास इसका कोई आधार नहीं था। वे इस संबंध से अति अनभिज्ञ थे। उन्हें एक दिन एकाएक सूझा कि द्रव्य मात्रा के प्रकाश की गति से गुणा कर देने पर प्राप्त होगा। उन्हें अनजाने ही किसी अदृश्य की प्रेरणा से इस आविष्कार का संकेत प्राप्त हो गया था। एक प्रकार से वे पहले ही अंतिम उत्तर तक पहुँच चुके थे। बाद में वे केवल इतना ही बता सके कि उनके आविष्कारों का पूरा श्रेय ईश्वर की सत्ता को जाता है।

महान गणितज्ञ रामानुजम् ने गणित के गूढ़ एवं अनसुलझे प्रश्न सपनों में सुलझाए थे। प्रसिद्ध विज्ञानवेत्ता लुई रेगासिज ने अपनी जीवाश्म संबंधी खोजों की सफलता पर प्रकाश डालते हुए लिखा है कि मुझे स्वप्नों के संकेतों से अपनी खोजें आगे बढ़ाने की सतत प्रेरणा मिलती रही है। नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ० पाउलिंग ने भी यह स्वीकारा है कि उन्हें अनेक वैज्ञानिक विचारों की झलक-झाँकी स्वप्नों में ही मिली है। पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय अमेरिका के प्राचार्य लेम्बटन एक वैज्ञानिक गुत्थी को सुलझाने में वर्षों से लगे थे। एक रात को उन्होंने स्वप्न देखा कि सामने की बड़ी दीवार पर उनके प्रश्न का उत्तर चमकदार अक्षरों में लिखा है। जागने पर यह लक्ष्य उन्हें अक्षरश: सही मिला।

विश्वविख्यात संगीतकार मोजार्ट जब झपकी ले रहे थे तो उन्हें अचानक एक संगीत धुन का सूत्र-संकेत प्राप्त हो गया। वायलिन वादक लारातिनी को ‘दि डेविल्स सानेट’ नामक धुन पूरी-की-पूरी स्वप्न में सुनाई पड़ी। चौपीन भी अपने संगीत-सृजन का दिशा-निर्देश सपनों से पाते थे। प्रसिद्ध नृत्य पारंगता मेरी बिगमैन ने ‘पास्तोरेल’ नामक नृत्य की कल्पना स्वप्न के आधार पर की। हेनरी मूर, एण्ड्रम वेथ, पाब्लो पिकासो, रान गांग, साल्बाहोर, डॉली आदि विश्वप्रसिद्ध चित्रकारों की सृजन-चेतना में स्वप्नों की बड़ी भूमिका रही है। साहित्यकारों में तो ऐसा लगता है कि इनके सृजन का माध्यम स्वप्न ही रहा है। टालस्टाय, पुश्किन, गेटे, शेक्सपियर, होमर, कालरिन, एडगर एलन पो, नीत्से, दांते, वैगनर, विलियम ब्लैक, विलियम बटलर, कीट्स आदि असंख्य साहित्यकारों को विभिन्न रचनाओं एवं कृतियों का संदेश एवं परामर्श स्वप्नों के माध्यम से ही प्राप्त हुआ था।

बाणभट्ट की विख्यात पुस्तक कादंबरी की रूपरेखा उन्हें स्वप्न-संदेश से मिली थी। विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को अपनी गीतांजलि की कई कविताओं का आभास स्वप्न में उपलब्ध हुआ था। आदिकवि वाल्मीकि ने भगवान राम के अवतार के पूर्व ही उस समूचे कथानक को आद्योपांत लिखकर रख दिया था। भविष्यपुराण और कल्किपुराण के संबंध में भी यही बात है। वे घटनाक्रम से पूर्व ही लिखे रचे गए थे। इस प्रकार यदि स्वप्नों के माध्यम से भविष्य बताने वाली प्रक्रिया पर भी विचार करें तो यह पता चलता है कि मनुष्य का मस्तिष्क अपनी तरंगों के माध्यम से पूरे ब्रह्मांड की यात्रा कुछ ही क्षण में संपन्न कर सकता है।

जाग्रत मन-मस्तिष्क के माध्यम से स्वप्न को दिशा भी दी जा सकती है। यह तथ्य आधुनिक वैज्ञानिकों के लिए भले ही चुनौतीपूर्ण हो, परंतु एक सचाई है, जिसे भारतीय मनीषा ने प्रयोग के माध्यम से सिद्ध किया है। उनके अनुसार जाग्रत मस्तिष्कीय क्षमताएँ वेगवती धारा से भी अधिक प्रचंड होती हैं। क्षमताओं को जाग्रत करने का एक ही उपाय है कि मस्तिष्क को सुनिश्चित एवं एकदिष्ट दिशा में नियोजित कर दिया जाए। उपलब्ध सारा भंडार दाँव पर लगा दिया जाता है तो अक्षय स्रोत खुल जाता है। हम अपने मस्तिष्क के बिखराव को रोककर उसे जड़ता से निकालकर सक्रिय कर दें तो वह अपनी विलक्षण विशेषताओं के साथ जीवंत और जाग्रत हो सकता है।

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