हीमोप्टाइसिस (खांसी के साथ खून आना) रोग के लक्षण, कारण और उपचार

Last Updated on November 5, 2022 by admin

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग क्या है ? (Hemoptysis in Hindi)

हीमोप्टाइसिस जिसे उर:क्षत भी कहते है छाती का एक भयंकर रोग है जिसमें छाती के अन्दर फेफड़ों में घाव हो जाता है।

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग का विभिन्न भाषाओं में नाम :

  • हिन्दी – छाती का घाव।
  • अंग्रेजी – ब्रीडिंग-फ्रामिंग लंगूस, हिमोप्टाइसिस।
  • बंगाली – उर:क्षत, बक्षक्षत।
  • गुजराती – छातीनो दुखायो।
  • मलयालम – श्वासकोषचथऊ।
  • मराठी – छातीला जखम।
  • पंजाबी – लहूदीउल्टी।
  • तमिल – इस्मिरकतमथुपुथल।
  • अरबी – हओफओक्षत, बक्षक्षत।

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग के कारण :

उर:क्षत (फेफड़ों में घाव होना) रोग कई कारणों से होता है जैसे –

  • अधिक भारी बोझ उठाना,
  • मोटर गाड़ी आदि को छाती से रोकना,
  • अधिक ऊंचाई पर चढ़ना,
  • उंचाई से गिरना,
  • अधिक उछलकूद करना,
  • भाला व पत्थर को हाथों से दूर फेंकना,
  • तेज दौड़ना,
  • अधिक तैरना,
  • तेजी से नाचना आदि कारणों से छाती में घाव हो जाता है।
  • रूखा-सूखा व कम पौष्टिक भोजन करना एवं अत्यधिक थकावट के बाद भी स्त्री-सहवास करना आदि करणों से भी यह रोग हो जाता है।

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग के लक्षण :

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) को बोलचाल की भाषा में सिलरोग कहते हैं। इस रोग में रोगी को ऐसा महसूस होता है जैसे –

  • किसी न छाती पर भारी पत्थर रख दिया हो और दबाव के कारण छाती फट रही हो।
  • इस रोग में रोगी की छाती अर्थात फेफड़े फट जाते हैं और उसमें घाव हो जाता है।
  • फेफड़ों में घाव होने के कारण मुंह से खून आने लगता है।
  • छाती का घाव पक जाने पर उसमें बनने वाला मवाद भी मुंह से ही बाहर निकलता है।
  • इस बीमारी में छाती में बहुत दर्द होता है,
  • खून मिला हुआ पेशाब आता है,
  • पसली, कमर एवं पीठ में भयंकर दर्द होता है।
  • खांसी बहुत अधिक आना,
  • पतले दस्त आना,
  • शारीरिक शक्ति का कम होना,
  • वीर्य नष्ट होना,
  • खून मिला हुआ कफ बार-बार गिरना आदि इस रोग के लक्षण हैं।

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग में खान-पान और परहेज :

  • बेल, बैंगन, करेला, राई, तेल से निर्मित पदार्थ आदि हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) के रोगियों के लिए हानिकारक होता है। स्त्री प्रसंग, दिन में सोना तथा अधिक क्रोध, द्वैष और मैथुन करना आदि रोगी के लिए बेहद हानिकारक होता है।
  • हीमोप्टाइसिस रोग में शीतल, चिकना, जलनरहित तथा हल्के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

हीमोप्टाइसिस (उर:क्षत) रोग का घरेलू उपचार (Khansi ke Saath Khoon Aane ka Ilaj)

1. पोस्तादाना : पोस्तादाना 30 ग्राम तथा ईसबगोल 10 ग्राम को 500 मिलीलीटर पानी के साथ काढ़ा बनाएं और जब आधा पानी शेष बचा रह जाए तो इसे उतारकर छान लें। इस काढ़े को किसी कलईदार बर्तन में भरकर उसमें आधा किलो मिश्री, 9 ग्राम खसखस तथा 9 ग्राम बबूल का गोंद मिलाकर पीस लें। फिर इस मिश्रण को थोड़ी देर के लिए पकाएं और कुछ गाढ़ा हो जाने पर चीनी मिट्टी या कांच के अमृतवान आदि में भरकर ढक्कन लगा दें। इसे 50 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से पुराने से पुराने हीमोप्टाइसिस (फेफड़ों का घाव) कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

2. खिरेंटी : खिरेंटी, असगंध, कुंभेर के फल, शतावर तथा पुनर्नवा को दूध के साथ पीसकर प्रतिदिन पीने से हीमोप्टाइसिस की सूजन दूर होती है और दर्द में आराम मिलता है।

3. मुल्तानी मिट्टी : मुल्तानी मिट्टी को महीन पीसकर 3 या 6 ग्राम शहद के साथ चाटने से फेफड़ों का घाव ठीक होता है।

4. वासा : वासा के ताजे पत्तों का रस 70 से 140 मिलीलीटर शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से फेफड़ों के दर्द में आराम मिलता है और यह रोग ठीक होता है।

5. लाक्षा : शुद्ध लाक्षा का चूर्ण 1 ग्राम को लगभग 4 से 6 ग्राम शहद के साथ या 100 से 200 मिलीलीटर दूध के साथ या 140 मिलीलीटर शराब के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से हीमोप्टाइसिस (फेफड़ों का घाव) रोग में लाभ मिलता है।

6. जौ :

  • जौ का आटा 100 ग्राम और घी 100 ग्राम को अच्छी तरह से मिलाकर 250 मिलीलीटर दूध के साथ उबालकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से छाती का घाव ठीक होता है और दर्द में आराम मिलता है।
  • जौ का सत्तू 100 ग्राम, शर्करा 50 ग्राम और शहद 50 ग्राम को अच्छी तरह से मिलाकर 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से हीमोप्टाइसिस रोग नष्ट होता है।

7. बलामूल : बलामूल का चूर्ण, अश्वगंधा, शतावरी, पुनर्नवा और गंभारी का फल समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 1 से 3 ग्राम की मात्रा में 100 से 250 मिलीलीटर दूध के साथ दिन में 2 बार सेवन करें। इससे फेफड़ों का घाव ठीक होता है और दर्द व पेशाब में खून आना बन्द होता है।

8. काश : काश, कमलकेशर और रक्तचंदन समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 12 से 14 ग्राम की मात्रा में 4 से 6 ग्राम शहद में मिलाकर दूध के साथ सेवन करें। इसका सेवन दिन में 2 बार करने से हीमोप्टाइसिस (फेफड़ों का घाव) में बहुत अधिक लाभ मिलता है।

9. पुनर्नवा की जड़ : पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम और तन्दुल 24 ग्राम को 100 से 200 मिलीलीटर दूध और अंगूर के रस के साथ उबालकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे फेफड़ों का घाव ठीक होता है।

10. धान : धान की खील 6 ग्राम को 100 मिलीलीटर कच्चे दूध व शहद में मिलाकर पीएं और 2 घंटे बाद गाय के 200 मिलीलीटर दूध में मिश्री मिलाकर पीएं। इससे हीमोप्टाइसिस रोग ठीक होता है।

11. पीपल : पीपल की लाख 3 से 6 ग्राम की मात्रा में पीसकर शहद के साथ चाटने से फेफड़ों का घाव ठीक होता है।

12. फिटकरी : गुलाबी फिटकरी को महीन पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से उर:क्षत (फेफड़ों का घाव) रोग में बेहद लाभ मिलता है।

13. बबूल : बबूल की कोंपले 10 ग्राम, अनार की पत्ती 10 ग्राम, आंवला 10 ग्राम और धनिया 6 ग्राम लेकर रात को ठंड़े पानी में भिगो दें और सुबह इसे मसलकर थोड़ी सी मिश्री मिलाकर रख लें। यह पानी दिन में 3-4 बार पीने से मुंह से खून का आना बन्द होता है और दर्द में भी आराम मिलता है।

14. अडूसा : अडूसा के 6 ग्राम सूखे पत्ते अथवा 10 ग्राम हरे पत्ते को महीन पीसकर शहद में मिलाकर सेवन करने से मुंह से खून आना बन्द हो जाता है।

(अस्वीकरण : दवा, उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

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