आयुर्वेद के अनुसार आहार के गुणधर्म

Last Updated on August 8, 2019 by admin

अनाजों का वर्णन :

1-चावल के गुण –
चावल बहुत प्रकार के होते हैं। उन सबका वर्णन करने से लेख बढ़ जाने का भय है; इस लिये हम यहाँ सिर्फ दो प्रकार के चावलों का वर्णन करते हैं- एक शाली चावल और दूसरे साँठी चावल। अब

शाली चावल के गुण –
शाली चावल हेमन्तु ऋतु में पैदा होते हैं। इन पर भूसी नहीं होती और यह सफ़ेद होते हैं। यह मीठे, चिकने, बलदायक, रुके हुए मल को निकालने वाले, कसैले, रुचि करने वाले, स्वर को उत्तम करने वाले, वीर्य को बढ़ाने वाले, शरीर को पुष्ट करने वाले, कुछ-कुछ बादी और कफ करने वाले, शीतल, पित्तकारक और पेशाब बढ़ाने वाले होते हैं।

साँठी चावल के गुण –
जो चावल बाल में ही पक जाते हैं, उनको साँठी चावल कहते हैं। ये चावल शीतल, हल्के, मल को बाँधने वाले, बादी और पित्त को शान्त करने वाले और शाली चावलों के समान गुणदायक होते हैं। सब चावलों में साँठी चावल उत्तम, हल्के, चिकने, त्रिदोष-नाशक, मीठे, कोमल, ग्राही, बलदायक और ज्वर को नष्ट करने वाले हैं।

2- जौ के गुण –
जौ कसैले, मधुर, शीतल, लेखन, कोमल, रूखे, बुद्धि और अग्नि को बढ़ाने वाले, अभिष्यन्दी, स्वर को उत्तम करने वाले, बलकारक, भारी, वात और मल को बहुत करने वाले, चमड़े के रोग, कफ, पित्त, मेद, पीनस, दमा, खाँसी, उरुस्तम्भ, खून-विकार और प्यास का नाश करने वाले हैं।

3- गेहूँ के गुण –
मीठे, शीतल, वात तथा पित्तनाशक, वीर्य बढ़ाने वाले, बलदायक, चिकने, दस्तावर, जीवन-रूप, पुष्टिदायक और रुचिकारक होते हैं। नये गेहूँ कफकारक होते हैं, परन्तु पुराने कफकारक नहीं होते। मथुरा, आगरा, दिल्ली आदि में जो गेहूँ होते हैं, वे मधूली गेहूँ कहलाते हैं। मधूली गेहूँ शीतल, चिकने, पित्तनाशक, मीठे हल्के, वीर्य बढ़ाने वाले, पुष्टिदायक और पथ्य होते हैं।

4- मूंग के गुण –
रूखे, ग्राही, कफ-पित्त-नाशक, शीतल, स्वादु, थोड़ी बादी करने वाले, आँखों के लिये हितकारी हैं और बुखार का नाश करते हैं। सुश्रुत और चरक हरे मूंग में अधिक गुण लिखते हैं।

5- उड़द के गुण –
हिन्दी में इसे उड़द और उर्द भी कहते हैं। संस्कृत में माष और बँगला में माष-कलाय कहते हैं। उड़द भारी, पाक में मधुर, चिकना, रुचि करने वाला, वात-नाशक, तृप्तिकारक, बलदायक, वीर्य बढ़ाने वाला, अत्यन्त पुष्टिकारक, दूध बढ़ाने वाला, मेदकारक, कफकारक और पित्तकारक है। उड़द, दही, मछली और बैंगन, ये चारों कफ और पित्त को बढ़ाने वाले हैं।

6- मौंठ के गुण –
बँगला भाषा में इसे बन-मूंग कहते हैं। यह वातकारक, ग्राही, कफ तथा पित्तनाशक, हल्की, अग्नि को जीतने वाली, कीड़े पैदा करने वाली और बुखार का नाश करने वाली है।

7- मसूर के गुण –
पाक में मधुर, ग्राही, शीतल, हल्की, रूखी, बादी करने वाली है। किन्तु कफ, पित्त, खून-विकार और बुखार का नाश करने वाली है।

8- अरहर के गुण –
कसैली, रूखी, मधुर, शीतल, हल्की, ग्राही, बादी करने वाली, रङ्ग को उत्तम करने वाली, पित्त और खून-विकार का नाश करने वाली है तथा पोषक तत्वों से भरपूर है।

9- चना के गुण –
चना शीतल, रूखा, हल्का, कसैला, विष्टम्भी, बादी करने वाला, खून, कफ और बुखार का नाश करने वाला है। तेल में आग पर भुने हुए चनों में यही गुण है। हरे (गीले) भुने हए चने बलदायक और रुचिकारक होते हैं। सूखे भुने हुए चने अत्यन्त रूखे, वात और कोढ़ को कुपित करने वाले होते हैं।

10- मटर के गुण –
मटर मधुर, पाक में भी मधुर और शीतल होते हैं।

11- तिल के गुण –
स्वादिष्ट, चिकने, कफ और पित्त को नष्ट करने वाले, बलदायक, बालों को उत्तम करने वाले, छूने में शीतल, चमड़े को हितकारी, दूध बढ़ाने वाले, घाव में हितकारी, पेशाब को थोड़ा करने वाले, ग्राही, बादी करने वाले, अग्निदीपन करने और बुद्धि बढ़ाने वाले हैं। सफ़ेद तिल मध्यम हैं। काले तिल रोग का नाश करने में सर्वोत्तम हैं।

12- सरसों के गुण –
चिकनी, कड़वी, तीक्ष्ण, गर्म, कफ और बादी नष्ट करने वाली, खून, पित्त और अग्नि को बढ़ाने वाली, खुजली, कोढ़ और कीड़ों का नाश करने वाली है। जो गुण लाल सरसों में हैं, वही सफ़ेद सरसों में हैं; परन्तु सफ़ेद उत्तम होती है।

13- राई के गुण –
राई कफ तथा पित्तनाशक, तीक्ष्ण, गर्म, रक्तपित्त करने वाली, कुछ रूखी, अग्नि को दीपन करने वाली, खुजली, कोढ़ और कोठे के कीड़ों का नाश करने वाली है।

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