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सोमवती अमावस्या का महत्व और धन समृद्धि बढ़ाने के विषेश उपाय | Somvati Amavasya Ka Mahatva

📅 4 फ़रवरी 2019 ✍️ admin ⏱️ 3 मिनट
सोमवती अमावस्या का महत्व और धन समृद्धि बढ़ाने के विषेश उपाय | Somvati Amavasya Ka Mahatva

Last Updated on जुलाई 22, 2019 by admin

शुभ संयोग : सोमवती अमावस्या

वर्षभर में ऐसा एक या दो बार ही हो पाता है, जब अमावस्या सोमवार को पड़े। इस दिन ग्रहों-नक्षत्रों की स्थिति विशेष होती है। अमावस्या सोमवार को पड़ने पर यह सोमवती अमावस्या अपने आप में ही सनातन धर्म में विशेष महत्त्व रखती है। इस दिन विवाहिता स्त्रियों द्वारा पीपल की पूजा की जाती है और 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा की जाती है। विवाहिता के द्वारा अपने पतियों की दीर्घायु कामना के लिए व्रत रखा जाता है।

पीपल की पूजा के कारण इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहते हैं। इस दिन मौन व्रत का विधान है और साथ ही नदियों में स्नान-दान का भी महत्त्व है। परंपरा के द्वारा पीपल के महत्त्व को सनातन ने समाज में स्थापित किया। आज हम जानते हैं कि पीपल के कितने लाभ हैं। तभी ऋषियों ने इसमें सभी देवों का वास कहा और इसकी पूजा करवाई। सोमवार का दिन महादेव का माना जाता है। इस दिन अमावस्या पड़ने से इसका विशेष महत्त्व महिलाओं के लिए स्थापित हुआ। यह अमावस्या अमूमन ज्येष्ठ-आषाढ़ अर्थात् जून जुलाई में पड़ती है। इस पूरी गरमी में पीपल की परिक्रमा को प्राकृतिक रूप से समझना होगा। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी हो सकता है।

दरिद्रता नाशक तथा धन सम्पत्ति दायक उपाय :

सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करने से, ओंकार का जप करने से, सूर्य नारायण को अर्घ्य देेने से, या यह सब एक साथ करने से घर से दरिद्रता भाग जाएगी। अगर यह संभव नहीं तो सिर्फ तुलसी की 108 बार प्रदक्षिणा करने से भी मनचाही आर्थिक समृद्धि मिलती है।

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जिस अमावस्या को सोमवार हो, उसी दिन इस व्रत का विधान है। प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है, परंतु ऐसा बहुत ही कम होता है, जब अमावस्या सोमवार के दिन हो। यह स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

ग्रंथों में कहा गया है कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से ही पड़ती है। पांडव पूरे जीवन तरसते रहे, परंतु उनके संपूर्ण जीवन में सोमवती अमावस्या नहीं आई। इस दिन को नदियों, तीर्थों में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।

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सोमवार चन्द्रमा का दिन है। इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चन्द्र एक सीध में स्थित रहते हैं इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है। सोमवार भगवान शिव का दिन माना जाता है और सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिवजी को समर्पित होती है।
इस दिन यदि गंगा जी जाना संभव न हो तो प्रात: किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें। अमावस्या के दिन वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है।

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