बच्चों की बीमारियां और उनका सरल उपचार व नुस्खे

बच्चों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या और उनका समाधान :

1- बच्चों में खाँसी की समस्या – बंसलोचन पीस कर शहद के साथ चटाने से बालक की खाँसी मिट जाती है।

2- बच्चों में पेट में दर्द की समस्या का इलाज – अगर बालक के पेट में दर्द, आम और अजीर्ण हो, तो धनियाँ और सोंठ का काढ़ा दो; अवश्य लाभ होगा।

3- डिब्बा रोग का इलाज – बालकों को अक्सर डिब्बे का रोग हो जाता है। यह बहुत बुरा रोग है। इससे अनेक बच्चे मर जाते हैं। इस रोग में नीचे का नुसखा अच्छा पाया गया है- पहले करेले के पत्ते, अडूसे के पत्ते, नागर-पान यानी खाने के पान (ताम्बूल) और जामुन की छाल- ये चारों लाओ। पीछे इन सब का बराबर-बराबर रस निकाल कर मिला लो। उस रस में “बच” घिस-घिस कर, सात दिन तक, बालक को पिलाओ। खाने-पीने का परहेज ठीक रखो। निश्चय ही बच्चा बच जायगा।

4- बच्चों में तुतलाने की समस्या- अगर आपका या किसी का बच्चा तुतलाता हो–साफ़ उच्चारण न कर सकता हो, तो उसे रोज सवेरे, बलाबल देख कर, “लघुब्राह्मी” के गीले पत्ते खिलाओ, निश्चय ही लाभ होगा। इससे जीभ का मोटापन और कड़ापन दूर हो जाता है।

5- पेट के कीड़े का उपचार – बालक को काले जीरे का चूर्ण शहद में मिला कर चटाने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

6- बालक का कव्वा लटक आये, तो मुल्तानी मिट्टी, सिरके में मिला कर, सिर पर रख दो। फ़ौरन आराम होगा।

7- बच्चों को दस्त लाने का उपाय – छोटे बच्चों को दस्त कराने हों, तो बालक के बल का अन्दाजा लगा कर, रत्ती-दो-रत्ती या कम-ज्यादा रेवन्दचीनी का शीरा या रेवन्दचीनी की जड़ दूध में घिस कर पिलाओ।

8- कीड़ों की पीड़ा का उपाय – अरण्ड के पत्ते का रस निकाल कर रोज़ बालकों की गुदा में लगाने से चुरने-कीड़ों की पीड़ा नहीं रहती।

9- बच्चों में पसली चलने की समस्या – गोमूत्र में नमक मिला कर पिलाने से बालकों का पसली चलना, डब्बे का रोग और श्वास आराम हो जाते हैं।

10- बच्चों का दाँत आसानी से निकले उसका उपाय –
• केले के फल के बारीक तन्तुओं के रस में जीरा और मिश्री मिला लो। इसमें से ४ या ६ माशे दवा नित्य एक बार पिलाने से और वही रस मसूड़ों पर दिन में ८-१० बार लगाने से, दाँत आसानी से निकल जाते हैं और उनकी वजह से हुए ज्वर, दस्त और खाँसी भी आराम हो जाते हैं।
• कौड़ी की भस्म शहद में मिला कर बालक के मसूड़े पर मलने से दाँत आराम से निकलते हैं;
• सुहागा शहद के साथ पीस कर दाँतों पर मलने से दाँत सुख से निकल आते हैं।
• धाय के फूल और पीपर पीस कर रख लो। इस चूर्ण को शहद में मिला कर मलने से दाँत
बिना कष्ट के निकलते हैं।
• कच्चे आमलों का या कच्ची हल्दी का रस मसूड़ों पर मलने से दाँत सहज में निकलते हैं।
• सिरस के बीज गले में बाँधने से दाँत जल्दी निकलते हैं। कायफल का टुकड़ा अथवा तुम्बरू के बीज गले में लटका देने से दाँत आराम से निकलते हैं।
• पीपर, पीपरामूल, चव्य, चीता, सोंठ, अजवायन, अजमोद, हल्दी, मुलेठी, देवदारु, दारुहल्दी, बायबिडङ्ग, छोटी इलायची, नागकेशर, नागरमोथा, कचूर, काकड़ासिंगी, बिरिया और संचर नमक-इन १९ दवाओं को तीन-तीन माशे ले कर महीन पीस-छान लो। फिर इस चूर्ण में अभ्रक भस्म ३ माशे, शंख भस्म ३ माशे, लोहा । भस्म ३ माशे और सोनामाखी की भस्म ३ माशे मिला दो और खरल में डाल कर, पानी के साथ घोट कर, दो-दो रत्ती की गोलियाँ बना लो और छाया में सुखा लो।
इनमें से एक-एक गोली, पानी के साथ, पत्थर पर घिस-घिस कर, बालक के मसूड़ों पर लगाओ। इस तरह दिन में ३-४ दफा गोली लगाते रहने से दाँत आसानी से निकल आते हैं।

11- हरे-पीले दस्त रोकने का उपाय – अजवायन के कुछ दाने माँ के या बकरी के दूध में पीस कर बालक को पिलाने से बालक के पेट का दर्द, हरे-पीले दस्त होना और कय होना आराम होता है।

12- जमा कफ निकालने का उपाय – अगर बालक की छाती पर कफ जम गया हो, तो उसकी छाती पर गाय का घी धीरे-धीरे मालिश करो और उस घी को वहीं सुखा दो; कफ निकल जायगा।

13- खाँसी कफ का उपाय – अगर बालक को खाँसी आती हो, तो सरसों का तेल नित्य छाती पर मलो और थोड़ा गुदा में चुपड़ो; बड़ा आराम मालूम देगा। इसी सरसों के तेल में थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला कर छाती पर मलने से छाती पर जमा कफ, अण्डे-के-अण्डे बँध कर निकल जाता है।

14- श्वास रोग का उपचार – आध पाव पानी में २ तोले खाने का चूना और ५ तोले मिश्री पीस कर घोल दो। उसमें से नितार-नितार कर ८-१० बूंद पानी बालक को पिलाओ। इस पानी से बालक का दूध गिराना, खाँसी और श्वास आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।

15- मुँह में घाव, छाले का उपचार – संगजराहत, गिले अरमनी और गेरू एक-एक तोला तथा आग पर भुनी फिटकरी १ रत्ती ले कर महीन पीस-छान लो। इसमें से थोड़ी-थोड़ी दवा, दिन में चार-पाँच बार, बालक के मुँह में अँगुली से लगाने से मुँह में घाव, छाले,मुँह आना या मुँह पकना ये सब आराम हो जाते हैं। इसके मुँह में चले जाने से । बालक के दस्त में लाल रङ्ग आता है; उसका वहम मत करना। गेरू की वजह से पाखाना लाल हो जाता है। हमने देखा है कि इसके लगाते समय बालक को पाखाना भी साफ़ होता है। मुँह से लार बहुत ज्यादा टपकती है। ज्यों-ज्यों लार टपकती है, बालक को आराम होता है। इसके लगवाते समय दो दिन बच्चा रोता है; फिर राजी से लगवा लेता है। हमने खुद अपने बच्चों पर भी इस नुसखे की परीक्षा की है।
» नोट–संगजराहत सेलखड़ी को कहते हैं। गिले अरमनी लाल सुर्ख नर्म गेरू की तरह होता है। गेरू सख्त और श्यामता लिये लाल होता है। ये तीनों समान-समान एक-एक तोला लिये जाते हैं। फिटकरी आग पर फुला कर १ रत्ती ली जाती है।

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नोट :- ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।