शुगर लेवल बढ़ने के कारण और कम करने के उपाय

क्या करें जब पता चले कि आपको डाइबिटीज है :

आज के समय में एक रोग बहुत ही आम होता जा रहा है, वह रोग है- डाइबिटीज़।
डाइबिटीज़ आमतौर से ज़िंदगी भर रहने वाला रोग माना जाता है। इसके बारे में आम धारणा है कि इसके लिये जिंदगी भर या मरते दम तक दवाओं का सेवन करना पड़ेगा और डॉक्टरों की निगरानी में रहना पड़ेगा। इस रोग से रोगी तो दु:खी हो जाता है परंतु डॉक्टर (कर्त्तव्यनिष्ठ और ईमानदार को छोड़ कर), फार्मा कंपनी और डाइग्नोस्टिक सेंटर्स खुशी से फूले नहीं समाते। यही वह बीमारी है जिसे मल्टीनेशनल कंपनियाँ सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी मानती हैं। तो आईये, हम आम आदमी जानते हैं कि जब पता चले कि आपको मधुमेह/शुगर (डाइबिटीज़) है, तो क्या कदम उठाएं जिससे ज़िंदगी एक दुःखद अंत या बीमारियों की खान बनने से बचे।

शुगर लेवल बढ़ने के चार मुख्य कारण :

1- अक्सर लोगों की बढ़ी हुई शुगर टेंशन, तनाव या डर के समय पता चलती है। जैसे आपका ऑपरेशन होने वाला हो, गर्भावस्था होने पर तनाव हो या किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद। ऐसे में जब रूटीन टेस्ट होता है तो उसमें आपको शुगर का मरीज़ करार दे दिया जाता है और ताबड़तोड़ दवाईयां शुरू कर दी जाती हैं। ऐसे समय न तो मरीज़ अपनी मानसिक अवस्था पर गौर करता है और न ही डॉक्टर इस बारे में जानने के लिये कुछ मेहनत करता है।

2- दूसरा मधुमेह का पता किसी दवाई के दुष्प्रभाव हो जाने के बाद पता चलता है।

3- तीसरा मधुमेह का पता हमारी लंबे समय से चल रही अनियमित दिनचर्या के बाद चलता है।

4- चौथा पता हमारे लिवर या हृदय के अपने कार्य को सुचारू रूप से नहीं करने पर चलता है।

शुगर लेवल बढ़ने पर क्या करें :

अब उपरोक्त चार कारणों से हमारे रक्त में शुगर का लेवल बढ़ सकता है। ऐसे में चिकित्सक को चाहिये कि वह सबसे पहले रोगी का शुगर लेवल बढ़ने के कारण का पता करे और वास्तव में चिकित्सक का ध्यान इस तरफ कम ही जाता है कि मधुमेह/शुगर का कारण क्या है। वह तो सबसे पहले रीडिंग देखकर दवाओं को लिखने में व्यस्त हो जाता है।

कारण कुछ भी हो और उपचार एक ही तरह का, यह तो चिकित्सा के सिद्धान्त के विपरीत है। क्योंकि चिकित्सा का सबसे पहला सिद्धान्त है जो आचार्य सुश्रुत ने दिया था “संक्षिप्तेः क्रिया योगे निदान परिवर्जनम्” अर्थात् सबसे पहले रोग के होने के कारण को रोका जाए या नष्ट किया जाये। लेकिन आधुनिक चिकित्सक कारण को अनदेखा करके अपना स्वघोषित ब्रह्मास्त्र गोलियां या इंसुलिन रोगी को लिख देते हैं और बेचारा अनपढ़ (जो शरीर के बारे में नहीं जानता मैं उसे अनपढ़ ही समझता हूँ, चाहे उसके पास कितनी ही डिग्रियाँ क्यों न हों) रोगी इन गोलियों को निगलना शुरू कर देता है और फिर अपने लिये मुसीबतें बुला लेता है। साल-दर-साल, गोलियाँ-दर-गोलियाँ वह और भी ज्यादा रोगी होता चला जाता है।

हमारे शरीर में प्राकृतिक तौर पर बीमारियों से लड़ने की ताकत होती है। यह एक अद्भुत तंत्र होता है। जब वह अपना काम शुरू करने ही वाला होता है कि हम बाहर से केमिकल्स का डोज़ ले लेते हैं जिससे शरीर का वह तंत्र क्रियाशील नहीं हो पाता और हमारा शरीर इन बाहर से आये रसायनों पर निर्भर हो जाता है। तात्पर्य कि वह आलसी हो जाता है और हमारे शरीर को इन रसायनों की – आदत पड़ जाती है।

शुगर लेवल कम करने के उपाय :

1- रोग को सुनिश्चित करें – इसलिये जब आपको पता चले कि आपका शुगर लेवल बढ़ गया है तो आप कम से कम 2 से 3 जगह अच्छी लेबोरेट्री में जांच करवाएं और कन्फर्म कर लें कि जाँच सही भी थी या नहीं।

2- कारण की सही पहचान – यदि सभी रिपोर्ट में शुगर बढ़ी हुई आये तो आप खुद सबसे पहले देखें कि आपका शुगर लेवल बढ़ने की वजह क्या है? तनाव है, डर है, दवाएँ हैं, आपकी गलत जीवन शैली या फिर किसी दवाई का दुष्प्रभाव तो नहीं जिसे आप लंबे समय से ले रहे हैं या जिसे अभी-अभी शुरू किया है?

3- तनाव चिंता को दूर करें – जब आप खुद ही कारण खोज लें तो उसे खुद ही मिटाएँ, धर्म से, बड़ों से अपनी समस्याओं का निराकरण जानकर या किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर। यकीन मानिये आपका तनाव, चिंता या डर जाते ही एक से दो दिन में आपकी शुगर सामान्य हो जाएगी। हाँ, यदि वह 500 से 600 mg /dl तक होगी तो भी। ये मेरा विगत वर्षों का हजारों रोगियों को परामर्श देने के बाद का अनुभव है।

4- जीवन शैली मे परिवर्तन – यदि आपकी जीवन शैली इसके लिये उत्तरदायी है तो उसे जल्द ही बदल दें। सही समय पर उठे, सोयें, खायें-पियें, कसरत एवं योगा करें। 10 से 15 दिन में अधिकांश रोगियों की शुगर नॉर्मल होना शुरू हो जाती है।

5- दवाइयों के दुष्प्रभाव से बचे – यदि इसका कारण दवाइयों से दुष्प्रभाव हों जैसे- गर्भ निरोधक गोलियाँ, एंटी एलर्जिक दवाएँ, स्टेरॉइड्स, सीडेटिव्स (निद्राजनक), थॉयराक्सिन (थायरॉइड के लिये दी जाने वाली दवा) आदि (बहुत सारी हैं) तो उन्हें उचित परामर्श लेकर बंद करने की योजना बनाएँ। आपकी शुगर 15-30 दिनों में सामान्य होने की पूरी-पूरी संभावना है।

6- लिवर या हृदय की दुर्बलता का समुचित उपचार करें – यदि आपकी बढ़ी हुई शुगर की वजह आपके लिवर या हृदय की दुर्बलता है जो कि आपका निष्णात चिकित्सक आपको बताएगा, तो आप उसके बताये अनुसार लिवर और हृदय को शक्ति देने वाली दवाओं का सेवन करें। इसे शक्तिशाली बनाने के कोई केमिकल्स या विटामिन्स खाना न शुरू कर दें। इसके लिये जड़ी-बूटियों, योग, ध्यान और श्रेष्ठ आहार-विहार का सेवन श्रेष्ठ है। यदि कारण के हटने के बाद भी शुगर सामान्य न हो तो आप किसी कुशल आयुर्वेद, यूनानी या होम्योपैथिक चिकित्सक से चिकित्सा करवाएं इससे आपकी शुगर सामान्य हो जाएगी। यदि दवाओं को भी 20 से 30 दिन लेने से आपकी शुगर सामान्य न हो तो (ऐसा केवल 10 में से 1 या 2 मरीजों में होगा) फिर आप एलोपैथी दवाएँ खाएँ, लेकिन इसे धीरे-धीरे छोड़ने की नियत से।

यदि हम ऐसा करेंगे और लोग इस फार्मूले को अपना लें तो 10 करोड़ में से 8 करोड़ लोगों को हम जिंदगी भर खाने वाली गोलियों से बचा सकते हैं और उन्हें एक अच्छी ज़िन्दगी दे सकते हैं। वह भी बिना दवाओं के।

मधुमेह / शुगर के रोगी ये ना खाएँ :

मीठे खाद्य एवं पेय, दही, चावल, बैंगन, अचार, फास्ट-फूड्स, कोल्ड ड्रिंक्स, ठण्डा पानी।

यह ज़्यादा खाएँ :

मूंग की दाल, ग्वार फली, करेला, लौकी, मेथीदाना, गेहूँ-जौ-चना और सोयाबीन के आटे के मिश्रण से बनी रोटियाँ, अलसी का सेवन, कुनकुना पानी, क्रीम निकला मट्ठा।

मधुमेह / शुगर के रोगी यह न करें :

दिन में सोना, रात में जागना, खाना खाने के बाद फौरन सो जाना, चिंता, तनाव या भय, एयर कंडीशनर (A.C.) में रहना, शारीरिक श्रम न करना।

यह करें :

• टहलना, खाना निचे बैठकर परंपरागत तरीके से खाएँ ।
• सोने से लगभग 4 घण्टे पहले खाना खा लें ।
• खाना खूब चबा-चबा कर खाएँ ।
• खाना थोड़ा-थोड़ा करके खाएँ, एक साथ पेट भर कर खाना न खाएँ।

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