ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ? Grahan me kya kare kya na kare

ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ? Grahan me kya kare kya na kare

★    चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने …

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श्री गुरु नानक देव जी और कोड़ी (बोध कथा)

श्री गुरु नानक देव जी और कोड़ी (बोध कथा)

एक बार श्री गुरु नानक देव जी जगत का उद्धार करते हुए एक गाँव के बाहर पहुँचे और देखा वहाँ एक झोपड़ी बनी हुई थी। उस झोपड़े में एक आदमी रहता था, जिसे कुष्‍ठ का …

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आयुर्वेदः निर्दोष एवं उत्कृष्ट चिकित्सा-पद्धति

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आयुर्वेद एक निर्दोष चिकित्सा पद्धति है। इस चिकित्सा पद्धति से रोगों का पूर्ण उन्मूलन होता है और इसकी कोई भी औषध दुष्प्रभाव (साईड इफेक्ट) उत्पन्न नहीं करती। आयुर्वेद में अंतरात्मा में बैठकर समाधिदशा में खोजी …

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अपने हाथ में ही अपना आरोग्य

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★    नाक को रोगरहित रखने के लिये हमेशा नाक में सरसों या तिल आदि तेल की बूँदें डालनी चाहिए। कफ की वृद्धि हो या सुबह के समय पित्त की वृद्धि हो अथवा दोपहर को वायु …

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कालसर्पयोग (Kaalsarp Dosha)से मुक्ति का सरल उपाय

कालसर्पयोग (Kaalsarp Dosha)से मुक्ति का सरल उपाय

किसी पर कालसर्पयोग (Kaalsarp Dosha)होता है तो बेचारा मुसीबतों में आ जाता है लेकिन जो मेरे शिष्य हैं उन्हें कालसर्पयोग की विदाई करने के लिए कोई पूजा-पाठ या लम्बा-चौड़ा विधि-विधान नहीं कराना है केवल ‘कालसर्पयोग …

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‘वहाँ देकर छूटे तो यहाँ फिट हो गये'(बोध कथा)

‘वहाँ देकर छूटे तो यहाँ फिट हो गये'(बोध कथा)

सुनी है एक सत्य घटनाः अमदावाद, शाहीबाग में डफनाला के पास हाईकोर्ट के एक जज सुबह में दातुन करते हुए घूमने निकले। नदी की तरफ दो रंगरूट (मनचले) जवान आपस में हँसी मजाक कर रहे …

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सृष्टिकर्ता का विधान

सृष्टिकर्ता का विधान ❘❘ Pujya Asaram Bapu Ji ❘❘ जिस बलसे निर्बलोंकी सेवा नहीं होती, अपितु ह्रास होता है, वह बल स्वतः मिट जाता है। तिलक महिमा (Benefit of Tilak) ?  ललाट पर दो भौहों …

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