गोखरू के सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Ayurvedic Home Remedies for Corns

गोखरू का रोग हाथों या पैरों की त्वचा का मोटा हो जाने को कहते हैं। यह रोग स्त्री या पुरुष किसी को भी हो सकता है।

गोखरू के कारण : Gokhru ka Karan

गोखरू (corn) का रोग अक्सर ज्यादा टाईट जूते या सैंडिल पहनने के कारण हो सकता है।

गोखरू के लक्षण : Gokhru ka lakshan

इस रोग में शरीर के ज्यादा रगड़ खाने वाले स्थान की त्वचा मोटी हो जाती है तथा सूज जाती है। ये सूजन लाल रंग की होती है। इसमें घाव बनने के कारण कभी-कभी पीब भी आने लगती है।

गोखरू से बचाव :

  • रोगी को बिल्कुल सपाट एड़ी के जूते या सैंडिल आदि पहनने चाहिए।
  • स्त्रियों को ज्यादा ऊंची हील की सैंडिल नहीं पहननी चाहिए।
  • पैरों को एप्सन साल्ट के घोल से धोने से वे कोमल और मुलायम बन जाते हैं।
  • पैरों को ताजी हवा में रखना चाहिए।
  • पैरों की खुरदरी त्वचा को हटाने के लिए किसी पत्थर या झावे आदि का प्रयोग करना चाहिए।

गोखरू में सावधानी :

बहुत से लोग होते हैं जो गोखरू को ब्लेड या छुरी आदि से काट देते हैं लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।

आयुर्वेदिक घरेलु उपचार : Gokhru ka Gharelu Upchar

Gokhru ka Desi Ilaz

1. प्याज :

  • जंगली प्याज के कन्द (फल) को पीसकर पका लें। इसे गर्म-गर्म ही गोखरू (गट्ठे) पर बांधने से बहुत जल्दी आराम आ जाता है।
  • प्याज के रस को दिन में गोखरू (गट्ठे) पर लगा लें और गोखरू के नर्म हो जाने पर गोखरू को काटकर फेंक दें।
  • गोखरू (गट्ठे) में प्रतिदिन 3 बार प्याज का रस लगाने से लाभ होता है।

2. भिलावा : भिलावे के तेल में मक्खन मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार गोखरू (गट्ठे) या मांस के बढ़ने (चर्मकील) पर लगाने से लाभ मिलता है।

3. सुहागा : 2 ग्राम सुहागे की खील या लावा को शहद के साथ सुबह और शाम खाने से गोखरू (गट्ठे) समाप्त हो जाते हैं।

4. चमेली : चमेली के पत्तों को पीसकर उसका ताजा रस लगाने से या उसे पीसकर उसके चूर्ण को गोखरू (गट्ठे) पर बांधने से वो धीरे-धीरे पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

5. राई : शरीर के किसी भी अंग में यदि गांठ हो तो राई और थोड़ी सी कालीमिर्च के चूर्ण को घी में मिलाकर लेप करने से गांठ को बढ़ने से रोका जा सकता हैं। गांठ को पकाने के लिए, गुड़, गुग्गुल और राई को बारीक पीसकर पानी में मिलाकर, कपड़े की पट्टी पर लेप करके चिपकाने से गांठ पककर बिखर जाती है।

6. फिटकरी : पैरों में कही-कहीं पर पत्थर की तरह सख्त कठोर गांठ सी हो जाती है जिसके कारण रोगी को चलने में दर्द होता है। इसके लिए फिटकरी, हल्दी और सुहागा को बराबर मात्रा में पीसकर रख लेते हैं। इस चूर्ण को थोड़ी सी मात्रा में पानी में गाढ़ा-गाढ़ा मिलाकर गोखरू (गांठ) पर प्रतिदिन लगाने से लाभ होगा। इससे कुछ ही दिनों में गोखरू (गट्ठे) ठीक हो जाते हैं। नींबू के रस से गोखरू (गट्ठे) को तर रखने से भी गोखरू ठीक हो जाते हैं।

7. चुकन्दर : गोखरू (गट्ठे) के रोगी को इस रोग की शुरूआत के 2 दिन में मौसमी फल और सब्जियों पर रहने दें। तीसरे दिन रोगी को प्रात:काल 1 गिलास पानी में नींबू का रस और 4 चम्मच शहद मिलाकर पिलाएं। दिन में 4 बार 1 कप अंगूर का रस तथा मौसंबी का रस रोगी को दिन में 1-2 बार पिलाएं। रोगी को शारीरिक श्रम न करने दें और उसे पूर्ण रूप से आराम करने दें। चौथे दिन से रोगी को लगातार कुछ दिनों तक आधा गिलास गाजर का रस और आधा चम्मच चुकन्दर का रस मिलाकर दें। रोगी को सामान्य, हल्का और अंकुरित अन्न सेवन कराना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में गांठ पिघल जाती है।

8. कलौंजी – कलौंजी के तेल को गट्ठों पर नियमित रूप से लगाते रहने और रोजाना 1 चम्मच कलौंजी का तेल 15 दिन तक गर्म दूध में डाल कर पीने से लाभ मिलता है।

9. ग्वारपाठा (घृतकुमारी) :

  • गट्ठों की सूजन पर घृतकुमारी के पत्ते को एक ओर से छीलकर तथा उस पर थोड़ा सा हरिद्रा चूर्ण छिड़ककर थोड़ा-सा गर्म करके गांठों की सूजन पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • शरीर की किसी नस में गांठ पड़ जाए तो वहां पर ग्वारपाठे का गूदा, लहसुन और हल्दी को एकसाथ मिलाकर गर्म-गर्म करके लगाने से आराम आता है।

10. गूलर : शरीर के किसी भी अंग पर गांठ होने पर गूलर का दूध लगाने से लाभ मिलता है।

11. निर्गुण्डी : निर्गुण्डी के पत्तों को गर्म करके बन्द गांठ पर बांधने से गांठ बिखर जाती है।

12. नींबू :

  • नींबू के रस को गोखरू (गट्ठे) पर मलने से गट्ठा नर्म पड़ जाता है। इस पर नींबू की 1 फांक भी बांध सकते हैं।
  • गोखरू पर नींबू के रस में रूई भिगोकर बांध दें और गोखरू (गट्ठे) को नींबू के रस से तर करके रखें।

13. सोयाबीन : सोयाबीन के आटे की रोटी खाने तथा दूध पीने से जोड़ो का दर्द और गठिया दूर होती है।

14. बावची : बावची के बीज़ों को पीसकर गांठ पर बांधते रहने से गांठ बैठ जाती है।

15. एरण्ड : सुबह-शाम एरण्ड का तेल मलते रहने से गोखरू (गट्ठे) ठीक हो जाते हैं। तेल में कपड़ा भिगोकर पट्टी बांधे। इसका प्रयोग लगभग 2 महीनों तक करने से गोखरू ठीक हो जाते हैं।

16. आकड़ा : आकड़े के दूध और गुड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर गोखरू (गट्ठे) पर लगाने से गोखरू ठीक हो जाते हैं।

17. अलसी : अलसी के चूर्ण को दूध व पानी में मिलाकर उसमें थोड़ा हल्दी का चूर्ण डालकर खूब पका लें और जहां तक सहन हो सके, गरम-गरम ही ग्रंथि व्रणों पर इस पोटली का गाढ़ा लेप करके ऊपर से पान का पत्ता रखकर बांधने से जख्म पककर फूट जाता हैं और जख्म की जलन आदि दूर हो जाती है। बड़ी-बड़ी अन्तर्विद्रधि भी इस उपाय से ऊपर को उभरकर फूट जाती है। किंतु अन्तर्विद्रधि पर यह पुल्टिस कई दिनों तक लगातार बांधनी पड़ती है।

18. पीपल : पीपल के पत्ते गर्म करके सीधी और से बांधने पर बंद (गांठ) बैठ जाती है।

19.मूलेठी : मूलेठी के तीन-चार टुकड़े ले लें और इनको पिस करके पेस्ट बना लें। इस पेस्ट में तिल का तेल या सरसों का तेल मिलायें। अब इस पेस्ट को सोने के पहले कॉर्न (gokhru)पर धीरे-धीरे रगड़ें। रात भर इसे लगे रहने दें, इससे त्वचा नरम हो जाएगा और ये आकार में छोटा होने लगेगा।

20. नींबू : ताजे नींबू का स्लाइस लेकर कॉर्न(Corn) के ऊपर रखकर कपडे से अच्छी तरह से बांधकर रातभर रहने दें। रोज़ाना इस प्रयोग को  करने पर गोखरू(corn) में जल्द लाभ होगा |

21. पपीता : कच्चे पपीते के स्लाइस काट कर उनका रस निचोड़ लें। अब उस रस को गोखरू पर लगाकर रात भर यूं ही रख दें।

22. लहसुन : ज़रूरत के अनुसार लहसुन के कुछ फांक ले लें और उनको अच्छी तरह से पिसकर पेस्ट बना लें। अब उस पेस्ट को गोखरू(कॉर्न )पर लगाकर अच्छी तरह से रात भर बांधकर रखें।

23. अरंडी का तेल(Castor oil) : पहले कास्टर आयल को गर्म कर लीजिये जब यह गर्म हो जाए तो किसी साफ़ कपडे को इसमें भिगों कर गोखरू पर लगायें| उपर से किसी और कपड़े से कवर कर लीजिये तांकि आयल की गर्मी बनी रहे |ऐसा कुछ दिनों तक करने पर गोखरू(corn) में जल्द लाभ होगा |

गोखरू रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

  • इस रोग से पीड़ित रोगी को दिन के समय एक टब में गर्म पानी भरकर उसमें थोड़ा सा नमक डालकर इस पानी में अपने पैरों को कुछ घण्टों तक डुबाए रखना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
  • रोगी को अपने पैर के पंजों पर कच्चे आलू को पीसकर लेप करना चाहिए फिर इसके ऊपर एक कपड़े की पट्टी बांधनी चाहिए। इस पट्टी को दिन में 2 बार बदलते रहना चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से 2-3 दिनों में ही गोखरू रोग ठीक हो जाता है।
  • पैर के पंजों पर 3-4 दिनों तक केले के छिलके बांधने से गोखरू रोग ठीक हो जाता है।
  • इस रोग से बचने के लिए हमेशा जूते अपने पैर के साइज से 1 इंच बड़े ही पहनने चाहिए तथा जूते वही पहनने चाहिए जिसका अगला भाग चौड़ा हो ताकि पंजे पर किसी तरह का दबाव न पड़े।
  • जूते को उतारने के बाद पंजों को सही दिशा में फैलाना चाहिए।
  • गर्म पानी में इप्सम नमक डालकर इस पानी से पैरों को धोने से गोखरू रोग के कारण होने वाला दर्द ठीक हो जाता है तथा गोखरू रोग भी जल्दी ठीक हो जाता है।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

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