प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने के घरेलू इलाज – Prostate Granthi Badhne ka Gharelu Ilaj in Hindi

शरीर में प्रोस्टेट ग्रंथि का कार्य ? (Role of Prostate Gland in Human Body in Hindi)

पुरुष के मूत्र संस्थान में एक अंग होता है। जो पुरुष के शरीर में वीर्य का निर्माण करने में सहायक होता है। यह अंग एक ग्रन्थि (Gland) के रूप में होता है जिसे पौरुष ग्रन्थि या अष्ठीला (प्रोस्टेट ग्लेण्ड) कहते हैं। यह ग्रन्थि मूत्राशय (ब्लेडर) के बाहरी ओर नीचे के द्वार को घेर कर स्थित होती है। यह ग्रन्थि लगभग 20-25 ग्राम वज़न की और 4 बाई 3 बाई 2.5 से.मी. आकार की होती है। इस ग्रन्थि के दोनों तरफ के हिस्से मूत्रनलिका (यूरेथ्रा) में खुलते हैं। इस ग्रन्थि में एक तरल स्राव का निर्माण होता है जो कि शुक्र (वीर्य) का एक सहायक द्रव होता है। इस तरल स्राव के कारण शुक्राणु को गति मिलती है।

प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (Enlarged Prostate in Hindi)

प्रौढ़ अवस्था यानी 50-55 वर्ष की आयु के बाद, विशेषकर 60 से 70 वर्ष की आयु में यह ग्रन्थि असामान्य रूप से बड़े आकार की हो जाती है। इसका आकार बढ़ने पर मूत्राशय के अन्दर दबाव बढ़ने लगता है। इसी कारण से जब रोगी मूत्र त्याग करने के लिए। ज़ोर लगाता है तो मूत्र के भार से मूत्राशय पर दबाव बढ़ता है जिससे पौरुष ग्रन्थि का मध्य भाग नीचे झुक जाता है और मूत्राशय का मार्ग बन्द हो जाता है। इससे मूत्र त्याग में रुकावट आने लगती है।

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने के संकेत और लक्षण क्या होते हैं? (Enlarged Prostate Symptoms in Hindi)

कुछ लक्षणों से प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। जैसे –

  • पहले रात में मूत्र की बारबार हाजत होती है, कुछ समय बाद दिन में भी होने लगती है।
  • मूत्र त्याग करने के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं होता और बचा हुआ मूत्र Residual urine अधिक होने से बार-बार मूत्र त्याग की प्रवृत्ति होती है।
  • मूत्र धीमी गति से और काफी जोर लगाने पर उतरता है, धार मन्दी हो जाती है और बीच बीच में टूट भी जाती है।
  • अन्त में बूंद बूंद करके मूत्र आता रहता है इस प्रकार मूत्र खुल कर और तेज़ रफ्तार से नहीं होता और मूत्र के वेग को रोगी रोक भी नहीं पाता और पेशाब छूट जाता है।
  • मूत्राशय में अधिक देर तक मूत्र रुका रहे तो किडनी पर बुरा असर पड़ता है और किडनी की गतिविधि कम हो जाती है।
  • रक्त से यूरिया पूरी तरह बाहर निकल नहीं पाता और रक्त में यूरिया की मात्रा बढ़ने लगती है जिससे रोगी का मुंह सूखना, कण्ठ व जीभ सूखना, प्यास बढ़ना,पूरे शरीर में खुजली होना, रात को नींद की कमी होना, तबियत में बेचैनी व सुस्ती,शरीर कमज़ोर होना, पैरों व आंखों के नीचे या चेहरे पर सूजन होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
  • आधुनिक चिकित्सा पद्धति में सोनोग्राफी करके रोग की सही स्थिति की जांच कर ली जाती है।

प्रोस्टेट ग्रंथि क्यों बढती है ? (Enlarged Prostate Causes in Hindi)

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं जैसे –

  • अति उष्णपान,
  • मद्यपान,
  • बिना परिश्रम के आलसी दिनचर्या,
  • मानसिक चिन्ता,
  • तनाव या अवसाद से पीड़ित रहना,
  • वृद्धावस्था
  • अनियमित ढंग से आहारविहार करना इस रोग की उत्पत्ति के मुख्य कारण हैं।

( और पढ़े – मूत्र असंयमिता (पेशाब न रोक पाना) का इलाज )

प्रोस्टेट वृध्दि के घरेलू उपचार (Enlarged Prostate Home Remedies in Hindi)

प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने के घरेलू उपचार में निम्न उपाय किए जा सकते हैं –

1). लौकी – लौकी का बीज प्रोस्टेट में वृध्दि को रोकने में लाभकारी है। इन बीजों में असंतृप्त (अनसैचुरेटेड) चरबीदार बीज होते हैं। इस बीज के पाउडर को भोजन या दूध में मिलाया जा सकता है या शहद के साथ भी लिया जा सकता है।

2). क्रैनबेरी – प्रोस्टेट में वृध्दि के साथ-साथ पेशाब में संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में मरीज को मूत्रमार्ग में संक्रमण रोकने के लिए क्रैनबेरी जूस लेना चाहिए।

3). लहसुन – लहसुन के सेवन से प्रोस्टेट संक्रमण को कम किया जा सकता है। प्रोस्टेट से संबंधित बीमारियों का इलाज करने में टमाटर भी बहुत सहायक साबित हो सकते हैं। टमाटर में उपचायक निरोधक (एंटीऑक्सीडेंट) मौजूद होते हैं जो कि प्रोस्टेट में वृध्दि को रोक सकते हैं ।

4). गाजर – प्रोस्टेट से जुड़ी हुई समस्याओं को रोकने के लिए गाजर और पालक के ज्यूस जैसे सब्जियों के ज्यूस का सेवन किया जा सकता है।

5). प्रोस्टेट के आकार को बढ़ने से रोकने के लिए विटामिन ई और जिंक के संपूरक को लिया जा सकता है।

6). अधिक मात्रा में स्टार्च या मीठा युक्त भोजन प्रोस्टेट को अतिरिक्त रूप से संवेदित कर सकता है और इस कारण से मूत्र से जुड़ा हुआ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। किसी को भी बहुत ही तेजी के साथ भोजन नहीं करना चाहिए। भोजन को अच्छी तरह से चबा-चबाकर ग्रहण करना चाहिए और पानी भोजन करने के कुछ देर पहले या बाद में पीना चाहिए। आंत या मूत्राशय से जुड़े हुए क्षेत्र को संक्रमित करने वाला भोजन करने से बचने का प्रयास करना चाहिए।

7). हाइड्रोथेरैपी या गर्म तथा हल्के गर्म पैक से राहत मिल सकती है।

8). खांसी और जुकाम से राहत देने वाली कुछ दवाओं में उच्च मात्रा वाले डिकॉनजेस्टेंट्स होते हैं और मरीजों को। ऐसी दवाएं लेने से बचने का प्रयास करना चाहिए। सोने जाने के एक या दो घंटे पहले तरल पदार्थ पीने से बचने का प्रयास करना चाहिए और कभी भी भारी मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। पूरे दिन नियमित अंतराल के पश्चात पानी और फल लेना चाहिए।

प्रोस्टेट वृध्दि की आयुर्वेदिक दवा (Enlarged Prostate Ayurvedic Medicine in Hindi)

आयुर्वेदिक चिकित्सा के अंतर्गत निम्न औषधियों का प्रयोग चिकित्सक परामर्शानुसार प्रयोग करने पर लाभदायक है।

1). बृहत बंगेश्वर रस 2 ग्रा., त्रिविक्रम रस 2 ग्रा., आरोग्यवर्धनी वटी, चन्दनादि वटी, यवक्षार और वृद्धिवाधिका वटी चारों 10-10 ग्रा. – सबको पीस कर मिला लें और 50 पुड़िया बना लें। एक-एक पुड़िया सुबह शाम गरम पानी के साथ लें। इसके साथ शिवा गुटिका 2-2 गोली लें।

2). वरुणे की छाल, गोखरू और पुनर्नवा तीनों का जौ कुट मोटा चूर्ण – तीनों 5-5 ग्राम एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा गिलास बचे तब उतार कर छान कर ठण्डा कर लें। इस पानी के साथ, भोजन के बाद काचनार गुग्गुलु और गोक्षुरादि गुग्गुलु की 2-2 गोली सुबह शाम लें।

(अस्वीकरण : दवा ,उपाय व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार उपयोग करें)

Leave a Comment